माँ बेटे ने सुहागरात का मजा लिया

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हैल्लो दोस्तों… मेरा नाम रोहित है और में पुणे महाराष्ट्र का रहना वाला हूँ.. दोस्तों मेरी पिछली कहानी “माँ का बर्थ-डे गिफ्ट” को आप सभी ने बहुत पसंद किया.. उसके लिए धन्यवाद. अब में अपनी माँ के साथ आगे की कहानी शुरू करता हूँ.. दोस्तों अब माँ और में एक दूसरे से पूरी तरह खुल चुके थे और हर तरह से में माँ को चोद चुका था. फिर रात को 10:30 बजे में माँ के कमरे में गया. माँ ने पर्पल कलर का गाऊन पहना हुआ था और माँ पलंग पर लेटी हुई थी में पास गया और एक तरफ से करवट लेकर चिपककर सो गया.

माँ : क्या है? तुझे भी रोज रोज चुदाई करने की आदत पड़ गयी है में तेरी माँ हूँ कोई तेरी बीवी नहीं.

तो में माँ से चिपका हुआ था उनकी गर्दन पर हल्के हल्के किस कर रहा था.

माँ : मैंने कहा ना आज नहीं.

में : माँ मेरा लंड खड़ा हो गया है और अब में क्या करूं?

माँ : तेरे लंड को और काम ही क्या है जब देखो जब खड़ा हो जाता है.

में : माँ मुझे कर लेने दो ना वैसे भी कल पापा आने वाले है फिर दो दिन आप उन्ही से चुदोगी.

फिर में अपना हाथ नीचे की तरफ ले गया और धीरे धीरे हाथ को कमर से जाँघो घुटनों तक ले गया और गर्दन पर चूमने लगा और वो आहे भरने लगी.

माँ : तूने तो माँ बेटे के रिश्ते का मतलब ही बदल दिया.. चल ठीक है कर ले वैसे भी कल तेरे पापा आने वाले है. फिर मैंने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और माँ को जकड़ लिया और प्यार करने लगा, चूमने लगा और में होंठो पर किस करने लगा. ज़ोर ज़ोर से होंठो को पीने लगा.. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. फिर मैंने माँ से कहा कि आप खड़े हो जाइये और माँ बेड के पास आ गयी.. तो में माँ के गाउन को थोड़ा नीचे से धीरे धीरे ऊपर करने लगा और मुझे सामने काले कलर की पेंटी दिख गई. दोस्तों में तो पागल हो गया था.. गोरी सफेद त्वचा पर काली पेंटी क्या मस्त लग रही थी और में कुछ देर ऐसे ही देखता रहा.. तो माँ बोली.

माँ : इतने ध्यान से क्या देख रहा है? कितनी बार तो तू अपनी माँ को नंगी कर चुका है.

में : हाँ माँ.. लेकिन में क्या करूं आप बहुत खूबसूरत और सेक्सी हो.. मुझे आपको देखने से मन नहीं भरता.. ऐसा लगता है आपको देखता ही रहूँ.

माँ : तो तू अपनी माँ का दीवाना हो चुका है. फिर ऐसे ही में माँ के गाउन को ऊपर लेट गया और गाउन पेट तक पहुंचा ही था.. तो मैंने अपना मुहं माँ की सेक्सी काली पेंटी के ऊपर रख दिया और ऊपर से ही माँ की चूत को किस करने लगा और पेंटी के ऊपर ही मुहं घुमाने लगा.. में तो अब जन्नत की सैर कर रहा था. फिर में माँ के गाउन में समा गया और अपना सर गाउन के ऊपर से निकाल दिया और अब में माँ के गाउन में था और खड़े होकर गांड पर हाथ घुमा रहा था और किस कर रहा था. दोस्तों में क्या बताऊँ? जन्नत से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था. फिर माँ बोली..

माँ : तू बड़ा सेक्सी हो गया है. रोज कुछ ना कुछ अलग करता है अपनी माँ के साथ.. ऐसे सेक्सी तरीके से तो तेरे पापा ने भी नहीं किया है.

में : माँ आप तो जन्नत की परी हो.. आपको नंगी देखते ही में सब भूल जाता हूँ और जो मन में होता है वैसा करता हूँ और फिर हमारी मस्तियों का सिलसिला चलता रहा.. में माँ के गाउन में था और हम एक दूसरे के साथ लेटे हुए थे.. कभी बात करते तो में कभी किस करता तो कभी माँ के गालों पर आहे भरता थोड़ी जीभ से चेहरे पर हल्के से चाटता बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था.

माँ : आआअहहा… बस कर बेटा अब क्या ऐसे ही मेरे साथ गाउन में पड़ा रहेगा? माँ अब पूरी तरह जोश में आ चुकी थी.

में : माँ मुझे आपके गाउन में बहुत अच्छा लग रहा है. फिर मैंने गले पर हल्के से किस किया और हम हल्के हल्के किस करने लगे और मैंने अपने आपको गाउन से बाहर निकाला और में बेड के पास खड़ा हो गया.. मैंने माँ से कहा.

में : माँ आप भी खड़ी हो जाओ.

माँ : नहीं अभी में खड़ी नहीं हो सकती.

में : माँ प्लीज.

फिर मैंने माँ का हाथ पकड़कर हल्के से खींचा तो वो मान गयी और मेरे सामने खड़ी हो गयी. तो में माँ का गाउन धीरे धीरे ऊपर करने लगा और गाउन पूरा निकाल दिया और अब माँ मेरे सामने काली पेंटी और सफेद ब्रा में खड़ी थी और ऐसे ही में माँ के ऊपर फिर से झपट पड़ा और अपने पूरे आगोश में ले लिया.. पूरा जकड़ लिया और नीचे से ऊपर तक प्यार करने लगा और लिप किस करने लगा. माँ की गोल गोल गांड पर पूरा हाथ घुमाने लगा. माँ की पेंटी के अंदर हाथ डालकर गांड को सहलाने लगा.

माँ : आह्ह्ह…. कितना प्यार कर रहा है मेरे बेटे.. इतना तो मेरे साथ अपनी सुहागरात में भी नहीं हुआ था.

में : माँ मेरे रहते आपकी हर रात सुहागरात से बड़कर होगी. ऐसा कहकर मैंने माँ को अपने सामने पलटकर खड़ा किया और फिर ब्रा का हुक खोल दिया और पीछे से बूब्स को हल्के हल्के से दबाने लगा और गले के पास हल्के किस करने लगा.

फिर ऐसे ही मैंने पेंटी में हाथ डाला वाह कसम से माँ की चूत को हाथ लगाने में ही बहुत मज़ा आ रहा था और फिर मैंने माँ की पेंटी को उतार दिया और माँ को सामने खड़ा किया और नीचे से ऊपर तक देखने लगा.

माँ : क्या देख रहा है? पहली बार देख रहा है क्या?

में : माँ मुझे तुम नंगी बहुत अच्छी लगती हो यह कहकर मैंने माँ की चूत पर किस किया और फिर जीभ से चूत चाटने लगा और फिर चूत के दोनों होंठो को खोलकर पीने लगा.

माँ : में खड़े खड़े थक गयी हूँ और यह कहकर माँ बेड पर जाकर लेट गई. में बेड पर जाकर माँ की चूत को पीने लगा.

माँ : बस और कितना चाटेगा? मेरी चूत की तो जान ही निकल गयी. तू पूरी चूत का पानी पी गया है.

माँ यह ही बोलती रही और में चूत चाट रहा था. फिर में उठा और मेरा मुहं थोड़ा गीला था.. तो में माँ के पास गया.

में : चूत खोलो.

माँ : अभी 5 मिनट रुक जा में थक चुकी हूँ.

तो में माँ से लिपट कर लेट गया और चूत सहलाने लगा और किस करने लगा तो माँ मेरा मुहं हटाने लगी.

माँ : गंदी बदबू आ रही दूर हटा तू कैसे चाटता है इस गंदी जगह को.

में : माँ मुझे तो बहुत अच्छी लगती है उसके टेस्ट के सामने तो सब बेकार है.

फिर ऐसे ही बातों का सिलसिला चलता रहा और 10 मिनट के बाद में माँ के ऊपर लेट गया और प्यार करने लगा.

में : माँ थोड़ा चूत को खोलो.

माँ : हाँ हाँ चल जल्दी डाल और मुझे फ्री कर.

फिर माँ ने अपने दोनों हाथ से चूत को खोला.

माँ : चल अब डाल भी दे.

फिर मैंने अपने लंड को चूत के ऊपर रखा और हल्के से अंदर डाला और मेरा लंड बहुत अच्छे तरीके से अंदर चला गया और में माँ के ऊपर पूरा लेट गया.. बहुत अच्छा लग रहा था. फिर मैंने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया और तब में माँ को किस भी कर रहा था.

माँ : आज तो तूने मुझे मार ही डाला है और अब तो होठों को छोड़.

फिर भी मैंने एक ना सुनी और में चुदाई और किस कर रहा था.. मैंने माँ को पूरा जकड़ा हुआ था और माँ की साँसे तेज़ चलने लगी. मेरा पूरा लंड माँ की चूत में समा चुका था और में मज़ेदार चुदाई के मज़े ले रहा था. तो ऐसे ही 20-25 मिनट तक में चुदाई करता रहा.

में : माँ मेरा होने वाला है और यह कहकर मैंने अपने लंड का पूरा दबाव चूत पर लगाया और अपना पूरा पानी माँ की चूत में छोड़ दिया और में कुछ देर तक ऐसे ही पड़ा रहा और में पास में सो गया.. सुबह 5:30 बजे माँ ने मुझे उठाया में बहुत गहरी नींद में था.

माँ : उठ बेटा चल अपने कपड़े पहन ले तेरे पापा आने वाले है.. 6:30 बजे उनकी ट्रेन का टाईम है और तुझे उनको लेने स्टेशन जाना है.

में : ठीक है माँ.. लेकिन इधर तो आओ.

माँ : क्या है?

तो माँ पास आई… फिर मैंने माँ का हाथ पकड़कर अपने ऊपर खीँच लिया और माँ मेरे ऊपर आकर गिर गयी.

माँ : अब क्या है? रात को इतना सारा किया है तूने और अब तो बिल्कुल भी नहीं.. तेरे पापा की ट्रेन का टाईम होने वाला है.

में : माँ चलो भी.. में जल्दी से डाल देता हूँ.. थोड़ी देर में हो जायेगा.

यह कहकर मैंने माँ को बेड पर पटका और उनका गाउन ऊपर करके लंड को चूत में डाल दिया और चुदाई शुरू की दोस्तों सुबह सुबह की चुदाई में बहुत मज़ा आता है और में चुदाई करता रहा 10 मिनट बाद.

माँ : जल्दी कर मुझे पता है तेरी सुबह की चुदाई जल्दी खत्म नहीं होती है प्लीज… थोड़ा जल्दी कर और में लगातार धक्के लगाये जा रहा था. फिर 20 मिनट बाद..

माँ : अब बहुत हो गया.. अब उठ जा. तेरे पापा की ट्रेन का टाईम हो गया है.

में : माँ सिर्फ़ 5 मिनट रुको.

अब में ज़ोर ज़ोर से पूरी मेहनत से धक्के लगाने लगा और मैंने एक जोरदार पिचकारी माँ की चूत में छोड़ी और में जल्दी से उठा और कपड़े पहने फिर फ्रेश होकर बाईक लेकर पापा को लेने स्टेशन चला गया. में पापा को 7:30 बजे स्टेशन से लेकर घर आ गया था.. क्योंकि ट्रेन 30 मिनट लेट थी. फिर माँ हमारे लिए चाय लेकर आई पापा और मैंने बातचीत की फिर माँ, पापा से बोली कि

माँ : आप थोड़ा आराम कर लीजिये और मुझसे भी कहा कि तू भी थक गया होगा.. जाकर सो जा.

तो में समझ गया और में अपने रूम में सो गया.. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी. फिर 30 मिनट के बाद में माँ के रूम के पास गया और दरवाजे पर ध्यान से सुना तो वो दोनों भी शुरू हो चुके थे और में अपने रूम में आ गया और सो गया. फिर 2 घंटे बाद माँ ने मुझे आवाज़ लगाई.

माँ : उठ रोहित बेटा 10 बज चुके है.. चल जल्दी से उठ में नहाने जा रही हूँ और तुम्हारा नाश्ता तैयार है.

तभी मुझे भी माँ के साथ नहाने का ख्याल आया.. मैंने पापा को कमरे में देखा वो सो रहे थे और में बाथरूम के पास चला गया और दरवाजा बजाया.

माँ : कौन है?

में बिल्कुल चुप था क्योंकि मुझे पता था कि अगर कहूँगा में हूँ तो माँ पापा के डर से दरवाजा नहीं खोलेगी और मैंने फिर से दरवाजा बजाया.

माँ : ओह हो कौन है? कुछ बोलो तो.. आप हो क्या.. रोहित तो सो रहा है? फिर माँ ने हल्के से दरवाज़ा खोला में कोने में छुप गया था माँ टावल लपेटे हुई थी और में एकदम माँ के सामने आ गया और अंदर घुस गया और दरवाजा बंद कर दिया.

माँ : तू क्यों आया है तुझे पता है ना तेरे पापा यहाँ पर है चल जल्दी बाहर निकल.

में : माँ मैंने आपके रूम पर चेक किया है पापा घोड़े बेचकर सो रहे है.

माँ : (थोड़े गुस्से में) नहीं कुछ कह नहीं सकते तू अभी बाहर निकल.

में : ठीक है.. लेकिन पहले एक किस कर लेने दो.

माँ : इतना सारा करके भी तेरा पेट नहीं भरा अभी और एक किस चाहिये. में तुम दोनों बाप, बेटे के बीच में फंस गयी हूँ ठीक है और अब जल्दी से कर.

तो में माँ के पास गया और अपने होंठ माँ के होंठो से चिपका दिये और चूसने लगा और फिर मैंने झटके से माँ का गुलाबी कलर का टावल नीचे गिरा दिया और अब माँ पूरी नंगी थी.. में माँ को जमकर प्यार करने लगा और माँ जमकर ऐतराज़ कर रही थी.

माँ : नहीं नहीं बेटा नहीं.. तूने सिर्फ़ एक किस के लिये कहा था में शॉट नहीं मारने दूँगी.. मुझे रिस्क नहीं लेना.

लेकिन अब में कहाँ सुनने वाला था? में पूरे शरीर को चिपका कर प्यार करने लगा और मैंने एक हाथ से फव्वारा चालू कर दिया तो माँ और में भीगने लगे.

में : माँ अब हम भीग ही चुके है तो अब नहा लेते है.. लेकिन माँ का ऐतराज़ जारी था और मेरा काम भी.

तो मैंने माँ को साबुन लगाया.. पहले कंधे पर फिर बूब्स और पेट पर फिर पैरों से ऊपर चड़ते हुए चूत पर, बहुत सारा साबुन लगाया.. मुझे बहुत नरम अहसास हो रहा था. फिर माँ ने मुझे भी पूरे शरीर पर साबुन लगाया और मेरे तने हुए लंड पर भी.

माँ : (लंड को साबुन लगाते हुए) यह भी बहुत शरारती हो गया है.

फिर मैंने माँ को बाहों में लिया और प्यार करने लगा.. साबुन की वजह से नरम मुलायम अहसास हो रहा था और बहुत मज़ा आ रहा था. पूरा शरीर एक दूसरे से रगड़ रहा था और फिर 5 मिनट बाद मैंने माँ की चूत में खड़े खड़े ही लंड डाल दिया.. बहुत मस्त साबुन में भीगी हुई चूत का मुलायम अहसास हो रहा था और मैंने धीमी धीमी चुदाई शुरू की.. पूरा शरीर साबुन में भीगा हुआ था और हम मस्त हो रहे थे. में लगातार चुदाई कर रहा था और 10 मिनट बाद दरवाजा बजा तो दरवाजे पर पापा थे. दोस्तों में कसम से बोलता हूँ मेरी तो गांड फट गयी. मैंने झट से लंड चूत में से बाहर निकाला.. में डर के मारे तो कांपने लगा.. लेकिन मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या करूं? माँ और में दोनों एक दूसरे की तरफ देख रहे थे.. तो फिर से दरवाजा बजा.

पापा : डार्लिंग दरवाजा खोलो इतना टाईम क्यों लग रहा है? मुझे तुम्हारे साथ नहाना है.

माँ : नहीं नहीं अभी नहीं.

पापा : क्या हुआ डार्लिंग? क्यों नहीं?

माँ : में नहा चुकी हूँ और बस कपड़े पहन रही हूँ.

पापा : तो क्या हुआ फिर एक बार नहा लेंगे और कपड़े तो मेरे सामने भी पहन सकती हो चलो.. अब जल्दी से दरवाज़ा खोलो.

माँ : ठीक है लेकिन आप पहले रोहित के रूम में जाकर उसे उठने के लिए आवाज़ देकर आइये.

पापा : ठीक है डार्लिंग में बस 2 मिनट में आया.

फिर मैंने जल्दी से बदन साफ किया और मेरी नाईट पेंट पहन कर बाथरूम के पीछे से छत पर चड़ गया और कुछ मिनट बाद.

पापा : डार्लिंग रोहित अपने कमरे में नहीं है शायद उठ गया है.

तो माँ ने दरवाजा खोला माँ तब भी पूरी नंगी थी और पापा अंदर चले गये और मैंने राहत की सांस ली माँ की समझदारी ने मुझे बाल बाल बचा लिया और में अपने कमरे में जाकर तैयार हुआ और हमने साथ में नाश्ता किया और मैंने 2 दिनों तक कुछ नहीं सोचा.. बिल्कुल नॉर्मल व्यवहार किया और 3 दिन के बाद रात को पापा को स्टेशन छोड़कर घर आया. पापा को बिजनेस की वजह से बाहर जाना था और में जब घर आया तो माँ को पता था कि में चुदाई करने वाला हूँ इसलिए माँ मेरे लिए चमकदार नीले कलर की मेक्सी पहनकर बैठी थी.

में जो 2 दिन से सेक्स का भूखा था. फिर मैंने जमकर माँ के साथ सुहागरात मनाई और माँ को बहुत चोदा… मैंने माँ को धक्के पर धक्के मारे और हम एक दूसरे से बात करने लगे.

माँ : तू तो बिल्कुल मेरे ऊपर टूट पड़ा है.

में माँ से पूरा लिपटा हुआ था.

में : माँ में क्या करूं… में तो आपके बिना पागल हो जाता हूँ.. मैंने खुद को 2 दिन कैसे कंट्रोल किया है मुझे ही पता.

माँ : हाँ तूने तो हम दोनों को मरवा ही दिया था तुझे मैंने मना किया था फिर भी तू नहीं माना.. में क्या कहीं भागी जा रही थी?

में : हाँ माँ डर तो में भी बहुत गया था और मेरे तो रोंगटे खड़े हो गये थे पापा अगर हमको देख लेते तो?

माँ : ऐसा सपने में भी मत सोचना तूने तो जन्मदिन पर गिफ्ट के बहाने मुझे ब्लेकमेल करके फायदा उठाया था और तब से लगातार मुझे चोद रहा है.. तू जैसे मेरा बेटा नही पति है. नई शादी जैसे सुहागरात मना रहा है.

में : माँ आप तो मेरी दुल्हन हो और मैंने एक जोरदार किस किया.

फिर कुछ देर ऐसे ही बातों का सिलसिला चलता रहा और में माँ के ऊपर फिर चड़ गया और लंड, चूत में घुसा दिया और चोदने लगा.

माँ : तेरा इंसान का लंड है या किसी घोड़े का.. इतनी जल्दी जल्दी खड़ा हो जाता है.

फिर में लगातार चुदाई किए जा रहा था. मेरा पूरा लंड माँ की गीली चूत से भीग चुका था और 30 मिनट बाद फिर एक बार में माँ की चूत में झड़ गया और हम ऐसे ही रात भर पड़े रहे. सुबह 11 बजे मेरी आँख खुली तो मैंने कपड़े पहने और हॉल में गया.

माँ : किचन से बोली.. क्या उठ गया तू? अभी चाय देती हूँ.

फिर मैं चाय नाश्ता करके नहाकर बाहर चला गया और 3 बजे वापस आया. हम दोनों ने साथ में लंच लिया.

में : माँ चलो ना… आज गार्डन घूमने चलते है.

माँ : गार्डन.. तू क्या कोई छोटा बच्चा है जो गार्डन चलना है?

में : प्लीज़… माँ चलो ना प्लीज़.

माँ : ठीक है मेरे प्यारे बेटे.

में : माँ मेरी एक और इच्छा भी है?

माँ : वो क्या?

में : मुझे आज आपके साथ असली सुहागरात मनानी है और आज रात आप दुल्हन की लाल साड़ी पहनो.

माँ : चल हट बड़ा आया अपनी माँ के साथ सुहागरात मनाने वाला.

में : प्लीज़… माँ मान जाओं ना.. प्लीज प्लीज़.

माँ : दुल्हन के मेकअप में बहुत टाईम लगता है और दुल्हन के मेकअप के आधे सामान मेरे पास नहीं है.

में : माँ तो क्या हुआ हम आज शाम को मार्केट से ले लेंगे?

माँ : तो तू नहीं मानेगा.. हमेशा अपनी जिद मनवा कर ही रहता है.. चल ठीक है.

तो मुझे अब सिर्फ़ रात का इंतजार है और में जाकर अपने कमरे में सो गया.. क्योंकि रात में जागने के लिए आराम ज़रूरी था और मुझे माँ ने 4:45 बजे उठाया.. माँ और में पूरी तरह तैयार हो गये.. चाय पीकर बाईक पर निकल पड़े.

माँ : कौन से गार्डन चलेगा?

में : कुछ ही मिनट में आ जायेगा देख लेना और 10 मिनट के बाद माँ को में लवर्स गार्डन ले आया और हम अंदर चले गये.. वहाँ पर बहुत जवान जोड़े थे.

माँ : यह कहाँ ले आया है तू बेटा?

में : माँ यहाँ पर हम जोड़े है.. लवर जोड़े.

फिर हम थोड़े अंदर जाकर एक कोने में पेड़ के पास बैठ गये और बातें करने लगे.. वहाँ पर मस्त हवा चल रही थी और ऐसे ही 1 घंटा बीत गया और फिर हम मार्केट गये. तो माँ ने कुछ मेकअप का समान लिया फिर हम एक लेडीस शॉप में गये वहाँ पर माँ ने ब्रा और पेंटी खरीदी में शॉप के बाहर ही खड़ा था और फिर हम घर आ गये. शाम के 7:30 बज चुके थे और माँ खाने की तैयारी कर रही थी क्योंकि माँ को तैयार होना था और 8:30 बजे तक खाना बन गया.

माँ : चल तू भी मेरे साथ जल्दी से खाना खा ले.

में : ठीक है.

तो हमने साथ में खाना खाया और 9:00 बज चुके थे.

माँ : चल में अब तैयार होने जा रही हूँ. में तुझे जब तक खुद आवाज़ ना दूँ तब तक तू हॉल में ही रहना चाहे कितना भी टाईम लगे.. में तुझे खुद आवाज़ दूँगी.

में : ठीक है माँ.

फिर माँ रूम में चली गयी और ऐसे ही आधा घंटा बीत गया.. मेरी माँ मेरे लिए दुल्हन बन रही थी और आज में अपनी माँ के साथ सुहागरात मनाने जा रहा था और एक एक मिनट सालों जैसा लग रहा था मेरी तो घड़ी से नज़र हट ही नहीं रही थी और इंतजार बड़ता जा रहा था. 10:20 बजे अब तो इंतजार की सारी हद समाप्त हो गयी थी और में जल बिन मछली जैसा तड़प रहा था. 11 बजे अब तो बहुत हद हो गयी. में कंट्रोल से बाहर हो गया और जाकर माँ के रूम का दरवाजा बजाया.

माँ : क्या है तुझे मैंने कहा था ना तू नहीं आना.

में : माँ अब और इंतजार नहीं होता.. जल्दी करो ना.

माँ : इंतजार तो करना पड़ेगा.. यह दुल्हन तो टाईम लगायेगी.

तो मुझसे इंतजार नहीं हो रहा था.. लेकिन मेरे पास इंतजार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था. फिर 11:45 पर माँ ने आवाज लगाई.

माँ : रोहित दरवाजा खोल दिया है.

यह सुनते ही मुझे कपकपी हो गयी कुछ ही कदमो पर मेरी दुल्हन तैयार थी.. मैंने धीरे धीरे अपना कदम रूम की तरफ बड़ाया और दरवाजे को धीरे से खोला और धीरे धीरे में रूम में गया.. लेकिन रूम में ट्यूब लाईट बंद थी.. हल्का सा ज़ीरो बल्ब चालू था. में बेड के पास गया.. माँ ने लाल कलर की भारी काम वाली साड़ी पहनी हुई थी और साड़ी का घूँघट ओढ़े बैठी थी.

में : माँ मेरी दुल्हन का चेहरा तो दिखाओ.

फिर मैंने पुरानी फिल्म जैसे माँ का घूँघट धीरे धीरे ऊपर किया.. माँ और मैंने एक दूसरे की तरफ देखा और माँ ने नई नवेली दुल्हन की तरह आँखे शरमाकर नीचे की तो मुझे तो यह सब किसी सपने की तरह लग रहा था.

में : माँ आप यहाँ बेड के पास खड़े हो जाये.. में अपनी दुल्हन को रोशनी में ऊपर से नीचे तक निहारना चाहता हूँ. फिर माँ को मैंने बेड के पास खड़ा कर दिया और लाईट को चालू कर दिया और जैसे ही लाईट चालू हुई तो माँ दुल्हन की साड़ी में क्या लग रही थी? में, माँ को पूरी तरह ऊपर से नीचे तक नैनो से निहारने लगा.

माँ : देख बेटा अच्छे से देख तेरी दुल्हन को… मैंने बहुत मेहनत की है.

में : धन्यवाद… माँ सच में यह सब तो जैसे आपने मेरे सपने को पूरा कर दिया हो.

फिर में, माँ के पास गया उनका हाथ अपने हाथ में लिया और चूमने लगा. माँ की लाल कलर की चूड़ियों को उतारने लगा और दोनों हाथों की चूड़ियों को उतारने के बाद मैंने माँ का नेकलेस उतारा, कान के उतारे और फिर माँ की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और फिर साड़ी को धीरे धीरे उतारने लगा. अब माँ मेरे सामने लाल पेटीकोट और ब्लाउज में थी.. में माँ के ब्लाउज के हुक एक एक करके खोलने लगा और पूरा ब्लाउज उतार दिया. फिर माँ को उंगली से स्पर्श करने लगा.. माथे से नीचे जाते हुए पेट पर और नीचे जाते हुए मैंने माँ के पेटीकोट का नाड़े को हल्का सा झटका दिया और पेटीकोट नीचे गिर गया. तभी मेरे होश उड़ गये.. माँ ने ब्रा और पेंटी तक एक ही कलर पहनी हुई थी. माँ मेरे सामने लाल कलर की ब्रा पेंटी में खड़ी थी.. गोरी गोरी जांघो के बीच माँ की लाल कलर की पेंटी जो चमकीली थी और ब्रा भी एक ही कपड़े की थी. दोस्तों सच में गजब का नज़ारा था और फिर में माँ के ऊपर झपट पड़ा और उन्हें बाहों में ले लिया और माँ को प्यार करने लगा. फिर गर्दन पर हल्के किस करने लगा और पेंटी के ऊपर से हाथ घुमाने लगा. पूरी गोल गोल गांड को सहलाने लगा.. पेंटी के ऊपर मज़ा ही मज़ा आ रहा था. फिर में माँ की ब्रा के हुक खोलने लगा.

माँ : रुक जा बेटा में अभी मुहं धोकर आती हूँ इतना भारी मेकअप जो किया है. फिर तू मुझे रातभर कहाँ उठने देगा. तो माँ बाथरूम में चली गयी और 5 मिनट बाद मुहं धोकर आई तो में माँ के ऊपर फिर झपट पड़ा और माँ की ब्रा का हुक खोल दिया और पेंटी को भी निकाल दिया और अब माँ मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थी. में माँ को पूरा बाहों में लेकर दबाकर प्यार करने लगा. होंठो को किस करने लगा.. चूसने लगा और माँ के बूब्स को दबाने लगा. माँ को उल्टी तरफ खड़ा करके बूब्स को दबाने लगा और चूत को सहलाने लगा. फिर हम बेड पर आ गये और में माँ के ऊपर और ज़ोर से टूट पड़ा.

माँ : रोहित बेटा में कहीं भागी नहीं जा रही.

तो में एक ना सुनते हुए ज़ोर ज़ोर से प्यार करने लगा और लंड को कूल्हों के ऊपर से रगड़ने लगा और में धीरे धीरे माँ की चूत के पास अपना मुहं ले आया दोनों हाथों से माँ के पैरों को घुमाकर अलग किया और चूत चाटने लगा.. धीरे धीरे चूत को अपने होठों से पीने लगा. माँ की चूत गीली हो गई थी.. में लगातार चूत चूस रहा था और माँ पूरे मज़े से सिसकियाँ भर रही थी आह्ह्ह और माँ ने मेरे सर को ऊपर से कसकर पकड़ लिया और दोनों जांघो से दबाया. में चूत को ज़ोर ज़ोर से चाट रहा था और चूत का पूरा पानी मेरे मुँह में गिर रहा था.. में चूत को चूस रहा था और माँ मेरे मुँह में झड़ चुकी थी और वो ढीली पड़ गयी और मेरा सर भी चूत से हटा दिया.

माँ : बस कर बेटा मेरा हो गया है अभी कुछ देर रुक जा.

तो माँ ठंडी होकर पड़ी थी.. में, माँ से चिपककर लेट गया मेरे मुँह पर माँ की चूत का पानी लगा हुआ था और बदबू आ रही थी.

में : माँ बहुत मज़ा आया आपकी चूत को चूसकर.

माँ : मेरी चूत का रस कोई जूस नहीं जो तुझे अच्छा लगे.

में : माँ आपकी चूत के रस के आगे तो हर जूस फीका है और में अपना लंड लेकर माँ के चहरे के पास गया.

में : माँ अब तुम लंड को चूसो.

तो में लेट गया और माँ मेरे लंड को ऊपर से नीचे तक धीरे धीरे चूसने लगी.. बहुत अच्छा लग रहा था और लंड को जैसे कोई जादुई अहसास हो रहा था. माँ एक हाथ से लंड को नीचे से पकड़कर मुँह से चूस रही थी.. करीब 5 मिनट चूसने के बाद मैंने माँ से कहा कि ..

में : माँ मेरा काम होने वाला है और माँ ने लंड को मुँह से बाहर निकाल दिया.

में : क्यों निकाला माँ चूसो ना?

माँ : तेरा काम होने वाला था और तेरा पानी मेरे मुँह में गिर जाता तो?

में : यही तो में चाहता हूँ आप मेरा पानी पी जाओ.

माँ : पागल हो गया है तू? तेरे लंड का इतना सारा पानी में पी जाऊँ.. बिल्कुल नहीं.

में : माँ प्लीज़, प्लीज़ माँ और थोड़ी देर मनाने के बाद वो मान गयी.

माँ : ठीक है.. लेकिन पहले तू लंड को चूत में डाल और जब तेरा होने वाला हो तब लंड मुँह में डाल देना.

फिर मैंने माँ की चूत पर लंड रख दिया और एक ही झटके में लंड पूरा अंदर चला गया और में पूरा माँ के ऊपर लेट गया और लंड अंदर बाहर करने लगा. लंड को तो जैसे मुलायम मखमल सा अहसास हो रहा था और हम माँ, बेटे चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगे सिसकियाँ भरने लगे अहह उफ्फ्फ और में लगातार चुदाई किए जा रहा था. फिर 30 मिनट बाद मुझे लगा कि में झड़ने जा रहा हूँ.

में : माँ अब में झड़ने वाला हूँ.

माँ : झड़ जाओ मेरी चूत में.

फिर माँ ने मुझे कसकर पकड़ लिया.

में : लेकिन मुझे आपके मुँह में झड़ना है.

माँ : फिर कभी अभी चूत में ही छोड़ दो मुझे बहुत अच्छा लगता है और में धीरे धीरे झटके लगाये जा रहा था और कुछ ही देर बाद मैंने लंड का पूरा दबाव चूत पर लगाया और अपना पूरा वीर्य चूत में भर दिया और में शांत हो गया और ऐसे ही हम सो गये. रात को मैंने 2 बार और लंबी चुदाई की.. पूरी रात माँ बेटे ने सुहागरात को इन्जॉय किया ..

आज की रात तुम ही मेरे पति हो

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हैल्लो दोस्तों.. में साहिल एक बार फिर से आप सभी के सामने हाज़िर हूँ अपनी एक और आप बीती लेकर और में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को मेरी यह स्टोरी भी पिछली स्टोरी की तरह आपको बहुत पसंद आएगी. तो में अब सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ अब में दिल्ली में एक नौकरी करने लगा था तो वहाँ पर मैंने रूम भी ले लिया था जैसा कि आपको पता है कि में शुरू से ही शर्मीले स्वभाव का हूँ और इसी वजह से में अपने रूम पर भी बस रात को आना खाना खाना और सो जाना और सुबह उठकर फिर से ऑफिस चले जाना.. बस यह ही मेरी दिनचर्या रहती थी. उस घर में तीन रूम थे.. एक रूम में मकान मालिक और उनकी पत्नी रहती थी जो बहुत अधेड़ उम्र की थी.. दूसरे रूम में एक आदमी कोई 48 साल का होगा वो रहता था और तीसरे में में मेरा रूम गली के बिल्कुल सामने था और सामने वाले घर में दो बहुत ही सुंदर सी मेरी हम उम्र लड़कियों को अक्सर में जाते देखता था.. लेकिन वो कौन है में नहीं जानता था और शायद उनकी माँ जिसकी उम्र 36 साल के आस पास थी.. लेकिन उसका शरीर इतना गठीला और भरा पूरा था और अक्सर गली के लड़को से में उसके चर्चे करते सुनता था.

फिर जब कभी भी में रात को छत पर बैठता तो वो बहुत लोगों के दिलो पर छुरियां चलाती हुई चलती थी और जब भी मटक मटक कर चलती और उसके कुल्हे तो क्या बताऊँ दोस्तों क्या कहर थे? फिर एक दिन में रात को ऑफिस से आया तो वो दोनों लड़कियां मेरे पीछे गली में आ रही थी और जब मैंने पीछे मुडकर देखा तो अंधेरी गली में वो एक दूसरे में खोई हुई थी और एक लड़की दूसरी के कभी गले में लटकती तो कभी गाल पर किस कर लेती. तभी मैंने सोचा कि बच्ची होगी कोई बात नहीं.. ल्रेकिन जब में रूम पर आकर गेट बंद करने लगा तो उसने उस लड़की के गालों पर फिर से किस किया और उसी वक्त मैंने उन्हे देखा और उस दूसरी लड़की ने मेरी और देखकर झूट मूठ गुस्सा उस लड़की पर दिखाते हुए बोली कि तू अपनी बदमाशियों से कभी भी बाज नहीं आएगी अजीब सी स्माईल दी और झट से भागकर सामने वाले घर में घुस गई. फिर में खाना खाकर अपने रूम का दरवाजा खोलकर लेपटॉप पर फिल्म देख रहा था.. तभी मुझे सामने वाले घर की छत से लड़कियों की आवाज़ आई और फोन की लाईट दिखाई दी. तो मैंने सोचा कि यह वही लड़की है और मैंने उस पर ट्राई मारने की सोची मैंने अपने फोन की लाईट को ओन ऑफ किया.

तो उधर अंधेरे में से भी ऐसा ही कुछ सिग्नल मिला और फिर मेरी हिम्मत थोड़ी बड गई. मैंने फिर से ऐसा ही किया और वहाँ से दोबारा से जवाब आया मैंने सोचा कि लगता है कि मामला सेट हो जाएगा. ऐसी हरकतों में बहुत वक्त गुजर गया और में सो गया. फिर सुबह उठते ही मुझे उनका ध्यान आया और में जल्दी से उठा और छत की और देखा तो में हैरान हो गया वहाँ पर वो लड़कियां तो नहीं थी.. लेकिन वो हसीन आंटी जरुर थी. तो मैंने सोचा कि यह ऐसे ही खड़ी होगी और फिर में अपने काम में लग गया. मैंने कपड़े उतारे और तोलिया लपेटकर आँगन में घूमने लगा.. कभी ब्रश करता तो कभी नहाने जाता.. लेकिन मैंने बिल्कुल भी गौर नहीं किया कि वो आंटी तब तक वहीं पर खड़ी होकर मुझे घूरती ही रही जब तक कि में तैयार होकर ऑफिस नहीं चला गया.. लेकिन मेरे मन में एक बार भी यह ख्याल नहीं आया कि रात को वहाँ पर वो आंटी भी हो सकती थी? खैर और अब यह रोज की आदत हो गई. में रात को सोता और वही फोन की लाईट दिखती और फिर सुबह वो आंटी खड़ी नज़र आती.

मैंने उसके बारे में और पता किया तो पता लगा कि वो पंजाब से है और उसका पति एक कम्पनी में मेनेजर है जो कि अक्सर कम्पनी के कामों के लिए बाहर जाता रहता है और मैंने यह भी सुना कि वो अंकल बहुत चुदक्कड है क्योंकि गली के लड़के कहते है कि जब रात को वो दोनों जब भी कभी सेक्स करते है तो उनकी सिसकियों की आवाज़ बाहर गली तक आती है और आंटी तो थी ही माल.. लेकिन उसका पति जब उसकी इतनी ठुकाई कर देता है तो मेरी दाल कहाँ से गलेगी? फिर में बहुत उदास हो गया.. लेकिन फिर भी दिल नहीं माना तो मैंने फिर से कुछ डोरे डालने की सोची. तो एक दिन सुबह सुबह उठा तो वो मुझे घूर रही थी.. में बाथरूम में नहाने गया और तोलिया लपेट कर बाहर आया.. तभी अचानक से जानबूझ कर मैंने अपना टावल नीचे गिरा दिया और मैंने नीचे जानबूझ कर कुछ भी नहीं पहना था और यह दिखाया कि यह काम गलती से हुआ और किसी ने नहीं देखा होगा.. लेकिन जब उसकी तरफ नज़र मिलाई तो वो हँसी और चली गई.. मेरे तो अब भी कुछ समझ में नहीं आया.

फिर एक दिन बाद ही एक जनवरी थी और में शाम को ऑफिस से जल्दी आ गया यह सोचकर कि नया साल रूम पर ही कोई ब्लूफिल्म देखकर मनाऊंगा.. लेकिन घर पर आया था और देखा कि वो आंटी हमारे ही आगंन में मेरी मकान मालकिन के साथ बैठी है मैंने उन्हे नमस्ते किया तो मकान मालकिन ने बताया कि आज उनकी शादी की सालगिरह है और उन्हे घर में कुछ सजावट करनी है और सभी सामान तो वो ले आई है.. लेकिन अकेले यह सब करना मुमकिन नहीं होगा क्योंकि अंकल रात को नहीं आने वाले थे वो कहीं बाहर थे और उन्हें कल सुबह 10 बजे तक आना था तो आंटी ने मुझे मदद के लिए पूछा और मैंने हाँ कर दी.. क्योंकि मुझे लगा कि आज कुछ उम्मीद है शायद कोई मौका मिल जाए. फिर मैंने जल्दी से कपड़े बदले और लोवर डाला. खाना खाने को आंटी ने पहले से ही मना कर दिया था और वो बोली कि मेरे यहीं पर खा लेना.

फिर हम जल्दी से उनके घर पर पहुंचे उनका बहुत ही सुंदर घर था.. वो मेरे आगे आगे गांड को मटका कर चल रही थी और में उनकी मोटी गांड को हिलते देखकर पागल होता जा रहा था. फिर अन्दर आकर पहले आंटी ने मुझे कोल्डड्रिंक पिलाई और कुछ खाने को दिया.. उसके बाद हम घर को सजाने में लग गये. में लड़ियां लगा रहा था और वो नीचे से मेरी मदद कर रही थी और में बीच बीच में उनकी बड़े बड़े बूब्स पर भी निगाह डाल लेता था. इस उम्र में भी उनका फिगर कयामत था.. 36- 26- 38.. सच में कोई नहीं मान सकता था कि उनकी शादी को इतने साल हो चुके है. फिर मैंने धीरे धीरे उनसे बातें करनी शुरू की तो पता लगा कि उनके दो लड़के है और दोनों बंगलोर में रहते है और वो ही यहाँ पर अकेली रहती है. तो में स्टूल पर खड़ा होकर एक उँची सी जगह पर एक पोस्टर लगाने की कोशिश कर रहा था. तभी अचानक से आंटी के हाथ से स्टूल लड़खड़ा गया और में उनके बिल्कुल ऊपर जा गिरा.. गिरते गिरते वो तो सोफे पर जा गिरी और में पास में रखे बेड से टकरा गया और मेरे घुटने पर बहुत ज़ोर से चोट लगी.. लेकिन खून नहीं आया.

में जल्दी से उठा और पूछा कि क्या आंटी आप ठीक तो है? तो वो बोली कि में तो बिल्कुल ठीक हूँ.. लेकिन जब में उठकर चला और एकदम से लंगड़ाया तो आंटी ने मुझसे कहा कि शायद तुम्हे बहुत चोट लगी है? तो मैंने उनकी बात को हँसी में टालना चाहा.. लेकिन वो बोली कि नहीं तुम्हे चोट लगी है मुझे दिखाओ. तो उन्होंने मुझे बेड पर लेटाया और मेरा लोवर ऊपर करके देखने लगी.. मेरे घुटने के ऊपर बहुत दर्द हो रहा था तो वो बोली कि में बाम लेकर आती हूँ.. लेकिन मैंने मना कर दिया तो वो बोली कि तुम चुपचाप लेटे रहो. तुम्हे चोट लगी है. फिर वो दूसरे कमरे में जाकर बाम ले आई और लोवर को थोड़ा ऊपर करके लगाने लगी.. लेकिन बार बार लोवर नीचे आ जाता था. तभी उन्होंने मुझे लोवर को निकालने को कहा. तो में डर गया क्योंकि मैंने नीचे कुछ भी नहीं पहना था और फिर उनके बार बार कहने पर मैंने शरमाते हुए उन्हे बताया कि मैंने नीचे अंडरवियर नहीं पहना है. तो वो बहुत ज़ोर से हंसकर बोली कि कोई बात नहीं तुम यह टावल लपेट लो..

तो मैंने टावल लपेट लिया और वो मेरे पास में बैठकर बाम लगाने लगी और फिर उनके हाथ मेरे शरीर से स्पर्श होते ही मेरे शरीर से कपकपी छूट गई और मैंने अपनी दोनों आँखे बंद कर ली. फिर वो धीरे धीरे घुटने से लेकर मेरी जांघो तक बाम मसल रही थी और मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ रहा था और अब मेरा लंड भी टाईट होने लगा था जिसकी वजह से टावल ऊपर उठ गया था और में शरम के मारे उनसे नज़र नहीं मिला पा रहा था.. लेकिन मजे में उन्हे मना भी नहीं कर पाया और मैंने जिझक में मना भी किया.. लेकिन वो नहीं मानी और वो धीरे धीरे बाम मसल रही थी. मेरे लंड में तनाव आ चुका था और जिसे वो भाँप चुकी थी.

फिर वो भी चोरी चोरी मेरी तरफ देखती.. लेकिन मैंने उन्हे दिखाने के लिए दोनों आखें बंद कर रखी थी और धीरे धीरे उनका चेहरा लाल होने लगा था और चेहरे के भाव भी बदल गये थे और धीरे धीरे बीच बीच में उनका हाथ मेरे लंड को स्पर्श कर जाता.. लेकिन मैंने कोई विरोध नहीं किया और यह दिखाया कि में सो गया हूँ. तो उनकी थोड़ी हिम्मत बड़ी और उन्होंने धीरे से मेरे लंड के ऊपर से टावल हटाया और बहुत अच्छे से उसे घूरा और चोरी से मेरी तरफ नज़रे घुमाई.. लेकिन मेरी आखें बंद थी. फिर उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया और आराम आराम से उसकी चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी.. फिर उन्होंने धीरे से अपने चहरे को मेरे लंड के पास किया और आराम से लंड को सूँघा और एक किस करके मुहं में ले लिया. मेरे तो पूरे शरीर में जैसे आग ही लग गई. वो उसे मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी और अब मुझे सब कुछ बर्दाश्त से बाहर हो रहा था. तो में अचानक से उठकर खड़ा हुआ और नाटक करते हुए बोला कि आंटी आप यह आप क्या कर रही हो? तो वो बोली कि तुम बस कुछ मत बोलो और मुझे करने दो में बहुत दिनों से प्यासी हूँ. तो मैंने पूछा कि क्यों लेकिन अंकल है ना आपकी प्यास बुझाने के लिए? तो वो बोली कि हाँ वो बहुत अच्छे से बुझाते है.. लेकिन अक्सर उनके पास अपने दूसरे कामों की वजह से मेरे लिए बहुत कम समय होता है.. लेकिन मेरी प्यास ही इतनी है कि बुझती ही नहीं और मेरी बहुत दिनों से तुम पर नज़र थी. आज मौका भी है और वक़्त भी.

फिर मैंने कहा कि क्यों आज तो आपकी सालगिरह की रात है? तो वो बोली कि कोई बात नहीं आज की रात तुम मेरे पति हो और बस उसके बाद उन्होंने बस हद ही कर दी.. अपने सारे कपड़े उतार दिए और मेरे तो आधे पहले ही उतर चुके थे और बाकी भी उतर गये. फिर वो मुझे ऊपर से नीचे तक बुरी तरह से काटने और चूमने लगी. मेरे होंठ पर, मेरी निप्पल पर, मेरे पेट पर, मेरे लंड पर, मेरी बॉल्स पर. तो मेरे मुहं से बस अह्ह्ह आअहह ही निकल रही थी और में झड़ने लगा तो उसने मेरे लंड को मुहं से बाहर नहीं निकाला और चूस चूसकर मेरे वीर्य की एक एक बूँद को पी गई और उसने मेरे लंड को पूरा निचोड़ दिया.. में चुपचाप लेटा रहा तो वो मेरे पास में आ गई और मेरे बदन को सहलाने लगी और अब मेरी बारी थी.. मैंने उन्हे गरम करना और सक करना शुरू किया तो वो मचलने लगी. में उन्हे किस करता हुआ निप्पल पर काट रहा था.. उसके मस्त मस्त बूब्स को दबा रहा था और उसके मुहं से सिसकियाँ निकल रही थी और अब में थोड़ा और नीचे उनकी चूत पर आ गया.

वाह कितनी गौरी दूध जैसी चूत थी उस पर एक भी बाल नहीं था. एकदम चिकनी जैसे कि मेरे लिए ही तैयार की हो और बिल्कुल लाल फांके. तो मैंने धीरे धीरे से उन्हे खोला और अपनी जीभ को जैसे ही उसमे डाली तो उसने अपनी कमर को उठाया और मेरे सर को पकड़ कर अपनी जांघो में दबा दिया.. में उन्हे काटने और बुरी तरह से निचोड़ने लगा वो चूतड़ उछाल रही थी और हाथ पटक रही थी. मेरे हाथ साथ में उसके निप्पल को दबा रहे थे और वो बस ज़ोर ज़ोर से सिसकियां लिए जा रही थी और वो बिल्कुल बेकाबू हो गई. उसने मुझे अपने ऊपर से हटाकर बेड पर वापस लेटाया और दोबारा मेरे लंड को मुहं में ले लिया. बस एक मिनट में ही वो दोबारा तैयार हो गया और उसने बिना कोई देरी करते हुए लंड को चूत पर सेट किया और उस पर सवार हो गई और जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में दाखिल हुआ तो उसने ऐसी सांस ली जैसे कि उसे सूकून मिल गया हो.

फिर उसने एक के बाद एक ज़ोर ज़ोर से झटके देने शुरू किए और में उसकी कमर को अपने दोनों हाथों का सहारा दे रहा था और वो मेरे लंड पर उछले जा रही थी. फिर कभी वो ऊपर कभी में.. आधे घंटे तक हम ऐसे ही करते रहे. जैसे ही में झड़ने वाला होता में रुककर उसे सहलाने लगता और फिर से शुरू हो जाता.. लेकिन अब उसकी हाफतें हाफतें हालत खराब हो गई थी और अब में झड़ने वाला था.. तो वो बोली कि वो दो बार झड़ भी चुकी है और तीसरी बार उसका होने वाला है. तो मैंने उससे कहा कि कहाँ पर डालूं? तो वो बोली कि अंदर ही आने दो.. तभी तो मेरी चूत की गर्मी मिटेगी.. मेरे शरीर को शांति मिलेगी और बस 4-5 झटकों के बाद ही में उसकी चूत में झड़ गया. फिर हमने खाना खाया और उसके बाद फिर से शुरू हो गये.. इस उम्र में भी उसमे गजब का जोश था.. वो लगातार सुबह 4 बजे तक मेरा पूरा पूरा साथ देती रही. फिर मैंने इस बीच उसकी एक बार गांड भी मारी और हम साथ में भी नहाए फिर हम ऐसे ही पूरे नंगे सो गए. सुबह 8 बजे उठे साथ में नहाए और एक बार फिर मैंने उसकी गांड मारी और उसके पति के आने से आधा घंटा पहले में वहाँ से निकल गया. फिर उसके बाद तो जितने भी दिन में वहाँ पर रहा.. बस मेरी तो किस्मत में रस ही रस रहा ..

बहन को फंसाकर घर में चोदा

antarvsna Kamukta hindi sex indian sex chudai हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम अंशुमन है और में इस साईट का बहुत चाहने वाला हूँ.. क्योंकि मुझे ब्लू फिल्म देखने से ज़्यादा मज़ा इस साईट की स्टोरी पढ़ने में आता है और शायद आप सभी को भी आता होगा में अधिकतर लेस्बियन कहानियाँ ही पढ़ता हूँ और कभी कभी देसी भी. मेरी उम्र अभी 20 साल है और मेरे साथ 11 अगस्त को बहुत मस्त घटना हुई जो में आज आप सभी से शेयर करना चाहूँगा और वो मेरे दिमाग़ से हट ही नहीं रही.. बाकी सब स्टोरी का पता नहीं.. लेकिन यह स्टोरी बिल्कुल एकदम असली है और अब में उस दिन को पुरानी यादोँ की तरह आप सभी के सामने रखता हूँ. मेरी छोटी बहन 19 साल की है और उसका नाम प्रेरणा है और पता नहीं मुझे एकदम से क्या हो गया है कि में आजकल उसी को देखकर तड़पता रहता हूँ और उसको पता भी नहीं चलने देता कि में उसके साथ सेक्स करना चाहता हूँ.. लेकिन क्या बताऊँ कि अगर वो मुझे मिल जाए तो फिर और कोई नहीं चाहिए. यह अहसास आप सभी समझते होंगे और मेरे ख्याल से सारे भाई अपनी बहन के साथ सेक्स करने की इच्छा अपने मन में दबाए रखते है. फिर मैंने इस दिशा में कभी कोई कदम नहीं उठाया और मेरी कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं बनी और कभी किसी को मैंने ट्राइ ही नहीं किया और सच बोलूं तो में लड़कियों के मामले में थोड़ा शर्मीला स्वभाव का हूँ.

इसलिए तो मैंने एक दिन डिसाईड किया कि धीरे धीरे कुछ ट्राई किया जाए और कुछ ऐसा किया जिससे प्रेरणा खुद ही मुझसे सेक्स करना चाहे और में जब भी कोई मौका हाथ लगता उसको देखना नहीं छोड़ता था.. उसकी नाभि, उसके बूब्स, उसकी छाती, उसके पैर, उसकी गांड, और कभी उसकी कमर.. सब की एक तस्वीर बनाकर रोज़ उसके नाम की मुठ मार ही लेता था. फिर वो भी इस उम्र में हर रोज़ धीरे धीरे सेक्सी होती जा रही थी और धीरे धीरे में उससे सभी बातें शेयर ज्यादा करने लगा.. उसका भी कोई बॉयफ्रेंड नहीं था और फिर में उसको सेक्सी कहानियाँ मेल करने लगा एक फेक आई.डी से जिसमे लेस्बियन या देसी सेक्स वाली अच्छी स्टोरी होती थी.. लेकिन मुझे पता नहीं था कि वो पढ़ती थी या नहीं और सिर्फ़ मुझे एक बार पता लग जाए कि वो उन स्टोरी को पढ़ती है.. तो मुझे पता चल जाए कि वो क्या और कैसा सोचती है एक भाई से सेक्स करने के बारे में?
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फिर सभी स्टोरी की तरह में उसको नहाते हुए नहीं देख पाता था और ना ही बाकी स्टोरी की तरह में रात को उसके साथ सोता था जिससे उसको छू सकूँ.. में ज़मीन पर गद्दा बिछाकर सोता था और वो ऊपर बेड पर सोती थी. में ट्राई करता था कि उसको देखता रहूँ क्योंकि उसकी उम्र हो गयी थी चूत में ऊँगली करने की.. कभी वो सोचे कि में सो रहा हूँ और वो चूत में ऊँगली करे तो में उसको ऐसा करते हुए देखना चाहता था. में उसकी पेंटी, ब्रा तो सूंघने लगा था और मुठ मारने लगा था. फिर कभी वो बाथरूम में पेंटी, ब्रा को छोड़कर आती थी तो में उनको सूंघकर ही में बहुत खुश हो जाता था और में आजकल उससे बहुत खुलकर बातें करता था जिससे उसकी पसंद ना पसंद का पता लग जाए और जब भी मौका मिलता था उसको हग करता था. उसके बूब्स को महसूस करने के लिए में उसको अपने साथ बाईक पर घुमाने लगा.. क्योंकि वो पीछे से थोड़े बूब्स मेरी कमर पर छू देती थी.

एक दिन में जब बाईक पर उसके साथ था तो उसने मुझे किसी जनरल स्टोर के बाहर रोका और कहा कि 15 मिनट रुको में अभी आती हूँ. तो मैंने ज्यादा नहीं सोचा.. लेकिन में उसके पीछे नहीं गया और थोड़ी देर बाद मैंने सोचा.. कि में अंदर जाता हूँ और मुझे पता लगा कि उसको ब्रा, पेंटी लेने थे. फिर 2-3 दिन के बाद बाथरूम में उसकी नयी वाली पेंटी, ब्रा पड़ी हुई थी में बहुत गरम हो गया और मैने फिर से मुठ मार ली और मैंने ध्यान दिया कि वो भी आजकल मेरी तरफ आकर्षित होने लगी थी और एक दिन उसका मेरी फेक आई.डी पर जवाब आया कि वो भी ऐसी कहानियों को बहुत पसंद करती है और मुझे बहुत अच्छा लगा.. क्योंकि मुझे अब भरोसा था कि उसको फंसाने में बहुत मज़ा है.. लेकिन अब उसको अपनी तरफ आकर्षित कैसे करूं यही सोचना था. दोस्तों आपको बता दूँ कि मेरी फेक आई.डी से उसको लगता था कि कोई लड़की उसको स्टोरी भेजती है.

फिर एक दिन वो स्कूल में थी और जब मैंने देखा कि वो ऑनलाईन है.. तो मैंने फेक आई.डी से उससे चेट करना शुरू किया.. फिर उसने मुझे बताया कि वो भी भाई के साथ सेक्स करना चाहती है. तो मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया.. लेकिन दोस्तों में उसको कैसे पूछूँ और कैसे किस तरह उसको चोद सकूँ समझ में नहीं आ रहा था और वो पता नहीं कैसा व्यहवार करेगी और में बहुत डरता भी था और शरम भी बहुत थी. फिर मैंने एक प्लान बनाया और थोड़ा दिमाग़ लगाया.. उस समय मेरे एग्जाम थे.. मैंने उसको बोला कि मुझे सुबह जल्दी 6 बजे उठा देना. क्योंकि वो रोज़ जल्दी उठकर मम्मी की किचन के कामों में मदद करवाती थी और एक्ससाईज़ भी करती थी. फिर मैंने भी थोड़ा पहले का अलार्म लगा लिया और सुबह सुबह उठकर उसके बारे में सोचने लगा.. तो मेरा लंड खड़ा हो गया और इंतजार करने लगा. कि वो मुझे उठाए और उसको पता लग जाए कि मेरा लंड खड़ा हुआ है.

फिर थोड़ी देर बाद वो मुझे उठाने आई.. और थोड़ी देर मैंने नींद में होने का नाटक किया.. में नीचे जमीन पर बिस्तर डालकर सोता हूँ इसलिए वो मुझे झुककर उठा रही थी और उसकी सुंदर छाती को देखकर मेरा लंड ज्यादा खड़ा हो गया और उसको भी पता लग गया कि मेरा खड़ा है. मैंने ग़लती से उसके बूब्स के ऊपर से हाथ लगा दिया और नींद में होने की बात सोचकर उसने कोई विरोध नहीं किया और उसका हाथ भी स्टाईल से मैंने अपने लंड पर छू दिया.. लेकिन उसने कोई भी विरोध नहीं किया और धीरे धीरे मुझे महसूस होने लगा कि एक दिन तो में उसके साथ सेक्स कर ही लूँगा और काश में उससे सीधा पूछ पाता.. लेकिन में बहुत शर्मिला स्वभाव का था और एग्जाम टाईम था इसलिए रोज़ यह सब होने लगा. वो कुछ हलचल नहीं करती थी और रोज़ में ग़लती से उसके बूब्स छू लेता था. उसको भी पता था कि में बहुत शर्मीले स्वभाव का हूँ और उसका भी सेक्स करने का मन होने लगा. फिर मेरे एग्जाम खत्म हो गये और एक दिन उसने मुझे बोला कि आज कल आप लेट उठने लगे हो भैया.. रोज़ सुबह जल्दी उठना चाहिए. तो में समझ गया कि उसको भी लंड चाहिए? तो मैंने पूछा कि क्यों अब क्या करूं जल्दी उठकर?

प्रेरणा : जल्दी उठकर एक्ससाईज़ किया करो.. में भी करती हूँ.. या मॉर्निंग वॉक पर जाया करो.

में : नहीं में फिट हूँ मुझे नहीं करनी एक्ससाईज़.

प्रेरणा : यार आप आज कल मोटे हो रहे हो.

में : ठीक है कल से करेंगे.. लेकिन तेरे साथ ही करूँगा.

प्रेरणा : ठीक है भाई और क्या करेगा मेरे साथ?

में : क्या मतलब?

प्रेरणा : कुछ नहीं मेरा मतलब है कि मॉर्निंग वॉक पर भी चलेंगे ना.

में : हाँ क्यों नहीं?

अब में हर रोज़ एक्ससाईज़ के वक्त में उसको बहुत छूने लगा था.. रोज़ वो मुझे जल्दी उठाती थी और हर रोज़ वही होने लगा. मुझे आखिरकार एक दिन उसको चोदना था और एक दिन मम्मी को मौसी के यहाँ पर जाना पड़ा. पापा ऑफिस में थे और वो दूसरा शनिवार था.. हमारी छुट्टी थी तो मैंने कुछ नहीं बोला और फिर ..

प्रेरणा : उठो भैया.

में : नहीं.. आज आलस आ रहे है और तुम भी सो जाओ.

प्रेरणा : क्या में यहीं सो जाऊँ आपके पास?

में : हाँ क्यों नहीं.

प्रेरणा : ठीक है भैया आज घर में कोई नहीं है मम्मी मौसी के घर गयी है.

में : तो अब खाना कौन बनाएगा.. तू?

प्रेरणा : क्या यार.. आपको भी उठने से पहले भूख लग जाती है.

में : ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा.

प्रेरणा : और बताओ भाई क्या चल रहा है?

में : कुछ नहीं यार.

प्रेरणा : भाई में जब भी आपको उठाने आती हूँ तब आप सोए हुए रहते है.. लेकिन आपका सुबह सुबह ऐसे क्यों खड़ा हुआ रहता है?

में बहुत चकित और खुश और नर्वस और गरम.. सारा मिक्स सा अहसास आ रहा था और उसे क्या जवाब दूँ? समझ में नहीं आ रहा था और फिर मैंने कहा.. कि मुझे पेशाब आ रहा है और में उठकर बाथरूम में चला गया.

प्रेरणा : क्या हुआ? वापस आओ ना मेरे साथ थोड़ी देर लेटो.. कुछ बात करनी है.

में : हाँ आ रहा हूँ.

प्रेरणा : आपको में कैसी लगती हूँ?

में : तू बहुत अच्छी है.. लेकिन तू ऐसा क्यों पूछ रही है?

प्रेरणा : यार आप बहुत शर्मीले हो और आपकी कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं है और मेरा भी कोई बॉयफ्रेंड नहीं है.

में : हाँ मेरी तो अभी तक कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.. लेकिन तेरा कोई बॉयफ्रेंड क्यों नहीं है? और तू तो दिखने में भी बहुत अच्छी लगती है.

प्रेरणा : क्या भैया आजकल अच्छे लड़के है ही नहीं.. सब गंदे है और मुझे वो पसंद नहीं.. कोई वैसे भी आप की तरह अच्छा दिखने वाला हो और आप क्यों नहीं पटाते कोई? आप बहुत शर्मीले हो.

में : हाँ यार और अब मेरा लंड फिर से बहुत टाईट हो रहा था.

उसको फिर मेरा खड़ा हुआ लंड महसूस हुआ. इस बार मैंने उसके गाल पर छोटा सा किस कर दिया और उसने भी मेरे सर पर किस कर दिया.

प्रेरणा : में आपसे बहुत प्यार करती हूँ भैया और आप बहुत अच्छे हो मेरा बहुत ध्यान रखते हो.

फिर वो मेरे ऊपर लेट गयी और में पीछे से उसकी ब्रा महससू कर रहा था और उसकी गांड भी. तभी वो बोली कि भैया अब शरमाओ मत और एक किस करने में आपका खड़ा हुआ है प्लीज़ मुझे फिर से किस करो ना. फिर मैंने कुछ नहीं सोचा और उसके गुलाब जैसे होंठो को ऐसा किस किया कि क्या बताऊँ? बहुत चूसा उसके होंठो को और उसने भी और एक दूसरे को गीले वाले किस किए और हम बहुत देर तक किस करते रहे.. करीब 12 मिनट तक वो मेरे ऊपर लेटी हुई किस करती रही और में किस करते हुए उसकी गांड को मसल रहा था. तभी अचानक से वो उठकर चली गयी और रोने लगी.

में : क्या हुआ.. रो क्यों रही है.

प्रेरणा : भाई यह क्या हुआ? और यह क्या कर दिया हमने? क्यों यह बहुत ग़लत है ना? सब मेरी ग़लती है मैंने ही आपको उकसाया.. आप तो कुछ नहीं करने वाले थे.

में : रो मत और अब चुप हो जा कुछ नहीं करना तो कोई बात नहीं और मुझे माफ़ कर दे में ही तुझे वो सेक्सी कहानियाँ भेजता था.

प्रेरणा : क्या? तुम पागल हो.

में : मुझे माफ़ करो वैसे किस कैसा था?

तो वो कूदकर मेरी गोद में आ गयी और फिर से किस करना स्टार्ट कर दिया और इस बार भी अच्छा किस था और उसने मेरी टी-शर्ट को उतार दिया और मैंने भी उसका टॉप उतार दिया.. वो ब्रा में बहुत अच्छी लग रही थी. क्या बताऊँ एकदम ग़ज़ब? और फिर से किस करना स्टार्ट कर दिया. तो वो बोली कि क्यों भैया आपको सब आता है ना?

में : हाँ मैंने बहुत ब्लू फिल्म देखी है.

प्रेरणा : कंडोम है?

में : छोड़ उसको उसका अभी क्या काम?

फिर मैंने उसकी ब्रा उतार दी और किस करते हुए उसकी कमर को मसलने लगा.. वो बहुत अच्छे से किस कर रही थी. मैंने उसको रोककर उसके बूब्स दबाए और उसके बूब्स चूसने लगा.. लेकिन उसके बूब्स बड़े बड़े एकदम गोरे बहुत अच्छे आकार में थे और बहुत अच्छे निप्पल भी थे. में बहुत देर तक दोनों बूब्स को एक एक करके चूसता रहा और हम फिर से किस करने लगे.

प्रेरणा : भैया आपका लंड दिखाओ ना प्लीज़.

में : पहले तू तेरी चूत दिखा ना.

प्रेरणा : आप भी पूरी लाईफ शर्मीले ही रहोगे.. आप खुद ही देख लो.

फिर मैंने उसकी पेंट को उतार दिया और उसके पैर को चूमने चाटने लगा और फिर उसकी जांघ को चाटा और उसकी गुलाबी पेंटी के पास उसकी चूत को किस करने लगा. फिर उसकी चूत के पास चाटने लगा.. वो तो इतने में ही एक बार झड़ गयी और उसकी पेंटी गीली हो गई. तो उसने कहा कि भैया प्लीज़ पेंटी खोलो मेरा रस तो बाहर आ गया. तो मैंने उसकी पेंटी को जोश ही जोश में फाड़ दिया.. उसकी क्या चूत थी? बस थोड़े थोड़े बाल थे और बिल्कुल गुलाबी सी चूत थी और उसे देखकर मेरे मुहं में पानी आ गया और फिर मैंने कहा कि अब तो चूत को चूसकर बहुत मस्त मज़ा आएगा. तो वो बोली कि कोई बात नहीं.. लेकिन आपको बुरा ना लगे तो क्या अब आप मेरी चूत को चाटोगे?

फिर मैंने कहा कि हाँ तुम देखती रहो और में चूत को बहुत तेज़ी से चूसने लगा और थोड़ी देर चूसने के बाद वो मेरे बाल पकड़ कर खींचने लगी और मुझे पता था कि उसका दूसरी बार झड़ने का नंबर आने वाला है. उसकी चूत के रस का बहुत अच्छा स्वाद था और उसने मेरे सर को अपनी जांघ में दबा लिया था. फिर वो बोली कि वाह भैया आप मेरी चूत का सारा पी गये.. चलो अब आपका लोवर उतारो.. तो मैंने कहा कि तुम खुद ही उतार लो. फिर उसने हंसकर मेरा लोवर और अंडरवियर एक साथ उतार लिया मेरा लंड भी थोड़ा सा गीला था और अब वीर्य निकल रहा था. तो उसने पहले हाथ से सहलाया, मसला तो मेरा लंड झड़ गया और पूरा वीर्य उसके बूब्स पर गिर गया और थोड़ा सा उसने चाट लिया और वो बोली कि कोई बात नहीं भैया यह दोबारा खड़ा कब होगा? तो मैंने कहा कि इसको अपने मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसो.. अभी खड़ा हो जाएगा.

तो उसने लंड को ऐसा चूसा कि लंड एकदम से दो मिनट में ही खड़ा हो गया उसने बहुत मस्त चूसा था. उसकी इस मस्त स्टाईल से मुझे पहली बार बहुत मज़ा आया और अब दोबारा से मेरा खड़ा हुआ था और उसने बहुत देर तक चूसा.. लेकिन इस बार झड़ा नहीं. तो मैंने उससे कहा कि तेरे बूब्स के बीच में दबाकर प्लीज़ मेरे लंड की मालिश कर दे. तो उसने वैसा ही किया और मैंने बहुत धक्के मारे और उसको भी बहुत मज़ा आ रहा था.. वो बोली कि भैया अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा.. प्लीज़ इसको मेरी प्यासी चूत में डालो ना. तो मैंने कहा कि मुझसे भी कंट्रोल कहाँ हो रहा है? फिर मैंने बोला कि क्या तू वर्जिन है? और खून तो नहीं निकलेगा ना? तो वो बोली कि भैया मेरी सील तो पहले ही टूट गयी थी.. मेरा एक बार साईकल पर एक्सिडेंट हो गया था और बहुत खून निकल गया.. लेकिन आज नहीं निकलेगा. मैंने फिर से उसकी गीली चूत को चूसा और उसको बोला कि तू ऊपर आकर इसको अपनी चूत में डाल ले. वो मान गयी और जल्दी से मेरे ऊपर आ गयी.. लेकिन पहली बार उसकी टाईट चूत में लंड को डालने में मुझे थोड़ी प्रोब्लम हुई और उसको दर्द भी हुआ.

फिर मैंने नीचे से एक ज़ोर का धक्का लगाकर लंड को डाल दिया और उसके मुहं में उंगली डाल दी ताकि वो चीखे चिल्लाए नहीं.. उसकी चूत अंदर से बहुत गरम थी. एक बार लंड के पूरा अंदर घुसने के बाद वो मेरी छाती पर लेट गयी और मेरी छाती के बालों पर किस करने लगी और धीरे धीरे हम धक्के मारने लगे और वो भी बहुत तेज़ तेज़ धक्के देने लगी और अब उसको दर्द नहीं हो रहा था.. लेकिन बहुत मज़ा आ रहा था और में उसके बूब्स दबा रहा था.. कभी धक्के रोककर उसके बूब्स चूस भी रहा था, कभी उसकी पीठ पर हाथ से मालिश कर रहा था. उस पल को में बहुत अच्छे से पूरा इन्जॉय कर रहा था और वो भी कर रही थी. फिर उसने बोला कि भैया अब पोज़िशन चेंज करते है आप ऊपर से आओ.. तो मैंने उसकी बात मान ली और उसके ऊपर आकर धक्के मारने लगा और हम दोनों बहुत मज़े कर रहे थे.. लेकिन पसीने से गीले हो गए थे और उसके पसीने की स्मेल भी अच्छी लग रही थी.

तभी थोड़ी देर में मेरी चुदाई की स्पीड बढ़ गयी और हम दोनों एक साथ में झड़ गए.. उसने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून से निशान बना दिए.. मुझे दर्द तो हुआ.. लेकिन बहुत अच्छा भी लगा और फिर मैंने भी बहुत ज़ोर से उसके बूब्स पर काट लिया. उसकी चीख निकल गयी.. लेकिन उसको भी मज़ा आया. मैंने फिर से लंड को चुसवाकर खड़ा किया और उसको डॉगी स्टाईल में चोदा और फिर 69 पोज़िशन में बहुत देर तक उसने मेरा लंड और मैंने उसकी चूत चाटी.. बहुत मज़ा आया. अब तक हम दोनों बहुत थक गये थे.. लेकिन सेक्स की इच्छा हो रही थी और फिर भी सेक्स किए जा रहे थे और झड़े जा रहे थे.. क्योंकि आज के बाद पता नहीं कब ऐसा मौका मिले और आज ही सारी पोज़िशन ट्राई करनी थी.. उसकी गांड भी बहुत अच्छी थी.

फिर मैंने कहा कि क्यों अब गांड में डाले? तो वो मान गयी और बहुत ट्राई किया.. लेकिन में लंड को उसकी गांड में नहीं डाल सका.. वो बहुत टाईट थी. फिर मैंने तेल से बहुत मालिश की उंगलियां डालकर उसका छेद को ढीला किया और फिर उसने मेरे लंड पर तेल से मालिश की और फिर ट्राई किया तो में उसकी गांड में लंड को घुसा पाया और गांड में लंड को घुसाने का अलग ही मज़ा है. हमे सेक्स करते हुए लगातार 4 घंटे हो गये थे.. लेकिन मेरा लंड अभी भी फिर से खड़ा था और उसके जिस्म की आग भी कम नहीं हुई थी.

फिर हम साथ में नहाने गये और नहाते हुए भी मस्त सेक्स किया. उसकी गांड में साबुन लगाकर भी गांड मारी.. उसने मेरा लंड मस्ती से बहुत चूसा, कुर्सी पर, बेड पर, सोफे पर, बाथरूम में, जमीन पर, किचन में हर जगह सेक्स किया.. 11 अगस्त तो सेक्स दिन घोषित कर देना चाहिए और पता नहीं अगला मौका कब मिलता? और हमने घर पर कोई नहीं होने का बहुत फायदा उठाया. में कभी कभी तो लंड उसकी चूत में घुसाकर ही सो जाता हूँ और एकदम नंगे सोते है और रात को ही हमे मौका मिलता है और बहुत जोरदार सेक्स करते है ..

Meri Mala Bhabhi Ki Chudai 3

Hindi Sex Story Antarvasna Indian Sex Stories Chudai Kamukta Desi Sex O sirf nighty pehan ke hi hall me aa gayee, jab unki aur meri najar ek huwi to unhone ek bahot hi sexy smile di, lekin uss smile me thoda sharmilapan bhi tha. Aur chupchap bina kuch kahe o sofe ke pass aur table ke pass kuthc dhundane lagi. Maine pucha, “kya dhund rahi ho Bhabhi?” “Kutch nahi Raj, mere kuthc kapade they,” “Lekin kapade to app le gayee na” “ha lekin muje dusre kapade chahiye they” Unhe kuthc mila nahi to o kitchen ki taraf jane lagi, tabhi sofe ke chair ke pass unke pair me kuthc chubha.Unhone ek karaha li “AAhaaaaaaaaaaaaa” “Kya huwa bhabhi” “Kutch nahi, shahed kutch chubha”, fir unhone niche se bra uthayee, unke haat me bra latak rahi thi aur mai dekh ke hasane laga, fir unhone bhi muskura diya aur bra ko piche chupa liya, maine kaha, Bhabhi mill gaya na kapada, fir maine unke jango ke bitch dekh ke kaha “lagata hai ek kapada baki hai milne ka?” uspe o unki hassi ruk nahi payee aur o kitchen me jane lagi, mai bedroom ki taraf bada, aur hat me unki panty le li, maine apne ankho ki kone se dekha ki bhabhi kitchen ki door pe hi khadi ho ke muje dekh rahi hai. Maine aise show kiya ki muje pata nahi hai ki o dekh rahi hai, fir maine unki panty ko apne nose se laga liya aur khusboo ka maja lene laga, unka mu to khula ka khula rahe gaya, yeh sub dekh ke, unhone yeh sub expect nahi kiya tha. Unki panty ko halki si lady ke virye ki khusboo ke sath sath washing powder ki khuboo aa rahi thi, Kyo ki panty dhuli huwi thi iss liye unki jawani ki khusbhoo ka pura maja to nahi aya. Lekin muje bahot accha laga. Bhabhi ne kitchen se awaj lagayee… “Rajjjjjjjjj… kya kar rahe ho…” “Kutch nahi bhabhi…. Bus app ka ek aur kapad milgaya…. ” Aur mai apne hato me unki panty le ke kitchen me chalagaya. Unhone dekh ke muskura diya aur kaha, bade naughty ho gaye ho deverji….. uhone deverji pe jo sexy undaj me jore diya to mere to hosh hi udd gaye.maine kaha bhabhi app muje Raj ki bajaye issi style me deverji kaha karo jaisa ki abhi kaha. O mere iss bat pe hunsane lagi. Boli “Thik hai agar tumhe pasand hai to yehi kahungi lekin muje Raj jada pasand hai.” “Maine kaha kya pasasand hai bhabhi apko???” vo mere bat ka matalab samaj gayee, aur kaha ki “Muje Raj kahena pasand hai, samje buddhu.” Panty abhi bhi mere hat me thi aur abb maine unko dhyan se dekha upper se niche tak, O to mano sex ki devi lag rahi thi, gol chehar, khule ball, moti garden, chauda sina, badi badi takatwar bhujaye, pahado jaise side tane huwe bade bade boobs, unke bitch yek gaheri kahyee. Bahot hi mulayem pet (unka pet bahar nahi nikala hone ke karan o moti ki bajaye cahude badan wali ek sexy aurat lagati thi) uske upper bade coat ke boton jaise unkhi sexy nabhi, nabhi se hote huwe unke sexy chut ki taraf ek patle balo ki line gayee huwi thi, unke chut pe halke halke ball they, mano ki 1 mahine pahele unhone chut saff ki hogi, Unki kamar bahot badi thi kamse kam 32 ki thi. Aur hips to bas pucho mat, bahot hi bade aur akarshak they,unki tange bhi bahot chikani thi, bilkul kele ke khambe jaisi chikani. Unki chut ka clour pink tha, aur chut ke cunt amm aurato se jada bade they, lekin bichwla chhed thoda chota lag raha tha, bich me jo dana tha o bhaot hi lal tha, usko dekh ke aise lag raha tha ki bhabhi roj usko apne nakhuno se kuredati hogi. Unhone dekha ki mai unke sare badan ko ghur raha hu, fir unhone apne app ko dekha aur tab unko khayal aya ki aare abbi bhi unhone sirf nighty hi paheni hai. Unhone zhat se mere hato se panty chin li aur kitchen table pe padi huwi bra uthayee aur bedroom ki taraf chal padi, tabhi maine kaha, “Bhabhi abb kya fayeda”,

अनामिका को चोदा बंगले में

अनामिका को चोदा बंगले में

antarvsna Kamukta hindi sex indian sex chudai हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम अशोक है और में आज आप सभी को अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ. जिसमे मैंने एक लड़की को कैसे चोदा.. और उसको फिर मेरे लंड की भूखी बनाया? दोस्तों यह कहानी एक खेल के मैदान से शुरू होती है और मेरे घर से कुछ दूरी पर ही एक खेल का मैदान था.. और हर शाम की वॉक के लिए में वहां जाता था.. और बस यहीं से मेरी कहानी शुरू होती हैं और अब में सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ और यह किस्सा उस वक़्त का है जब में कॉलेज के 3rd साल में था.. और मुझे अपने शरीर को वी आकार देना था. तो में हमेशा सुबह को 6 या 7 बजे जिम जाता था.. और शाम को वॉक के लिए में उस मैदान में जाता था. इसी दौरान मुझे महसूस हुआ कि दो प्यारी सी मदहोश कर देने वाली सुंदर आखें मुझे हमेशा घूरती रहती हैं.. और जब में मैदान में था तो यह बात सोचकर मेरे शरीर पर एक बिजली सी दौड़ गई और मन ही मन में बहुत खुश भी हो रहा था.. और मैंने मन ही मन में ठान लिया.. कि मुझे कैसे भी करके इस प्यारी सी आखों वाली के साथ जान पहचान करनी होगी.

फिर में एक दिन मैदान में शाम को घूम रहा था.. तो मैंने देखा कि मेरे पीछे पीछे वो लड़की भी आ रही थी.. और में जानबूझ कर थोड़ा धीरे धीरे चलने लगा और वो लड़की मेरे सामने पहुंच गई. तो मैंने इस मौके का फ़ायदा उठाया और थोड़ा हिम्मत करके उसको हाय बोला.. तो वो भी हैल्लो बोली. फिर मेरी हिम्मत बड़ गई और में उसके साथ मे चलने लगा.. और फिर मैंने उसे अपना नाम बताया तो उसने भी मुझे अपना नाम अनामिका बताया.. क्या बताऊ दोस्तों? वो उसके नाम जैसी ही सुंदर थी.. और करीब से उसके फिगर को देखने के बाद मेरे लंड से दो बूँद पानी निकल गया.. बिल्कुल चिकना बदन, उभरी हुई चूचियाँ.. क्या मस्त फिगर था उसका? एकदम लाल एप्पल के जैसे गाल, अंगूर जैसे हाथ, उसे देखने से ही किसी की भी सांसे अटक जाऐ.. और उसके बदन के रंग के बारे में क्या बताऊँ? जैसे दूध में हल्दी पाउडर मिक्स किया हो. फिर हम लोगों ने थोड़ी देर बात की.. और मैंने उसका मोबाईल नंबर लिया और में चला आया.

फिर उसके बाद में दूसरे दिन के लिए बहुत ही उत्सुकता के साथ सोचने लगा.. और मुझे रात भर नींद नहीं आई और में उसके बारे में सोच सोचकर तीन बार मुठ मार चुका था.. और मुझे बार बार उसके बूब्स की याद आ रही थी.. जब वो मेरे साथ चल रही थी तो उसके बूब्स बार बार ऊपर नीचे हो रहे थे.. और यह बात सोचकर मेरा लंड बार बार खड़ा हो रहा था. फिर उसके अगले दिन हम लोग फिर एक साथ शाम को घूमे और बहुत सारी बातें की. फिर उसी रात को करीब 11 बजे मुझे उसका मिस्ड कॉल मिला.. तो में बहुत खुश हो गया और मुझे पूरा विश्वास हो गया कि आग दोनों तरफ़ बराबर लगी हैं.. और मैंने उसे फोन किया तो एक ही रिंग में उसने फोन उठा लिया.. और हम लोगो ने करीब 3/4 घंटे तक बातें की.. और बातों ही बातों में मुझे पता चला कि वो भी मेरे ही कॉलेज में पहले साल में हैं और रोज शाम को कॉलेज के बाद कंप्यूटर स्कूल के लिए जाती हैं. तो मैंने उससे कहा.. कि में तुम्हे कल तुम्हारे कंप्यूटर स्कूल के टाईम पर मिलूँगा..

और वो भी मिलने को तैयार हो गई. फिर हम लोगो ने फोन बंद किया और सो गये. फिर उसके अगले दिन मैंने उसकी कंप्यूटर स्कूल में जाने से पहले उसको फोन किया.. लेकिन उसने कोई भी जवाब नहीं दिया. तो में थोड़ा सोचने पर मजबूर हो गया.. और फिर उसके आधे घंटे के बाद मुझे उसका मिस्ड कॉल मिला. तो मैंने तुरंत कॉल कर दिया और उससे पूछा.. कि तुम कहाँ हो? तो वो बोली कि में स्कूल के लिए निकल रही हूँ.. तो मैंने पूछा कि कहाँ पर मिलोगी? फिर उसने मुझे जगह का नाम बताया और साथ में टाईम भी. फिर में भी अपनी बाईक लेकर घर से निकल गया.. और कंप्यूटर स्कूल पहुंचने से थोड़ी दूरी पर मैंने उसे अपनी बाईक पर बिठाया और हमारे घर के एक पार्क में लेकर चला गया.. और वहाँ पर हम दोनों ने ढेर सारी बातें करी और फिर कुछ घंटे उसके साथ गुजारने के बाद अपने घर पर चला गया. फिर उस दिन के बाद हम दोनों हर रोज रात में बातें करने लगे.

फिर एक दिन मैंने उससे रात को फोन पर पूछा कि तुम क्या पहन कर सोई हुई हो? तो वो शरमा गई और बोली कि में नहीं बताउंगी.. लेकिन में उससे बहुत ज़िद करने लगा. तो वो बोली कि में बिना डोरी का टॉप और गाऊन पहने हुई हूँ. तो फिर मैंने पूछा कि और क्या पहना है? तो अनामिका बोली.. कि ब्रा और पेंटी.. इधर मेरा लंड अपने पूरे जोश में आ गया और में मुठ मारने लगा.. और धीरे धीरे मैंने उससे सेक्स की बहुत सारी बातें करना शुरू किया और वो भी बड़े मज़े से मुझसे सेक्स की बातें करती थी. फिर एक दिन मैंने कहा कि मुझे एक किस दो.. तभी वो शरमा गई. फिर मैंने उसे दो तीन बार बोला.. तो उसने धीरे से एक किस दे दिया. फिर वो बोली कि मुझे भी दो.. तो मैंने पूछा कि कौन से अंग पर चाहिये? वो एकदम चुप हो गई.. और मेरे दो तीन बार पूछने के बाद बोली कि तुम्हारी जहाँ पर मर्ज़ी हो दे दो. फिर में उसे एक एक अंग पर फोन से ही किस करने लगा और उसके मुहं से आहह उुउउहह ऊफ्फ की आवाजे निकलने लगी.. जिसे सुनकर मेरे लंड से पानी निकल गया.

तो मैंने उससे बोला कि में अगर तुम्हारे बूब्स चूसू तो.. क्या तुम को बुरा तो नहीं लगेगा? तो उसने कहा कि में पागल हो जाऊंगी.. प्लीज़ मुझे और मत तरसाओ. तो मैंने कहा कि ठीक है.. में कल तुमसे मिलूँगा और तुम्हारे बूब्स पिऊंगा. फिर हम लोग सो गये और दूसरे दिन में उसको पहले की जगह से हटकर दूसरी जगह पर लेकर गया. उस जगह पर भीड़भाड़ बहुत ही कम रहती है.. और कभी भी उस रोड़ पर इघर उधर से कोई भी गाड़ी नहीं जाती थी.. इसलिए किसी ने हमे देखा भी नहीं.. और रोड एकदम खाली देखकर अनामिका मेरी पीठ से एकदम चिपक कर बैठ गई और मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था. फिर उस रोड़ पर थोड़ा दूर जाने के बाद एक सुनसान सी जगह पर मैंने अपनी बाईक को रोक दिया और मैंने उसको अपनी तरफ खीचकर बाहों में ले लिया.. और धीरे से उसको किस किया. तो शर्म से उसने अपनी दोनों आखों को बंद कर लिया और मैंने उसकी टी-शर्ट को थोड़ा ऊपर उठाया.. और किस के साथ साथ में उसके बूब्स को भी दबाने लगा और उसके निप्पल को भी रगड़ रहा था.

तभी थोड़ी ही देर में वो मस्ती में आ गयी और मैंने उसकी टी-शर्ट को पूरा उतार दिया. उसने काली रंग की ब्रा पहनी हुई थी. और ऐसा लग रहा था.. कि वो कभी भी बाहर आ सकते है और फिर मैंने उन पर थोड़ा तरस खाया और उसकी ब्रा के हुक खोल दिए.. और अब वो दोनों बूब्स ब्रा की क़ैद से आज़ाद होकर ऐसे उछलने लगे जैसे उनकी मुराद पूरी हो गई. तो मैंने अनामिका के गोल गोल बूब्स को पहले तो अपनी जीभ से बहुत देर तक चाटा.. फिर उसको किस किया.. एक बूब्स पर किस करता था तो दूसरे को हाथ से मसलता जा रहा था. धीरे धीरे अनामिका को मस्ती आने लगी और वो अपने मुहं से अजीब अजीब सी आवाजे निकालने लगी.. में उसकी आवाज़ सुनकर और तेज़ी से उसके बूब्स को मसलने लगा और मैंने उसके निप्पल को अपने मुहं में लिया और ज़ोर जोर से चूसने लगा..

और बीच बीच में अपनी जीभ से उसके निप्पल को में रगड़ता भी जा रहा था.. वो इतनी पागल और मस्ती में आ गयी कि मुझे खुद से चिपकाने लगी. मैंने करीब आधे घंटे तक उसकी चूचियों को खड़े खड़े चूसा.. तभी अचानक से एक गाड़ी की आवाज आने लगी तो हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहन लिए और वापस उसके कंप्यूटर स्कूल आ गये क्योंकि में नहीं चाहता था कि कोई हम दोनों पर शक करे. फिर उसी रात मैंने उससे फोन पर खूब सेक्स भरी बातें की.. तो वो बोली कि जानू मेरे नीचे कुछ हो रहा है और बहुत कुछ अजीब सा लग रहा है. तो मैंने कहा कि क्या अजीब सा? तो उसने कहा कि मुझे पता नहीं.. लेकिन मेरी चूत बहुत गीली हो गयी है.

तभी मैंने कहा कि तुम्हारी चूत को मेरा लंड ही ठीक कर सकता है.. लेकिन इसके लिए तुमको दो दिन के लिए इंतजार करना होगा.. और अब मेरे पास में दो दिन थे और मुझे ऐसी कोई एक जगह ढूढ़नी होगी.. जहाँ पर में अनामिका को ले जाकर चोद सकूँ.. तो मैंने तीन चार अपने दोस्तों को फोन किया.. जो कि गार्डन में मैनेजर की नौकरी करते थे.. क्योंकि गार्डन के बंगले पर कोई आता जाता नहीं था और गार्डन के बहुत बंगले बहुत सुनसान जगह पर हुआ करते हैं और बहुत सुरक्षित भी था और किस्मत से मेरा एक दोस्त अगले दिन कुछ दिनों की छुट्टियों पर बाहर जाने वाला था.. और उस बीच उसका बंगला एकदम खाली रहेगा. तो मैंने उसको सारी बात बता दी.. तो मेरा दोस्त बोला कि ठीक हैं.. में तो अपना बंगला तुमको दे दूँगा.. लेकिन मुझे भी मज़ा लेना हैं. तो मैंने बोला ठीक हैं भाई हो जाएगा.. लेकिन पहले मुझे तो मज़ा लेने दे. फिर वो तैयार हो गया और अगले दिन में उसको अपने दोस्त के बंगले पर ले गया और रात को मैंने अनामिका के साथ फोन पर बात की.. और उसे अगले दिन का प्लान बताया तो.. वो भी तैयार हो गई मज़ा लूटने के लिए.

फिर अगले दिन मैंने उसे कंप्यूटर स्कूल पहुंचने से थोड़ा पहले ही अपनी बाईक पर बिठा लिया और फिर उसी बंगले पर ले गया और आज अनामिका की गांड एकदम सेक्सी लग रही थी. टाईट टी-शर्ट और वो स्किन टाईट जीन्स पहने हुई थी.. जिससे उसकी गांड एकदम उभरी हुई दिख रही थी. जिसको देखते ही मेरा लंड पेंट के अंदर ही फड़फड़ा रहा था.. फिर बंगले पर पहुंचकर अंदर से दरवाजा लॉक करते ही मैंने उसे किस करना चालू कर दिया और साथ में सारे कपड़े भी उतारने लगा.. और जब वो पूरी नंगी हो गयी तब मैंने उसे ऊपर से नीचे तक बहुत चूमा चाटा और उसकी चूचियों को दबा रहा था. फिर मैंने उसको बेड पर लेटा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा और अब वो भी पूरी मस्ती में आ गयी.

फिर मैंने उससे कहा कि अब तुम मेरे लंड को चाटो.. पहले तो वो मना कर रही थी.. लेकिन थोड़ा मेरे समझाने के बाद वो मान गई और मेरे लंड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी.. में मस्ती में पागल हो गया और थोड़ी ही देर में मेरा लंड फुल साईज में आ गया.. और वो मेरे लंड का साईज देखकर डर गई और चूसने के लिए मना करने लगी. तो मैंने बोला कि कुछ नहीं होगा.. और में तुम्हे धीरे से चोदूँगा और में उसको बेड पर लेटाकर उसके बूब्स को दबाने लगा और धीरे धीरे में उसकी चूत को भी चाटने लगा और मस्ती में आ गया. फिर में उसके ऊपर आ गया और उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ना चालू कर दिया. अनामिका सिसकियाँ लेने लगी और बोली कि जानू क्यों तड़पा रहे हो.. जल्दी से अंदर डालो ना इसे. तो मैंने कहा कि ठीक है.. फिर मैंने धीरे से एक धक्का मारा तो मेरा लंड एक इंच लंड अंदर चला गया और वो चिल्लाने लगी और मुझसे लिपट गई..

लेकिन में रूका नहीं और एक झटका मारा तो.. मेरा आधा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया. तो वो रोने लगी और बोली कि मुझे नहीं करवाना है.. प्लीज बाहर निकालो इसे.. मुझे छोड़ दो मुझे बहुत दर्द हो रहा है. लेकिन मैंने उसकी एक ना सुनी और ज़ोर से फिर एक बार धक्का लगाया और मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर डाल दिया.. और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा और साथ में उसके बूब्स को पीता रहा. पूरा रूम आहा उह्ह्ह अह्ह्ह की आवाज़ से गूंजने लगा. करीब 15 मिनट तक में उसे चोदता रहा.. इस बीच वो 3 बार झड़ी.. लेकिन में धक्के पर धक्के लगाता रहा.. आख़िर में मेरी भी मंज़िल आ गयी और में भी झड़ गया.

तभी थोड़ी देर एक दूसरे के साथ हम ऐसे ही चिपके पड़े रहे.. थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर से मस्ती में आ गया. फिर मैंने उसके दोनों पैर मेरे कंधे पर उठाए और लंड उसकी चूत में डाल दिया.. वो फिर से रोने लगी.. और मैंने अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू किया. थोड़ी देर बाद वो भी मस्ती में आ गई और मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी. करीब 1 घंटे चोदने के बाद में झड़ गया. दोस्तों उस दिन मैंने उसे 3 घंटे में करीब 8 बार चोदा और में तो पूरा थक गया था फिर मैंने थोड़ी देर आराम करने के बाद उसे कंप्यूटर स्कूल के सामने छोड़ दिया और में अपने घर पर आ गया.

दोस्तों.. हमारी चुदाई का दौर इसी तरह चलता रहा और मैंने उसे बहुत बार चोदा. कभी उसके घर पर कभी मेरे घर पर.. कभी इधर, उधर जब भी जहाँ भी मौका मिलता में उसे चोदता और वो बहुत खुश होकर चुदवाती थी.

अपनी चाची तैयार हो गई

प्रेषक : जावेद खान

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम जावेद खान है और मेरी उम्र 24 साल है। दोस्तों मेरी पूरी लाईफ सेक्स से भरी हुई है और जब मैंने पहली बार कामुकता डॉट कॉम को देखा तो मुझे इसकी सभी कहानियाँ बहुत अच्छी लगी और मैंने सोचा कि अपनी कहानी भी आप सब दोस्तों के साथ शेयर करूँ। यह कहानी मेरी चाची और मेरी है.. मेरी चाची का नाम साईमा है और उनकी उम्र 33 साल, उनका रंग बिल्कुल गोरा है, उनकी हाईट 5.3 होगी, मोटे मोटे होंठ, घने काले बाल, मस्त चाल.. लेकिन सबसे ज़बरदस्त उनके बूब्स और चूतड़ बहुत बड़े बड़े है। उनके 3 बच्चे है और उनके पति मलेशिया में रहते है। दोस्तों मैंने जवानी में क़दम रखते ही उनके बारे में सोचना शुरू कर दिया कि किस तरह में उनके साथ सेक्स कर सकूँ.. लेकिन मुझे कोई भी तरीक़ा समझ में नहीं आया। वो जब भी हमारे घर आती या हम उनसे मिलने जाते तो में जानबूझ कर उनसे गले मिलता और उनकी कमर पर हाथ फेरता.. लेकिन वो मुस्कुराकर इस बारे में ज्यादा नहीं सोचती.. क्योंकि शायद वो मुझे बच्चा समझती थी।

पिछले साल मेरे मम्मी और पापा को गावं में किसी रिश्तेदार की म्रत्यु की वजह से गावं जाना पड़ा तो उन्होंने चाची को जो कि अपने घर पर रहती है हमारे घर बुला लिया ताकि वो यहाँ पर रहकर मुझे खाना तैयार करके दे सके। फिर में जब उन्हे घर ला रहा था तो पूरे रास्ते में यही सोच रहा था कि यह बहुत अच्छा मौका है और इसका फ़ायदा उठाया जाए। फिर में बाजार जाकर कुछ ज़रूरी सामान खरीदकर घर लाया और फिर अपने एक दोस्त को फोन किया और अपनी समस्या उसे बता दी। तो उसने मुझसे कहा कि किसी भी तरह अपनी चाची को अपना तना हुआ लंड दिखा दो.. यह एक आज़माया हुआ तरीक़ा है इससे 90% औरतें आकर्षित हो जाती है और अब मैंने सोचना शुरू किया कि कैसे उन्हे अपना लंड दिखा सकूँ?

फिर उस रात को कोई एसी बात नहीं हुई और मैंने, चाची और उनके 3 बच्चो ने खाना खाया और में अपने रूम में आकर सो गया और चाची से कहा कि मुझे सुबह 10 बजे जगा देना और फिर उस रात को मैंने प्लान बना लिया था कि उन्हे कैसे चोदना है। फिर अगली सुबह उनके तीनो बच्चे स्कूल गए हुए थे.. वो अपने स्कूल बेग अपने साथ में लाए थे और पेपर की वजह से मेरी छुट्टी थी इसलिए में बड़े आराम से सोता रहा और 9:45 पर में उठ गया और मैंने रात को सोते वक़्त अपनी शर्ट तो वैसे उतार ही दी थी और अब अपना ट्राउज़र भी उतार दिया और अपनी आखें बंद करके चाची के आने का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार करने लगा। फिर मैंने अपने लंड को हल्का हल्का हिलाया जिससे वो खड़ा हो जाए.. इस दौरान में अपनी प्यारी चाची के ख्याल दिमाग में लाता रहा कुछ वक़्त बाद मेरा लंड पूरी तरह से तनकर खड़ा हो गया।

तो इतने में 10 बज गए और 2 मिनट बाद मुझे मेरे रूम की तरफ आते हुए चाची की चप्पल की आवाज़ आई और मैंने तुरंत अपनी आखें ठीक से बंद की और ठीक से तैयार हो गया और मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था और में सोच रहा था कि पता नहीं अब क्या होने वाला है। फिर चाची ने जैसे ही दरवाज़ा खोला तो उनके मुहं से निकला जावेद बेटा 10 बज गए है उठ जा और उन्होंने मेरे ऊपर से चादर को हटा दिया। अब में सिर्फ उनकी आवाज सुन सकता था और में उनको देख नहीं सका.. लेकिन उनका मुहं खुला का खुला रह गया होगा.. इसके बाद उन्होंने कुछ नहीं कहा और 2-3 मिनट तक एकदम चुपचाप खड़ी रही.. शायद वो मेरे तने हुए लंड को घूर घूरकर देख रही थी। उनकी नजरें मेरे तने हुए लंड से हटने को तैयार नहीं थी। उनके पति पिछले 3 साल से बाहर कहीं पर नौकरी कर रहे थे और उनको यहाँ पर आए हुए भी बहुत समय हो चुका था। अब उन्होंने मेरे पास में बैठकर मेरे हाथ को पकड़कर हिलाया और कहा कि बेटा उठ जाओ 10 बज गए है। तो मैंने धीरे धीरे अपनी आखें खोली और ऐसा नाटक किया कि जैसे मुझे कुछ पता ही नहीं है कि मेरे शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं है। तभी अचानक मैंने नीचे अपने खड़े हुए लंड की तरफ देखा और उनसे कहा कि सॉरी चाची मेरी पेंट कहाँ गई? और वो मैंने जानबूझ कर बाथरूम में लटका दी थी। फिर चाची मेरे लंड की तरफ देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी और वो थोड़ी थोड़ी शरमा भी रही थी।

तो मैंने उठकर बाथरूम में जाने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे रोक लिया और अपने पास बैठा लिया और मुझसे पूछा कि तुम्हारे कपड़े कहाँ पर है? तो मैंने कहा कि चाची रात को मुझे बहुत गर्मी लग रही थी और फिर में रात को नहाने के बाद ऐसे ही सो गया। तो चाची ने कहा कि ड्रामा मत करो मुझे पता है इस उम्र में सभी लड़कों को औरत की जरूरत होती है और हाँ उन्हे गर्मी तो बहुत लगती ही है.. लेकिन तुम्हारा यह लंड बहुत बड़ा है तुम्हारी तो जल्दी से शादी करा देनी चाहिए। फिर में गर्दन झुकाकर एकदम चुपचाप हो कर बैठा रहा और उनकी बातें सुनने लगा। तो उन्होंने कहा कि मेरी तरफ देखो और मुझसे पूछा कि क्या तुम्हे अब तक किसी लड़की के साथ सेक्स करने का मौका नहीं मिला?

तो मैंने अपना सर हिलाकर कहा कि नहीं.. मुझे आज तक कोई भी मौका नहीं मिला और आज सुबह भी मेरा दिल और दिमाग सेक्स के लिए बहुत ज़ोर से तडप रहा था और शायद इसलिए मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया। तो उन्होंने बड़े प्यार से मेरी तरफ देखते हुए कहा कि अच्छा ठीक है.. में तुम्हे एक बार यह सुंदर मौका दे सकती हूँ.. लेकिन तुम्हे मुझसे वादा करना होगा कि कभी भी किसी को इस बारे में कुछ भी नहीं बताओगे? तो मैंने कहा कि ठीक है में आपसे पक्का वादा करता हूँ कि कभी किसी को नहीं बताऊंगा। तभी मैंने देखा कि यह बात सुनकर उनकी आखों में एक अजीब सी चमक आ गई और मेरा दिल भी खुशी से ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर उन्होंने धीरे धीरे अपना एक हाथ आगे बडाते हुए मेरा तना हुआ लंड मज़बूती से पकड़ लिया और धीरे से उसे सहलाने लगी और दूसरे हाथ से मेरे लंड के नीचे की गोलियों को उठाकर देखा और उनसे खेलने लगी। तो मैंने उनसे कहा कि प्लीज चाची इसे अपने मुहं में लेकर चूसो.. लेकिन वो कहने लगी कि नहीं में यह गंदा काम नहीं करूंगी। फिर मेरे बहुत देर समझाने के बाद उन्होंने मेरे लंड को पहले धीरे धीरे डरते हुए अपनी जीभ से चाटा और फिर उसका टोपा अपने मुहं में ले लिया.. शायद अब उनका डर जोश में बदल चुका था और फिर वो लंड बहुत मज़े से चूसने लगी। फिर 5 मिनट के बाद मैंने उनसे कहा कि आप भी अपने कपड़े उतार दें.. तो उन्होंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और पूरी नंगी हो गई। में तो उनके बड़े बड़े बूब्स, गदराया हुआ बदन, पतली कमर, बड़ी सुंदर कामुक चूत और गांड को देखकर चकित हो गया। उनकी चूत एकदम गोरी बिना बालों वाली थी और वो बहुत दिनों से बिना चुदी हुई दिख रही थी और फिर मैंने उन्हे जल्दी से बेड पर लेटा दिया और उनके पूरे जिस्म को चूमने चाटने लगा.. उनके बूब्स को चाटने और उन्हे चूसने लगा। बूब्स को चूमते चूमते में उनकी चूत तक आ गया और उसको सूंघने लगा। उसके कुछ देर बाद मैंने उनके दोनों पैरों को फैलाकर उसमे अपनी जीभ को अंदर तक डालकर चाटना शुरू किया। तो चाची में मुहं से चीख निकल गई और वो सिसकियाँ लेने लगी और वो मेरे सर को अपनी चूत पर दबाकर.. अपने चूतड़ को उठा उठाकर चूत चटवा रही थी.. लेकिन मुझे लगा कि शायद यह सब उनके साथ पहली बार हो रहा था। फिर 10 मिनट चूत चाटने के बाद मैंने उनसे कहा कि अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता। तो उन्होंने अपने दोनों पैरों को पूरी तरह से खोल दिया और अपने चूतड़ को थोड़ा सा जमीन से ऊपर उठा दिया और अब लंड को चूत में लेने के लिए एकदम तैयार हो गई। तो मैंने अपने लंड को एक हाथ से पकड़ा और उनकी चूत पर रखा और धीरे से एक धक्का दिया.. लेकिन लंड तो पहले से ही गीली चूत में फिसलकर अंदर घुस गया.. तो लंड के अंदर जाते ही मुझे एक अजीब सा अहसास होने लगा और मैंने धीरे धीरे झटके मारने शुरू किए और चाची भी मज़े की वजह से सिसकियाँ लेती रही और कहती रही कि हाँ और ज़ोर से चोदो मुझे हाँ और चोदो मुझे.. आज मेरी चूत की प्यास बुझा दो और ज़ोर से।

तो मैंने भी जोश में आकर झटके और तेज़ कर दिए और क़रीब 10-15 मिनट के बाद में उनकी चूत के अंदर ही झड़ गया.. लेकिन उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा और में 3-4 मिनट तक उनके ऊपर ही लेटा रहा और वो मेरी कमर पर, मेरे पूरे शरीर पर हाथ घुमाती रही। फिर उसके बाद मैंने उन्हे होंठो पर किस किया और उठ गया और फिर हम दोनों एक साथ बाथरूम में जाकर नहाए और नहाने के बाद में फिर से गरम हो गया था और मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया.. लेकिन इस बार मैंने उन्हे उल्टा लेटाया और उनके कूल्हों को बहुत जी भरकर प्यार किया और चूमा। फिर मैंने उनकी गांड को थोड़ा सा खोला तो उनकी गांड का छेद देखकर मेरी नियत खराब हो गई.. मैंने अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगाया और थोड़ा सा उनकी गांड पर भी। फिर पहले तो वो गांड में लंड लेने से मना करती रही और कहती रही कि नहीं मैंने आज तक कभी भी गांड में लंड नहीं लिया और मुझे बहुत दर्द होगा.. लेकिन मैंने बहुत कहकर उसे तैयार कर ही लिया और अपना पूरा लंड उनकी गांड में उनको घोड़ी बना कर घुसा दिया। तो वो बहुत ज़ोर से चिल्लती रही.. लेकिन में मज़े से पागल हो गया था और जब तक उनकी गांड के अंदर झड़ ना गया तब तक उनकी गांड में ज़ोर ज़ोर से धक्के मारता रहा।

फिर कुछ देर बाद उन्हे भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी.. उन्होंने खुश होकर मेरी चुदाई के तरीके की बहुत तारीफ की और अब मुझे भी बहुत खुशी थी और मुझे अब झड़ने का एहसास हो रहा था और में उनकी गांड में ही झड़ गया और अगले दो दिन तक हम अलग अलग तरह से लगातार सेक्स करते रहे। उसके बाद भी में अब तक जब भी मौका मिलता है उनके साथ सेक्स करता हूँ और वो मेरी चुदाई से बहुत खुश है ।।

धन्यवाद …

खूबसूरत बहन

प्रेषक : मयंक ..

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम मयंक है और में हरियाणा का रहने वाला हूँ.. में बहुत समय से कामुकता डॉट कॉम पर कहानियाँ पढ़ रहा हूँ और ज्यादातर सेक्स के तरीके पर ज्यादा ज़ोर देता हूँ और बहुत मज़े भी करता हूँ.. लेकिन में जब भी कहानी पढ़ता हूँ तो मेरा भी मन करता है कि में भी कभी अपनी बहिन के साथ सेक्स करूं और यह घटना अभी कुछ दिन पहले की है.. लेकिन दोस्तों यह मेरी पहली कहानी है तो अगर मुझसे कोई भी गलती हुई हो तो मुझे माफ़ करना। दोस्तों में कुछ अपने बारे में भी बता देता हूँ.. में एक कॉलेज से बीटेक के तीसरे साल का स्टूडेंट हूँ और मेरी उम्र 20 साल है.. में दिखने में ठीक ठाक हूँ और मेरे लंड का साईज 6.5 इंच है और में चूत का बहुत बड़ा शौक़ीन हूँ। यह घटना मेरी और मेरे मामा की लड़की की है.. उसका नाम ईशा है और वो अब बीकॉम के पहले साल में है। वो दिखने में बहुत सुंदर और मोटे मोटे बूब्स और गांड तो बस देखने से ही अच्छे अच्छो के लंड खड़े हो जाते है।

हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे और एक दूसरे से सभी तरह की बातें शेयर करते थे.. लेकिन बस सेक्स की बातों को छोड़कर.. में उसका साईज भी आप सभी को बता दूँ.. उसका साईज 34-28-36 है और यह कुछ दिन पहले की बात है.. में अपने कॉलेज की छुट्टियाँ बिताने के लिए अपने मामा के घर पर आया हुआ था। तो हम दोनों सारा दिन बैठकर बातें करते रहते थे और बहुत मज़े करते थे। दोस्तों उस टाईम तक मेरे मन में उसके लिए किसी भी तरह की कोई भी ग़लत बात नहीं थी.. लेकिन फिर एक दिन मामा और मामी किसी प्रोग्राम में बाहर गये हुए थे और मुझसे घर पर रुकने के लिए बोलकर गये थे और फिर हम दोनों गेम खेलने लगे। फिर गेम खेलते खेलते अचानक से मेरा हाथ उसकी कमर पर लग गया.. लेकिन उसने मुझसे कुछ नहीं कहा.. और एक मुस्कान देकर फिर से खेलने लगे.. तो एकदम से दिल में एक अजीब सा ऐहसास हुआ और मैंने उसके हाथ पर हाथ रख दिया। तो वो एकदम से ऐसे खड़ी हुई जैसे उसको 240 वॉल्ट का करंट लग गया हो।

फिर इतना होने के बाद वो बाहर भाग गई और मुझे भी अपनी गलती महसूस हुई.. लेकिन फिर भी मेरा सेक्स का बुखार शांत होने वाला नहीं था और में उसके पीछे गया तो मैंने देखा तो वो नहाने के लिए बाथरूम में चली गई और में चुपचाप आकर टीवी देखने ल्गा। इतने में ही मुझे एक बहुत ज़ोर से आवाज़ आई जैसे कुछ गिरा हो.. तो में भागकर कमरे से बाहर गया और मैंने बाथरूम के पास जाकर देखा तो ईशा नीचे जमीन पर गिरी पड़ी है और उसका टावल भी पूरा खुला पड़ा था। दोस्तों मैंने पहली बार किसी लड़की को पूरा नंगा देखा था.. और में उसे इस हालत में कुछ देर देखता रहा और उसके पीछे का हिस्सा मुझे दिख रहा था.. मतलब उसकी कमर और गांड। फिर मैंने अपने आपको संभाला और उससे पूछा कि ईशा क्या हुआ? तो उसने मुझसे कहा कि दिखता नहीं में गिर गई हूँ.. मुझे उठाओ.. बहुत दर्द हो रहा है। तो मैंने जल्दी से उसे अपने दोनों हाथों का सहारा देकर खड़ा किया.. वो एकदम नंगी मेरी आखों के सामने थी.. उसकी चूत छोटी सी थी और उस पर हल्के हल्के बाल भी थे। बिल्कुल गुलाबी कलर की.. में उसे देखता ही रह गया। तभी उसने उठकर अपना टावल ऊपर खींच लिया और में एकदम होश में आ गया। फिर वो मुझसे बोलने लगी.. बेशर्म में तेरी बहन हूँ ऐसे घूर घूरकर क्या देख रहा है? तो मैंने अपना सर नीचे कर लिया.. तभी उसने कहा कि मुझसे चला नहीं जा रहा.. मुझे अपनी गोद में उठाओ। तो मैंने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम में ले गया.. और उसे बेड पर लेटा दिया.. लेकिन अब भी उसके बूब्स हल्के हल्के दिखाई दे रहे थे और मेरा लंड खड़ा हो चुका था। तो मैंने उससे कहा कि तुम सीधी लेटी रहो.. में दवाई लाता हूँ.. में दूसरे कमरे में जाकर दवाई लेकर आया और में उसकी कमर पर दवाई लगाने लगा और कमर पर दवाई लगाते हुये मेरा हाथ अचानक से उसके बूब्स पर लग गया.. तो मेरे मन में एक अजीब सा अहसास हुआ और में अपने आपको रोक नहीं पाया और मैंने धीरे से उसकी कमर पर किस कर दिया.. वो एकदम से सीधी हुई तो उसके बूब्स मेरे मुहं पर छू गये और उसे भी अजीब सा महसूस होने लगा और फिर उसने मेरा मुहं अपने दोनों हाथों से पकड़ा और मेरे होंठो पर किस कर दिया। तो अब में भी नहीं रुक सका और में भी उसे किस करने लगा और मेरा एक हाथ उसके बूब्स पर था और दूसरा पेट पर.. वो अजीब सी आवाज़ निकाल रही थी उह्ह्ह अह्ह्ह और कह रही थी मुझे और ज़ोर से किस करो। तो में भी पूरे जोश में था मैंने अपनी शर्ट उतार दी और उसके बूब्स को चूमने चाटने लगा.. वो अजीब सी आवाज़ निकाल रही थी अहह मयंक और ज़ोर से चूसो.. पी लो आज इनका सारा दूध.. बहुत दिन से मेरा तुझसे चुदने का मन कर रहा था।

फिर इतने में उसने अपना एक हाथ मेरे लंड पर रख दिया। पेंट के ऊपर से ही वो मेरे लंड को रगड़ने लगी और फिर उसने मेरी पेंट को खोल दिया। तो में भी उसके सामने पूरा नंगा था और अब में उसकी गर्दन पर, पेट पर, होंठ पर, बूब्स पर बारी बारी से किस करने लगा। तो वो अब बहुत गरम हो गई फिर मैंने मौके का फायदा उठाते हुए उसकी चूत पर अपना हाथ रख दिया.. वो एकदम से सिहर उठी और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी और वो बोलने लगी कि मयंक अब बस डाल दो मुझसे रहा नहीं जा रहा.. जल्दी करो और चोद दो मुझे.. फाड़ दो मेरी चूत। तो मैंने उसे सीधा लेटाया और उसकी चूत पर किस करने लगा.. वो आईइ उह्ह्ह्ह सीईई कर रही थी। फिर मैंने अपना लंड हाथ में लिया और उसकी चूत पर रख दिया और रगड़ने लगा और वो अपने आप झटके मारने लगी और लंड अंदर लेने की कोशिश करने लगी.. मैंने उसके छेद पर अपना लंड रखा और हल्का सा धक्का मारा तो वो एकदम से चिल्ला उठी और बोलने लगी कि प्लीज बाहर निकालो भैया बहुत दर्द हो रहा है। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

में उसकी खराब हालत को देखकर वही रुक गया और वो आवाज़ निकालने लगी आईइ अहह माँ बचाओ मार दिया मुझे और अब उसकी चूत से खून आने लगा। तो मैंने एक मिनट शांत रहने के बाद फिर से जोरदार झटका मारा.. इस बार मैंने मेरा पूरा 6.5 इंच का लंड अंदर उतार दिया। तो वो ज़ोर से बोली कि आह में मर जाउंगी प्लीज इसको बाहर निकालो.. लेकिन में कहाँ सुनने वाला था.. दो मिनट रुका और आराम आराम से झटके मारने लगा। तो वो भी चुदाई के मज़े लेने लगी और अहह उह्ह्ह माँ मर गई की आवाज़ निकालने लगी और मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी और वो भी नीचे से धीरे धीरे झटके मारने लगी और मेरा पूरा साथ देने लगी। तभी थोड़ी देर बाद वो बोलने लगी कि मेरी चूत से कुछ निकल रहा है और वो उम्म अह्ह्ह की आवाज़ निकालते हुई झड़ गई.. उसकी चूत की गर्मी से में भी झड़ गया। फिर वो मुझसे पूछने लगी कि क्या तुम वर्जिन थे? तो मैंने कहा कि नहीं में वर्जिन नहीं हूँ। फिर हम दोनों ने किस किया और कुछ देर लेटे रहे और फिर से हमने दो बार सेक्स किया और सो गए। सुबह उठकर एक बार फिर सेक्स किया और नहाकर कपड़े चेंज किए ।।

धन्यवाद …

Meri Mala Bhabhi Ki Chudai 2

Hindi Sex Story Antarvasna Indian Sex Stories Chudai Kamukta Desi Sex Bhabhi ki ye ada muje bahot aachi lagi. Ungi jism ki garmahat ki khusbhoo se to mere tan badan me zhurzhuri asi daud gayee. Bhabhi ne muje pani la ke diya. Aur boli, “Mai bhi aabhi abhi bank se aayee hu. accha huwa tum jaldi nahi aye warna intajar karna padata mera. Tum thodi der behato tab tak mai change karke aati hu, agar tumhe bhi fresh hona ho to ho jao.” Bhabhi ne muje bathroom dikhaya. Unke bedroom ke bagal me hi bathroom tha, ek door unke bedroom me khulata ta aur ek hall me.mai fresh hoke aya. Bahbhi change karke ayee thi aur hall me zhadu laga rahi thi. Mai to dekhate hi rahe gaya. Bilkul freeze ho gaya. Bhabhi ne bahot hi patli pink colour ki nighty pehani thi aur under se bra nahi pehani thi. O zhuk ke zhadu laga rahi thi aur unke boobs ka pura darshan muje ho raha tha. Mere lund ne to salami dena bhi suru kar diya. Mera unke ghar me pahela hi din tha. Aur paheli hi din muje itni khubsurati ka darshan ho gaya. Bhabhi ne mere taraf dekha lekin mai to hosh me tha hi nahi, meri najar to unke boobs pe hi tiki thi. Unhone meri najar ka picha kiya to pata chala ki mai unka secrete part dekh raha hu.Tab unke dhyan me aya ki unhone to hamesh ki tarha bra pehani hi nahi hai, actuly o ghar me akeli raha karti thi to garmi ke din hone ke karan ghar me bra nahi pehanti thi, aur roj ki tarah abhi bhi unhone bra nahi pehani, jab unke dhyan me aya to zhadu chod ke sidi khadi ho gayee, aur meri aaur unki najar ek ho gayee. Mai sharma gaya aur unhone ek muskurahat di aur jaldi se bedroom me chali gayee. Thodi der bad o vapas ayee to maine dekha ki unhone bra paheni huwi thi.Maine fir se unke boobs ke taraf dekha aur muskura diya meri najar aur muskurahat ka matalb o samaj gayee aur unhone bhi muskura diya. Bhabhi ne khana banaya, mai hall me tv dekh raha tha. Bhabhi mere pass aayee fir humne thodi der tak bate ki, fir onhone kaha “Raj tum tv dekho tab tak main naha ke aati hu. Muje sham ko khane se pehale nahane ki aadat hai”. Bhabhi ne cupboard se apne kapade nikale aur centre table pe rakh diye fir unhone soap nikala aur nahane chali gayee. Bathroom se gungunane ki aawj aa rahi thi. Bhabhi ki awaj itni acchi to nahi thi lekin unki awaj me pyass saff zhalakati thi. Thodi der bad shower band ho gaya, 2 minute bad bhabhi towel lapete huwe hall me ayee aur, hall me lage huwe bade aayeene ke samne khadi ho ke gana gate huwe apne app ko niharne lagi. Mera to fuse hi udd gaya. Unke badi badi bajuo se pani ki bunde niche ja rahi thi. Gerden se aur chhati ke upari hisse se aati huwi bunde unke dono sidhe khade pahado ke bich wali khayee me sama rahi thi. Gori gori mansal dudhiya jangao se tapakati huwi pani ki bunde mano muje invite hi kar rahi thi. Abb bhabhi gungunate huwe palati, aur palatate huwe unhone towel ka ek kona hat me le liya aur usko o nich chhodane hi wali thi ki unki najar muj pe padi. O ekdam se rukh gayee. Hat me towel ke do kone they. Dhila ho jane ke karan ek side se towel thoda niche aa gaya tha, aur unka uss side ka boobs 80% dikh raha tha, yeha tak ki nipple ke upper wala brown hissa bhi najar aa raha tha. Meri to kismat hi khul gayee thi. Bhabhi ne meri taraf dekha aur jaldi jaldi center table se kapade utha liya, maine dekha ki jaldi jaldi me o bra aur panty to wahi chod ke gayee hai. O bedroom me chali gayee. Mai utha aur center table se bra aur panty utha li. Bra ko sofe ki chair ke piche dal diya, jider se bhabhi bedroom me gayee thi, aur panty ko bedroom ke door ke pass ek kone me dal diya. Bhabhi ko bra aur panty to mili nahi, lekin o muje bulane me dar rahi thi, kyo ki mai unko kamse kam 70% nude dekh chukka tha. Abb aur nude dikha ke o mere samne apne app ko loose character sabit nahi karana chahati thi.

वकील की बीवी की चाबी

प्रेषक : सूरज ..

हैल्लो फ्रेंड्स.. मेरा नाम सूरज है और एक बार फिर से आप सभी के सामने कामुकता डॉट कॉम पर एक और कहानी लेकर आया हूँ.. में अपने पाठकों को बता दूँ कि मेरा नाम सूरज है और में मुंबई का रहने वाला हूँ.. मेरी उम्र 21 साल है और में एक कॉलेज से इंजिनियरिंग कर रहा हूँ।

दोस्तों यह बात कुछ 6 महीने पहले की है हर रोज़ में सुबह 8:30 बजे कॉलेज के लिए निकल जाता हूँ और फिर शाम को 04:00 बजे आता हूँ। मेरे सामने के फ्लेट में मिस्टर शर्मा रहते है और वो पेशे से एक वकील है और उनकी एक मस्त सेक्सी सी वाईफ है उसका नाम नेहा है जो कि उनकी दूसरी वाईफ है। शर्मा जी की उम्र लगभग कोई 40 के पास होगी और भाभी जी की उम्र कोई 25 के पास होगी। वो बड़ी ही प्यारी सी सेक्सी सी है और कॉलोनी के ही एक स्कूल में टीचर है.. वो सुबह 8:00 बजे स्कूल जाती है और 1:00 बजे घर पर लौटकर आ जाती है। जब वो सुबह स्कूल जाती है तो रोज़ में उनको देखता हूँ और वो एक बार मुझे देखकर हल्की सी मुस्कान ज़रूर देती है और लगातार पिछले एक साल से ऐसा ही चल रहा था। फिर एक दिन जब वो सुबह स्कूल जा रही थी तो में अपने गेट पर खड़ा हुआ था और वो अपने गेट पर ताला लगा रही थी। तभी मेरा टावल खुल गया और मैंने टावल के अंदर कुछ नहीं पहना हुअ था। तो वो मुझे देखकर हल्का सा मुस्कुराई और चली गयी.. लेकिन उस दिन के बाद कुछ दिन तक मेरा और उनका कोई आमना सामना नहीं हुआ। फिर एक दिन मेरे कॉलेज की छुट्टी थी तो में घर पर आराम से सोकर उठा और सिगरेट पीने के लिए बिल्डिंग से बाहर जा रहा था। तो मैंने देखा कि वो बाहर झाड़ू लगा रही है.. शायद उस दिन उनकी नौकरानी काम पर नहीं आई थी और उसने एक छोटी सी टी-शर्ट और छोटी वाली जीन्स पहन रखी थी।

फिर जब वो झुककर झाड़ू लगा रही थी तो उसके मस्त बूब्स साफ साफ दिखाई दे रहे थे और जब मैंने उनको देखा तो देखता ही रह गया.. उस वक़्त वो बहुत मस्त लग रही थी। तभी में उसको छूता हुआ वहां से निकल गया और उसने मुझे एक हल्की सी मुस्कान दी। तो मुझे लगा कि यहाँ पर मेरा कुछ काम बन सकता है और कुछ दिन के बाद एक दिन में दोपहर को कलेज से घर पर आया तो भाभी जी अपने फ्लेट के बाहर खड़ी थी.. मैंने उनको पूछा कि क्या हुआ भाभी जी? तो उन्होंने कहा कि मेरे फ्लेट की चाबी कहीं पर खो गयी है और आपके भाई साहिब भी किसी कंपनी के काम से नेनिताल गये है। तो मैंने उनको बोला कि आप मेरे फ्लेट में आ जाओ.. में कुछ देर के बाद किसी चाबी वाले को ले आऊंगा और तब वो मेरे घर में आ गई। फिर हम दोनों ने एक साथ मिलकर कोल्ड ड्रिंक पी और उसके बाद में बाथरूम में चला गया। तभी भाभी जी ने टीवी चालू कर दिया.. उसमे मैंने सीडी पर ब्लूफिल्म लगा रखी थी और फिर टीवी चालू करते ही ब्लूफिल्म शुरू हो गयी और जब में बाथरूम से बाहर आया तो मैंने देखा कि भाभी जी वो ब्लू फिल्म बड़े ध्यान से देख रही है और वो मुझे देखते ही बोली कि यह कैसी कैसी फिल्म देखते हो? फिर में उनको सॉरी बोला और टीवी को बंद कर दिया और मार्केट से एक चाबी बनाने वाले को लेकर आया और उनका ताला खुलवा दिया। फिर उसी शाम को भाभी जी ने मेरी डोर बेल बजाई तो मैंने दरवाजा खोला और उनको अंदर आने को कहा.. वो अंदर आकर सोफे पर बैठ गई। फिर वो बोली कि सूरज आज शाम को तुम क्या कर रहे हो? तो मैंने कहा कि कुछ नहीं बस खाना खाकर सोना ही है। तभी वो बोली कि आज शाम का खाना आप मेरे साथ ही खा लो.. आप भी अकले हो और में भी अकेली हूँ.. हो सकता है मुझे आपका कुछ साथ मिल जाए। तो मैंने कहा कि ठीक है और फिर में उनके फ्लेट पर चला गया और वो कुछ देर मुझसे इधर उधर की बातें करने के बाद किचन में खाना बनाने चली गई। में ड्रॉयिंग रूम में बैठा था और चुपके से उनको देख रहा था।

तभी वो पीछे मुड़कर मुझे देखते हुए बोली कि सूरज क्या देख रहे हो? तो मैंने कहा कि कुछ नहीं? तो उन्होंने कहा कि क्यों खाना खाने से पहले कुछ ड्रिंक्स हो जाए? तो मैंने कहा कि ठीक है यह बहुत अच्छा आईडिया है.. में अभी लेकर आता हूँ। तो वो बोली कि आपके भाई साहब की रखी है.. तुम रुको में लाकर देती हूँ और उन्होंने मेरे सामने एक ठंडी बियर लाकर टेबल पर रख दी। फिर मैंने कहा कि क्यों आप नहीं पीओगी? तो उन्होंने कहाँ कि नहीं में यह सब नहीं पीती हूँ.. लेकिन में तुम्हारे साथ सॉफ्ट ड्रिंक पी सकती हूँ और हम दोनों ने साथ में पीते हुए बहुत सारी बातें की.. तब में धीरे धीरे उनसे सटने लगा और बिल्कुल उनके पास बैठ गया और एक हाथ को उनकी कमर में डाल दिया। तो वो बोली कि सूरज तुम यह क्या कर रहे हो? चलो खाना खाते है वरना वो ठंडा हो रहा है। मैंने बोला कि कुछ देर बैठो फिर चलते है और फिर में उसके साथ मस्ती करने लगा था और मस्ती मस्ती में उनको छेड़ रहा था और वो मुझसे कह रही थी कि सूरज बस करो यार सब ठीक नहीं है.. लेकिन में अपने काम में लगा रहा और फिर वो भी धीरे धीरे गरम होने लगी।

तभी उसने मेरी पेंट पर हाथ रख दिया और मेरा लंड तन गया लंड और बुरी तरह से बाहर निकलने को तड़पने लगा.. भाभी जी पेंट के ऊपर से मेरे लंड को सहलाने लगी। तो मेरा लंड बाहर निकलने को तैयार हो गया और वो मेरी पेंट की ज़िप खोलकर मेरी पेंट को उतारने लगी और फिर मैंने अपनी पेंट को निकाल दिया और अंडरवियर को भी उतार दिया.. जब उन्होंने मेरे 9 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा लंड देखा तो वो उस पर टूट पड़ी और लंड को धीरे धीरे मुहं में लेकर चूसने लगी। तो में भी उसे पकड़कर किस करने लगा और धीरे धीरे उसे चूमता चाटता रहा और जब मुझे एहसस हुआ कि वो पूरी तरह से गरम हो चुकी है। तो मैंने उसके भी कपड़े एक एक करके उतारने शुरू किए और उसके कपड़े उतारने के बाद उसकी कोमल नाज़ुक जवानी देखकर में थोड़ी देर दंग सा रह गया। उसका फिगर बहुत सुंदर था.. उसका फिगर का साईज यही कोई 30-28-30 था और उसके बूब्स तो छोटे छोटे और गोरे गोरे थे.. लेकिन उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और गुलाबी रंग बड़ी रसीली चूत थी।

फिर मैंने मेरे सभी कपड़े उतार दिए और मेरा लंड उसके मुहं में डालकर चुसवाने लगा और वो मेरे लंड को मुहं में लेकर बड़े आराम से करीब 20 मिनट तक चूसती रही और वो यह सब पहली बार कर रही थी क्योंकि शर्मा जी ने कभी भी उसके साथ ऐसा नहीं किया था.. लेकिन फिर भी वो किसी अनुभवी लड़की की तरह यह सब कर रही थी और उसके लंड चूसने में ही मेरे लंड ने अपना वीर्य बाहर निकाल दिया। तो में उसके सर को पकड़कर अपने लंड को उसके मुहं में ज़ोर ज़ोर से धक्के देने लगा और फिर पूरा लंड शांत होने के बाद मैंने उसके सर को छोड़ दिया और में उसको वैसे ही खड़ा करके उसकी चूत को चाटने, चूसने लगा। तो वो इस असहनीय दर्द से छटपटाने लगी और में अपनी जीभ को उसकी चूत में डालकर उसे जीभ से चोदने लगा और अब मेरा लंड फिर से लोहे की तरह सख़्त हो गया था। तो मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और अपने लंड को उसकी चूत पर रखकर धीरे धीरे अंदर डालने की कोशिश कर रहा था.. लेकिन वो अंदर नहीं जा रहा था। फिर थोड़ी देर धीरे धीरे कोशिश करने के बाद मैंने उसके होंठ पर अपने होंठ रखकर उसे किस करने लगा और सही मौका देखकर एक ज़ोर का झटका दिया और पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में अंदर डाल दिया। तो उसके मुँह से एक चीख निकल गयी.. लेकिन वो मेरे मुँह के अंदर दब गयी। तो में थोड़ी देर उसकी टाईट और रसीली चूत में मेरा बड़ा और मोटा लंड डाले हुए बिना हीले डुले उसके ऊपर पड़ा रहा और बारी बारी से उसके एक एक बूब्स को दबाता रहा और उसे किस करता रहा।

फिर थोड़ी देर बाद उसे जब अच्छा लगने लगा तब मैंने लंड को धीरे धीरे झटके देने शुरू किए और में उसकी मस्त चूत में मेरा बड़ा और मोटा लंड अंदर बाहर करके उसे चोदे जा रहा था और वो भी नीचे से उसके कूल्हे उठा उठाकर मज़े लेकर मुझसे चुदवा रही थी। तो उसके मुँह से बड़ी अज़ीब सी आवाज़ें आ रही थी शायद वो मोन कर रही थी और मुझसे कह रही थी और ज़ोर से चोदो अपनी रानी को सूरज आईईईईईईईई अह्ह्ह इतनी ज़ोर से करो कि पूरा मज़ा आ जाए.. आज तुमने मुझे एक सुहागन का मज़ा दिया है.. अब तो में और तुम रोज़ इसी तरह से रोज़ चुदाई करेंगे.. फाड़ दो आज अपनी रानी की चूत को। उसके मुँह से ऐसी बातें सुनकर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ। फिर करीब 20-25 मिनट ताबड़तोड़ धक्के देकर उसे चोदने के बाद मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और उस पूरी रात हम दोनों एक दूसरे के साथ चिपककर नंगे ही सो गए और फिर में सुबह 05:00 बजे उठा और फिर से एक बार और जबरदस्त चुदाई की और फिर हम सो गए।

फिर सुबह 08:00 बजे मेरी नींद खुली तो हम लोग जल्दी से फ्रेश होकर अपने अपने काम पर निकल गए और शाम को मिलने का वादा किया और अगली शाम को हमारा प्रोग्राम शुरू हुआ। तो उस रात को मैंने उसे बाथरूम में चलने का इशारा किया और वो उठकर बाथरूम में आ गयी। तो में भी बाथरूम में गया और अंदर जाकर मैंने उसे पीछे से ज़ोर से पकड़कर उसके बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा.. उस दिन उसके बूब्स बहुत सख्त थे। फिर उसने अपनी दोनों आँखे बंद कर दी और में उसके बूब्स को टी-शर्ट के ऊपर से दबाने लगा। तभी थोड़ी देर बाद एक हाथ से उसकी केप्री को निकाल दिया और उसकी चूत में अपनी एक उंगली को डाल दिया और उस उंगली से उसकी चुदाई करने लगा। तभी थोड़ी देर बाद मैंने उसके सारे कपड़े निकालकर उसको बिल्कुल नंगी कर दिया और अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। तो मैंने अपनी पेंट की ज़िप खोलकर अपना लंड बाहर निकाला.. तो मेरा लंड देखकर वो फिर से पागल हो गयी और एक हाथ से ज़ोर से मेरे लंड को पकड़ लिया।

फिर अपने कोमल कोमल हाथों से वो मेरे लंड को सहलाने लगी और उसके बाद में नीचे बैठ गयी और मेरे लंड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी और अपनी जीभ से वो मेरे लंड को चाट रही थी और धीरे धीरे उसने मेरे लंड को अपने मुहं में लेना शुरू कर दिया। तो मेरा लंड बहुत सख्त और बड़ा था उसके मुहं में पूरा नहीं आ रहा था.. मैंने उसके बाल पकड़कर एक ज़ोर का धक्का लगाया.. आधा लंड उसके मुहं में चला गया और उसकी आखों से पानी बाहर निकल आया। फिर धीरे धीरे ज्यादा से ज्यादा लंड वो मुहं में रखकर चूसने लगी.. करीब 15-20 मिनट बहुत लंड चुसवाने के बाद मैंने उससे घोड़ी बनाने के लिए कहा और वो अपनी दोनों टाँगे मोड़कर घोड़ी बन गयी। दोस्तों इस तरह चुदाई करवाने में औरत को बहुत मज़ा आता है और में भी घुटनों के बल बैठ गया और पीछे से अपना लंड उसकी चूत पर लगाया और दोनों हाथों से उसके बाल पकड़ कर एक ज़ोर का धक्का लगाया.. उसके मुहं से बहुत ज़ोर से चीख निकल गयी और में अपना लंड उसकी चूत में ऐसे ही डालकर उसके बूब्स दबाता रहा और जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। तो वो धीरे से बोली कि आज मेरी सारी प्यास बुझा दो प्लीज। फिर मैंने कहा कि आज तो तुझे ऐसे चोदूंगा कि सारी उम्र तू मेरा लंड याद रखेंगी और उसे मेरे सख्त लंड का मज़ा आ रहा था में उसे तेज़ी से धक्के देकर चोदे जा रहा। फिर वो अब अपने पति को गलियाँ देने लगी कि उसके लंड में दम नहीं है और उसने कहा कि तुम मुझे एक बार मेरे पति के सामने भी चोदना.. कम से कम उसे भी यह तो पता चल जाएगा कि चुदाई कैसे करते है? फिर इस तरह से में उसे बहुत तेज रफ़्तार से चोदे जा रहा था और वो बड़बड़ा रही थी सिसकियाँ ले रही थी अपने नाख़ून से मेरे शरीर पर निशान कर रही थी।

दोस्तों सही में उसकी चूत का मज़ा मेरे लंड को जो आया वो ना किसी की चूत में नहीं था और 25 मिनट तक उसकी चूत का कचूमर निकालने के बाद मैंने सारा वीर्य उसकी गरम गरम चूत में निकाल दिया और फिर मैंने लंड को बाहर निकालकर उसके मुँह में दे दिया मेरा और उसकी चूत का जो रस मेरे लंड पर चिपका हुआ था.. उसे वो आइस्क्रीम की तरह से चाटने लगी। उस रात को मैंने उसे 3 बार अलग अलग तरीके से चोदा और उसके बाद जब भी हमें मौका मिलता.. हम एक दूसरे में समां जाते। आज तक मैंने उसे कितनी बार चोदा है यह मुझे भी याद नहीं है.. लेकिन आज भी में उसे बड़े प्यार और मज़े से चोदता हूँ और वो भी मजे लेकर चुदवाती है ।।

धन्यवाद …

Meri Mala Bhabhi Ki Chudai 1

Hindi Sex Story Antarvasna Indian Sex Stories Chudai Kamukta Desi Sex Meri Mala Bhabhi Ki Chudai Please only long story pasand karne wale hi yeh story padhe, short story pasand karne wale kripaya isse padke bore na hoye. Mera nam Raj hai, mai 27 sal ka navjawan hu, bessically Maharashtra se hu, lekin filhal Chandigarh me raheta hu, aur ek bahot badi MNC me kam karata hu. Muje college time se hi matured aurate jada pasand hai. To abb kahani suru karate hai, Yeh kahani tab ki hai jab mainecollege ki surwat ki thi, nayee nayee jawani thi, 20 sal ki umar thi. Mere pitaji goan ke school me teacher they. Humare baju me jo padosi they o bhi ek teacher they lekin O young they, nai nai naukri lagi thi aur shadi bhi nayi nayi huwi thi. Main unko bhaiya kaheta tha aur unki wife ko bhabhi, Bhabhi bhaot sunder aur thi aur utani hi dil ki bahot acchi thi, aur muje bahot pyar karti thi, mera jada se jada waqt unke ghar me hi katata tha.Kabhi kabhi o meri majak bhi karati thi, kabhi kabhi to meri short bhi kinch leti thi, ek din maine janbuj ke short ke niche kutch nahi pehana, bhabhi ne majak me short niche khich di aur mera tana huwa lund dekha to dang rahe gayee, o jor jor se hasane lagi, mai sharma gaya, fir unhone kaha, bade sharmile ho deverji, pata nahi tumhara kya hoga. Iss taraha humari chhedkhani humesha chali raheti thi. Unki ek badi sister thi, jo saher me raheti thi aur bank me service karti hai. Uska divorce ho chukka hai aur o akeli hi raheti hai. Unka nam mala hai aur o thodi moti hai, aur dekhane me to pucho mat, bahot hi sexy hai, colour bahot hi gora hai, gathila badan hai, boobs itne bade hai ki jo bhi dekhe mu me pani aa jaye. Size hoga 39- 32-40. Aur o bahot free mind wali hai, sharam bilkul nahi karti, koi bhi bat bedhadak kahe deti hai. Uski yehi bat muje bahot pasand hai. Muje college me admission lena tha, aur college sehar me hi tha. Maine college me admission le liya. Lekin jab bhabhi ko pata chala ki mai sehar me college me ja raha hu aur waha hostel me rahene wala hu, to o bahot naraj ho gayee aur boli ki meri badi sister ka ghar hote huwe tum hostel me kyo rahoge. Unhone mala bhabhi ko phone karke bata diya ki o muje unke yeha rahane ke liye bhej rahi hai, aur agar unko koi problem ho to bata de. mala bhabhi ne kaha ki “bhej de waise mera bhi akele dil nahi lagat O aa jayega to mera bhi dil laga rahega.” Aur mere raheni ki problem solve ho gayee. Bhabhi ne mala bhabhi se kaha ki Raj bahot sharmila hai jara iska khayal rakhana. To mala bhabhi boli ki tu bilkul chinta mat kar, mai iski sharm bhi mita dungi. Sham ke 6.30 baje they, maine mala bhabhi ki door bell bajai,2 minute ke bad darwaja khula, door me bhabhi khadi thi, mai to unko dekhate hi rahe gaya, halke asmani colour ki siffon ki saree paheni thi, uspe matching low cut blouse tha, aur match petticoat bhi. Pallu thoda side me tha. Unki cleavage line saff saff dikh rahi thi. Aur do bade bade pahad sidhe khade they, dono pahado me bichwali khayee bahot jada gaheri thi, kyo ki unke pahad amm aurato ke muqabale kuch jada hi bade they. (yeh unka style hai, humesha ghar me saree ka pallu shoulder pe cleavage line se hata ke hi rakhati hai) mai to paheli hi najar me ghayal ho gaya. “Are Raj tum, aao aao, Seema ne (Meri bhabhi, gaon wali jo meri neighbor hai) bataya tha ki tum aane wale ho, mai tumhara hi intajar kar rahi thi.” Bhabhi ne muje under bulaya aur mere mathe ku chum liya.