चुदसी आंटी विभा की चुदाई

चुदसी आंटी विभा की चुदाई

गौरव इस चुदसी आंटी विभा को आज से कुछ 6 महीने पहले ही मिला था. कोलकाता के एक मार्केट मे दोनो मिले थे. जैसे की जवान लोंडो को आदत होति है वैसे उस दिन गौरव भी अपनी बाएक पर बैठा हुआ इस आंटी के बड़े बूब्स को निहार रहा था. और उसे लगा के आंटी भी उसे लाइन दे रही थी. गौरव की तरह वो भी मार्केट मे अकेले ही आई थी शायद. गौरव तो सिर्फ़ मा ने मँगवाए हुए राजमा लेने आया था. और यह आंटी सब्जी वगेरह लेने आई थी.

बात तो तब सेट हुई जब इस आंटी ने सामने से गौरव को स्माइल दे दी. गौरव को भी उसी वक्त लगा की एक चुदसी आंटी की तलाश आज पूरी हो ही गई. आंटी ने सामने से लाइन दिया तो गौरव की हिम्मत भी बढ़ गई और उसने आंटी को अप्रोच किया. फिर जो हुआ वो हरेक अफेर ने होता है इसलिए हम उसे फास्ट फॉर्वर्ड कर देंगे. आंटी आजकल गौरव को अपने घर बुला के उसका लंड लेती है. और कभी कभी एक बार के सेक्स से वो सॅटिस्फाइ नही होती है तो गौरव को लंबा रोक के उस से दुबारा और तीसरी बार भी सेक्स कराती है.

गौरव ने ऑलरीडी इस बड़े बूब्स वाली चुदसी आंटी को चोद के अपना विरी उसकी चुत मे निकाला था. लेकिन आंटी को अभी और सेक्स करना था. गौरव ने चुदाई के बाद सिगरेट सुलगा ली और आंटी उसके लंड को फिर से खड़ा करने मे लग गई. आंटी अपने बड़े बूब्स पर गौरव के लोड को रगड़ने लगी. और फिर इस लंड को हिला के अपने निपल्स पर भी घिसने लगी. कुछ ही देर मे यह लंड टाइट हो गया और चुदसी आंटी की आँखो मे अलग ही चमक आ गई.

लंड की समस्या का कमाल 2

“लंड की समस्या का कमाल – 1” से आगे की कहानी..antarvasna Kamukta hindi sex indian sex chudai Kahani

तो दोस्तों फिर आंटी ने इतना ज़ोर ज़ोर से मेरा लंड चूसा कि मेरा वीर्य तो एक मिनट में ही निकल गया और मैंने अपना वीर्य उनके मुहं में ही छोड़ दिया.. वो पूरा पी गयी और कुछ बोली भी नहीं.. वो मेरे लंड को और चूसना चाहती थी। लेकिन एक बार वीर्य निकलने के बाद लंड कहाँ खड़ा रहता है और वो थोड़ा मायूस सी हो गयी। मैंने कहा कि थोड़ा सा रुक जाओ और मैंने उन्हे खड़ा किया और उनके बूब्स को दबाने लगा.. उनके बूब्स इतने मस्त और बड़े लग रहे थे कि क्या बताऊँ? वो लगभग 38 साईज़ के तो जरूर होंगे और उनके निप्पल खड़े हो गए थे। फिर मैंने दोनों बूब्स के बीच में जो लाईन बन रही थी उसमें पूरा सर घुसा दिया और बूब्स का थोड़ा सा हिस्सा जो मुहं से सट रहा था उसे चाटने लगा और उनके बूब्स को इतना चाटा और चूसा कि वो गीली हो गयी और आंटी मुझे देखकर मुस्कुराने लगी.. क्योंकि इतना करते करते मेरा लंड 3-4 मिनट में फिर से खड़ा हो गया। तो आंटी ने फिर से लंड को हाथ में लिया और हिलाने लगी। मैंने उन्हें थोड़ा रुकने को कहा और कहा कि थोड़ा सा इंतजार करो और मज़ा आने वाला है और वो रुक गयी। फिर में नीचे झुककर उनकी नाभि को चाट रहा था और चाटते हुए उनके पेटीकोट की तरफ बढ़ा और मैंने पेटीकोट को खोल दिया.. उनका पेटीकोट एकदम नीचे सरक गया। अब वो काली कलर की पेंटी में चिकनी टाँगों के साथ खड़ी थी। फिर मैंने उन्हे पास में रखे बेड पर लेटा दिया और उनके पैरों को सहलाने लगा और उनके पैरों को किस करता हुआ में उनकी जांघ की तरफ बढ़ा और जांघ पर बेशुमार किस करके फिर से नीचे पैर की तरफ चला गया। अब आंटी बहुत छटपटा रही थी और सिसकियाँ लेने लगी जिससे मुझे भी लगा कि पहली बार में बहुत अच्छा कर रहा हूँ। फिर में उनके पैरों को चाटने लगा और चाटते हुए उनकी जांघ की तरफ बढ़ा और जांघ पर तो इतना चाटा कि आंटी ने मेरा सर पकड़कर ज़बरदस्ती चूत की तरफ मुहं घुमा दिया और पेंटी के ऊपर से ही मेरे मुहं को अपने चूत में घुसाने लगी। मेरी नाक थोड़ी लंबी है तो आसानी से पेंटी होने के बावजूद उनकी चूत के होंठ में घुसने लगी और वो अपनी चूत में लगातार मेरे मुहं को कसकर दबाने लगी।

मैंने धीरे धीरे पेंटी के ऊपर से चूत को चाटना शुरू किया और आंटी की पेंटी उनकी चूत के रस की वजह से पहले से भीग गई थी। फिर में ज़ोर ज़ोर से पेंटी के ऊपर से चूत चाटने लगा और जो रस पेंटी में लगा हुआ था उसकी खुश्बू बड़ी अजीब थी और टेस्ट भी अजीब था.. लेकिन अच्छा लग रहा था। फिर मैंने एक हाथ आंटी के बूब्स को दबाने में लगा दिया और एक हाथ को आंटी की चूत को पेंटी के ऊपर से रगड़ने में लगा दिया। फिर मैंने उसी हाथ से आंटी की गांड भी बहुत दबाई और पेंटी के ऊपर से गांड में उंगली डालने की भी कोशिश की और वहाँ पर सहलाता रहा। आंटी अब पागल हो गयी और बोल पड़ी कि कब चोदेगा? तो मैंने रुकने को कहा और कहा कि मज़ा तो अभी आना चालू हुआ है। मैंने आंटी की तरफ अपना लंड बड़ाया तो वो झपट पड़ी और लंड मुहं में लेकर चूसने लगी और आंटी एकदम पागलों की तरह चूस रही थी।

फिर दो मिनट के बाद मैंने फिर से आंटी के मुहं में ही वीर्य छोड़ दिया और आंटी बड़े आराम से और मज़े से उसे पी गयी और में आंटी के बूब्स की तरफ बड़ा और उनके बूब्स को चूसने लगा। दोस्तों.. मुझे किसी औरत या लड़की में सबसे ज़्यादा उसके बूब्स पसंद है फिर उसकी गांड और फिर चूत.. बूब्स को देखकर में अब पागल हो गया और ऐसे बूब्स चूस रहा था जैसे कोई बच्चा दूध पीता हो। अब आंटी के निप्पल कड़क हो गये और बूब्स एकदम टाईट थे और बूब्स को चूसते चूसते लगभग 15 मिनट हो गये और मेरा लंड फिर से खड़ा हो चुका था। आंटी ने भी मेरा सर कसकर अपने बूब्स में दबा रखा था और अब आंटी बोल पड़ी कि दो घंटे होने को है.. क्या अगले साल चोदेगा? तो मैंने भी सोचा कि दो घंटे हो गए.. अब कॉलोनी की सारी आंटी एक जगह मिलती हैं अगर लेट हो गया तो कोई यहाँ आंटी को बुलाने ना आ जाए? फिर मैंने घड़ी देखी अभी 4 बजे का समय हो रहा था और मैंने सोचा कि अभी 2 घंटे बाकी हैं और इतनी देर में तो मस्त चुदाई हो जाएगी।

फिर में उनकी पेंटी की तरफ बड़ा और उसको ऊपर से हल्का चाटने के बाद मैंने उसे खींचकर खोल दिया.. आंटी की चूत पर हल्के हल्के बाल थे और चूत देखने में एकदम मस्त थी और चिपचिपी लग रही थी। पहले मैंने अपने सीधे हाथ को धीरे से उनकी चूत पर रखा और सहलाने लगा और धीरे से एक उंगली उनकी चूत में घुसा दी.. उन्होंने हल्के से आअहह उईई माँ किया और शांत होकर अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया और अपने एक बूब्स को दबाने लगी। मैं उनकी चूत में ज़ोर ज़ोर से उंगली डालने लगा और धीरे धीरे उनकी आवाज़ भी आने लगी आहहाआहह चलो अब चोदो आआहह मुझे और मैंने उनकी चूत में एक और उंगली घुसा दी और जब मैंने दोनों उंगलियों से ज़ोर लगा दिया तो उनके मुहं से आवाज़ आअहहहह निकलने लगी। फिर थोड़ी देर तक ऐसा ही करता रहा और फिर मैंने उनकी चूत में तीसरी उंगली भी घुसा दी और वो मज़े से आअहहहह करने लगी और अब मैंने तीनों उंगलियों से ज़ोर लगाया। फिर मैंने तीनो उंगली निकालकर सिर्फ़ अब छोटी उंगली को घुसा दिया और अब एक हाथ से उनकी चूत को ऊपर से हिलाने लगा और अब वो एकदम कंट्रोल नहीं कर पा रही थी और ज़ोर ज़ोर से आवाज़ करने लगी.. लेकिन मैंने अपने हाथों को नहीं रोका। फिर में धीरे धीरे 69 पोज़िशन में उनके ऊपर चड गया और उनके मुहं में लंड देकर उन्हे चुप करा दिया और उनकी चूत में अपनी एक हाथ की उंगली को अंदर बाहर कर रहा था और दूसरे हाथ से उनकी चूत को ज़ोर ज़ोर से सहला रहा था। फिर वो मेरे लंड को चूसने लगी तो मैंने उनसे चूसने के लिए मना करते हुए कहा कि लंड थोड़ा दर्द कर रहा है और उन्होंने थोड़ी देर तक बस मेरे खड़े लंड को मुहं में ही रखा, चूसा नहीं और मैंने उनके मुहं में लंड इसलिए डाला ताकि आवाज़ नहीं निकले।

फिर वो थोड़ी देर रुकी रही.. लेकिन अब मैंने उंगलियों और हाथों को हटाकर अपना मुहं उसमें लगा दिया.. उनकी चूत से अजीब सी खुशबू आ रही थी और उस खुशबू से में मदहोश हो गया और उनकी गीली चूत को चाटने लगा और उनकी चूत को जैसे ही चाटना शुरू किया तो उसने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया और वो मेरे लंड को चूस रही हैं मुझे एहसास भी नहीं हुआ क्योंकि में चूत चाटने में एकदम मग्न था। फिर मैंने चूत के अंदर अपनी जीभ को घुसा दिया और चाटने लगा। अचानक से 4 मिनट के बाद जब मैंने उनके मुहं में फिर अपना वीर्य छोड़ दिया और मैंने अपना लंड आंटी के मुहं से बाहर निकाल दिया। तो उस दिन मुझे समझ में आया कि औरत के अंदर मर्द से 9 गुना ज़्यादा सेक्स करने की इच्छा होती है और उनको पूरी तरह संतुष्ट करना इतना आसान नहीं होता। फिर मैंने सोचा कि मेरा लंड तो बहुत दर्द कर रहा है और में आंटी को संतुष्ट कैसे कर पाऊंगा? तब मैंने सोचा कि थोड़ी देर रुक जाता हूँ।

फिर में उठकर बैठ गया और उनके पैरों को फैलाकर उनकी चूत को चाटने लगा और चूत को चाटने के साथ साथ उसमें जबरदस्त उंगली करने लगा और दूसरे हाथ से चूत को सहलाता और कभी फैलाता.. इतना करते करते लगभाग 10 मिनट के बाद आंटी अचानक से उठी और मुझे कसकर पकड़ लिया और मेरे सर को अपनी चूत में कसकर अपने हाथ से दबाने लगी। तब में समझ गया कि अब आंटी का वीर्य भी छूटने वाला है और मैंने चूत को चाटने की स्पीड और बड़ा दी और फिर थोड़ी देर बाद आंटी ज़ोर ज़ोर से आवाज़ करने लगी.. अहह अब चोदो मुझे.. प्लीज चोदो मुझे आअहह आआए आआअम्म आअहह और उसके बाद मुझे कसकर जकड़ लिया और मेरी पीठ पर अपनी उंगलियों को ज़ोर से गड़ा दिया और में उनकी चूत को अभी भी चाट रहा था। तो अचानक से उनकी चूत से पानी निकलने लगा में और उंगली करता रहा.. ढेर सारा रस निकल रहा था। फिर मैंने सोचा कि हल्का सा टेस्ट कर लूँ और टेस्ट किया तो वो बड़ा अजीब लगा.. लेकिन में भी कहाँ होश में था और कसकर चाटने लगा। फिर थोड़ी देर बाद आंटी ने बहुत अच्छी सी स्माइल दी और में आंटी के पास में लेट गया और उनके बूब्स को फिर चाटने लगा और चूसने लगा। तभी थोड़ी देर बाद मेरा ध्यान आंटी की गांड की तरफ गया.. पूरी कॉलोनी में सारी आंटियों की गांड में से सबसे मस्त और सबसे ज़्यादा बड़ी, सुडोल, टाईट और चौड़ी है। उनकी गांड को देखकर रहा नहीं गया और में दोनों हाथों से उनकी गांड को दबाने लगा और फिर चाटने भी लगा और मेरा लंड फिर से खड़ा तो हो चुका था.. लेकिन थोड़ा दर्द कर रहा था और अगर दर्द नहीं हो रहा होता तो में आंटी की गांड को उसी समय चोदता। फिर में थोड़ी देर उनकी गांड के साथ मज़े करने के बाद उनके साथ लेट गया और उनके ऊपर लेटकर मैंने उनकी चूत में अपना लंड नहीं घुसाया बस बाहर रखा और उनके बूब्स को चूसने लगा। तो थोड़ी देर बाद आंटी की चूत की लाईन पर मैंने बस हल्के से लंड रखा.. लेकिन अंदर नहीं घुसाया और उनके बूब्स को दबाता रहा और चूसता रहा और अब आंटी इतना गरम हो गई थी कि वो बोल पड़ी कि प्लीज़ अब अंदर घुसा दो.. प्लीज ऐसे मत करो ना.. प्लीज़ घुसा दो.. लेकिन जब मुझे बूब्स मिले हो तो में कहाँ उनकी बात पर ध्यान दे पता। में तो बस उनके बूब्स को चूस रहा था.. लेकिन उनकी चूत इतनी गीली थी कि मेरे लंड का सुपाड़ा धीरे से उनकी चूत की लाईन में घुस गया और वो एकदम तड़प उठी और फिर से बोलने लगी कि प्लीज़ चोदो.. मुझसे अब कंट्रोल नहीं हो रहा है। तब भी मैंने उनकी नहीं सुनी.. में बस बूब्स को चूस रहा था और उन्होंने मेरे सर को बाल से पकड़ कर खींचा और मुझे बोली कि प्लीज़ छोड़ो क्या बूब्स ही चूसते रहोगे? और जिस काम के लिए शुरू में मरे जा रहे थे.. वो करना है या नहीं? प्लीज चोदो ना मुझे.. अब नहीं रहा जाएगा।

मैंने एक हल्का सा झटका दिया और मेरा लंड उनकी चूत के अंदर आसानी से आधा घुस गया.. क्योंकि एक तो उनकी चूत पूरी तरह से गीली थी और अंकल का लंड भी बहुत मोटा होगा.. क्योंकि मुझे उनकी चूत ज़्यादा टाईट नहीं लगी और जैसे ही मेरा लंड घुसा तो वो आहह अहह उह्ह्ह करने लगी.. लेकिन बड़ी धीरे से। फिर मैंने उनकी चूत में दम लगाकर पूरा लंड डाल दिया और वो अब थोड़ी ज़ोर से बोल पड़ी आआहह आईईईइ और में ज़ोर ज़ोर के झटके लगाने लगा और वो भी हल्के हल्के आवाज़ करने लगी। फिर मुझे उनकी आवाज़ से लगा कि उन्हे ज़्यादा मज़ा नहीं आ रहा है.. तब मैंने उनसे पूछा कि क्या अंकल का लंड मेरे से ज़्यादा अच्छा है? तो उन्होंने कहा कि तुम्हारे लंड से थोड़ा मोटा है.. लेकिन साईज़ में छोटा है। तो मुझे थोड़ा अच्छा लगा फिर मैंने थोड़ी स्पीड और बड़ाई और बड़ाते हुए पूछा कि लगता है आप ऐसे संतुष्ट नहीं होंगी? तो आंटी ने पूछा कि क्यों? मुझे तो मज़ा आ रहा है। तो मैंने कहा कि लेकिन मुझे लग नहीं रहा और मैंने ज़ोर के झटके लगाने शुरू कर दिए और जमकर लंड को अंदर बाहर करने लगा और में पूरी तरह से लंड को उनकी चूत में कसकर रगड़ रहा था और जब में उनकी चूत की चुदाई कर रहा था तो थोड़ी देर के लिए मैंने उन्हें किस किया और थोड़ी देर उनके बूब्स को चूसा।

फिर में ज़ोर ज़ोर के झटके लगाने लगा और आंटी भी आहह्ह्ह उह्ह्ह करती रही और 4 मिनट के अंदर ही मैंने वीर्य छोड़ दिया और वीर्य को आंटी की चूत के अंदर ही डाल दिया। तो मैंने आंटी से पूछा कि आंटी आपको कुछ होगा तो नहीं ना? तो आंटी ने पूछा कि क्या? तो मैंने कहा कि कहीं आप प्रेग्नेंट तो नहीं हो जाओगे? तो वो हँसने लगी और मुझे पागल बोलकर अपनी चूत फैलाकर इशारा करने लगी कि वो अभी शांत नहीं हुई है। मैंने अपनी एक हाथ की दो उंगलियाँ उनकी चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा और जब में यह कर रहा था तब आंटी की चूत में से मेरा वीर्य भी थोड़ा सा मेरे हाथ में लग गया था और में फिर ज़ोर ज़ोर से उंगलियों को अंदर बाहर करने लगा और दूसरे हाथ से चूत की लाईन के ऊपर सहलाता और कभी उस लाईन को फैलाता। आंटी अब फिर ज़ोर ज़ोर से आवाज़ कर रही थी और पूरे जोश में थी और लगभग 15 मिनट के बाद आंटी ने फिर से उसी तरह किया जैसे पहली बार किया था.. जब उनका वीर्य निकलने वाला था तो में समझ गया कि आंटी का वीर्य अब निकलने वाला है। तो आंटी ने फिर से मेरे बदन को कसकर जकड़ लिया और में उंगली करता रहा। आंटी ने इतने ज़ोर से जकड़ा कि मेरी पीठ पर उंगलियों के नाख़ून गाड़ा दिए और बहुत ज़ोर से आह्ह्ह करते हुए अपने वीर्य को छोड़ दिया और फिर अह्ह्ह्हउह्ह्ह की आवाज़ निकालते हुए शांत होने लगी और में उनकी चूत को फिर से चाटने लगा.. क्योंकि मुझे पिछले बार का टेस्ट अच्छा लगा था और फिर उन्होंने मुझे चेहरे से उठाकर मुझसे स्मूच करने लगी और कहने लगी कि तुमने जो कहा था सच में वो ही किया.. मुझे पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया। तुम्हारे अंकल भी कभी ऐसा नहीं कर पाते.. लेकिन तुम ने सच में अपना वादा निभाया। तो मैंने कसकर स्मूच करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि मैंने आपको अभी ठीक तरह से संतुष्ट नहीं किया.. लेकिन करना जरूर चाहता हूँ और इसलिए में आपकी गांड जो कि मुझे बहुत पसंद है.. में उसे मारना चाहता हूँ.. क्योंकि जब मैंने आपकी चूत में लंड डाला था तब आप उतना मज़ा नहीं कर पाई और वो जब तक कुछ कहती मैंने उन्हें घुमा दिया और उनकी गांड को सहलाने लगा और मैंने उन्हें फिर डॉगी स्टाईल में सेट कर दिया। फिर इतने में वो बोल पड़ी कि देखो अंकल बहुत कम करते है और ऐसा उन्होंने शायद हमारी शादी के बाद 5-6 बार किया.. इसलिए मेरी गांड बहुत टाईट है और इसमें बहुत दर्द होगा।

फिर मैंने कहा कि वही तो में चाहता हूँ और मैंने धीरे से उनकी गांड पर अपने लंड को रख दिया जो कि अब तक खड़ा हो चुका था और मेरे लंड में बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था। फिर मैंने सोचा कि दर्द जितना चाहे हो.. लेकिन मुझे यह मौका फिर नहीं मिलेगा और मैंने अपने लंड की चमड़ी को हटाया और लंड के सुपाड़े को उनकी गांड के छेद पर रखा और मैंने देखा कि उनकी गांड पर भी हल्के हल्के बाल थे और उन बालों को हटाकर सुपाड़ा उनके छेद पर टिकाया। आंटी बोली कि बहुत दर्द होगा.. हल्का सा तेल लगा लो और मैंने उनकी गांड को दोनों हाथों से फैला दिया और लंड को घुसाने की कोशिश की.. लेकिन बहुत दिक्कत हो रही थी और मेरा लंड दर्द भी कर रहा था और मैंने फिर से घुसाने की कोशिश की तो लंड का टोपा अन्दर घुस गया और आंटी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी आआहा आईईईईइ आआअहह बहुत दर्द हो रहा है.. प्लीज मत घुसाओ, बहुत दर्द हो रहा है। फिर मैंने अपने लंड को घुसाने की बहुत कोशिश की.. लेकिन अंदर नहीं गया। मैंने फिर ट्राई किया.. लेकिन नहीं हुआ और मैंने सोचा कि थोड़ा तेल लगा ही लेता हूँ।

मैंने लंड को बाहर निकाला और तेल लेकर आंटी से कहा कि थोड़ा सा मेरे लंड पर मालिश कर दो.. आंटी की गांड की थोड़ी सी गंदगी भी लग गयी थी और उसको धोने के बाद आंटी ने अच्छे से तेल लगाकर मालिश कर दी। फिर मैंने आंटी को घुमाया और फिर आंटी की गांड को हाथों से फैलाकर गांड के छेद पर फिर से लंड टिकाया और फिर तेल को लेकर उनकी गांड के छेद पर हल्का सा तेल गिरा दिया। तो आंटी ने पीछे देखकर कहा कि यह क्या कर रहे हो? मैंने कहा कि बस देखते जाओ और आंटी की गांड के छेद को दोनों हाथों से चौड़ा करते हुए लंड को घुसा दिया.. पहले लंड का सुपाड़ा घुसा और दबाव लगाने के बाद आधा लंड घुस गया और आंटी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी आआआहह अरे बहुत दर्द हो रहा है प्लीज इसे बाहर निकाल दे.. बर्दाश्त नहीं हो रहा अह्ह्ह उईई माँ मरी।

फिर मैंने हल्का सा लंड को पीछे खींचा और एक ज़ोर से झटका दिया और पूरा लंड घुसा दिया। अब तो आंटी ने बवाल ही मचा दिया और ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी.. आअहह बहुत दर्द हो रहा है हरामी इसे बाहर निकाल दे प्लीज़.. आआआहह। तो मैंने अपने लंड को थोड़ी देर घुसा हुआ छोड़ दिया और उन पर लेटकर उन्हें पीठ पर किस करने लगा और जब मेरा लंड अंदर घुस रहा था तब मुझे एहसास हो रहा था कि मेरे लंड की पूरी चमड़ी उतर गई है और मुझे लंड पर एक जलन सी महसूस हो रही थी। लेकिन मैंने अपने लंड को घुसाए रखा आंटी थोड़ी देर तक आवाज़ करती रही फिर में उनके चेहरे को पीछे घुमाकर स्मूच करने लगा और उनके बूब्स को दबाने लगा। लगभग 3 मिनट के बाद मैंने गांड के छेद पर लंड के चारो तरफ से हल्का तेल डाल दिया और आंटी को कहा कि अब आएगा आपको असली चुदाई का मज़ा और लंड को अंदर बाहर करने लगा.. में तेल की वजह से बहुत स्पीड में अंदर बाहर कर रहा था। फिर मैंने लंड को धीरे धीरे घुसाया और धीरे धीरे निकाला और में थोड़ी देर इस तरह करता रहा। उसके बाद मैंने थोड़ी ज़ोर ज़ोर के झटके भी लगाए। अब इतनी देर के बाद लंड अब ठीक से घुसता और निकलता.. लेकिन गांड अभी भी टाईट ही थी.. लेकिन में ज़ोर ज़ोर से लंड अंदर बाहर करता रहा और आंटी को अब कम दर्द हो रहा था.. लेकिन फिर भी बहुत ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी.. आआह्ह्ह उह्ह्ह और में भी मज़े में बहुत देर तक अंदर बाहर करता रहा और उसके बाद 6 मिनट के बाद मैंने फिर अपना वीर्य उनकी गांड के अंदर ही छोड़ दिया.. लेकिन इस बार लंड पर इतना दर्द हुआ कि में बता नहीं सकता था।

फिर मैंने गांड से लंड को बाहर निकाला और लेट गया और आंटी भी पास में आकर लेट गयी। आंटी ने फिर मुझे बड़े प्यार से कुछ किस किए और फिर एक प्यारा सा स्मूच किया और धन्यवाद भी कहा। में और वो इतना थक चुके थे कि वहीं पर नंगे ही सो गये और थकते कैसे नहीं? हमारी 30 मिनट से चुदाई चल रही थी और में तो इतना थक गया कि मुझे बिल्कुल भी होश नहीं था.. बस मैंने उनके बूब्स को पकड़ा और चूसते चूसते सो गया। में फिर रात को लगभग 10 बजे उठा और मैंने देखा कि आंटी किचन में खाना बना रही थी.. उन्होंने कपड़े पहन लिए थे और बहुत खुश लग रही थी। में उनके पास गया तो उन्होंने कहा कि अब तो कपड़े पहन लो और अब तो खुश हो? तो मैंने उन्हे पीछे से कसकर पकड़ लिया और पूछा कि आप खुश हो या नहीं? वो कुछ नहीं बोली और इतने में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था और उनकी गांड को छू रहा था और हमारे बीच में बस साड़ी थी और मैंने हाथों से उनके बूब्स दबाना शुरू कर दिए। तो उन्होंने कहा कि रूको और मैंने पूछा कि आपको कैसा लगा? तो उन्होंने मुझे किस करते हुए कहा कि मुझे इतना अच्छा आज तक नहीं लगा और थोड़ी ताकत बचाकर रखो.. अभी अंकल को आने में तीन दिन और हैं।

फिर उनकी इस बात पर में बहुत खुश हुआ और उन्हे स्मूच करने लगा और उनके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और स्मूच करते हुए हाथ पीछे करके उनकी गांड को भी मसलने लगा। मेरा लंड बहुत दर्द कर रहा था। फिर उन्होंने थोड़ी देर बाद कहा कि अब जाकर कपड़े पहन लो और खाना खा लो.. उन्होंने रात को दूध, पिस्ता, बादाम खिलाया और कहा कि कल दिन में फिर ऐश करेंगे.. इसलिए दूध पीकर थोड़ी ताक़त ले लो। फिर रात में हम लोगों ने कुछ नहीं किया.. बस साथ में नंगे सोए और में बस उनके बूब्स को चूसता रहा और उनकी चूत में उंगली की और उनकी चूत चाटी। लेकिन आंटी को अपने आप पर इतना कंट्रोल था कि उन्होंने मेरे लंड को बिल्कुल भी नहीं चूसा और जब मैंने पूछा तो उन्होंने कहा कि एक तो तुम दुबले पतले हो और आज इतनी बार तुम्हारा वीर्य निकला.. अगर और निकाल दिया तो तुम्हारी तबीयत खराब हो जाएगी और तुम तीन दिन तक कुछ भी नहीं कर पाओगे और हम नंगे ही सो गये। रात भर में उनके बूब्स को चूसता रहा और उनकी चूत में उंगली डालता रहा.. मुझे तो रात भर नींद नहीं आई। दोस्तों.. अगर कोई औरत जिसे आप हमेशा से चोदना चाहते हो और वो अगर साथ में नंगी सोए तो नींद क्या खाक आएगी। में सुबह तक उनके बूब्स को चूसता रहा और सुबह उठकर उन्होंने कहा कि क्यों तुम्हे चूचियाँ बहुत पसंद है ना? तो मैंने चूचियों को चूसते हुए हाँ कहा और गांड भी मसलने लगा। फिर वो उठकर नहाने के लिए चली गयी.. क्योंकि उन्हें स्कूल जाना था। उन्होंने मुझे दूध पीने को कहा और दिनभर पिस्ता, बादाम भी खाने को कहा और उस दिन में बहुत खुश था और सारे दिन अच्छी अच्छी चीजे खाई और दूध पिया और अच्छी तरह सोया और आने वाले तीन दिन मैंने उनकी जमकर चुदाई की और उन्होंने मुझे कई नयी तरह की पोजिशन में चोदने को कहा और में कई तरह के सेक्स तरीके सीख गया। कई बार हम साथ में नहाए। मुझे उनके बूब्स को चूसने और गांड को दबाने में बहुत मज़ा आया और उनकी चूत को चाटने में और रस पीने में भी बहुत अच्छा लगा। उस दौरान उन्होंने मेरी सेहत का बहुत ख्याल रखा और अब तो कभी भी मौका मिलता है तो में उनको संतुष्ट करने चला जाता हूँ या यूँ समझो कि अपने आप को संतुष्ट करने चला जाता हूँ।

धन्यवाद …

कॉलेज टीचर के साथ सेक्स

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उसकी एज कुछ 34 साल के अराउंड होगी. जब उसे फर्स्ट टाइम देखा तो उसके बड़े बड़े देख कर मैं तो उसको छोड़ने के सपने लेने लगा जो की मजे टा ता की काबी सच नही होने वाले. बट थे बाएकम ट्रू लास्ट सें.कॉलेज फेस्ट के अराउंड का टाइम ता. वो टेचएर एक टीम हेड कररी ती जिसका पार्ट मैं बी ता. बीयिंग इन फाइनल एअर, ई वाज़ वन ऑफ थे हेड्स. सो ऑलमोस्ट हर रोज़ उनसे मिलना हो ही जाता ता. उस टीचर का नाम प्रगया ता. न उनकी फिगर होगी कुछ 38 30 36. साथ काम करने की वजह से हम दोस्त टाइप्स बन गये थे.

एक दिन काम करते मजे माँ का कॉल आया की कुछ अर्जेंट काम है न मैं उनके ऑफीस मैं आ जौ. मैं चला गया. उनको कुछ कॉल्स वगेरह करवानी ती न इसमे काफ़ी टाइम निकल गया न शाम के 7 ब्ज गये. ऑलमोस्ट सारे टीचर्स जा चुके थे. न डिपार्टमेंट बिल्कुल वीरान सा ता. काम के बाद मैं माँ से जनरल बातें करने लगा रिगार्डिंगहेयरहज़्बंद न ऑल. बातें करते करते ऑलमोस्ट 8 ब्ज गये न माँ को उनके हज़्बंद का कॉल आ गया. माँ ने एक दम से जल्दी मचा दी न जल्दी जल्दी मैं उनके सूट एक कही फस गया न फॅट गया. माँ की ब्लॅक कलर की ब्रा आगे से दिखनी लगी. मेरा तो खड़ा हो गया. बट मैने माँ को अपना जॅकेट दिया न कहा सॉरी माँ न वाहा से चला गया.

अगले दिन छुट्टी ती बट मैं कॉलेज आया हुआ ता ड्यू तो फेस्ट. माँ ने मजे फोन करके बुलाया की वो ऑफीस मैं है न उन्हे कुछ काम है. मेरा पिछले दिन के इन्सिडेंट के बड़े मैं सोच कर खड़ा हो गया. मैं उनके रूम मैं गया न उन्होने कुछ काम बोले न दें मैं जाने लगा तो उन्होने रोक लिया न कहा ये जॅकेट ले जाओ न थॅंक्स फॉर येस्टरडे. ई साइड नो प्राब्लम माँ. फिर शी साइड की प्लीज़ किसी को ब्ठाना मत. तो मैने भी कहा की नही ब्टौँगा.उन्होने मेरे हाथ पर हाथ रखा न कहा “मजे बाट अछा लगा थे वे उ रिक्टेड येस्टरडे” मैने स्माइल कर दिया.

प्रगया: बट एक चीज़ तो तुम बी नही कंट्रोल कर सके

मे: क्या?

प्रगया: तुम्हारा टूल. कुछ ज़्यादा ही खुश हो गया ता वो तो *विंक्स*

मे: न..न..नही नही माँ.

प्रगया: अर्रे डेन बे अफ्रीड.

शी स्टॅंड्स उप न घूमने लग जाती है न म स्टिल सिट्टिंग ऑन माई चेर.

प्रगया: सच सच ब्ताओ

मे: मा..म ऐसा कुछ नही है. सॉरी अगर आपको ऐसा लगा तो.

एक दम से वो पीछे से आ कर मेरे लॅंड पर हाथ रख लेती है

प्रगया: झूते, अबी बी खड़ा है देखो

मे: माँ अब आप हो ही इतनी सुंदर

प्रगया: अछा जी

शी सिट्स ऑन माई लॅप.

प्रगया: ऐसा क्या अछा है मजमे?

मे: सब कुछ माँ..उपर से नीचे ले कर सब कुछ

>ई किसहेयरफोरहेड. आपकी सुंदर सुंदर आँखें. देनहेयरचीक्स क्यूट से गाल. देनहेयरनोस. शराराती सा नोस.न देनहेयरलिप्स.. ई शकहेर लिप्स..उनके मूह मैं अपनी टंग डाल कर. न दें शी स्टार्ट्स फाइटिंग वित माई टंग वित हर्स. उन्हे उठा कर मैने टेबल पर बैठा दिया. स्टिल किस्सिंग न माई हॅंड्ज़ इनसाइडहेयरकमीज़. किस करते करते मैं उनकी कमीज़ उतार देता हूँ न ई मेकहेयरलिए डाउन ऑन थे टेबल.

मे:आपकी प्यारी सी गर्दन न ई किसहेयरनेक..

प्रगया: अहहहह.. बस करो कारण.

मे: आपके ये बड़े बड़े बूब्स. इनके लिए तो मैं कुछ भी लूटा दूं.

ई स्टार्टेड रब्बिंग देम ब्रा के उपर से ही.ई अनहुकहेयरऔर स्टार्टेड सकिंगहेयरनिपल्स. वन बाये वन. चूस चूस कर लाल कर दिए मैने. ई ईवन बीत देम.

प्रगया: अहह…ज़ोर से कारण….ईट देम..रंडी ब्ना दो मजे.

मे: आपकी ये सूते सी कमर. ई किसहेयरस्टमक न लीकहेयरनेवाले.

प्रगया: सस्स्स्सस्स…….ओह कारण

ई देन रिमूवहेयरसलवार न ग्रॅबहेयरगान्ड

मे: आपकी ये प्यारी सी मोटी सी गान्ड.ई प्रेस इट हार्ड न किसहेयरपुसी पेंटी के उपर से.

प्रगया: ऑश कारण..चूसो मेरी चुत को..शी प्रेसस माई फेस अगेन्स्टहेयरपुसी ई रिमूवहेयरपेंटी न किसहेयरचुत. उसके बाद ई स्टार्ट लिकिंग इट. वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगती है..

प्रगया: ओह कारण…..डीपर.. डाल दो अपनी जाब अंदर… सॅटिस्फाइ मे….फक मे कारण फक मे..

ई स्टार्टेड फिंगरिंग हेर. 2 उंगलियाँ..न साथ ही अपनी टंग से ई कीप लिकिंगहेयरचुत.

प्रगया: ओह अहहहह….फास्टर और तेज़…न शी कम्स इन 20 मिनट.

प्रगया: ओह कारण..मज़ा आ गया..अब प्ल्ज़्ज़ चोद बी दो मजे..क्यू तडपा रहे हो.. शी टेक्स आउट माई 7″ लूँ. न रब्स इट.

मे: माँ प्ल्ज़ मूह मे लो ना..

प्रगया: शुवर बेबी. न वो अपने मूह मे ले कर उसे चूसने लगती है..बुत उन्हे ब्ज इतनी पसंद नही सो शी टेक्स इट आउट आफ्टर 2 मीं.

प्रगया: अब डाल दो इस लॅंड को मेरे अंदर. फक मे हार्ड कारण.

मई उन्हे उल्टा करटा हूँ..अगेन्स्ट थे टेबल न अपना लॅंड उनकी चुत मैं डाल देता हूँ फ्रॉम बिहाइंड.न स्टार्ट फक्किंग हेर..

प्रगया: ओह कारण…फाड़ दी मेरी चुत तुम्हारे लूँ…फक मे कारण…डीपर फास्टर…ज़ोर से कारण..ज़ोर से..
ई फकहेयरहार्ड न फ़स्तन स्लॅपहेयरआस रिपीटेड्ली..

प्रगया: आह कारण…म उर रंडी फुक्कककककक मीईए.अहह…म्‍म्म्मममममममममम..ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ..छोड़ दो मजे…शांत कर दो इस चुत की आग..तुम्हारे लॅंड की दीवानी हो गयी हूँ मैं ..छोड़ो मजे…ज़ोर से…फक फक फक फक फक फक फक……….अहह अहह्ा हह्ा हहहह अहहा हााहह्ा हहा हहह. फुक्कककककक मीईए..आंड देन आधा घंटा की चुदाई के बाद वो झाड़ जाती है न मैं बी उनके अंदर झाड़ जाता हूँ..

वी हद सेक्स आ कपल मोरे टाइम्स इन थे नेक्स्ट 2 मंत्स आफ्टर तीस. अब मेरा कॉलेज ख़त्म हो गया. टा नही फिर कब चान्स मिले.

लंड की समस्या का कमाल

antarvasna Kamukta hindi sex indian sex chudai Kahani हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम नीरज है और में कामुकता डॉट कॉम पर बहुत लंबे समय से सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और ऐसी ही एक कहानी में आज आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ। यह कहानी तब की है.. जब में बारहवीं क्लास में पड़ता था और मेरा सेक्स के प्रति बहुत झुकाव था। मेरे घर के पास एक मीनाक्षी नाम की आंटी रहती थी। उनकी उम्र उस समय 38-40 होगी.. वो बहुत सुंदर थी और उनका फिगर इतना मस्त था कि कोई भी पागल हो जाए। मुझे उनके फिगर का साईज तो पता नहीं बस इतना आज भी याद है कि उनके बूब्स बहुत बड़े बड़े और टाईट थे और गांड भी बहुत चौड़ी और टाईट थी। उनके दो बच्चे दिल्ली और जयपुर से पढ़ाई कर रहे थे। इसलिए अंकल और आंटी घर में अकेले ही रहते थे। अंकल बेंक में नौकरी करते थे और आंटी स्कूल में टीचर थी। में आंटी को हमेशा से ही बहुत पसंद करता था और उनके बूब्स को हमेशा छुपकर देखा करता था और उनके बारे में सोचकर मुठ भी मारा करता था। मेरे मन में बस यही चाहत थी कि किसी तरह उनको एक बार चोद सकूँ।

एक बार उनके पति दिल्ली अपनी बेटी के कॉलेज में गये हुए थे और वहाँ से अपने कुछ रिश्तेदारों के यहाँ भी होकर आने का प्लान बनाया था। लेकिन आंटी नहीं जा सकी क्योंकि उस समय उनके पास दसवीं क्लास के पेपर्स चेक होने के लिये आए थे.. इसलिए उनको घर पर ही रुकना पड़ा। किस्मत से उसी समय मेरे मम्मी, पापा भी दस दिनों के लिए बाहर गये हुए थे। घर पर में, मेरी दीदी, दादी और दादा जी थे। उसी शाम आंटी हमारे घर पर आई और बोली कि मेरी दीदी रात को उनके यहाँ पर सो जाए क्योंकि वो घर पर अकेली हैं। मुझे लगा कि इस बार भी कुछ काम नहीं हो पाएगा क्योंकि में तो उनके यहाँ जा ही नहीं पाऊंगा। में यह बात सोचते सोचते गुस्से में टीवी देखने लगा। तभी दीदी मुझे पढ़ाई करने के लिए डाँटने लगी पर में नहीं माना और टीवी देखता रहा और फिर मेरी दीदी ने रिमोट पटक दिया.. इस बात पर मेरी और मेरी दीदी की लड़ाई हो गयी।

फिर दीदी ने गुस्से में कहा कि मुझे कहीं नहीं जाना तुम ही घर से बाहर जाओ। तुम आंटी के यहाँ जाओ और आज वहीं सोना घर में आने की जरूरत नहीं है। में सोचने लगा कि ग़लती से ही सही एक मौका तो मिला और में आंटी के यहाँ गया और उन्हे सारी बात बताई और मैंने कहा कि आज से मुझे ही रात को यहाँ आना पड़ेगा। आंटी ने मुझे समझाया कि अपनी बड़ी दीदी से झगड़ा क्यों करते हो? और कहा कि चलो कोई बात नहीं तुम्ही सो जाना। दोस्तों मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था और रात को सोने से पहले मैंने कपड़े चेंज किये और सिर्फ एक केप्री पहन ली और सो गया। वैसे तो मेरा कोई खास शरीर नहीं है में दुबला पतला लड़का हूँ। फिर एक बार तो आंटी ने मुझे गौर से देखा.. लेकिन कुछ नहीं बोली और हम एक ही बेड पर कूलर वाले रूम में सो गये क्योंकि गर्मी बहुत थी। देर रात को मैंने नींद में ऐसे ही धीरे से आंटी के बूब्स पर हाथ रखा.. आंटी गहरी नींद में सो रही थी। फिर मैंने धीरे से ब्लाउज का एक बटन खोला कि आंटी हिलने लगी और करवट लेकर मेरी तरफ घूम गयी.. लेकिन मेरा एक हाथ उनके नीचे दब गया। फिर धीरे से मैंने हाथ बाहर निकाला तो उनकी नींद खुल गयी और में तुरंत नींद में होने का नाटक करने लगा और उनको भी ऐसा ही लगा कि शायद यह सब नींद में ही हो गया होगा। फिर थोड़ी देर बाद में इधर उधर करवट लेने लगा.. तो बेड की आवाज़ से आंटी की नींद खुल गयी और वो मुझसे पूछने लगी कि क्यों नींद नहीं आ रही है क्या? तो मैंने कहा कि हाँ मुझे नींद नहीं आ रही है। आंटी ने पूछा कि क्यों नहीं आ रही? फिर मैंने बहुत देर सोचा और बड़ी हिम्मत करके कहा कि कुछ प्राब्लम है। तो उन्होंने फिर पूछा कि क्या हुआ? क्या समस्या है बताओ? और बड़ी हिम्मत करके मैंने कहा कि में जिससे टॉयलेट करता हूँ वो बहुत ज़्यादा टाईट हो गया है और उसमे बहुत खिंचाव भी हो रहा है। दोस्तों.. मैंने यह सोचा कि ऐसा सुनने के बाद आंटी का सेक्स करने का मन हो जाएगा। लेकिन इस बात का आंटी पर वैसा कोई असर नहीं हुआ जैसा मैंने सोचा था। उन्होंने तुरंत पूछा कि ऐसा कब से हो रहा है? और कहा कि अपने पापा को बोलकर किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाओ।

मैंने कहा कि ऐसा तो पिछले एक साल से हो रहा है। फिर उन्होंने कहा कि डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाया? तो मैंने कहा कि वो जो नौकरानी पहले हमारे घर पर काम करने आती थी.. वो इसको ठीक कर देती थी। तो उन्होंने पूछा कि उस नौकरानी को कैसे पता चला? तो मैंने कहा कि में एक दिन टीवी पर फिल्म देख रहा था और घर पर कोई नहीं था.. तब भी ऐसा ही हुआ था और उस वक़्त नौकरानी ने ही ठीक किया था और उसके बाद जब भी ऐसा होता था तो वही ठीक कर देती थी। उन्होंने कहा कि तुम्हे उससे ठीक करना सीख लेना चाहिए था और खुद ही कर लेते। तो मैंने कहा कि मैंने बहुत बार किया था.. लेकिन मुझसे ठीक हुआ ही नहीं जैसे वो करती थी और अब तो वो आती भी नहीं है। फिर आंटी ने कहा कि अब तुमको होता है तो तुम क्या करते हो? मैंने कहा कि में तो बस पेट के बल लेट जाता हूँ और बहुत ज़ोर ज़ोर से रगड़ता हूँ और थोड़ी ही देर के बाद सब ठीक हो जाता है.. लेकिन जैसे वो करती थी वैसा आराम नहीं मिलता है।

फिर आंटी ने पूछा कि यह बताओ कि तुम्हारी नौकरानी कैसे ठीक करती थी? तो मैंने कहा कि जब मुझे पहली बार हुआ था तब में घर पर अकेला था और वो रूम में झाड़ू लगा रही थी और तब मेरा बहुत ज़ोर से टाईट हुआ था और बहुत खुजली भी हो रही थी और इतना ज़ोर से टाईट हुआ था कि पेंट के बाहर दिख रहा था और में बेड पर लेट गया और तकिये को ज़ोर से रगड़ने लगा.. तब वो उस समय रूम में ही थी और उसने पूछा कि क्या हुआ? तब मैंने अपनी समस्या उसे बताई.. तो उसने कहा कि वो यह ठीक कर सकती है.. लेकिन मेरी भी एक समस्या है? और जब मैंने पूछा तो उसने कहा कि तुम्हे अपनी पेंट को उतारना पड़ेगा। मैंने कहा कि क्या ऐसा करने से ठीक हो जाएगा? तो उसने कहा कि हाँ पक्का ठीक होगा और फिर मैंने अपनी पेंट को उतार दिया.. तो वो मेरे लंड को अपने हाथ में बड़े अजीब तरीके से पकड़ कर हिलाने लगी और लंड की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी और थोड़ी देर बाद मुहं में लेकर चूसने लगी और थोड़ी देर बाद मेरे लंड से कुछ रस निकला और मेरी समस्या एकदम ठीक हो गई। फिर उसके बाद जब भी ऐसा हुआ तो वो हमेशा ऐसा ही कर देती थी और अगर घर पर कोई रहता तो छत पर जो कमरा है उसमे जाकर करती थी। लेकिन हमेशा ठीक हो जाता था। तो यह सुनकर आंटी बहुत चकित हुई और मेरे लंड की तरफ देखने लगी जो कि पेंट के अंदर खड़ा हो गया था और टेंट बना हुआ था। फिर मैंने आंटी से कहा कि आज बहुत ज़ोर से खुजली हो रही है और आज टाईट भी बहुत ज़्यादा हो गया है और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है। फिर आंटी ने कहा कि वो जो सब कुछ तुम्हारे साथ करती थी वो बहुत गंदी बात है। मैंने कहा कि मुझे यह सब नहीं मालूम.. मुझे बस अपनी समस्या से आराम मिल जाता था। फिर मैंने कहा कि आंटी अब मुझेसे कंट्रोल नहीं हो रहा है और मैंने तकिये को अपने लंड के नीचे रखा और ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगा.. दोस्तों यह समझ लो कि में आंटी के सामने उस तकिये को चोदने लगा। तो आंटी ने कहा कि अरे तुम यह क्या कर रहे हो? मैंने फिर से कहा कि अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है और मुझे थोड़ी ही देर में आराम मिल जाएगा.. बस एक बार वीर्य निकल जाए। तो आंटी ने सोचा कि में बेड पर वीर्य गिराकर बेड खराब कर दूँगा और फिर आंटी ने कहा कि अरे यहाँ पर ऐसे मत करो.. यह सब बाथरूम में जाकर करो। तो मैंने कहा कि मुझसे बाथरुम में नहीं होगा क्योंकि मुझे वो तरीका नहीं आता और मैंने भी बहुत बार ट्राई किया है.. लेकिन कुछ नहीं हुआ और मुझे लगता है कि जब कोई लड़की या औरत उस तरीके से करती है तो आराम तुरंत मिल जाता है और क्यों ना में आपको तरीका बता देता हूँ आप कर दीजिए?

आंटी बहुत चकित हुई और मुझे गुस्से से देखने लगी.. मैंने एक बार और उनसे आग्रह किया और तकिये को कसकर रगड़ने लगा। फिर आंटी ने पहले तो मना किया और थोड़ी देर बाद कहा कि ठीक है में बस एक बार कर देती हूँ.. लेकिन यहाँ पर नहीं बाथरूम में चलो। फिर में उनके साथ बाथरूम में गया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो तुम यह बात किसी से नहीं कहोगे और में जो भी करूँगी वो सब हाथ से करूँगी.. तुम्हारी नौकरानी की तरह मुहं से कुछ भी नहीं करूँगी। तो मैंने वादा किया कि में किसी से नहीं कहूँगा और कहा कि आपको जैसे भी जो भी करना है कीजिए.. बस मुझे आराम दिला दीजिए। फिर उन्होंने कहा कि अपनी पेंट को खोलो.. में मन ही मन सोच रहा था कि अब तो चोदने का मौका मिल ही जाएगा। फिर मैंने अपनी पेंट को उतार दिया। मेरा लंड अंडरवियर के अंदर से ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी फाड़कर बाहर निकल जाएगा। फिर उन्होंने कहा कि अपनी अंडरवियर को भी जल्दी से उतारो बहुत रात हो गयी है और मैंने अपनी अंडरवियर को उतार दिया और वो मेरे 6.5 इंच के लंड को देखकर बहुत हैरान हो गयी।

फिर उन्होंने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा और धीरे धीरे हिलाने लगी और उन्होंने मेरे लंड की पूरी चमड़ी को उतार दिया और सुपाड़ा लाल लाल दिखने लगा और अब वो चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी और वो इतने मस्त तरीके से हिला रही थी.. मुझे लगा कि आंटी का भी अब सेक्स करने का मन हो गया है और यह बात सोचकर जब आंटी मेरा लंड हिला रही थी तब मैंने अपना एक हाथ उनके बूब्स को दबाने के लिए आगे किया और फिर आंटी ने मेरा लंड छोड़कर मुझे एक कसकर थप्पड़ लगा दिया और कहा कि में तुम्हारी प्राब्लम के लिए यह कर रही हूँ और तुम मेरे शरीर को छू रहे हो.. जाओ में अब कुछ नहीं करूँगी और तुम भी दूसरे रूम में जाकर सो जाओ। तो मैंने कहा कि आंटी जब वो नौकरानी ऐसे करती थी तब में इसी तरह से उसके शरीर के हिस्से को छूता था जिससे मेरा वीर्य जल्दी निकल जाता था और वो नौकरानी ही मुझसे ऐसा करने के लिए कहती थी। लेकिन आपको बुरा लगा तो मुझे माफ़ करे.. लेकिन आंटी प्लीज आप जो कर रहे थे उसे पूरा कर दीजिए। फिर आंटी ने कहा कि चलो लाओ जल्दी से कर दूं और फिर सोना भी है और फिर उन्होंने मेरे लंड को पकड़ा और बड़े मस्त तरीके से हिलाने लगी और आंटी लंड की चमड़ी को ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे करने लगी। में आखें बंद करके कंट्रोल किए हुआ था कि आज वीर्य छूटने नहीं दूँगा ताकि थोड़ी देर ही सही मेरे लंड को आंटी के हाथों का सुख प्राप्त होगा। फिर आंटी ने कहा कि बहुत अच्छा कंट्रोल कर लेते हो और कहा कि जब वीर्य आने लगे तो बता देना। तो मैंने आआहह करते हुए हाँ भरी और लगभग 4 मिनट हो चुके थे और अब मेरा वीर्य निकलने वाला था और मैंने आंटी को नहीं बोला और जैसे ही लंड से वीर्य बाहर निकलने लगा तो मेरा शरीर कांप उठा और मुझे कसकर पकड़ने को कुछ चाहिए था और मैंने पास में खड़ी आंटी को ही कसकर अपनी बाहों में पकड़ लिया और मेरा वीर्य निकल गया। मेरा थोड़ा सा वीर्य उनकी साड़ी और पेट पर लग गया और मैंने उनको कसकर पकड़े रखा था। आंटी छुड़ाने की कोशिश कर रही थी.. लेकिन दोस्तों जिस समय वीर्य निकलता है उस समय कंट्रोल करना बिल्कुल ही मुश्किल हो जाता है और तभी मैंने उनकी गर्दन पर किस कर दिए। तो आंटी ने मुझे ज़ोर से धक्का दिया और फिर से एक थप्पड़ लगा दिया और कहा कि कुछ तो शरम करो। मैंने इसलिए तो कहा था कि जब निकलने वाला हो तो बोल देना और मेरी साड़ी भी पूरी गंदी कर दी और मुझसे कहा कि क्यों हो गये ना अब तो नॉर्मल.. अब जाकर सो जाओ और मुझे अपने कपड़े चेंज करने दो।

में सोने के लिए रूम में आ गया और थोड़ी देर बाद आंटी भी आ गई। आंटी सिर्फ अपनी साड़ी उतारकर आ गयी और उन्होंने बस ब्लाउज और पेटीकोट ही पहना हुआ था। मैंने उनकी तरफ नजरें चुराकर देखा.. लेकिन आँख नहीं खोली। उन्होंने मुझे और फिर से मेरे लंड की तरफ देखा और बाप रे बाप बोलकर लेट गयी। फिर थोड़ी देर बाद सुबह हो गयी और में अपने घर चला गया। इस तरह वो तीन दिन तक लगातार मेरी मुठ मारती रही। लेकिन उनके अंदर सेक्स के लिए कोई अहसास नहीं आया और में समझ गया कि ऐसे कुछ नहीं होने वाला.. मुझे कुछ और करना होगा। फिर मुझे याद आया कि उन्होंने अपने घर की एक चाबी मुझे भी दे रखी थी और कहा था कि अगर तुम्हे दिन में भी आना हो तो आकर टीवी देख लेना। चोथे दिन मैंने सोचा कि अब कुछ और करना होगा। तो मैंने एक और प्लान बनाया और मुझे याद आया कि हर रोज स्कूल से आने के बाद वो नहाने जाती हैं और नहाने के बाद नंगी ही बाहर आ जाती हैं और फिर ब्रा और पेंटी पहनकर कर सो जाती हैं और फिर शाम को उठती हैं।

उस दिन भी जैसे ही वो स्कूल से आई और सीधी नहाने चली गयी तो उनके बाथरूम में जाने के बाद में भी दूसरी चाबी से जो मेरे पास थी घर के अंदर आ गया और फिर जिस रूम से अटेच बाथरूम था उसी रूम में उनकी ब्रा, पेंटी और टावल बेड पर रखा हुआ था। मैंने उनकी ब्रा, पेंटी को उठाकर अलमारी में रख दिया जो कि दूसरे रूम में थी और टावल को उठाकर तीसरे कमरे में चला गया और मैंने तीसरे कमरे में जाकर अपने कपड़े उतार दिए और टावल पहनकर उस बाथरूम की तरफ जाने लगा जिसमे वो नहा रही थी। में बाथरूम की तरफ बड़ा और जैसे ही कमरे में घुसा तो मैंने देखा कि आंटी पूरी नंगी हालत में बेड पर और बेड के नीचे झुककर कुछ ढूंड रही थी। तभी अचानक पीछे घूमकर देखा और मुझे देखकर हैरान हो गयी और में उनको देखकर हैरान रह गया। वो क्या मस्त लग रही थी उनके बूब्स एकदम सुडोल, बड़े बड़े और टाईट और उनकी गांड क्या चौड़ी और टाईट थी और उनकी चूत जिस पर हल्के हल्के बाल थे वो बहुत मस्त लग रही थी। उनके पास शरीर पर ढकने के लिए कुछ भी नहीं था तो सबसे पहले उन्होंने मुझे दूसरी तरफ देखने के लिए कहा.. लेकिन में नहीं माना और मेरा लंड तो बिल्कुल ही नहीं माना और टावल के अंदर ऐसा खड़ा हो गया कि मानो टवल के अंदर टेंट बन गया हो। उस दिन मेरा सबसे ज़्यादा खड़ा हुआ था क्योंकि मैंने पहली बार किसी नंगी औरत को सामने खड़ी देखा था और वो भी इतनी खूबसूरत। फिर आंटी ने भी नीचे देखा और थोड़ी सी सहम गयी। उन्होंने मुझसे कहा कि तुम यहाँ इस समय क्या करने आए हो? तो मैंने कहा कि में नहाने आया हूँ मेरे घर की मोटर खराब हो गई है। उन्होंने मुझसे कहा कि दूसरे रूम में जाकर मेरे कपड़े लाकर दो और टावल भी। में दूसरे रूम में गया और जाकर बस उनकी ब्रा और पेंटी ले आया। उन्होंने चिल्लाते हुए कहा कि टावल क्यों नहीं लाए और कपड़े की जगह इनको यहाँ पर क्यों लाए हो? तो मैंने कहा कि यह भी तो कपड़े ही हैं और अभी आपको इनकी ही ज़्यादा ज़रूरत है। वो गुस्से से मुझ पर चिल्लाने लगी और डांटने लगी। फिर मैंने उनसे कहा कि मुझे यह टावल आपके बेड पर मिला था इसलिए मैंने पहन लिया.. यह आपका है तो में आपको दे देता हूँ और मैंने वहीं टावल उतार कर दे दिया.. वो मुझ पर ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी कि तुम बहुत गंदे और बेशर्म हो गये हो। तब तक उन्होंने ब्रा पेंटी पहन ली थी और दूसरे कमरे में कुछ और पहनने के लिए जाने लगी.. तो में भी उनके साथ नंगा दूसरे कमरे में चला गया।

फिर उन्होंने अलमारी से साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट निकाला और बेड पर रखे तो मैंने उन कपड़ों को उठाकर दूसरे तरफ रख दिया और कहा कि आप ऐसे ही बहुत अच्छी लग रही हो। तो वो मुझ पर गुस्सा होने लगी और मुझे गाली देते हुए कहा कि अपने कपड़े तो पहन लो। फिर में उनकी तरफ बड़ा और उनको कसकर पकड़ लिया और अपना खड़ा लंड उनकी पेंटी के ऊपर घुमाने लगा और उनसे कहा कि आप मुझे बहुत पसंद हो.. प्लीज़ मुझे एक मौका दे दो। में अपने मोटे लंड से आपको संतुष्ट कर दूँगा और उन्हे गर्दन पर किस करने लगा। तो उन्होंने मुझे धक्का दिया और एक थप्पड़ लगा दिया.. लेकिन में आज कहाँ मानने वाला था। मैंने उन्हे बहुत मनाया और बहुत देर तक कहता रहा कि में आपको संतुष्ट कर दूँगा.. प्लीज मुझे एक बार करने दो। फिर थोड़ी देर बाद वो बोली कि तुमसे ज़्यादा मोटा तो मेरे पति का है इसलिए कपड़े पहनो और घर जाओ। लेकिन में फिर से उनकी तरफ बढ़ा और उनको कसकर पकड़ लिया और अपने हाथ से उनकी पेंटी के ऊपर से चूत को सहलाने लगा और वो मुझे धक्का देती रही। लेकिन मैंने भी अपनी पूरी ताक़त लगा दी और फिर मैंने अपना हाथ जैसे ही पेंटी में डाला तो उन्होंने ज़ोर से मुझे धक्के मारने शुरू कर दिए।

तब में वहीं बैठकर रोने लगा और वो अपने कपड़े पहनने लगी। उसके बाद मुझे चुप करने के लिए मेरे पास आई.. तो मैंने कहा कि मुझे सेक्स करने का बहुत ज़्यादा मन करता है और आपके जितनी खूबसूरत औरत कोई नहीं है। फिर वो बोली कि देखो सबसे पहले तो में शादीशुदा हूँ और तुम्हारी माँ की उम्र की हूँ। मैंने कहा कि जब भी में आपको देखता हूँ अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाता.. प्लीज़ मुझे आप एक बार सेक्स करने दो.. में कभी कुछ नहीं कहूँगा। में आपके बूब्स से दूध पीना चाहता हूँ और में आपको संतुष्ट करूँगा.. यह मेरा वादा है और अगर नहीं कर पाया तो कभी आपसे इस बारे में बात नहीं करूँगा। तो आंटी ने कहा कि देखो यह तो तुम शुरू से कह रहे हो कि आपको संतुष्ट करूँगा.. यह तो तुमसे होने से रहा और में यह सब तुम्हारे साथ नहीं कर सकती। फिर मैंने कहा कि में आपको अगर संतुष्ट नहीं कर पाया तो आप जो कहेंगी वो में करूँगा और में आपसे पक्का वादा करता हूँ कि में किसी से नहीं कहूँगा। लेकिन फिर भी वो नहीं मानी और वो वहाँ से उठकर जाने लगी और मैंने उनके हाथ को पकड़ा और कहा कि आपने यह क्यों कहा कि में आपको संतुष्ट नहीं कर सकता? तो आंटी ने मेरे नंगे बदन की तरफ देखा और कहा कि तुम इतने दुबले पतले हो और फिर मेरे लंड की तरफ देखकर कहा कि चलो ठीक है तुम्हारा लंड लंबा है, बहुत मोटा है.. लेकिन फिर भी मुझे नहीं लगता कि तुममें इतना जोश है? और आंटी ने कहा कि वैसे भी में तुम्हारे साथ नहीं करना चाहती हूँ क्योंकि में तुम्हारी मम्मी की उम्र की हूँ और यह सारी बातें गंदी हैं.. थोड़ी अच्छी बातें सोचा करो। में समझती हूँ इस उम्र में होता है.. लेकिन कंट्रोल करने की कोशिश किया करो। फिर मैंने कहा कि आंटी मुझसे कंट्रोल नहीं होता और जो आप कह रही है कि में आपको संतुष्ट नहीं कर सकता.. यह आप मुझे एक मौका देने के बाद कहना। में आपसे वादा करता हूँ कि में आपको अच्छी तरह से संतुष्ट करूँगा। उन्होंने मुझसे कहा कि एक बार सोच लो में इतनी आसानी से संतुष्ट नहीं होती हूँ।

मैंने कहा कि हाँ मैंने सोच लिया और उनकी तरफ बढ़ा और उन्हे पकड़ लिया और मैंने कहा कि जैसे जैसे में कहता हूँ बस आप करते जाओ.. इससे आज पूरी तरह से संतुष्ट हो जाओगे। में उन्हें किस करने लगा फिर में तो जमकर स्मूच करता रहा.. हमारा किस लगभग 11-12 मिनट तक चला.. उसके बाद मैंने उनकी साड़ी को खोल दिया और उनकी गर्दन पर किस करने लगा और उसके बाद मैंने उनके बूब्स पर ब्लाउज के ऊपर से ही बहुत देर तक चूसा और मेरे थूक से पूरा ब्लाउज गीला हो गया। फिर में उनकी नाभि पर किस करने लगा और नाभि और पेट को चूसने लगा और फिर में धीरे धीरे उनकी चूत की तरफ बढ़ा और चूत को पेटीकोट के ऊपर से ही चाटने लगा और उनका पेटीकोट उस जगह पर मेरे थूक से भीग गया और उसके बाद में उन्हें पीछे घुमाकर उनकी गांड को दाँतों से काटने लगा.. जैसे में आज गांड को खा जाऊंगा और फिर धीरे धीरे उनकी पीठ को चाटने लगा। जब में पीठ चाट रहा था तभी एक हाथ से में उनके एक बूब्स को दबा रहा था और एक हाथ उनकी गांड पर रखकर रगड़ रहा था और ऐसा करने से आंटी तो एकदम मदहोश हो चुकी थी। फिर मैंने पीछे से उनके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए और एक एक करके सारे बटन खोल दिए। फिर आगे आकर बूब्स को ब्रा के ऊपर से चूसने लगा और फिर अपने हाथों से उनके ब्लाउज को उतार दिया और उनके बूब्स को चूसने लगा। में एक बूब्स को चूसता और दूसरे को दबाता.. दबाने चूसने में ही आंटी इतनी मदहोश हो गयी कि ज़ोर से मेरे लंड को पकड़कर हिलाने लगी और नीचे झुककर चूसने लगी। में समझ गया कि आंटी की घंटी बज चुकी है अब और कमाल करना होगा।

दोस्तों आगे की कहानी अगले भाग में …

आंटी का दूध

आंटी का दूध – Hindi Sexy Story

हेलो दोस्तो, आज बहुत दीनो बाद मैं अपनी कहानी आप लोगो को सुनने जा रहा हूँ, मेरा नाम हर्ष है, मैं 24 साल का हूँ, मुझे उमिद है आप सभी ने मेरी पूरेानी कहानिया पढ़ी होंगी, मैं मुंबई मे रहता हूँ, आज मैं आपको जो कहानी सुनने जा रहा हूँ वो 2 महीने पहले घाटी हुई है, मैं जहा पे रहता हूँ वाहा पे दो घर छोड़के एक मकान मे नये किरायेदार आए थे, उसमे उनकी पूरी फॅमिली थी भैया, भाभी, उनके आंटी और अंकल और उनका छोटा 6 साल का लड़का सोनू, भैया कही मंक मे जॉब करते थे और भाभी स्कूल टीचर थी और भैया के अंकल भी कही जॉब करते थे, और उनकी बीवी घर पे ही रहती थी उनके पोते को संभालने के लिए, उनका नाम था कावेरी सिन्हा था, उनकी उमर 52 साल थी, दिखने मे एक दम मस्त थी अपने आप को बहुत मेंतेन कर रखा था उन्होने, थोड़े ही दीनो मे हमारे घर उनका आना जाना शुरू हुआ, और अच्छे रीलेशन बन गये हमारे उनके साथ, भैया और भाभी कभी-कभी घूमने जाते तो उनके लड़के को घर पे ही छोड़ते थे और कावेरी आंटी उसकी देखभाल कराती थी, जब भी मैं घर पे रहता था तो मैं भी उनके लड़के के साथ खेलने उसके घर जाता था और वो भी बहुत मस्ती कराता था.

लेकिन मुझे कावेरी आंटी मे बहुत इंटेरेस्ट था, वो मुझे बहुत अच्छी लगती थी और मैं जड़तर उनसे बाते कराता रहता था, और वो भी मुझसे खुल कर बाते कराती थी, कावेरी आंटी के बड़े बताता हूँ उनके बूब्स कुछ 38 के होंगे और कमर 34 की और उनकी गान्ड कुछ 40 की है, मैं जब भी उन्हे देखता था मुझे कुछ ना कुछ हो जाता था, मैने कही बार उनके नाम से लॅंड हिलाया था, मैं जब भी उनके घर जाता कावेरी आंटी को ही देखता रहता था और मैने बहुत बार उनकी क्लीवेज देखी और ये भी पता चला था के वो अंदर ब्रा नही पहनती थी, उसकी वजह से वो मुझे और भी सेक्सी लगती थी, एक दिन मेरे घर वाले बाहर गये हुए और मैं घर पे अकेला था, तो मैने ऐसे ही टाइम पास करने के लिए सोनू को बुलाया था और हम दोनो ऐसे ही घर मे खेल रहे थे, फिर कुछ देर बाद उसकी अंकली भी आ गयी देखने के लिए और वो सोफे पे बेठ गयी हमारे साथ, और सोनू भी उनकी गोद मे जाके बेठ गया, तभी मेरे दिमाग़ मे कुछ आया और मैं भी उनके बगल मे जाके बेठ गया, और फिर ऐसे ही मज़ाक मे मैं सोनू को छिड़ने लगा, मैं “सोनू अंकली मेरी है”, सोनू “नही मेरी है”, और आप सभी को पता है अगर छोटे बच्चों के साथ ऐसे खेलने से वो भी चिढ़ते है.

फिर मैं कावेरी आंटी के करीब गया और उनके हाथ मे हाथ लेके फिर से कहने लगा, और फिर वो भी आंटी का हाथ मेरे हाथ से चुद़ता था, ऐसे ही कर करके मैने आंटी को साइड से अपनी बाहों मे लिया, एक पल के लिए मुझे थोड़ा दर भी लगा क्योकि अगर आंटी को बुरा लगा तो, लेकिन आंटी ने कुछ नही कहा वो बस स्माइल दे रही थी, अब मैने थोड़ी देर और आंटी को वेसए ही रखा फिर आंटी ने भी अपना सिर मेरे खंधो पर रख कर सोनू को छिड़ने लगी और हास रही थी, आंटी “हन सोनू मैं हर्ष की हूँ, तुम्हारे तो मम्मी पापा है”, अब सोनू भी चिढ़ गया था और रोने वाला था, ये बात हम दोनो ने संजी फिर आंटी ने थोड़ा आगे झुक कर उसे सिने से लगाया और फिर से मेरे कंधे पर अपना सिर रख कर उसे कहने लगी, आंटी “हन मेरा बच्चा मैं तुम्हारी हूँ अब तो खुश”, फिर सोनू भी मुझे देख कर हासने लगा, लेकिन यहा मेरी हालत बहुत खराब थी एक तो आंटी इतनी चिपक के बेठी थी के मेरा लॅंड अब खड़ा हो गया था, और अंदर झटके मार रहा था, उसके बाद आंटी ने सोनू को गोद मे उठाया और खड़ी हो गयी, उसके बाद मैं भी खड़ा हुआ और आंटी के पीछे जाके सोनू से बात कर रहा था और आंटी की गान्ड पर मेरा लॅंड धीरे-धीरे सहला रहा था.

लेकिन आंटी ने एक बार भी कुछ नही कहा और ना ही पीछे मूड के देखा, मुझे थोड़ी और हिम्मत आई और आंटी को पीछे से हग किया और सोनू से कहा, मैं “ये मेरी आंटी है तुम्हारी नही”, और उसे चिड़के दिखाने लगा और मैने अपना लॅंड आंटी की गान्ड की दरार मे घुसा दिया, लेकिन फिर भी आंटी ने कुछ नही कहा और सोनू से कहा के मैं तुम्हारी हूँ डियर डोंट वरी और फिर हसके चली गयी, अब मुझे भी ऐसा लग रहा था शायद आंटी को भी अच्छा लगा होगा, अब कुछ ना कुछ करके आंटी छोड़ने के बड़े मे सोचने लगा था, फिर कुछ दिन निकल गये अब आंटी भी मुझे मोका मिलने पर इधर-उधर छू लेती थी और मैं भी आंटी को छू लेता था कुछ ना कुछ रीज़न के बहाने, और ऐसे ही एकबार मैं उनके घर गया था तब मैने देखा आंटी ने सोनू को अपनी गोद मे लिटाया था और उनका एक बूब उसे चूसने के लिए दिया और उपर से पल्लू लिया था, ये देख कर मुझे थोड़ा अजीब लगा लेकिन जेसे ही आंटी की नज़र मुज पर पड़ी, आंटी “अरे हर्ष आओ बेठो इसको आदत है अभी भी दूध पीने की, इसकी मम्मी नही रहती”, मैं “लेकिन आंटी क्या अब भी आपका दूध आता है”, आंटी “अरे नही बेटा वो तो ऐसे ही इसे समझने के लिए करना पड़ता है”.मैं “अच्छा ऐसा है क्या”, और इतना कह कर मैं जानबुज कर आंटी के बाजू मे जाके बेठ गया, और बार-बार मेरी नज़र आंटी के बूब्स के उपर ही जा रही थी, और ये बात आंटी ने भी नोटीस की और कहने लगी, आंटी “क्या हुआ हर्ष ऐसे क्यो देख रहे हो क्या तुम्हे भी दूध पीना है”, और इतना कह के आंटी हासने लगी, फिर मैने भी हिम्मत करके कहा, मैं “हन आंटी पिलाओगी क्या आप?”, आंटी ‘चल हट बड़े भी कभी दूध पीते है क्या”, और अब मैं भी ज़िद करने लगा, मैं “प्लीज़ आंटी एक बार पीला दो ना, किसी को नही बताउँगा मैं”, आंटी “अरे बेटा लेकिन इससे दूध नही आता है, तो केसे”, मैं “तो क्या हुआ आंटी बस एक बार मेरा मन है चूसने का प्लीज़”, आंटी “ओक रुक पहले सोनू को सुला देती हूँ फिर तू पे लेना”, मैने ओक कहा और फिर थोड़ी देर बाद सोनू सो गया और आंटी मुझे अपने बेडरूम मे लेके गयी और वाहा पर खड़े-खड़े ही बूब्स चूसने के लिए बोलने लगी, लेकिन मैने माना किया और कहा”, मैं “नही ना आंटी आप मुझे अपनी गोदी मे लो और फिर मैं चुसूंगा”, आंटी “ऑश ओक आओ जल्दी”, फिर आंटी बेड पर बेठ गयी और मैं उनकी गोद मे अपना सिर रख कर बेठ गया.

अब आंटी ने अपना ब्ल्ौसे उठाया और एक बूब बाहर निकाला और मेरे मूह मे दस दिया, अहहह आंटी के निपल थोड़े ब्राउन कलर के थे, आआहहहहाः अब मैं तो पागल हो गया था उन्हे देख कर और चुस्कर, आहह उम्म्म्माआ मुआहहाा मैं उनके निपल चूस रहा था और मेरा लॅंड भी खड़ा हो गया था और वो पेंट के उपर से दिख रहा था, आंटी “आहह थोड़ा धीरे-धीरे चूसो ना बेटा ह्म्‍म्म्म”, लेकिन अब मैं सुनने के मूड मे नही था और मैने अपने एक हाथ से आंटी का दूसरा बूब भी पकड़ने लगा था, लेकिन वो हाथ मे नही आ रहा था फिर आंटी ने अपना ब्लाउस पूरा उतार दिया, और अब मैं आराम से आंटी का पूरा बूब्स चूसने लगा था और दूसरा एक हाथ से सहलाने लगा था, आंटी “आहह बेटा क्या कर रहे हो अहहहहहा अब बस हो गया कितना चुसोगे अहहहहहाः, मैं “उम्मा नही आंटी बहुत मस्त है आपके दूध मज़ा आ रहा है चूसने मे उम्म्माआ, कितने नरम है अहहहहहहाः उम्म्म्माआ”, अब आंटी भी मोन कर रही थी और उनका ध्यान मेरे खड़े लॅंड पर बार बार जा रहा था और मैं भी अब बिना चिंता किए आंटी के बूब्स चूस रहा था, अब आंटी से भी रहा नही जा रहा था वो कभी मेरे बाल सहलाती थी तो कभी-कभी मेरे को गुर्ती थी.

अब उनसे और कंट्रोल नही हुआ, आंटी “आहह बेटा ये तुम्हारी पेंट मे क्या रखा है, जो इतना टाइट हो गया है”, मैं “उम्माआ आहः आप ही देख लो ना आंटी निकल के क्या है”, फिर आंटी ने मेरी पेंट के बतन खोले और मैने आनी गान्ड उठाई और पेंट नीचे कर दी अंडरवियर के साथ, मेरा लॅंड बाहर आ गया था आआहहहाः कितनी रहट मिली थी मेरे लॅंड को, आह और फिर आंटी ने लॅंड हाथ मे लिया और सहलाने लगी, आंटी “आहह कितना बड़ा है तुम्हारा बेटा आअहह क्या मैं भी इसे चूस सकती हूँ”, आईं “आहह क्या सच मे आप इसे चुसोगी अहहहहा”, आंटी “हन बेटा एक मिनिट”, और आंटी ने अपनी सारी और पेटिकोट निकल दिया और मुहे बेड पर बिठा के खुद नीचे बेठकर मेरा लॅंड चूसने लगी, मैं “अहह कितना मज़ा आ रहा है आंटी आआहहहहः”, आंटी “आहह अमा कितने सालो बाद लॅंड मिला है और वो भी इतना मोटा और टेस्टी आहहः, मुझे भी मज़ा आ रहा है आअहह”, मैं “मतलब अब आप अंकल से चुद़वति नही हो क्या”, आंटी “आहह “नही बेटा उन्हे फ़ुर्सत नही होती अब आअहह, अब वो सब टॉपिक मत निकालो तुम बस एंजाय करो उम्म्माआ”, ऐसे ही आंटी ने 10 मिंट चूसा और मैने अपना सारा माल आंटी के मूह मे छोड़ दिया और आंटी ने सारा पे लिया.

अब वो मेरे बाजू मे आके लेट गयी और फिर से मेरे लॅंड को सहलाने लगी, आंटी “आहह हर्ष ये बात किसी को मत बठाना प्लीज़”, मैं “आंटी इसकी तुम चिंता मत करो, मैं आपको कब से चाहता हूँ और आपको प्यार करने की इच्छा बहुत पहले से थी उम्म्माआ”, अब हम दोनो स्मूच करने लगे थे, फिर मैं धीरे-धीरे उनकी पूरी बॉडी को किस करके चूमते हुए नीचे तक आ गया और उनकी चुत चातने लगा, ये शायद आंटी ने एक्सेप्ट नही था और वो ज़ोर-ज़ोर से मोन कर रही थी, आंटी “आहहह बेटा ये क्या कर रहे हो आहहहा अहहहहहह आअहहः अहहहहह”, और वो मेरे बालो को सहला रही और मेरा मूह और अंदर डाल रही थी, मैं अपनी ज़ुबान से उन्हे चोदे जा रहा था, अहहहहा कितनी टेस्टी थी उनकी चुत (सच मे गाइस मुझे चुत चूसने मे बहुत मज़ा आता है, अगर किसी को भी अपनी चुत चटवानी है तो मुझे बोल देना मेरा मैल आइ डी नीचे है) कुछ 15 मिंट तक चुत चूसने के बाद वो झाड़ गयी, लेकिन मेरा लॅंड अब खड़ा हो गया था, फिर उन्होने मेरे लॅंड को थोड़ी देर सहलाया और मिशनरी पोज़ लेकर मेरा लॅंड अपनी चुत पर रख दिया, और मैने उनके बूब्स को हाथ मे लेके एक ज़ोरदार झटका लगाया और उनकी तबाद-तोड़ चुदाई करने लगा.

आंटी भी मेरा साथ दे रही थी नीचे से अपनी गान्ड उठा-उठा के आआहहहः सच मे बहुत मज़ा आ रहा था, उनकी चुत मरने मे आहहहहा वो भी मज़े ले रही थी आहहहा, फिर कुछ देर बाद मैने उन्हे उठा के अपनी गोदी मे लिया और खड़े-खड़े उन्हे छोड़ने लगा था अहाहाहह, आंटी “आहह और ज़ोर से चोदा बेटा बहुत अच्छा लग रहा है अहाहहा अहहहहः”, और बार-बार मुझे चूम रही थी और चाट रही थी, मैं भी पूरे जोश मे उनकी चुदाई कर रहा था अहहहहः, फिर 30 मिंट की चुदाई के बाद हम दोनो साथ मे झाड़ गये, एक तूफान थम गया था और आंटी को बेड पर लिटा कर मैं भी उनकी बाजू मे लेट गया, आआआअहह फिर 10 मिंट बाद आंटी ने मुझे उठाया और हम दोनोने कपड़े पहने और तब तक सोनू भी जाग गया था, फिर मैं अपने घर निकल आया, उसके बाद हमे जब भी मोका मिलता हम चुदाई करते हा, सच मे बहुत मज़ा आता है, इतमीनान से चुदाई करने मे, अगर किसी लड़की, आंटी या भाभी को मेरे साथ मज़े लेने है तो आप बे-फिकर हो कर मुझे मैल कर सकते है सीकरेसी और प्राइवसी की गॅरेंटी मैं देता हूँ, मेरी मैल आइ डी है “हर्ष.पाटिल22@याहू.कॉम”.

चूत का पूजन किया दारू पिलाकर

antarvasna Kamukta hindi sex indian sex chudai Kahani हैल्लो दोस्तों.. यह मेरी कामुकता डॉट कॉम पर पहली कहानी है.. लेकिन में उम्मीद करता हूँ कि यह आप सभी को बहुत पसंद आएगी। यह कहानी मेरी और मानसी की पहली चुदाई की कहानी है। मानसी मुझसे तीन साल बड़ी है और वो मुझे अपना भाई मानती है.. लेकिन में तो उसे कुछ और ही समझता हूँ और मानसी का फिगर कुछ खास नहीं है.. लेकिन हाँ उसके बूब्स बहुत बड़े बड़े है और वो जब गांड मटकाती हुई चलती है तो देखने वालों का लंड पानी छोड़ने लगता है। वो अपनी पतली कमर को बहुत झटके देती हुई चलती है। में उसके गदराए हुए बदन को देखकर बहुत खुश होता हूँ और उसके नाम से दिन में एक बार मुठ मारता हूँ। दोस्तों यह बात आज से एक साल पहले की है जब में दिल्ली कॉलेज में एडमिशन लेने गया था। वहाँ पर में सबसे पहले मानसी से मिला जो कि कॉलेज में मेरी सीनियर थी और उसने ही मुझे कॉलेज में एडमिशन लेने में और फ्लेट ढूंढने में मदद की थी। मैंने वहां पर दो कमरों का एक फ्लेट ले लिया था। मानसी और में बहुत अच्छे दोस्त बन गये थे। हम दोनों अक्सर घूमते फिरते थे और बहुत मस्ती करते थे।

फिर एक दिन मानसी ने मुझसे बोला कि उसको दारू पीनी है।

में : नहीं दीदी यह सब बहुत ग़लत बात है।

मानसी : नहीं मुझे तो एक बार दारू पीनी है।

में : अच्छा ठीक है में आपको दारू पिला दूँगा.. लेकिन आपके जन्मदिन वाले दिन।

मानसी : ठीक है मुझे तुम्हारी यह बात भी मंजूर है।

दोस्तों तीन दिन के बाद मानसी का जन्मदिन था और मैंने रात को 12 बजे उसको फोन किया।

में : हैल्लो मानसी दीदी.. आपको जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक हो।

मानसी : हाँ.. तुम्हे बहुत धन्यवाद।

में : अब पार्टी कहाँ पर मिलेगी?

मानसी : पहले तू मुझे दारू पिला.. उसके बाद हम पार्टी करेंगे।

में : अच्छा ठीक है आप कल शाम को 6 बजे तक मेरे फ्लेट पर आ जाना में सब कुछ इंतजाम करके रखूँगा।

मानसी : चलो फिर ठीक है.. बाय।

फिर में 4 बजे मार्केट जाकर एक बोतल विस्की की ले आया.. क्योंकि मुझे अच्छे ब्रांड की दारू ही पसंद है और उसके साथ खाने पीने का थोड़ा बहुत सामान भी ले आया और शाम 6 बजे मेरे फ्लेट का टेलिकॉम बजा और सिक्यूरिटी वाले का फोन था कि एक मेमसाहब आई है, क्या में उन्हें ऊपर भेज दूँ?

में : हाँ भेज दो वो मेरी दीदी है।

फिर गार्ड ने कहा कि ठीक है साहब जी और वो सीधे मेरे फ्लेट पर आ गई। पहले तो मैंने उसको गले लगाया और जन्मदिन की बधाई दी और जन्मदिन के उपहार में उसको दारू की बोतल गिफ्ट कर दी.. वो खुश हो गई और उसने मुझे ज़ोर से लिप किस किया.. हम दोनों सोफे पर बैठ गये और बातें करने लगे। करीब 7.30 बजे मानसी ने बोला कि आओ अब हम जश्न मानते है। तो में भी मान गया फिर मानसी ने दारू की बोतल खोली और दोनों का पहला पेग बनाया। हम दोनों ने चियर्स किया और पहला पेग पी गए.. ऐसे ही हमने 4-4 पेग पी लिए और अब धीरे धीरे मानसी को नशा चड़ रहा था और जब वो 5 पेग पी रही थी तो उसका ग्लास गिर गया और दारू उसके टॉप पर गिर गई और वो तो इतने नशे में थी कि उसको कुछ पता ही नहीं चल रहा था। फिर वो मुझसे बोली कि प्लीज मुझे साफ कर दो। मैंने उससे कहा कि में नहीं कर सकता.. इसके लिए तुम्हारा टॉप भी खोलना पड़ेगा। तो वो बोली कि प्लीज तुम कुछ भी मत सोचो और तुम जैसे चाहो इसे साफ करो और फिर मैंने उसका टॉप उतारा और उसको खोलते ही मुझे ब्रा के अंदर उसके बहुत बड़े बड़े मुलायम बूब्स नजर आए.. जिन्हें देखकर मेरा मन उन्हे पकड़ कर चूसने का हो रहा था और अब तक मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था और मैंने टावल से उसके गोरे गोरे जिस्म को बहुत धीरे से साफ कर दिया और उसके जिस्म को देखता रहा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

तभी वो बोली कि क्या अब घूरते ही रहोगे या कुछ करोगे भी? प्लीज मेरी ब्रा भी उतार दो.. में भी नशे में था.. लेकिन फिर भी अपने पूरे होश में था। मैंने ज्यादा देर ना करते हुए एक ही झटके में उसकी ब्रा को उतार दिया और अब उसके बड़े बड़े आम जैसे बूब्स एकदम मेरे सामने थे। तो में हल्के से उनके बूब्स को हाथ लगाकर साफ करने के बहाने से छूकर महसूस करने लगा और मुझे मज़ा भी बहुत आ रहा था और मैंने बूब्स को साफ करते करते थोड़ी दारू जानबूझ कर उसकी जीन्स पर डाल दी और मैंने कहा कि दारू तो तेरी जीन्स पर भी गिर गई है अब क्या करूं? तो उसने कहा कि इसको भी उतार दो और फिर मैंने धीरे धीरे एक एक करके उसके सभी कपड़े उतार दिए। मैंने जब उसकी पेंटी को छुआ तो वो चूत रस में एकदम गीली थी और में समझ गया कि इसको भी मेरे छूने से जोश आ रहा है.. लेकिन उसके पूरे कपड़े उतारते ही मेरा तो जैसे दारू का नशा ही उतर गया हो और मैंने धीरे से अपने भी सारे कपड़े उतार दिए। फिर में अपना लंड उसके मुहं के पास ले गया और उसको बोला कि लो लॉलीपोप चूस लो.. तो वो भी नशे की हालत में मेरे एक बार कहने से ही मान गई और मेरे लंड को पूरा अपने मुहं में लेकर चूसने लगी और में उसकी गीली एकदम गरम चूत में उंगली कर रहा था और धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी तो उसको बहुत दर्द होने लगा और वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी। तो में समझ गया कि उसकी चूत अभी तक कुंवारी है और आज में पहली बार उसकी चूत पूजन करूँगा। फिर जब में झड़ने वाला था तो मैंने लंड उसके मुहं से बाहर निकाल लिया और सारा वीर्य एक ग्लास में निकाल दिया और उसी ग्लास में एक और पेग बनाकर मानसी को पिला दिया और वो बड़े मज़े लेकर पी गई और में उसकी चूत चाटने लगा। वो थोड़ी ही देर में गरम हो गई और उसकी चूत से पानी भी निकल रहा था.. लेकिन उसको थोड़ा सा भी होश नहीं था कि उसके साथ क्या क्या हो रहा है और फिर मैंने थोड़ी देर बाद उसे एक पेग बनाकर और पिला दिया और फिर उसे गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले आया और बेड पर लेटा दिया और मैंने उसकी कमर के नीचे एक तकिया रख दिया जिससे उसकी चूत का मुहं थोड़ा खुल गया और मुझे उसकी चूत का दाना साफ साफ दिखने लगा। फिर मैंने अपना लंड उसकी गरम चूत पर रखा और अंदर डालने लगा.. लेकिन मेरा लंड उसकी टाईट चूत के अंदर नहीं जा रहा था। मैंने उसकी कमर को अच्छी तरह कसकर पकड़ा और लंड को चूत के मुहं पर रखा और एक ज़ोर का धक्का मारा.. मेरा पूरा लंड उसकी चूत में फिसलता हुआ अंदर चला गया और मानसी के मुहं से एकदम ज़ोर से चिल्लाने की आवाज बाहर आ गई.. लेकिन अब उसका भी दारू का सारा नशा उतर गया और जब मैंने नीचे देखा तो उसकी चूत से खून निकल रहा था.. आँख से आंसू निकल रहे थे, सांसे ज़ोर ज़ोर से चल रही थी, वो पूरी पसीने से गीली हो चुकी थी और अब उसके मुहं से गाली भी निकलने लगी थी।

मानसी : साले हरामी कुत्ते की औलाद.. तूने यह क्या किया? मुझे थोड़ी सी दारू पिलाकर चोद डाला। मेरी प्यारी कुंवारी चूत को फाड़ डाला.. अपने इस जानवर जैसे लंड को बाहर निकाल.. मुझे बहुत दर्द हो रहा है।

में : साली रंडी तेरी चूत है ही इतनी मस्त और तू ही तो मुझे बोल रही थी कि उतार दो मेरे सारे कपड़े और अब अगर एक प्यासे लंड के सामने कोई भी चूत आएगी तो वो बिना चुदे तो जाएगी ही नहीं।

यह बोलते हुए में धीरे धीरे लंड को धक्के देकर उसे चोदने लगा। वो कुछ बोलना चाह रही थी.. लेकिन अपनी चुदाई के दर्द के कारण कुछ बोल नहीं पा रही थी.. वो तो बस अह्ह्ह उह्ह्हह्ह बाहर निकाल इसे प्लीज अह्ह्ह सिसकियाँ ले रही थी और में लगातार ताबड़तोड़ धक्के दिए जा रहा था और मेरे लंड के चूत के अंदर बाहर होने से पूरे कमरे में फच फच की आवाजें आ रही थी और कुछ मिनट के धक्को के बाद उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी।

में : क्यों री रांड अब तो तुझे मेरे लंड से चुदाई करने में मज़ा आ रहा है ना?

मानसी : हाँ अह्ह्ह्ह उह्ह्ह और चोदो मुझे और चोदो.. पूरी फाड़ दो आज मेरी चूत को अह्ह्ह्ह हाँ और ज़ोर से।

फिर में तो जैसे उसकी वो आवाज़ सुनकर पागल सा हुआ जा रहा था.. आईईइ अह्ह्ह हाँ और तेज चोदो मुझे जानेमन चोदो और तेज़ चोदो.. मुझे आज चोदकर एक औरत बना दो। फिर मैंने अपनी चुदाई की स्पीड तेज़ कर दी.. लेकिन इसी बीच वो दो बार झड़ चुकी थी और जब 10 मिनट के बाद में झड़ने वाला था तो मैंने पूछा कि वीर्य कहाँ पर निकालूँ?

मानसी : मेरी प्यासी चूत में ही डाल दो और आज इसकी आग बुझा दो।

तो मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में निकाल दिया और बहुत थककर बेड पर लेट गया हमने उस रात को और भी बहुत दारू पीकर फिर से दो बार चुदाई की और थककर ऐसे ही नंगे सो गए। दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर मैंने एक बार और उसकी चूत में लंड डाला और उसे चोदा.. लेकिन अब वो बड़े आराम से पड़ी रही और मेरे लंड का मज़ा लेती रही.. क्योंकि रात भर चुदाई से उसकी चूत फट चुकी थी.. जिसकी वजह से मेरा लंड आसानी से अंदर बाहर हो रहा था। उस दिन हम दोनों कॉलेज भी नहीं गए और पूरे दिन नंगे ही पड़े रहे। दोस्तों अब मानसी हर कभी मेरे फ्लेट पर चुदवाने के लिए आ जाती है और में भी उसको बहुत चोदता हूँ ।।

धन्यवाद …

एरॉटिक मसाज चुत मालिश

एरॉटिक मसाज चुत मालिश – Indian erotic massage story

मुझे एक महिला का ए-मैल मिला, जिसमे उन्होने मुझे कानपूरे बुलाया था. उसके बाद हमारी मीटिंग कानपूरे मैं ही उनके घर तय हुई.

उन्होने मुझे केवल शारीरिक मसाज करने के लिए बुलाया था जिसमे मुझे उनके साथ क़िस्सी भी पारकार से शारीरिक संबंध नही बना ना था. उन्होने मुझे एरॉटिक मसाज के लिए बुलाया था

मई दोपहर को उनके पास आ गया.

वाहा बोली- आप अगर शाम को यह काम करो तो अच्छा है..; अभी ज़रा मुझे काम है.

मुझे क्या था… मैं तो पूरे दिन के लिए वही के लिए आया था. उसने घर पर अपना काम निबटाया… मुझे खाना खिलाया…. इस सब मैं शाम हो गयी थी.

मई बोला- मेरा काम कब शुरू होना है?

बोली- मैने आज सारा काम पूरा ख़त्म कर लिया था… लेकिन कुछ जर्रोरी काम आ गया है, जिसकी वजाहा से देर हो गयी.

फिर शाँको 7 बजे और वाहा खाली हुई , बोली-हा… आब कोई डिकाट नही है.. आप अपना काम बिना क़िस्सी संकोच के कर सकते है. . वो मुझे अपने कमरे मैं ले गयी.

वाहा उसने मुझे पूछा- कैसे शुरू करना है?

मई बोला- आप नीचे कालीन पर एक मोटा चदडार डाल दे… उस पर लाते जाए. तेल आपके पास है ही.

वो गाउन पहन कर आई और लाते गयी. मैं बोला- गाउन पर कैसे लगौ.. आप इसको उतार दे

वो गाउन उतार कर चाड़ी मैं लाते गयी. ब्रा उसने पहनी नही थी.

मई उस-से बोला- आप पीठ के बाल लाते जाए.

उमा के लाते जाअनए के बाद मैने उसकी पीठ पर हल्का गुनगुना तेल डाला और उसकी पीठ पर फैला कर मालिश करने लगा, उसने कंधे और पुतो पर मुझसे देर तक रगड़वाया उसने हाथ पर हल्का हे लिया. फिर मैं उसकी कमर पर आया.. कमर को रग़ाद कर मैं उसके गर्दन तक हाथ लगा रहा था. उसने चाड़ी पहेनी हुई तू … इसलिए मैने यूयेसेस हिस्से को बचा कर मालिश की.

फिर उसकी जाँघो पर मालिश की. उसको जाँघो पर मालिश करवाने मैं माज़ा आ रहा था. उमा को मैने उसके पैरे की उंगली तक मालिश दी… फिर उसको पलेतने के लिए बोला, वाहा पलट गयी.

उनसे पूछा- आपके मुम्मो पर मालिश करना है की नही?

उसने कहा- सब जगह करना है.

इस पर मैं बोला- फिर आप अपनी चड्डी उतार दे,,, जिससे उधर भी मालिश करने मैं आसानी होगी और आपको बार- बार उतना ना पड़े.

वाहा बोली- तुम ही नीचे से खिच दो.

मैने उसकी चड्डी उतार दी.

क्या औरात थी… बिल्कुल सॉफ …चिकनी..झट के बाल सॉफ करके बैठी थी और बुर तो एस खुली हुई थी जैसे की पावरोती… उसकी पंखुड़ी काली थी… लेकिन उसका किनारा सॉफ था ज़रा गहरे रंग था. मैने उसके मुम्मो पर तेल डाल कर मालिश करना शुरू किया और काफ़ी देर तक उसने मुझसे मालिश करवाई, उसकी पास्ससलिया भी मालिश से तरो-ताज़ा होती गयी.

आब उसने मुझसे बोला- जब क़िस्सी औरात को तुम मालिश करते हो… तुमको लगता नही की तुम उसको चोद दो?

उसके मूह से चुदाई से संबंधित शब्द मुझे बता रहा था की आब यह गरम होने लगी है

मई बोला- नही मेडम.. मैं इतना काम कर चूका हू की आब मुझे ज़रा भी हड़बड़ाहुत नही होती और जितना कहा जाता है.. मैं वही तक सीमित रहता हू.. एस्सा नही की उत्तेजना नही होती… हा… उत्तेजित हो जाता हू लेकिन वायकुलता भी नही होती.

मई तो अपनी चड्डी मैं ही था. उसके मुममे गोल-गोल थे और कसे हुए भी थे. वो 35 की थी ज़रूर… लेकिन उसके जिस्म मैं ढालकव नही था. उसको मुम्मो को रगड़वाने मैं माज़ा आ रहा था. जब मैं रग़ाद रहा था तो मैं उसकी तरफ देख रहा था… उसके पैरे कसमसा रहे थे.

उसको इस तारह करने से मुझे पता लग रहा था की यहा गरम हो गयी है… लेकिन उस-से मुझे चुदाई नही करना है.. यहा बात मैं जनता था और उसने जो कहा है… वही करना है. उसके मुम्मो की अछी मालिश से वाहा पूरी तरह से छुड़वाने के मूड मैं आ चुकी थी.

बोली- आलोक आब ज़रा नीचे बुर की मालिश आज अच्छे से करना

उसको मैने तेल लेकर उसकी बुर को गीला कर दिया. उसकी बुर पहले से ही गीली थी बुर मैं से पानी रिस रहा था.. उपर से तेल की चिकनाहट से उधर थोड़ा चिप-छिपा हो गया लेकिन ठीक ही था. उसको रग़ाद थोड़ी अछी मिल रही थी. उसकी बुर के बगल मैं मालिश करने से उसकी थकान कम हो गयी, जिस-से वाहा आराम से पैरे खोल कर लाते गयी.

आब क्या बचा था… मेरे सामने उसकी बुर तेल और उसके कामरस से चमचमा रही थी. उसकी चुत के होतो को लेकर मैने अपनी दोनो उंगली के बीच दबा कर धीरे से मसलना शुरू किया.

यहा उसके लिए बिजली का झटका लगने जैसा था. मेरी यहा मालिश की यह आड़ा उसको उत्तेजित कर रही थी. उसके मूह और कान लाल हो गये थे, उसने पैरे और खोल दिए थे, उसकी फांके अच्छे से गीली हो रही थी. फिर मैने उसकी फांके खो; कर उसका डन्ना छूआ. वाहा उछाल पड़ी और उसने अपनी कमर हिल्ला दी.

मई समझ रहा था की अगर इस वक़्त कोई उमा को थोक दे… उसको बुरा नही लगेगा लेकिन मुझे अपनी हाड़ तक रहना था.

मई भी उतेज़ित तो था लेकिन रुका हुआ था. उसका डन्ना जब मैने खोला तो उसकी गुलाबी फुददी मारे सामने नाश्ते की प्लेट की तरह खुल गयी. उसका डन्ना जब कुछ ही मिनिट रगड़ने से, उसका दम फूलने लगा. वाहा अपने हाथ से ही अपनी चूची को मसालने लगी थी. उसका दाना मसालने की वजाहा से वाहा अपनी कमर उचका रही थी.

फिर मैने उसकी बुर के छेद मैं धीरे से उंगली डाल दी और उसके अंदर की दीवरको सहलाना शुरू किया तो वो खुद ही कमर उछाल कर कोशिश करने लगी की मैं उसकी बुर के अंदर तक उंगली डाल कर मसलू. वाहा लगातार अपना पानी चोद रही थी जिस-से मेरा हाथ पूरा हथेली तक हाथ गिल्ला हो गया था.

उसने बोला- अच्छा आब मेरी बुर को अपने ज़ुबान से चाट कर मालिश कर दो.

मैने उसकी बुर को अपने रुमाल से पोंचा यूयेसेस पर लगा तेल पोंछ कर सॉफ किया और फिर मैने खुद को घुतने के बाल करके उसकी चुत पर अपना मूह सटा दिया और अपनी जीभ उसकी बुर के अंदर डाल कर चातने लगा. उमने भी अपने हाथ से पूरा साथ दिया, उसने अपनी बुर को अपनी उंगली से कीच कर खोल रखा था और मैं उसकी बुर को जीभ से चाट रहा था… साथ मैं अपनी उंगली से उसके भज्नसे को हिला रहा था.

जिस-से उसको पूरी उतेज्ना मिल रही थी और वो कोशिश यहा कर रही थी की मेरी जीभ उसके भज्नसे को खूब च्चटे

उसके लिए खुद वाहा अपने चुत के होतो को खिच कर खोल रही थी और उसकी कोशिश रंग लाई और उसका भज्नासा सामने धीखने लगा. मेरी यूयेसेस तक पहुच गयी. मेरा मूह… पूरी नाक… उसके चोदे हुए पानी से गीले हो गये थे. उसकी बुर की आग से वो बिल्कुल पागल हो गयी थी.

उसने उछाल-उछाल कर अपना पानी गिरना शुरू कर दिया और इतना तेज़ गिराया की मेरा मूह उसको चातने की बजाए पे रहा था. मेरा मूह एक तारह से भर गया था. उसको चूसने के बाद उमा पूरी निढाल हो गयी थी.

उसने तक कर अपने को अलग कर लिया और मुझसे बोला की मैं उसकेऊपर कंबल डाल दो.

मैने उसके उपर कंबल डाल दिया.

वाहा लटेटे ही सो गयी… मैं वही सोफे पर बैठ गया और मैं भी तकरीबन सो गया था.

यूयेसेस वक़्त रात के 9 बजे थे… लगभग 10 बजे उमा जागी… तब उसने मुझे सोफे पर सोते देख कर मुझे जगाया और बोला- चलो डिन्नर कर ले.

उसने खाना लगा दिया… हम दोनो ने खाना खाया.

आब रात को 11 बाज गये… उसने मुझे अपने कमरे से लगे कमरे मैं ही सेट किया और मैने सूबह 9 बजे उमा से विदा ली. मैं वाहा से निकल गया.

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रोजाना नई सेक्स कहानियाँ

प्रेषक : मयंक ..

antarvasna Kamukta hindi sex indian sex chudai Kahani हैल्लो फ्रेंड्स.. में मयंक आप सभी के सामने कामुकता डॉट कॉम पर एक नई स्टोरी लेकर हाजिर हुआ हूँ। मेरी उम्र साल 22 है मेरी हाईट 5.7 है और मेरा लंड 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है। दोस्तों मेरी यह स्टोरी एक सच्ची कहानी है और यह तीन साल पुरानी बात है जब में वर्जिन था तब कैसे मैंने पहला सेक्स किया? में आज आप लोगों को बताता हूँ। हाँ तो फ्रेंड्स आप सभी का टाईम खराब ना करते हुए में आपको सीधे बताता हूँ कि कैसे में अपने एक दोस्त की बहन को चोदने में सफल हुआ हाँ तो दोस्तों हुआ यूँ कि मेरा एक स्कूल का बहुत अच्छा दोस्त था और उसकी बहन थी शिल्पा.. वो मुझसे दो साल बड़ी थी। में उसकी बहुत इज़्ज़त करता था और वो भी मुझे बहुत इज़्ज़त देती थी। फिर जब में 12th पास हुआ तो मैंने एक कॉलेज में एडमिशन लिया और मेरे दोस्त ने पुणे में जाकर अपनी पड़ाई करना शुरू कर दिया। मेरे दोस्त की बहन का नाम शिल्पा है और में जबलपुर में रहकर ही बी-कॉम कर रहा था.. दोस्तों कहने को तो शिल्पा दीदी मुझसे दो साल बड़ी थी.. लेकिन उन्होंने बी-कॉम के लिए एडमिशन एक साल पहले ही लिया था। तो वो मुझसे एक साल बस बड़ी थी और वो बीकॉम 3rd में थी और मैंने भी उसी कॉलेज में एडमिशन ले लिया ताकि मुझे उनकी मदद मिल जाए।

पहले में आपको उनके बारे में बता दूँ.. वो बहुत ही सेक्सी आईटम लगती है, उनकी आँखें हिरनी जैसी और बूब्स बड़े-बड़े.. मन करता था कि अभी पकड़कर चूसने लग जाऊँ और उनकी गांड के बारे में क्या कहना बहुत मोटी गांड है और उनका फिगर 38-35-36, उनके दूध का साईज़ कुछ ज्यादा ही था.. लेकिन उनके बूब्स गजब के है, कुल मिलाकर चुदाई करने लायक। वो मुझसे इतने अच्छे से बात करती थी कि मेरा मन करता था कि उनके होंठ को घंटो तक चूसता रहूँ.. लेकिन मुझे ऐसा मौका नहीं मिला और फिर देखते ही देखते एक साल बीत गया और अब वो अपने आखरी साल में चली गयी। दोस्तों जैसा कि मैंने आपको बताया है कि मेरा दोस्त पुणे में था और मेरा उसके घर पर आना जाना कम ना हो जाए इसलिए में दीदी से बातचीत करता था.. में उनसे कॉलेज के नोट्स लेता रहता था। वो क्या है ना कि मुझे दीदी को देखने की बहुत इच्छा होती थी तो में उसके घर पर चला जाता था। पूरे एक साल में शायद ही ऐसा कोई दिन होगा जब में उनसे ना मिला.. में उनके घर जाकर सीधे उनसे पूछ लेता था जो कुछ भी मुझे नहीं आता था और ऐसे ही समय निकलता जा रहा था। फिर में भी अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया और उनसे अगले साल के नोट्स ले लेता था और पढ़ाई करता। फिर एक दिन जब में उनसे 2nd साल के नोट्स लेने के लिए गया तो उन्होंने मुझसे कहा कि तुम एक काम करो मेरे पास अभी तो यहाँ पर नोट्स नहीं है.. लेकिन तुम मेरे घर आ जाओ और आकर ले जाना। तो मैंने पूछा कि में कब आऊँ? तो उन्होंने कहा कि तुम कल सुबह आ जाना और जब में दूसरे दिन उनके घर पर गया तो उन्होंने मुझे अंदर बुलाया और में उनके रूम में जाकर बैठ गया और वो नोट्स निकालने लगी और में हमेशा की तरह उनको घूर रहा था। दोस्तों में आपको बता दूँ कि मेरे दोस्त के पापा नहीं है और घर में सिर्फ़ उसकी मम्मी, दीदी और वो है और उसकी मम्मी सरकारी नौकरी करती है तो वो हर रोज सुबह 10:30 बजे अपने घर से निकल जाती है। फिर जब में उनके घर पर पहुंचा तब 9 बजे थे और में जब दीदी को घूरने में व्यस्त था तभी आंटी मेरे और दीदी के लिए शरबत लेकर आ गई और फिर मैंने उनसे अपनी नज़रे चुराते हुए नीचे की और देखने लगा। फिर आंटी ने मुझे शरबत दिया और कहा कि बेटा कैसे हो? और घर में सब कैसे है? तो मैंने कहा कि जी आंटी सब लोग एकदम ठीक है और आप कैसे है? तो वो बोली कि बेटा में भी ठीक हूँ और फिर वो दीदी से बोली कि में नहाने जा रही हूँ और वो नहाने चली गई।

फिर उसके बाद दीदी ने कहा कि राहुल मुझे अभी यह थोड़े बहुत नोट्स मिले है। तुम अभी इनको ले जाओ.. में बाकि बाद में ढूढ़कर और दे दूंगी। फिर ऐसे ही कुछ दिन चलता रहा और मेरा उनके घर में आना जाना बड़ता रहा और फिर एक दिन शिल्पा दीदी का फोन आया कि राहुल मेरे कंप्यूटर में बहुत ज्यादा वाईरस आ गए है और कंप्यूटर बहुत धीमा हो रहा है। तुम प्लीज़ आकर एक बार इसको देख लेना। तो मैंने कहा कि ठीक है दीदी में जल्दी ही आ जाऊंगा और फिर में एक दिन करीब 12:30 बजे दीदी के घर गया और उस टाईम वो घर में एकदम अकेली थी.. मैंने घर की बेल बजाई.. तो दीदी ने दरवाज़ा खोला। उस टाईम दीदी ने एक बहुत ही ढीला गाऊन पहना हुआ था और ऊपर से वो एकदम जालीदार था। में क्या बताऊँ उन्होंने काले कलर का गाऊन पहना हुआ था और सफेद कलर की ब्रा और पेंटी पहने हुई थी जिससे अंदर सब कुछ साफ साफ दिख रहा था यहाँ तक की उनकी नाभि भी साफ साफ दिख रही थी। फिर उन्होंने मुझे अंदर बुलाया और सीधे अपने रूम में चली गई और बोला कि राहुल जल्दी से मेरा कंप्यूटर ठीक कर दो और एंटीवाइरस भी डाल दो। तो मैंने कहा कि ठीक है दीदी आप रूको में 30 मिनट में ठीक कर दूँगा और मैंने उनका पीसी फॉर्मेट करना चालू कर दिया और जब लास्ट के 2-3 मिनट का काम बचा था तब दीदी बोली कि राहुल में नहाने जा रही हूँ।

तो मैंने उनसे कहा कि ठीक है दीदी.. आप जाओ में अभी कंप्यूटर चला रहा हूँ और जब दीदी नहाने के लिए बाथरूम के पास गई तब तक उनका कंप्यूटर पूरा ठीक हो चुका था और फिर मैंने कंप्यूटर को चालू किया और में यही देखना चाहता था कि क्या दीदी सेक्स वीडियो देखती है? फिर मैंने उनकी ड्राइव को चेक करना चालू किया और मैंने जैसे ही हिडन फोल्डर देखा तो सब कुछ साफ साफ हो गया कि वो क्या क्या करती है? और उनका तो 70% कंप्यूटर पॉर्न वीडियो से भरा हुआ था और मैंने वो वीडियो देखना चालू किया और थोड़ी देर तक देखता रहा और में जब वीडियो देख रहा था तो मुझे ऐसा लगा कि कोई मेरे पीछे खड़ा है और मैंने तुरंत वीडियो बंद कर दिया और एकदम शांत बैठ गया.. तो थोड़ी देर के बाद दीदी आई और बोली कि में चाय लेकर आती हूँ और जैसे ही वो बाहर गई मैंने फिर से वही फोल्डर खोल लिया और फिर जैसे ही वो अंदर आने लगी तो मैंने उसे बंद कर दिया। वो मुझे देखकर स्माइल देने लगी और मुझे थाड़ा सा शक हुआ.. हम दोनों चाय पीते पीते बातें करने लगे। तब मैंने देखा कि मुझे दीदी की छाती साफ साफ दिख रही थी और में तो उसे ही देख रहा था.. दीदी समझ गयी थी लेकिन उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा.. बल्कि और भी ज्यादा दिखाने लगी। तो देखते देखते दीदी ने मुझसे पूछा कि क्या तुम ब्लू फिल्म देखते हो? मैंने कहा कि दीदी आप यह क्या पूछ रही हो? और मैंने कह दिया कि नहीं में यह सब नहीं देखता हूँ। फिर दीदी ने कहा कि तुम झूठ तो मत बोलो.. मैंने तुम्हे दरवाज़े से देखा है कि तुम मेरे कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रहे थे। तो मैंने अपनी आँखें नीचे कर ली और दीदी ने कहा कि शरमाने की क्या बात है? में भी देखती हूँ फिर धीरे धीरे हम दोनों के बीच में सेक्सी बातचीत शुरू हो गई। फिर दीदी ने मुझसे पूछा कि क्या मैंने कभी ट्राई किया है? तो मैंने नहीं कह दिया और फिर मैंने दीदी से पूछा कि क्या दीदी आपने कभी ट्राई किया है? तो दीदी ने कहा कि में हमेशा बाथरूम में जाकर अपने बूब्स को मसाज करती हूँ। तो मैंने मन ही मन में सोचा कि शायद दीदी के बूब्स इसलिए इतने बड़े बड़े है.. तब मैंने दीदी से कहा कि क्या आप मेरे साथ सेक्स करोगी?

तो दीदी ने कुछ नहीं बोला बस स्माईल कर दी और में समझ गया कि मेरी लाईन साफ है.. मैंने दीदी को एकदम से पकड़ा और किस कर दिया। पहले तो दीदी सोच में पड़ गयी और फिर दीदी भी मुझे चूसने लगी और में धीरे धीरे दीदी के कपड़े उतारने लगा.. उसने अपनी आँखें बंद कर ली थी और मेरे होंठो को चूस रही थी और मेरे मुहं में अपनी जीभ डाल रही थी और कभी कभी मेरी जीभ को चूस रही थी जिससे में बहुत गरम हो चुका था और वो भी बहुत मस्त हो चुकी थी मेरा सीना उसकी छाती से टकरा रहा था और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मैंने दीदी के बालों को खोल दिया और फिर मैंने दीदी की मेक्सी को उतार दिया और उसके बूब्स बहुत मस्त लग रहे थे। उनके अच्छे बड़े बड़े बूब्स थे और थोड़ी देर में हम दोनों पूरे नंगे हो चुके थे.. लेकिन हम अभी भी एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे और धीरे धीरे में उनकी गर्दन को चूसने लगा तो वो पागल हो रही थी। मैंने उनके कान को काट लिया और वो पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और में उनको चूमते चूमते उनकी गांड को भी हाथ से सहला देता। फिर मैंने उनको बिस्तर पर लेटा दिया और धीरे से उनकी चूत पर हाथ लगाया तो वो गीली हो चुकी थी। मुझे समझ आ चुका था कि अब वो भी पूरी तरह से मस्त हो चुकी है। वैसे तो हम दोनों ही वर्जिन थे.. लेकिन चिपक ऐसे रहे थे जैसे पहले बहुत बार चुदाई कर चुके है।

फिर मैंने उनके हाथों को कसकर पकड़ लिया। वो एकदम पागल हो रही थी.. में फिर उनके बूब्स को चूसने लगा और एक हाथ से दबा रहा था। इससे उनके मुहं से आहह औऊउ अह्ह्ह्ह की आवाज़ आ रही थी और में उनके ऊपर चढ़ा हुआ था। वो बहुत ज़ोर ज़ोर से आवाज़े निकाल रही थी और फिर उसने अपने दोनों हाथों से मेरे बालों को पकड़कर अपनी छाती की तरफ दबाने लगी। वो पूरी तरह से पागल हो चुकी थी। तो मैंने दीदी से कहा कि क्या आपके घर में जेम है? तो उन्होंने कहा कि हाँ है और में किचन में जाकर जेम ले आया और मैंने बहुत सारा उनकी चूत में लगा दिया और फिर थोड़ी देर में उनकी कुवारीं चूत को चाटने लगा। वो बहुत ज़ोर ज़ोर से अह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह कर रही थी और उनकी चूत से पानी बहने लगा था। फिर करीब एक घंटे तक लगातार चूत चाटने के बाद मैंने सोचा कि अब इसको चोदा जाए। तो उसने मेरे लंड को देखा और उस पर किस कर दिया और फिर हम 69 पोज़िशन में आ गए और करीब 10 मिनट तक मैंने उसकी चूत और बीच बीच में गांड का छेद भी चाटा और उसने मेरा लंड भी चूसा और उसने अपनी चूत में डालने के लिए उसको चूत के मुहं पर रख दिया। में भी वर्जिन था तो मुझे भी बहुत डर लग रहा था कि अगर मेरे लंड की चमड़ी फट गई या फिर गलती से शिल्पा की चूत फट जाए और ज़्यादा खून निकलने लगे तो क्या होगा? और मैंने शिल्पा को यह बताया.. तो वो बोली कि आज हमे बहुत अच्छा मौका मिला है और आज के बाद नहीं मिलेगा.. तुम जो चाहे कर लो.. आज मेरी चूत को फाड़ दो.. जो होगा देखा जाएगा.. लेकिन अभी तो इस हसीन पल का मज़ा ले लो। तो मैंने भी कहा कि ठीक है आज तो में तुम्हे बहुत मज़ा दूँगा.. वो बोली कि मेरी जान मेरी चूत को चाटकर तुमने मुझे जन्नत का नजारा दिखा दिया है और मैंने कंप्यूटर पर गाना लगा दिया और आवाज को थोड़ा बढ़ा दिया ताकि जब मेरा लंड उसकी चूत में घुसे तो आवाज़ ज़्यादा बाहर ना जाए। उसने अपनी आखों को बंद कर लिया और मैंने अपने हाथ से उसके हाथ को पकड़ लिया था और उसने अपने पैरों को मेरी कमर से बाँध दिया था। फिर मैंने सही मौका देखकर एक ज़ोर से झटका मारा और 3 इंच लंड उसकी चूत में चला गया वो चिल्लाई आईईई अह्ह्ह्ह माँ में मर जाउंगी.. प्लीज इसे बाहर निकालो। लेकिन में कहाँ सुनने वाला था और थोड़ी देर रुककर फिर से धक्का देने लगा। उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था और दो मिनट के बाद मैंने अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। वो बहुत ज़ोर से चिल्लाने लगी आआईईईईईईईईईई में मररररर गयी.. प्लीज इसे बाहर निकालो मेरी चूत फट जाएगी और उसकी आँखों से आंसू निकलने लगे।

फिर मैंने थोड़ी देर रुककर धक्के देना शुरू किए और उसके ऊपर लेटकर उसके बूब्स को दबाने लगा चूसने लगा और कुछ देर बाद जब वो ठीक हुई तो मैंने अपना लंड चूत से बाहर निकाला तो उसकी चूत से खून निकल रहा था जिसे देखकर मुझे अपने आप पर बहुत गर्व महसूस हुआ कि मैंने 19 साल की उम्र में पहली सील तोड़ी है और में उसके ऊपर पूरा ज़ोर लगाकर उसे धक्का देने लगा और अब वो मुहं से आह्ह्ह की आवाज़ निकाल रही थी और बोल रही थी कि चोद मुझे और ज़ोर ज़ोर से चोद फाड़ दो मेरी चूत को और में यह बात सुनकर पूरे जोश में आ गया। 15 मिनट की लगातार चुदाई के बाद में झड़ने वाला था तो उसने मुझसे कहा कि पूरा वीर्य मेरी चूत में ही डाल दो और में उसकी चूत में ही झड़ गया.. लेकिन वो इस बीच दो बार झड़ चुकी थी। तो में उसके ऊपर ही लेट गया और मैंने अपना लंड उसकी चूत में से बाहर निकाला तो वो खून में पूरा लाल हो चुका था और शिल्पा तो मेरे लंड को देखती ही रह गयी। फिर मैंने अपना लंड फिर से उसकी चूत में एक बार में ही पूरा डाल दिया.. लेकिन अब उसको और भी मज़ा आ रहा था। उसका शरीर तो आग की तरह तप रहा था और इस बार मैंने उसे 20 मिनट तक चोदा। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और इस बार वो दो बार झड़ चुकी थी।

फिर थोड़ी देर बाद मैंने कहा कि अब में तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ तो वो बोली कि नहीं मुझे बहुत दर्द होगा.. तो मैंने कहा कि नहीं होगा बस थोड़ी देर दर्द होगा फिर तुम्हे भी बहुत मज़ा आएगा और वो मान गई फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और पहले हम वॉशरूम गए.. लेकिन उससे तो ठीक से उठा भी नहीं जा रहा था क्योंकि चुदाई करने से उसकी चूत में बहुत दर्द हो रहा था। फिर जैसे तैसे में उसको बाथरूम लेकर गया और फिर वहाँ पर जाकर उसने मेरा लंड और अपनी चूत को साफ किया। उसने पहले मेरे लंड से पूरा खून वगेरा अच्छी तरह साफ किया और फिर अपनी चूत को अच्छे से साफ किया। मैंने भी उसकी चूत में उंगली डालकर अच्छे से उसकी चूत को साफ कर दिया और फिर उसने मुझे टावल से साफ किया और फिर अपने आप को साफ किया और फिर मुझे देखकर स्माइल दी और मैंने भी उसको स्माइल दी और फिर हमने वहीं पर एक किस किया और वो बोली कि मुझे टॉयलेट आया है.. तुम बाहर जाओ में दो मिनट में आती हूँ। तो मैंने कहा कि नहीं तुम मेरे सामने ही कर लो.. वो पहले साफ मना कर रही थी.. लेकिन फिर मान गई। उसके टॉयलेट में वेस्टर्न स्टाईल का सीट था और वो उस पर बैठ गई और टॉयलेट करने लग गई और जैसे ही उसका पेशाब बाहर निकला तो बहुत ही ज्यादा मदहोश कर देने वाली आवाज़ आने लगी। तो मैंने उसको देखा और उसके पास गया। फिर अपना लंड उसके मुहं में डाल दिया और उसने भी बैठे बैठे ही मेरा लंड चूस लिया और करीब 5 मिनट के बाद उसने मेरा लंड अपने मुहं से बाहर निकाल दिया और फिर उसने अपनी चूत को पानी से साफ किया और खड़ी हो गई।

फिर मैंने उसको अपनी गोद में उठाया और बेड पर ले गया और उसके बाद मैंने उसको गांड मारने के लिए इशारा किया और उसे कुतिया बनने को कहा और जब वो डॉगी बन गई तो मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रखा और रगड़ने लगा और धीरे धीरे से धक्के देकर डालने लगा। मेरा लंड उसकी गांड में पहली बार में तो घुसा ही नहीं। फिर मैंने उसकी गांड पर थूक लगाया और उसको अपना लंड 5 मिनट चुसवाया जिससे मेरा लंड भी थोड़ा चिकना और गीला हो गया और फिर मैंने उसकी गांड पर लंड रखा और थोड़ा दम लगाकर अंदर डाला तो बड़ी मुश्किल से मेरा लंड दो इंच घुसा और वो दर्द के कारण बहुत ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी.. लेकिन में फिर भी नहीं रुका और ज़ोर ज़ोर से धक्का लगाने लगा और थोड़ी देर बाद मैंने अपना पूरा 8 इंच का लंड उसकी गांड में उतार दिया। वो बहुत ज़ोर से चिल्लाई.. लेकिन अब उसे मज़ा भी आ रहा था।

फिर भी मैंने अपनी चुदाई ज़ारी रखी.. अब में थोड़ा ज़ोर लगाने लगा और फिर थोड़ी देर के बाद वो भी कहने लगी कि जान थोड़ा धीरे और आराम से चोदो और वो अह्ह्हउनह उह्ह्ह की आवाज़ निकाल रही थी और कह रही थी कि आज तो में पूरी तरह से तुम्हारी हो चुकी हूँ.. में कहीं भाग नहीं जाउंगी.. तुम थोड़ा आराम से चोदो.. मुझे बहुत मज़ा आ रहा है और धीरे धीरे उसकी साँसे तेज़ हो रही थी और अब उसे भी बहुत मज़ा आने लगा.. वो अपनी गांड को उठा उठाकर चुदवा रही थी और में तो इतनी मोटी गांड में लंड डालकर जन्नत की सैर कर रहा था और लंड को हिलाते हिलाते में भी उसकी गांड में झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया। फिर हम दोनों नहाने चले गये और मैंने वहाँ भी शावर के नीचे फिर से उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और 15 मिनट तक चुदाई की और बाहर निकलने के बाद हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और उसने मुझे कॉफी बनाकर पिलाई और हम दोनों एक ही कप में पी रहे थे।

फिर एक घंटे तक हमने ब्लूफिल्म देखी उस दौरान में उसे करीब आधे घंटे तक चूमता रहा.. उसे स्मूच भी कर रहा था। फिर हमने उस दौरान एक बार सेक्स भी किया और फिर 4 बजे तक हमने एक दूसरे के साथ फुल मजा किया और फिर उसके बाद मैंने फिर से अपने कपड़े पहने और फिर उसको 15 मिनट तक लगातार किस किया और फिर में वहाँ से निकल आया और फिर हमारा रात में फोन पर सेक्स शुरू हुआ और हम हर दो तीन दिन में चुदाई भी किया करते थे.. लेकिन जब दीदी की पढ़ाई पूरी हो गई तो वो भी आगे की पढ़ाई करने पूना चली गई। अब तो में चुदाई नहीं कर पाता और शिल्पा दीदी की यादों में खोया रहता हूँ ।।

धन्यवाद …

लीना की प्यासी चूत

मई लीना 25 वर्ष , गोन की रहने वाली हू, बरवी के बाद मेरी पढ़ाई बंद हो गयी, 4 साल पहले मेरी शादी हो गयी थी, तो शहर आ गयी. मेरे पाती संतोष कुमार एक प्राइवेट कंपनी मैं काम करते है, 10 बजे से 7 बजे तक! इसलिए घर पर बोर होने से अच्छा मैने नौकरी कर लेना उचित समझा और पास मैं हे रॉनी सलूजा सिर के ऑफीस मैं ही काम मिल गया.

यहा मेरे को दो साल हो गये, जब मैने नौकरी शुरू कीट ही, तब बहुत सीधी सॅडी थी परंतु आब मुझे कंप्यूटर चलना , बन-ना सवरना, कैसे क़िस्सी कस्टमर को अपनी बातो से प्रभावित करना और संतुष्ट किया जाता है, ऑफीस मैं रहा कर सब सिख लिया है. यहा रहा कर ही अपनी अल्हड़ मस्त जवानी का भी एहसास हो चक्का है.

रॉनी सिर के सानिंध्या ने मुझे जाने क्या क्या सीखा दिया, उनकी कहानी मैं पढ़ा होगा कैसे उन्होने मुझे उतेज़ित करके पहेली बार मेरे साथ योआन संबंध बँये थे और जो असीम सुख मुझे मिला उसके बाद तो जैसे उनकी लूट ही लग गयी.

समय गुजराता रहा!

करीब टीन माह पहले मेरे दूर के रिश्ते का भाई जीतू नौकरी की तलाश मैं शहर आया था जो 4 साल पहले मरियल सा दिखता था आब खूबसूरात और बांका जवान हो गया था, 5 माह बाद उसकी शादी होनी है. उसको देखा तो देखती ही रहा गयी! वो भी मुझे देख मेरी खूबसूराती की तारीफ़ करने लगा.

दरअसल शाहर की हवा जो मुझे लग गयी थी तो मुझ पर निखार आना तो सावभाविक ही था. मेरा फिगर 32-29-34 है, मुझे उसके मुख से अपनी तारीफ़ सुन-ना अच्छा लग रहा था.

वो दो दिन हमारे घर रुका, उसने और मेरे पाती ने भी उसकी नौकरी के लिए यथा संभव प्रयास किए पर नतीज़ा का कुछ नही निकला. वैसे भी अपने मन का जॉब मिलना इतना आसान तो नही होता! ना जाने उसमे क्या आकर्षण था की उसके जाने के बाद मुझे उसकी याद आती रही, लगता जैसे वो मेरा दिल ले गया हो. यदि एक बार काम- वासना दिल-ओ-दिमाग़ पर हावी हो जाए तो भावनेयो को बहकते देर नही लगती, ना ही जज़्बात अपने वश मैं रहते है.

फिर वो 20-25 दिन मैं शाहर आता रहा और मेरे मन मैं उस-से मिलन करने की खवैिश हावी होती रही, उस-से कैसे यौन संबंध बँये जाए, इसी उहापोह मैं लगी रहती! मैने सोचा रॉनी से इस बड़े मैं बात करू और उस-से मिलन का रास्ता पॉच लू पर इस्मै मुझे काम बिगड़ने की आशंका ज़्यादा लगी!

जीतू की नॅज़ारो से मुझे कभी एस्सा नही लगा की वो मुझे ग़लत नाज़र से देखता होगा पर मेरी नाज़रो मैं खोट आ चक्का था, मैं बस मौके की तलाश मैं रहने लगी और वो मौका मुझे पिछले महीने ही मिला.

सेक्स की कहानिया पढ़ते-पढ़ते मुझे कई आइडियास मिल गये थे और जब सगे-संबंधी आपस मैं संभोग कर सकते है तो दूर के रिश्ते मैं एससी गुस्ताख़ी तो चल ही सकती है!

यूयेसेस दिन जीतू सूबह 9 बजे गाव से आ गया था. चाय नाश्ते के बाद 10 बजे मेरे पाती अपने काम पर चले गये, मैं अपने प्लान के मुताबिक बाट्रूम मैं नहाने गयी और सारे कपड़े उतार कर नहाने लगी.

आज मैं अपने नंगे बदन की नुमाइश गैर मर्द के सामने करने वाली थी. मेरे हिसाहब से मेरे खूबसूरात बेपर्दा जिस्म को देख जीतू के जजबातो का बहकना सावभाविक है, सेक्स की कल्पना मात्रा से मेरे पूरे जिस्म मैं रोमांच और सिरहन सी उत्पान हो रही थी, दिल घबरा रहा था, उतेज्नावश सारा बदन कप-कापा रहा था,मेरे इस्टानो की घुंडिया कड़क हो तां गयी थी, यौनी गीली हो चली थी, मैं अपने आप मैं इतनी कुश थी और कल्पना कर रही थी की बस कुछ देर बाद ही जीतू मुझे पलंग पर पटक कर रौंद रहा होगा.

अपनी योजना से संतुष्ट होकर मैने जीतू को आवाज़ लगाई की मेरा तौलिया बाहर रहा गया है, ज़रा दे दो. जैसे ही जीतू दरवाजे पर आया, मैने आधा दरवाजा खोल दिया, लेकिन जीतू का चेहरा दूसरी तरफ था और उसने मेरे नंगे जिस्म को एक नज़र भी नही देखा. और वो मुझे तौलिया देकर चला गया!

मुझे एस लगा जैसे मेरे उपर कई घड़े पानी डाल दिया हो, मैं अपने गीले पेंटी ब्रा छोड़कर कपड़े पहन कर बाहर आ गयी.

आकर जीतू को कहा की वो नहा ले.

मई खाना लगाने लगी.

जब वो नहा कर आया तो खाना लगते समय उसको अपने इस्टानो को भी दिखाने की कोशिश कर रही थी, जो उसने एक बार तो देख लिए, फिर वो खाना खाने मैं मस्त हो गया.

मुझे बड़ा गुस्सा आ रहा था.

मैने बाथरूम मैं जाकर देखा. मुझे पूरी पोरी उमीद थी की मेरी ब्रा पेंटी देख कर जीतू को जोश आ गया होगा और उसने उन्न पाए हस्त-मातून करके ज़रूर अपना वीर्या गिराया होगा!

निराशा से भारी मैं 11 बजे अपने ऑफीस आ गयी. सोचा, आज वासना की सटाई लीना को रॉनी का प्यार और उसका हथियार तृप्त कर देगा.

पर रॉनी को तो जैसे तन की भाषा समझने की फ़ुर्सत ही नही थी! वो मुझे जलता छोड़कर अपनी साइट पर चला गया.

यहा ऑफीस मैं नेट पर मेरी एक सहेली से बात होती रहती है, उसको मैने अपने दिल की बात बताई तो उसने भी कुछ टिप्स और आइडिया दिए.

शाम को घर पहोची तो मेरे पाती आ चुके थे, आज जो आग मेरे बदन को जला रही थी पाती के साथ राअत मैं चुदाई करवा कर ठंडी की!

अगले दिन 10 बजे पाती के जाने के बाद अगले प्लान के तहत मैं नहाई और बिना पेंटी ब्रा के ही नाइटी पहन कर रसोई मैं बैठ गयी.

मुझे बड़ी ही धुक-धुकी से लग रही थी, हिर्डया के धड़कने की आवाज़ मुझे खुद को सुनाई दे रही थी मेरी यौनी मैं एक गुदगुदाहट से महसूस हो रही थी.

निघट्य को अस्त-वायासत करके घुतनो तक कर लिया और जीतू को आवाज़ लगाई.

वो आ गया, बोला- क्या हुआ?

तो मैं बोली- जीतू मुझे चक्कर सा आ गया है और उसका हाथ पकड़कर अपने सीने से लगा दिया तो मेरी धड़कन और भी बढ़ गयी.

तेज धड़कन का एहसास पाते ही बोला- डॉक्टर के पास चलो!

मैने कहा- पहले मुझे सहारा देकर पलंग तक पहुचा दो.

तो उसने अपने गढिले हाथो से सहारा देकर मुझे उठाया और पलंग पर लिटा दिया.

लाते-ते समय मैने अपनी टॅंगो को एस्सा कुछ किया की मेरी नाइटी मेरी जाँघो तक आ गयी और मेरी यौनी उजागर हो गयी और मैं तपड़ने का नाटक करने लगी परंतु उसने मेरी यौनी के दर्शन नही किए या फिर देख कर अनदेखा कर दिया!

बल्कि एक चादर मेरे उपर डाल दी इस कांड के रोमांच और कल्पनाओ की उसान से बहुत आनंदित हो रही थी.

चुत पर ठंडी हवा लगने के बाद भी वो भाटी की तरह सुलग से रही थी!

यूयेसेस पर जीतू के बदन की खुश्बू और उसके स्पर्श से इतनी उतेज़ी हो चुकी थी की उतेज्ना से कुलबुलाती मेरी चुत से पानी बहा निकला था, एस्सा लग रहा था की कोई मेरी चुत मैं अपनी जीभ डाल कर सहला दे और लंड डाल कर रग़ाद डाले!

जीतू शायद एक दम से घबरा गया था मेरी हालत देख कर एस मैं उस-से मेरी यौनी देखने की सुध ही कहा होई उस-से चिंता होगी की मुझे कुछ हो ना जाए!

मैने कहा – रसोई मैं जाकर नींबू पानी बना लाओ.

वो रसोई मैं चला गया तो मैं अपना हाथ इस्टानो पर रखकर उन्हे मसालने लगी और दूसरे हाथ को चादर के अंदर ले जाकर गीली चुत को सहलाते हुए उंगली चुत के अंदर बाहर करने लगी.

मुश्किल से बीस सेकेंड ही गुज़रे होंगे मेरे मूह से सिसकारिया निकल पड़ी और मेरी चुत ने पानी चोद दिया, मुझे कुछ रहट मिल गयी.

तभी जीतू आ गया, मैं पसीने पसीने हो गयी थी, नींबू पानी पीकर बाथरूम मैं जाकर फ्रेश हुई और ऑफीस आ गयी!

यहा भी मेरा मन नही लग रहा था क्यूंकी कल जीतू चला जाएगा और अभी भी कुछ ना कर पाई तो शायद फिर कभी कुछ नही कर पौँगी क्यूंकी जीतू को शायद मुझ पर शक हो चला था.

आख़िरी पेट्रा सोच कर मैने दोफर 3 बजे रॉनी सिर से बहाना बनाकर छुट्टी ले और घर पहुच गयी!

दरवाजा अंदर से बंद था, मैं दूर-लॉक मैं अपनी चाबी लगाई और धीरे से दरवाजा खोला तो वाहा जीतू के जूते दिखय दिए, मैं समझ गयी जीतू घर मैं हे है.

अंदर वाले कमरे मैं जीतू गहरी नींद सो रहा था क्यूंकी मेरी आहत को सुनकर वो ज़रा भी नही हिला था.

मेरी साँसे तेज हो गयी, एक्चा हुई की कपड़े उतार कर इसको दबोच लू पर एसससा नही कर सकी!

बाहर वाले कमरे से बाथरूम और रसोई लगी हुई है, इसी कमरे मैं मेरी कपड़ो की अलमारी है, अंदर वाला कमरे को बेडरूम बनाया है जहा जीतू सो रहा था.

मई रसोई मैं जाकर पानी पीने लगी और अपनी योजना मैं यह सुधार किया मुझे यह प्रदर्शित करना है की मैं जीतू की घर मैं मौजूदगी से अंजान हू इसलिए यूयेसेस कमरे मैं नही गयी!

अपनी योजना के तहत मैं सिद्धा बाथरूम मैं चली गयी और जीतू को जगाने के उद्देश्या से दरवाजे को इतना ज़ोर से बंद किया की यूयेसेस आवाज़ से जीतू की नींद खुलना तो ठीक, वो उठकर बैठ ही गया होगा.

फिर मैं गणना गुनगुनाते हुए संपूर्णा नागन होकर शवर मैं नहाने लगी.

जीतू को मेरे गाने की आवाज़ से मेरे आने का इतमीनान हो गया होगा और वो शायद फिर सोने को कोशिश करेगा!

आब मुझे उसके दोबारा सो जाने से पहले जल्द नगञा-वास्ता मैं बेर आकर यूयेसेस अलमारी से कपड़े निकालने थे जो जीतू को पलंग पर लेते हुए भी पूरी तरह से दिखाई देगी और साथ मैं यह नंगी बहाया लीना भी उससे दिखागी!

इस कृत्या के लिए मेरी हिम्मत जवाब देने लगी थी, अजीब सा ड्ऱ लग रहा था पर उतेज्ना-वश मैने अपने कदम आगे बढ़ा दिए.

बाथरूम का दरवाजा खोलते हुए ड्ऱ और अजीब सिरहन से हो रही थी, कैसे मैं क़िस्सी के सामने नंगी जा सकती हू, भले ही दूर का सही पर भाई तो लगता है, वो क्या सोचेगा मेरे बड़े मैं !

फिर याद आया मुझे तो यह प्रदर्शित करना है की घर मैं मैं अकेली हू!

मेरी ढहकां से मेरे इस्टानो मैं कंपन हो रहा था और इस कम्पान से वो उतेज़ित होकर तां गये थे, मेरी चुत तो जैसे मेरे वश मैं नही थी, उसमे से लगातार निकलता चिकना तरल बहकर मेरी राणू तक आ गया था.

दिमाग़ मैं उथल-पाठक मची हुई थी वही वो बाहर के कमरे मैं हुआ तो?

नारी लाज़ा-वश मैने तौईलया उठाकर लप्पेट लिया और दरवाजे को खोल कमरे मैं आ गयी!

सब कुछ मेरे हिसाहब से हो रहा था, काप्ते कदम अलमारी तक ले आए, मैने अलमारी के अईयने से देखा, जीतू शायद उठने की चेस्टा कर रहा था.

मेरी पीठ जीतू की तरफ था, मैने अपना तौलिया हटा दिया और अईयने मैं अपने आप को निहाराते हुए अपने नंगे गीले बदन पोछने लगी.

आब मुझमैई कुछ हिम्मत से आ गयी थी.

फ्र अलमारी खोलकर उस्मआ से पेंटी ब्रा और मॅक्सी निकल ली और फिर अईयने मैं अपने को निहाराते हुए अपने बदन की ज़्यादा से ज़्यादा झलक उस-से दिखाने की कोशिश करने लगी.

निश्चित हे मेरी बेदाग दोढिया जांघे और गोल-मटोल उभरी हुई चिकनी गांड देखकर उसके होश उडद गये होंगे.

फिर मैने ब्रा पहेनकर सोचा की पेंटी पहन-ने के लिए घूम जाओ ताकि मेरी चौत की झलक तो उसे दिखाई दे ही जाएगी.

मई घूम गयी. आब मेरा चेहरा जीतू की तरफ़ था लेकिन मैने उसे देखने की चेस्टा नही की, दोनो टॅंगो को फैलाकर तौलिए से एक बार फिर अपनी गीली हो राई चुत को सहलाते सॉफ किया जो उसने देख ले होगी.

फिर मैने आगे झुक-कर अपने इस्टानो की भर-पुवर झलक दिखाते हुए पेंटी पहन ले.

आब यह सब करके अच्छा लग रहा था.

योजना की अगली चाल के तहत मैने मॅक्सी उसाई और उसे पहन-ने से पहले ही जेटू को देखते हुए चीखना था सो मैने वही किया!

अपनी नज़रे उठाई और आश्चर्य से जीतू को देखा जो मानता मुग्धा सा मुझे हे देखे जर आहा था.

मई उसे डातने वाले अंदाज़ मैं चिल्ला उठी- जीतू तुउुुउउ यहा?

फिर चीखते हुए घहबरा-कर मॅक्सी लेकर रसोई मैं भाग गयी.

मेरा दिल मेरी छाती मैं धड़ धड़ टकरा रहता पर आब मुझे जीतू को उसकी गुस्ताख़ी के लिए डातने दपतने का काम करना था!

इससे कहते है उल्टा चोर कोतवाल को डाते..

आब मेरे चेहरे पर रहट भारी कुटिल मुस्कान थी!

10 मिनिट बाद मैने अपना त्रिया चरित्रा दिखाते हुए रुआंसी होकर नाज़ारे नीचे किए जीतू के पास गयी.

वो आब भी बढ़वाअस सा देख रहा था!

मैने कहा- मुझे मालूम नही था की तू घर पर हे है. मैं इस कमरे मैं भी नही आई थी, बहुत गर्मी लग रही थी तो हमेशा की तरह नहाने चली गयी और बिना कपड़ो के निकल कर बेर आ गया, यहा घर मैं अकेली रहती हूट ओह एस ही आदात से हो गयी! मुझे याद भी नही रहा की तू गाव से आया हुआ है और अंदर के कमरे मैं हो सकता है, नही तो दरवाजा खोलने तुझे हे बुला लेती! परंतु तू तो बता सकता था, तूने तो जान बूझकर मेरा सब कुछ देख लिया, मुझे बहुत शर्मिंदगी लग रही है, तुझसे कैसै नाज़ारे मिला सक़ीनगी? टुमरे जीजू को पता चलेगा तो…

कहकर मैने रोने का नाटक किया!

तब जीतू बोला-दीदी, आप नाहनी मैं सई बाहर निकली तो मैं आपसे कुछ बोलता, उसके पहले ही आप ने अलमारी के पास जाकर तौलिया हटा दिया. आपको इस इस्थिति मैं देख मैं चाहा कर भी कुछ बोल नही सका, आप जीजू को यह मत बठाना, नही तो वो मेरा यहा आअना बंद कर देंगे, फिर इस शहर मैं आपके अलावा मेरा है हे कौन!

नाज़ारे नीचे किए मैं उसके लोवर का मुआएना करते हुए उसका हाथ थामकर आफ़ि छाती पर रख लिया और अपने इस्टानो पर मसालते हुए बोली- जीतू, मैं तुम्हारे जीजू को नही कहूँगी, तुम भी इस बात की कभी किसी से भी चर्चा नही करना. मेरी कसम खा और अपना दूसरा हाथ उसके कंधे पर रख दिया!

और रोने का नाटक करते हुए उस-से लिपट गयी.

जीतू ने मेरा ज़्यादा विरोध नही किया , बस इनकार वाले लहजे से कसमसा कर अपने को छुड़ाने की नाकाम कोशिश कर रहा था, उसका हाथ आब भी मेरे इस्टानो पर था, जिसे मैं तमाई हुए थी जिस=से उतेज्ना जागृत हो जाए1

वो कुछ समझ पता, उस-से पहले हे मैने अपना हाथ उसके उठे हुए लोवर पर रखा तो करंट सा लग गया, उसका लंड कड़क होकर तनाया हुआ था, इसका मतलब मुझे नागन देखने के बाद उसकी जवानी जोश मरने लगी है और मेरा रास्ता खुलता गया.

मई उसके उपर पूरी तरह से सॉवॅर होकर उसे दबोच लिया, अपनी दोनो जंघी के बीच उसके उठे हुए लोवर को भिच कर अपने इस्टानो से उसके सीनाई पर रग़ाद दे रही थी और अपने होतो से उसके होठ दबाकर उन्हे चूस रही थी, उसके दोनो हाथ और पीठ पर हरकत कर रहे थे.

उसको अपने काबू मैं देख अपने कमर को थोड़ा उपर उठाकर अपनी मॅक्सी और ब्रा निकल फेंकी.

मेरे इस रूप को ड़ख वो मुझसे लिपट गया. आख़िर माखन को आग के संपर्क मैं आकर पिघलना हे पड़ता है!

आब उसने मेरे इस्टानो को अपने लाबो से सहलाते हुए चूसना शुरू कर ईया और अपने कठोर हाथो को मेरी पेंटी मैं डालकर मेरे मुलायम और गुदाज़ नितुंबो को सहलाने लगा.

आअहह…सस्स्स्सस्स के स्वर लहरिया मेरे मुख से निकालने लगी, मैने अपने हाथो को नीचे ले जाकर उसका लोवर और कचा नीचे सरका दिया, फिर अपनी टॅंगो की मदद से उन्हे बाहर निकल दिया.

आईई.. आहह… जीतू.. उसका खड़ा लंड कुछ गीला था जो मेरी पेंटी के साथ मेरी बुर मैं चुभाने लगा.

‘ऊसस्स!’ आब बर्दाश्त नही हो रहा है. जीतू मेरे आंगोको सहलाते हुए चूमे जर आहा था,मेरी पेंटी पिछपिछी गीली होकर मेरी चुत के छेद पर चिपक गयी थी.

आब ज़्यादा देर ना करते हुए मैने उसे भी तां से निकल दिया और जीतू की कमर पर सार होकर उसके लंड को अपने चौत पर रगड़ने लगी.

‘उहह सस्स.. आआ..सस्स’ एससी ही अस्पष्ट आवाज़े हम दोनो के मच से निकालने लगी, चुत और दाने पर लंड के घ्रसहड़ से असीम आनंद मिलराहा था.

अगर कुछ देर और कराती रहती तो एरा माल हे निकल जाता.

अछी तरह गीले हो चुके लंड को अपनी बुर के मुहाने पर सेट किया और दवाब बनती चली गयी, उसका लंड मेरी यौनी मैं समा गया आहह…सस्सस्स… फिर मैने अपने चोत्ड़ो को हिलाते हुए लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया, मेरे इस्टानो को झोलता देख जीतू ने उन्हे ताकर सहलाते हुए मसल डाला.

‘उईईइ…माआ…आहह’ करते हुए मैं बढ़ता बढ़ती जा रही थी, दोनो हे मादक सीत्कारो के साथ एक दूसरे से गुठे हुए थे.

चाँद मिनिट बाद जीतू मुझसे लिपट गया और उसका गरम लावा जैसा वीर्या मेरी चौत मैं भाता चला गया.

उनही शाड़ो मैं मेरे बदन मैं अकदम हुई और हम दोनो एक साथ सांखलित होकर एक दूसरे मैं सामने के लिए चूमते हुए लिपट कर निढाल हो गये!

इस संभोग मैं हम दोनो को अद्भुत यौन-आनंद प्राप्त हुआ.

हम एक-दूसरे को सहलाते हुए बाते करने लगे, तब मुझे पता चला की जीतू भी चुपका मुझे देखा कराता था, कई बार उसने रात मैं के-होल सई मुझे और मेरे पाती को संभोग्रात होते देखा है!

उसने यह भी बताया- ब्लू फ़िल्माई तो मैने कई देखी है पर सेक्स आज पहली बार किया है, पर हस्तमैतून कई बार कर चक्का हू!

जीतू आब बेशरम होकर मेरे नंगे जिस्म से खेलने लगा और मेरे बदन के हर आंग को मसालते हुए चूमने चातने लगा, यहा तक की मेरी चुत को भी चेट-ते हुए चूस डाला.

इस चूसा मैं मेरी आहे निकालने लगी, मैं भी उसके लंड को अपने हाथो से सहलाते हुए आगे पीछे करते हुए दोबारा खड़ा करने मैं जुटी थी.

बीच बीच मैं उसके लंड को अपने होतो से चूमते हुए जीभ से चुबला देती.

जल्दी हे उसका लंड कड़क हो गया.

आब मैने उसे अपने उपर कीच लिया और अपनी जाँघो को फैलते हुए टॅंगो को उपर उठा लिया.

जीतू नही भी देर ना करते हुए मेरे भाटी जसाई तपती चुत मैं अपना गरम लॅंड डाल दिया और मेरी चुत मैं लंड के पेलाई शुरू कर दी.

इस बार 10-12 मिनिट तक रगदकर मेरी चुदाई की उसने!

जितना यौन सच उठाया जा सकता था हम दोनो ने उठाया!

फिर दूसरे दिन उसको गाव जाना था तो मेरे पाती के जाने के बाद एक बार फिर हमने अपने जिस्मो की प्यास बुझाई.

फिर मैं ऑफीस और वो गोन चला गया.

आज मेरी यह खवैिश पूरी हो गयी थी!

भाभी की गांड की चटनी

antarvasna Kamukta hindi sex indian sex chudai Kahani हैल्लो फ्रेंड्स.. में राज आप सभी के सामने अपनी एक और हॉट कहानी लेकर आया हूँ। दोस्तों में आप सभी को अपना परिचय करवा देता हूँ.. मेरा नाम राज है और में अहमदाबाद का रहने वाला हूँ। में 3rd साल बी-कॉम में पढ़ाई कर रहा हूँ और मेरी उम्र 20 साल है। में जब भी किसी लड़की को चोदता हूँ तो उसको जन्नत की सेर करा देता हूँ और एक या दो घंटे तक लड़की को छोड़ता नहीं हूँ। मुझे जब तक उसको चोदने से पूरी तरह सन्तुष्टि नहीं मिलती में बस उसे चोदे ही जाता हूँ। मेरे लंड का साईज़ 8 इंच लंबा 3 इंच मोटा है।

दोस्तों कामुकता डॉट कॉम के बारे में मेरे एक फ्रेंड ने मुझे बताया और फिर में इसका दीवाना हो गया में दिन रात जब भी समय मिलता इस पर कहानियाँ पड़ता और कभी कभी मुठ भी मारता और यह मेरी आज की कहानी को पड़कर ही आपका पानी निकल जाएगा.. तो फिर में जब चोदूंगा तब क्या हाल होगा आप खुद ही सोच लेना। दोस्तों मैंने मेरी भाभी को चुदाई के लिये पटा लिया था और उनकी चूत को कई बार चोद भी चुका था। अब में आज आपको बताने जा रहा हूँ कि कैसे मैंने भाभी की गांड फाड़ डाली। दोस्तों एक दिन में भाभी का कॉल आया..

भाभी : हैल्लो.. क्या कर रहे हो?

में : बस आपको ही याद कर रहा हूँ।

भाभी : अच्छा.. तो फिर आज का क्या प्लान है?

में : बस आपको आज और भी जमकर चोदना और सन्तुष्टि देना का?

भाभी : ठीक है तो आज एक बजे मेरे घर पर आ जाना।

में : ठीक है भाभी।

फिर में भाभी के घर पर जाने के लिए तैयार हो गया और मैंने भाभी के घर पहुंच कर डोर बेल बजाई.. तो भाभी ने दरवाजा खोला.. वाह! दोस्तों में तो उसे देखता ही रह गया.. वो नीले कलर की जालीदार मेक्सी में क्या सेक्सी लग रही थी? फिर मैंने उसको देखकर सोच लिया था कि आज में इस साली की चूत और गांड दोनों फाड़ डालूँगा। फिर वो बोली कि क्या बस ऐसे ही देखोगे या कुछ करोगे भी? तो मैंने कहा कि जानेमन आज तो में तुझे छोड़ने वाला नहीं हूँ.. तू कितना भी चिल्लाए या आंसू निकाले.. आज में तुझे फाड़कर रख दूँगा। फिर वो बोली ओह बड़े आए फाड़ने वाले.. कहने से कुछ नहीं होता कुछ करके भी दिखाओ तब मुझे पता चले कि इस लंड में कितनी ताकत है? तो मैंने झट से उसको पकड़कर मेरी और खींच लिया और किस करने लगा। वाह क्या होंठ थे उसके? यारों इतने रसीले की उन्हें छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था। फिर वो बोली कि चलो अब बेडरूम में चलते है.. तो मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और किस करते करते बेडरूम में गया और उसे बेड पर फेंक दिया और उसके ऊपर आ गया।

तो वो बोली कि क्यों आज बहुत जोश में लग रहे हो राज। फिर में उनको किस करता रहा.. क्या मुलायम होंठ थे उनके कि बस पूछो मत। फिर में धीरे धीरे उनकी गर्दन पर और उनकी छाती पर किस करने लगा और उनके 36 के बूब्स दबाने लगा। उस जगह पर मेरा हाथ लगते ही उनके बूब्स के निप्पल टाईट होने लगे। तो में थोड़ा और नीचे आ गया और उनकी नाभि को चूमने लगा। दोस्तों में तो उनकी जांघो को चूमते हुए फिर उनकी चूत के ऊपर से ही रगड़ने लगा और वो सिसकियाँ भरने लगी और वो कहने लगी हाँ बहुत अच्छे.. बस ऐसे ही लगे रहो ऊओसुउउउ अह्ह्ह। फिर मैंने मेक्सी का बूब्स वाला हिस्सा खोल दिया और मैंने देखा कि उसके एकदम सफेद बूब्स थे उनको देखकर किसी के भी मुहं में पानी आ जाए फिर मैंने बूब्स को मुहं में ले लिया और चूसने लगा मुझे बहुत मज़ा आने लगा और वो भी सिसकियाँ लेने लगी अहह उह्ह्ह राज चूसो इनको और चूसो उउईईइ अह्ह्ह उनके निप्पल एकदम गुलाबी थे और में मुहं में लेकर चूस रहा था और बहुत ज़ोर से बूब्स को दबा रहा था।

तो वो बोली कि अह्ह्ह प्लीज थोड़ा धीरे करो बहुत दर्द हो रहा है फिर नाभि को चूसते हुए मैंने उनकी मेक्सी का नीचे का हिस्सा भी उतार दिया और उसकी चूत यारों एकदम साफ शेव की हुई थी। में झट से उनकी चूत को चाटने लगा और वो मेरा मुहं अपनी चूत पर दबा रही थी और चिल्ला रही थी। आह्ह राज और ज़ोर से अह्ह्ह उह्ह्ह्हऑश माँ मर गई अह्ह्ह फिर क्या था वो झड़ गई और फिर उसने मुझको लेटा दिया और धीरे धीरे मेरे कपड़े उतारने लगी और मुझे किस करने लगी। फिर में सिर्फ अंडरवियर में था और वो मेरे लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही हिलाने लगी और फिर मुहं में लेने लगी फिर झट से उसे उतार दिया और मेरा 8.5 इंच का लंड देखकर उसके मुहं पर एक ख़ुशी सी नजर आने लगी और वो उसे बस देखे ही जा रही थी। तो मैंने झटके से उसके मुहं में लंड को डाल दिया और वो ना ना करती रही.. लेकिन में कहाँ सुनने वाला था और उसके मुहं में मेरा पूरा लंड समा भी नहीं रहा था.. लेकिन फिर भी वो उसे लोलीपोप की तरह चूसने लगी और मेरा बुरा हाल होता गया.. वो बहुत ज़ालिम की तरह मेरा लंड चूस रही थी। वाह! दोस्तों में क्या बताऊँ में तो जन्नत में था और फिर 5 मिनट बाद में उसके मुहं में झड़ गया.. लेकिन फिर भी उसके मुहं को पकड़कर चोदने लगा और उसके मुहं से पुच पुच की आवाज आने लगी.. उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी और वो मुझसे दूर होने की कोशिश करने लगी। में उसके मुहं में लंड को आगे पीछे करे ही जा रहा था और कुछ देर के बाद में बेड पर लेट गया और वो मेरा सारा वीर्य पी गई और मेरा लंड फिर से मुहं में लेकर साफ करने लगी और उसने फिर से मेरा लंड खड़ा कर दिया और बोली कि राज मुझसे अब नहीं रहा जा रहा.. प्लीज अपनी इस रांड को चोद दो और फाड़ दो उसकी यह प्यासी चूत। तो मैंने कहा कि थोड़ा सब्र रखो मेरी जान और में उसकी चूत को चाटने लगा.. दो तीन मिनट चाटने के बाद लंड को उसकी चूत पर रखा और ज़ोर से झटका लगाया तो वो ज़ोर से चिल्ला गई अह्ह्ह ऑश माँ मर गई.. राज थोड़ा धीरे करो.. प्लीज यार तुम जब भी चोदते हो तो नानी याद दिला देते हो.. प्लीज थोड़ा धीरे से करो। तो मैंने कहा कि तभी तो चुदाई का मज़ा आता है मेरी जान.. फिर और ज़ोर से मैंने दूसरा झटका लगया और मेरा पूरा लंड उसकी चूत की दीवारों को चीरता हुआ अंदर चला गया और वो चीखने चिल्लाने लगी और उसकी आँख से आंसू बाहर आ गये और में उसके होंठो को किस करने लगा और जल्दी जल्दी धक्के मारता रहा और वो चिल्लाती रही कि मार डाला.. प्लीज थोड़ा धीरे कर अहह उह्ह। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है

फिर मैंने उसको खड़ा किया और उसका एक पैर ऊपर किया और मेरे कंधे पर रख लिया.. वो बोली अरे वाह आज तो नयी नयी पोज़िशन बना रहे हो.. लेकिन प्लीज राज थोड़ा धीरे करो और मैंने ज़ोर से धक्का देकर लंड उसकी चूत में डाल दिया वो चिल्लाने लगी और मुझसे चुदने लगी अह्ह्ह माँ मर गई अह्ह्ह प्लीज बाहर निकालो.. प्लीज निकालो और में झटके देता रहा। फिर वो झड़ गयी और थोड़ी बेहोश जैसे हो गयी और मैंने चूत से लंड को बाहर निकाला और उसके मुहं में डाल दिया और लंड को मुहं में धक्के देकर चोदने लगा और फिर से मुहं में सारा माल डाल दिया। हम दोनों बेड पर लेट गये। फिर थोड़ी देर बाद वो मुझे किस करने लगी और बोली कि आज बहुत दर्द हुआ राज.. लेकिन मज़ा भी बहुत आया.. चलो अब में फ्रेश हो जाती हूँ और वो बाथरूम में गई और में भी उसके पीछे गया। तो वो मुझे देखकर बोली कि प्लीज राज अब नहीं.. मुझमें और ताक़त नहीं है प्लीज़। तो मैंने कहा कि अरे चुदाई जितनी ज़्यादा हो उसकी अगली चुदाई में उतना ही ज्यादा मज़ा आता है मेरी जान।

फिर में उसके बूब्स को चूसने लगा और थोड़ी देर बाद मैंने उसे लंड की तरफ़ इशारा किया और वो उसको चूसने लगी। मैंने कहा कि में आज तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ। तो उसने झट से लंड को बाहर निकाला और बोली कि नहीं राज.. तुम चूत में डालकर हालत खराब कर देते हो और जब गांड में डालोगे तब मेरा क्या होगा? में तो मर ही जाऊंगी और शायद जिंदा बची तो ठीक से चल भी नहीं पाउँगी। फिर मैंने कहा कि अरे जान ऐसा कुछ नहीं होगा.. सिर्फ़ थोड़ा सा दर्द तो होगा.. लेकिन उसके बाद मज़ा भी बहुत आता है और वो फिर भी ना ना करने लगी मैंने और समझाया.. लेकिन फिर भी ना। तो मैंने कहा कि अरे यार एक बार ट्राई तो करो अगर तुम्हे ज्यादा दर्द होगा तो में बाहर निकाल दूँगा। तभी उसने कहा ठीक है.. लेकिन थोड़ा धीरे धीरे ही डालना। फिर क्या था मैंने उसकी 36 की गांड पर एक ज़ोर से थप्पड़ मारा और देखा वो एकदम लाल हो गई थी और में उसको बेडरूम में ले गया और उसकी गांड को थोड़ा चाटा और गांड में एक उंगली डाल दी। वो चिल्ला उठी और बोली कि देखो राज एक उंगली से इतना दर्द हो रहा है तो तेरा लंड जाने से मेरी तो पूरी की पूरी गांड फट जायेगी। फिर मैंने कहा कि क्या यहाँ पर लोशन है? तो वो बोली कि हाँ.. वहाँ पर वो ड्रा खोलो और मैंने लोशन निकाला और उसकी गांड के छेद पर लगा दिया और उसने मेरे लंड को मुहं में ले लिया और थोड़ा मेरे लंड पर लगा दिया। फिर मैंने उसे डॉगी स्टाईल में होने को कहा वो बोली कि ठीक है.. लेकिन राज प्लीज धीरे धीरे। तो मैंने लंड को उसकी गांड के छेद पर रखा और धीरे से धक्का दिया तो मेरा आधा टोपा उसकी गांड में जा चुका था और वो बहुत ज़ोर से चिल्ला रही थी। राज प्लीज़ अह्ह्ह अईईईई में मर गई अहह बाहर निकालो प्लीज़ मैंने सोचा अगर धीरे धीरे डालूँगा तो यह डालने नहीं देगी और उसे दर्द भी ज्यादा होगा और मैंने एकदम ज़ोर से झटका लगाया तो आधा लंड उसकी गांड में चला गया और उसकी हालत देखने जैसी थी। दर्द के मारे वो मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी और उसकी आखों में से आंसू निकल रहे थे और वो मुझे गालियां दे रही थी और बोल रही थी अरे मादरचोद छोड़ मुझे.. में मर गयी, प्लीज भगवान के वास्ते अहह मुझे छोड़ दो प्लीज। में उसके बूब्स को पकड़कर दबा रहा था। फिर मैंने एक और ज़ोर से झटका लगाया तो मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी गांड में चला गया और वो बहुत ज़ोर से चिल्लाने लगी अह्ह्ह माँ मर गई और थोड़ी देर बेहोश जैसी हो गई और में भी वैसे ही पड़ा रहा। फिर दो तीन मिनट के बाद उसको होश आया और वो बोली कि राज आज बस बहुत हुआ.. प्लीज इसे बाहर निकालो।

तो में बिना कुछ सुने लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा जिससे थोड़ी देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और वो खुद ही अपनी गांड को आगे पीछे करने लगी और बोली कि राज बहुत मज़ा आ रहा है फाड़ दो आज मेरी गांड। तो क्या अब मैंने भी ज़ोर ज़ोर से झटके लगाने शुरू कर दिए और वो चिल्लाने लगी अह्ह्ह उह्ह्ह हाँ और ज़ोर से मज़ा आ गया राज.. आज में सातवें आसमान पर हूँ उह्ह्ह ह्म्‍म्म्म। तो मैंने लंड को बाहर निकाला और देखा तो उसकी गांड का छेद बड़ा सा हो गया था.. फिर लंड को उसके मुहं में दिया और फिर में लेट गया और उसे मेरे ऊपर बैठने को कहा वो अपनी गांड का छेद लिए मेरे लंड पर बैठ गई और मैंने झट से उसकी कमर पकड़कर आधा लंड उसकी गांड में डाल दिया.. वो चिल्लाने लगी अहह माँ मरी थोड़ा धीरे और में उसकी कमर पकड़कर ज़ोर ज़ोर से झटके लगाता रहा फिर 10 मिनट बाद में झड़ गया और सारा वीर्य उसकी गांड में डाल दिया। तो उसने मेरे लंड को साफ कर दिया और हम लेट गये.. वो बोली कि राज गांड मरवाने में बहुत मज़ा आता है। अगर आज तुम ना होते तो में यह सुख शायद कभी नहीं ले पाती। मुझे आज बहुत मज़ा आया.. आज से तुम मेरी गांड चोदते रहना ।।

धन्यवाद …