रेखा की मस्त चुदाई

रेखा की मस्त चुदाई

प्रेषक : राकेश ..

Rekha Ki Mast Chudai

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम राकेश है और में कोलकाता में रहता हूँ.. दोस्तों में बहुत दिनों से कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ रहा हूँ और वो मुझे बहुत अच्छी लगती है और इसलिए मेरी भी इच्छा हुई कि में भी अपनी कहानी आप लोगों को सुनाऊं। मेरी उम्र अभी 28 साल है और यह कहानी 4 साल पुरानी है.. उस वक़्त मेरी उम्र 24 साल थी। दोस्तों मेरी एक गर्लफ्रेंड थी जो शक्ल से ज़्यादा सुंदर नहीं थी.. लेकिन उसका शरीर बिल्कुल मदहोश कर देने वाला एकदम सेक्सी था और में जब भी उसको देखता था तो मेरा लंड उसे देखते ही सलामी देने लगता था। वो उस समय 20 साल की होगी और उसके बूब्स कम से कम 36 के तो ज़रूर होंगे और वो मेरे पड़ोस में रहती थी। हमने कई बार फ्रेंच किस किया था और मैंने उसके बूब्स को भी दबाया था.. लेकिन बूब्स दबाते दबाते जब भी में उसकी चूत को छूना चाहता था वो एकदम से मुझे रोक देती थी।

फिर में हर बार उसकी चूत छूने की उम्मीद में दोबारा छूने की कोशिश करता था.. लेकिन छू नहीं पता था। फिर एक दिन उसके परिवार के सभी लोग कुछ दिनों के लिए बाहर गये हुए थे और घर में वो उसकी मम्मी और भतीजी रह गये थे और फिर मैंने देखा कि मौक़ा अच्छा है। तो मैंने उससे कहा कि में आज रात को तुम्हारे पास आऊंगा.. मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है। फिर में रात होने का इंतजार करने लगा और अपना सभी काम खत्म करके अपने रूम में चला गया और सोने लगा.. लेकिन अब मुझे नींद कहाँ आनी थी। तो करीब एक बजे में उठा और उसके घर के पास गया और दरवाज़े पर हाथ रखा तो वो खुल गया.. शायद वो पहले से ही खुला था और फिर में धीरे धीरे सीधा अंदर चला गया। तो मैंने देखा कि रेखा आईने के सामने खड़ी अपने बाल बना रही है तो मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया और उसके बूब्स को दबाने लगा.. क्या बूब्स थे उसके? एकदम मुलायम बड़े बड़े में अपने दोनों हाथों से उसके दोनों बूब्स को बारी बारी से दबा रहा था.. खुले बाल बिना दुपट्टे के बड़ी सी गांड एकदम सेक्सी पतली कमर.. में उसे ऐसे पहली बार देख रहा था।

में पीछे से बूब्स दबा रहा था और उसकी गर्दन पर किस कर रहा था और फिर वो बोली कि बोलो क्या बोलना है? तो मैंने कहा कि तुम्हारी सुन्दरता को देखकर में सब कुछ भूल गया हूँ.. प्लीज आज मुझे अपने सुन्दर जिस्म का मज़ा लेने दो ना और वो शरमाते हुए बोली कि नहीं। तो मैंने कहा कि हाँ और इस तरह में लगातार उसके बूब्स को दबाए जा रहा था और उसके निप्पल को मसल रहा था और साथ ही उसकी गर्दन पर किस किए जा रहा था.. वो क्या मस्त समा था और वो बार बार मुझे रोकने का नाटक कर रही थी.. लेकिन मैंने आहिस्ता आहिस्ता अब अपना एक हाथ उसकी कमीज़ के अंदर डाल दिया था और उसकी निप्पल को मसल रहा था और वो धीरे धीरे गरम हो रही थी.. लेकिन अपनी ज़ुबान से कुछ नहीं कह रही थी। फिर मैंने उसकी कमीज़ को उतारना चाहा.. लेकिन वो मुझे रोक रही थी और आख़िरकार मैंने उसकी एक ना सुनी और ज्यादा देर ना करते हुए उसकी कमीज़ को उतार कर फेंक दिया। फिर अब बारी थी उसकी ब्रा की तो मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और वो एक हाथ से अपनी ब्रा संभाल रही थी और दूसरे हाथ से मुझे हटा रही थी.. लेकिन में इतना बड़ा कमीना उसकी कहाँ मानने वाला था और आख़िरकार मैंने उसकी ब्रा को भी उतार कर फेंक दिया और अब वो मेरे सामने ऊपर से बिल्कुल नंगी थी और में उसके बूब्स देख रहा था.. जैसे तो में पागल ही हो गया क्या बूब्स थे उसके? मैंने उन्हें दबाया तो बहुत था.. लेकिन खुला हुआ पहली बार देख रहा था और मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। में तो उसके बूब्स को बार बार एक एक करके चूस रहा था और मस्ती में डूबा हुआ था और अब वो भी बहुत गरम हो गई थी और सिसकियाँ ले रही थी और मस्ती में आ गयी थी.. उसके मुँह से आ उहह की आवाज़ें बता रही थी कि वो कितना गरम हो चुकी है। तो आख़िरकार उसने ज़बान खोली और मुझसे कहा कि प्लीज अपनी पेंट उतारो ना। तो मैंने कहा कि क्यों तुम इसे नहीं उतार सकती? फिर क्या था वो मेरी पेंट को खोलने लगी.. पहले बेल्ट फिर पेंट और आख़िरी में मेरी अंडरवियर.. मेरा जूनियर तो पहले ही बाहर आने के लिए बड़ा बैताब हो चुका था। बिल्कुल गरम लोहे के सरिए की तरह तनकर खड़ा था और उसकी चूत को सलामी दे रहा था। फिर जैसे ही उसने मेरे लंड को देखा उसके मुँह से आह निकल गयी.. बाप रे इतना बड़ा लंड में इसे नहीं ले सकती.. यह तो किसी जानवर की तरह है इससे तो मेरी चूत फट जाएगी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

तो मैंने कुछ नहीं कहा बस किस करना शुरू रखा.. उसके बूब्स और होंठ को किस करते करते बहुत वक़्त लग चुका था और अब मैंने अपना लंड उसे चूसने को कहा.. लेकिन पहले तो उसने मना कर दिया और फिर मेरे कई बार कहने पर धीरे धीरे चूसने लगी। में तो जैसे सातवें आसमान पर था और फिर आहिस्ता आहिस्ता मैंने उसकी सलवार को भी उतार दिया.. लेकिन वो पेंटी नहीं पहनती थी और उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे। फिर मैंने उसे लेटा दिया और फिर उसकी चूत को चाटने लगा.. वो आहह उफ्फ्फ सीईईईई चिल्ला रही थी.. लेकिन इस बार वो मना करने की बजाए मेरा सर अपनी चूत में दबा रही थी। इसका मतलब कि मुझे वो चूत चोदने को ज़रूर मिलेगी। फिर करीब 20 मिनट तक चूत चटवाने और उसके बूब्स मसलवाने के बाद वो बोली कि आजा मेरे राजा अब मुझसे सहन नहीं होता प्लीज डाल दे इसे मेरी प्यासी चूत में जो भी होगा देखा जाएगा। तो मेरा जूनियर तो पहले ही तैयार था और यह सुनते ही मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और वो ज़ोर से चिल्लाई.. लेकिन में उसी वक़्त उसे लिप्स किस करने लगा और उसे चिल्लाने से रोक लिया।

फिर धीरे धीरे में अपना लंड उसकी चूत में डालने लगा और वो भी मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी और आज बड़ी मुश्किलों के बाद में अपना लंड उसकी टाईट चूत में डालने में कामयाब हो गया। वो चिल्ला रही थी और ज़ोर से और ज़ोर से फाड़ डालो इस चूत को बहुत दिनों से प्यासी है किसी रस के लिए। तो मुझे यह बात सुनकर बहुत मज़ा आ रहा था और सेक्स का मज़ा और भी बढ़ रहा था और में उसके बूब्स को ज़ोर जोर से दबाने लगा फिर में उसकी चूत की तरफ गया.. उसकी चूत पर थोड़े थोड़े बाल थे और फिर मैंने उसकी चूत के पास एक हाथ रखा और फिर एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी। तो उसके मुहं से एक जोर की चीख निकल गयी और में उसकी चूत चाटने लगा। धीरे धीरे उसे और मज़ा आ रहा था। फिर में दो उंगली डालकर ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करने लगा। फिर वो ज़ोर जोर से मेरा लंड हिलाने लगी और थोड़ी देर के बाद मेरे लंड ने भी उसके ऊपर अपना वीर्य छोड़ दिया। फिर मैंने उसको उठाया और कमरे में ले गया उसको बिस्तर पर पटककर में उसकी चूत चाटने लगा और वो मेरा लंड चूस रही थी। फिर 10 मिनट के बाद अब उसकी चुदाई की बारी थी। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के छेद के पास रख दिया और उसने बिस्तर पर लेटकर अपने दोनों पैर चौड़े कर लिए। अब में धीरे धीरे अपना लंड अंदर डालने लगा। आधा लंड अंदर गया तो मैंने एकदम से पूरा लंड एक जोर के धक्के के साथ अंदर डाल दिया.. उसकी चीख निकल गयी और उसकी चूत के वहाँ से खून आने लग गया फिर में ज़ोर ज़ोर से उसे चोदने लगा.. तो उसे भी दर्द के साथ साथ मज़ा आ रहा था। फिर मैंने अपना लंड निकाला और उसे कुतिया की पोज़िशन में बैठाया और उसकी गांड के छेद में अपना लंड धीरे धीरे धक्को के साथ डाल दिया और उसे चोदने लगा। उसके मुहं से आवाज़ आ रही थी। फिर में बिस्तर पर लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गयी और मैंने अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया और उसके बूब्स चूसने लगा और उसे चोद भी रहा था। फिर एक घंटे तक हम एक दूसरे का मज़ा लेते रहे और फिर में उसकी चूत में ही झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया। फिर थोड़ी देर बाद में बाहर आया तो देखा कि कोई भी नहीं है सारे लोग सो रहे थे तो में भी चुपके से अपने घर पर जाकर सो गया और उस रात के बाद कभी मुझे सेक्स करने का मौका नहीं मिला.. लेकिन मुझे हमेशा अपना गुज़रा हुआ समय याद आता है ।।

धन्यवाद …

Hindi Sex Story दीपा मेडम 2

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रविवार वाले दिन फिर हम दोनों साथ साथ नहाते हैं और फिर बाथरूम में भी खूब चूसा चुसाई के दौर के बाद एक बार फिर से गर्म पानी के फव्वारे के नीचे घंटों प्रेम मिलन करते रहते हैं। कई बार वो बाथटब में मेरी गोद में बैठ जाया करती है या फिर वो पानी की नल पकड़ कर या दीवाल के सहारे थोड़ी नीचे झुक कर अपने नितम्बों को थिरकाती रहती है और मैं उसके पीछे आकर उसे बाहों में भर लेता हूँ और फिर पप्पू और लाडो दोनों में महा संग्राम शुरू हो जाता है। उसके गोल मटोल नितम्बों के बीच उस भूरे छेद को खुलता बंद होता देख कर मेरा जी करता अपने पप्पू को उसमें ही ठोक दूँ। पर मैं उन पर सिवाय हाथ फिराने या नितम्बों पर चपत (हलकी थपकी) लगाने के कुछ नहीं कर पाता। पता नहीं उसे गाण्ड मरवाने के नाम से ही क्या चिढ़ थी कि मेरे बहुत मान मनोवल के बाद भी वो टस से मस नहीं होती थी। एक बात जब मैंने बहुत जोर दिया तो उसने तो मुझे यहाँ तक चेतावनी दे डाली थी कि अगर अब मैंने दुबारा उसे इस बारे में कहा तो वो मुझ से तलाक ही ले लेगी।
मेरा दिल्ली वाला दोस्त सत्य जीत (याद करें लिंगेश्वर की काल भैरवी) तो अक्सर मुझे उकसाता रहता था कि गुरु किसी दिन उल्टा पटक कर रगड़ डालो। शुरू शुरू में सभी पत्नियाँ नखरे करती हैं वो भी एक बार ना नुकर करेगी फिर देखना वो तो इसकी इतनी दीवानी हो जायेगी कि रोज़ करने को कहने लगेगी।
ओह …यार जीत सभी की किस्मत तुम्हारे जैसी नहीं होती भाई।
एक और दिक्कत थी। शुरू शुरू में तो हम बिना निरोध (कंडोम) के सम्भोग कर लिया करते थे पर अब तो वो बिना निरोध के मुझे चोदने ही नहीं देती। और माहवारी के उन 3-4 दिनों में तो पता नहीं उसे क्या बिच्छू काट खाते हैं वो तो मधु से मधु मक्खी ही बन जाती है। चुदाई की बात तो छोड़ो वो तो अपने पुट्ठे पर हाथ भी नहीं धरने देती। और इसलिए पिछले 3 दिनों से हमारा चुदाई कार्यक्रम बिल्कुल बंद था और आज उसे जयपुर जाना था, आप मेरी हालत समझ सकते हैं।
आप की जानकारी के लिए बता दूं राजस्थान में होली के बाद गणगौर उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। कुंवारी लड़कियाँ और नव विवाहिताएं अपने पीहर (मायके) में आकर विशेष रूप से 16 दिन तक गणगौर का पूजन करती हैं मैं तो मधु को भेजने के मूड में कतई नहीं था और ना ही वो जाना चाहती थी पर वो कहने लगी कि विवाह को 3-4 महीने हो गए हैं वो इस बहाने भैया और भाभी से भी मिल आएगी।
मैं मरता क्या करता। मैं इतनी लम्बी छुट्टी लेकर उसके साथ नहीं जा सकता था तो हमने तय किया कि मैं गणगोर उत्सव के 1-2 दिन पहले जयपुर आ जाऊँगा और फिर उसे अपने साथ ही लेता आऊंगा। मैंने जब उसे कहा कि वहाँ तुम्हें मेरे साथ ही सोना पड़ेगा तो वो तो मारे शर्म के गुलज़ार ही हो गई और कहने लगी,”हटो परे … मैं भला वहाँ तुम्हारे साथ कैसे सो सकती हूँ?”
“क्यों ?”
“नहीं… मुझे बहुत लाज आएगी ? वहाँ तो रमेश भैया, सुधा भाभी और मिक्की (तीन चुम्बन) भी होंगी ना? उनके सामने मैं … ना बाबा ना … मैं नहीं आ सकूंगी … यहाँ आने के बाद जो करना हो कर लेना !”
“तो फिर मैं जयपुर नहीं आऊंगा !” मैंने बनावती गुस्से से कहा।
“ओह …?” वो कातर (निरीह-उदास) नज़रों से मुझे देखने लगी।
“एक काम हो सकता है?” उसे उदास देख कर मैंने कहा।
“क्या?”
“वो सभी लोग तो नीचे सोते हैं। मैं ऊपर चौबारे में सोऊंगा तो तुम रात को चुपके से दूध पिलाने के बहाने मेरे पास आ जाना और फिर 3-4 बार जम कर चुदवाने के बाद वापस चली जाना !” खाते हुए मैंने उसे बाहों में भर लेना चाहा।
“हटो परे … गंदे कहीं के !” मधु ने मुझे परे धकेलते हुए कहा।
“क्यों … इसमें गन्दा क्या है?”
“ओह .. प्रेम … तुम भी… ना.. चलो ठीक है पर तुम कमरे की बत्ती बिल्कुल बंद रखना … मैं बस थोड़ी देर के लिए ही आ पाऊँगी !” मधु होले होले मुस्कुरा रही थी।

भाभी ने माँ को चोदना सिखाया

Bhabhi Ne Maa Ko Chodna Sikhaya

प्रेषक : वासु ..

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम वासु है और आज में आप सभी को कामुकता डॉट कॉम पर अपनी एक सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ.. दोस्तों यह स्टोरी मेरी भाभी और मेरी माँ के साथ मेरे गलत सम्बन्ध के ऊपर आधारित है। मेरी माँ और भाभी के बूब्स बहुत मोटे है और गांड दोनों की एक जैसी ही है। मेरी माँ की उम्र 42 साल है और मेरी भाभी की उम्र 34 साल है और में 18 साल का हूँ। दोस्तों यह बात तब की है जब में एक बार माँ को नंगी देखकर पागल हो गया था.. माँ बिल्कुल नंगी होकर नहा रही थी और तब से में माँ के जैसे फिगर वाली औरतों में ज़्यादा रूचि लेने लगा और मेरी बहुत तमन्ना थी कि में भी चुदाई करूं.. माँ की नंगी चूत को चाटूं और माँ की गांड भी मारुँ और फिर लगता था कि सब यूँ ही रह जाएगा.. लेकिन फिर में बुआ के यहाँ गया और वहाँ पर मेरी भाभी भी थी.. भाभी हमेशा साड़ी के अंदर कभी भी पेंटी नहीं पहनती थी और यह बात मैंने भाभी के मुहं से सुनी थी वो एक दिन माँ से कह रही थी कि आप भी तो पेंटी नहीं पहनती और फिर मैंने भाभी को फंसाने की सोची और फिर एक दिन मेरी भाभी अपने बच्चे को दूध पिला रही थी और मैंने उसके मोटे मोटे बूब्स देखे और में उनको घूरकर देखने लगा.. लेकिन भाभी ने मुझे इस तरह उनके बूब्स को देखने पर भी कुछ नहीं कहा और ब्लाउज को थोड़ा नीचे कर लिया। फिर में धीरे धीरे भाभी से बहुत मज़ाक करने लगा और खुलकर बातें करने लगा.. तो वो भी थोड़ा बहुत समझ जाती थी और फिर धीरे धीरे भाभी का भी मेरे साथ मन लग गया और उन्हें भी मेरे से बात करना अब बहुत अच्छा लगता था।

फिर एक दिन हम बातें कर रहे थे और थोड़ी ही देर के बाद भाभी बोली कि में नहा लेती हूँ.. मुझे बहुत गरमी लगने लगी है। तो मैंने कहा कि हाँ नहा लो.. तो वो बहार बरामदे में दरवाजा बंद करके नहाने लगी। तो मैंने मजाक में कहा कि दरवाजा थोड़ा अच्छे से बंद करना वरना में तुम्हे नहाते हुए देख लूँगा। तो वो कहने लगी कि नहीं तुम अंदर ही रहना। फिर वो थोड़ी देर के बाद नहाकर आ गई और बोली कि में बिल्कुल नंगी होकर नहाती हूँ और पेटिकोट भी नहीं पहनती.. क्योंकि वो गीला होकर चिपक जाता है और नहाने में बहुत दिक्कत होती है इसलिए में हमेशा ऐसे ही नहाती हूँ और फिर मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और चूमने लगा.. तो वो कहने लगी कि चल दूर हट वरना कोई आ जाएगा। तो मैंने कहा कि कोई नहीं आएगा.. प्लीज एक बार करने दो ना और मैंने उनके होंठ को अपने होंठो से चूस लिया.. तो वो कह रही थी कि बस करो समझा करो कोई आ जाएगा। फिर मैंने भाभी को छोड़ दिया और उसके अगले दिन वो कपड़े बदल रही थी.. तो मैंने कहा कि आ जाऊं.. तो वो कहने लगी कि सब तुम्हारा ही तो है आ जाओ। फिर भाभी बिल्कुल नंगी हो गई और उसने अपने पेटिकोट का नाड़ा खोल दिया तो वो नीचे गिर गया और में भाभी से लिपट गया और मैंने कहा कि में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और उसे चूमने लगा और बूब्स चूसने लगा। तो वो कहने लगी कि उफफफफफ्फ़ आहह वासु आराम से पियो दूध और थोड़ा सा बचा देना बच्चे को भी पिलाना है। फिर मैंने एक बूब्स पिया और फिर थोड़ी देर के बाद दूसरे वाले से भी पिया.. फिर मैंने कहा कि में नीचे की जगह भी चूस लूँ.. लेकिन उसने कोई भी जवाब नहीं दिया.. बस सिसकियाँ लेती रही। तो मैंने देर ना करते हुए झट से अपना मुहं उसकी चूत पर लगा दिया और उसको बोला कि में दूध की जगह जूस तो सारा पी सकता हूँ ना। तो वो कहने लगी कि वासु इसमे से जितना जूस पिया जाये पी लो उफफफ्फ़ अहह माँ मर गयी उफफफफफ्फ़ और वो मेरे सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी और फिर कहने लगी और ज़ोर से चूस और कुछ देर के बाद कहने लगी कि मुझे अपना वो दिखाओ। तो मैंने कहा कि आपका ही है निकाल लो ना.. तो उसने मेरी पेंट को खोलकर लंड को बाहर निकाला और कहने लगी कि यह तो बहुत लम्बा है और मेरी उम्मीद से कहीं बड़ा है और मैंने इतना बड़ा लंड कभी भी नहीं देखा और यह कहकर लंड को मुहं में लिया और चूसने लगी। तो में कहने लगा कि हाँ भाभी और लो पूरा डालो मुहं में.. हाँ और आगे पीछे करो.. भाभी हाँ बहुत अच्छे.. हाँ ऐसे ही करो। तो बोली कि हाँ वासु में कर रही हूँ और फिर थोड़ी देर बाद कहने लगी कि अब रहा नहीं जा रहा.. तो वो कहने लगी कि एक मिनट रूको.. में मेक्सी पहन लूँ फिर नीचे से नंगी रहूंगी तो तुम आराम से कर लेना और कपड़े पहने में भी ज्यादा देर नहीं लगेगी और फिर उन्होंने मेक्सी पहनी और उन्होंने अपनी मेक्सी को चूत से ऊपर अपने बूब्स तक उठा लिया।

फिर मैंने उनको नीचे लेटा दिया और लंड को एक ही धक्के के साथ चूत के अंदर डाल दिया तो वो बहुत ज़ोर से चिल्ला पड़ी अहह उईईई माँ मरी.. धीरे करो। तो मैंने कहा कि क्या हुआ? क्या ज्यादा दर्द हो रहा है? तो वो कहने लगी कि हाँ तुम्हारा लंड बड़ा है ना.. तुम एक काम करो थोड़ा मक्खन लगा लो.. तो मैंने अपने लंड पर मक्खन लगाया और लंड को एकदम ज़ोर से धक्का देकर अंदर डाल दिया। तो वो उफफफफ्फ़ अहह माँ मर गई और फिर उसने मेरी कमर में अपने दोनों पैर फंसा दिए और मुझे गंदे तरीके से चूमने लगी। फिर में नीचे से पूरा दम लगाकर धक्के मारता रहा और फिर वो भी अपने चूतड़ उछाल कर मरवाने लगी और कहने लगी कि अब तुम थक गए होंगे में तुम्हारे ऊपर आती हूँ और फिर वो मेरे ऊपर आकर चूतड़ो को घुमाने लगी और बूब्स मेरे मुहं में डाल दिया। फिर मैंने उसे कुतिया बनाया.. वो कुतिया बनी हुई क्या लग रही थी? पेरों में पायल और हाथों में चूड़ियाँ और बूब्स पर लटकता हुआ मंगलसुत्र.. बस मैंने और तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए और फिर कहने लगी कि में झड़ गयी हूँ और फिर थोड़ी देर के बाद में भी झड़ने लगा तो उन्होंने मेरा सारा वीर्य अंदर ही गिरा दिया और कहने लगी कि तुमने आज मुझे बहुत खुश कर दिया और फिर मेक्सी को नीचे किया और फिर हम किस करने लगे।

फिर हमने साथ में बैठकर खाना खाया और फिर हम एक हफ्ते तक लगातार ऐसे ही चुदाई करते रहे। फिर कुछ दिनों के बाद मुझे मम्मी ने घर बुला लिया.. तो मेरे जाते वक्त भाभी रोने लगी और में भी रोने लगा। तो मैंने कहा कि में तुम्हारे बिना कैसे रहूँगा और अब में घर में अकेला क्या करूँगा.. मुझे आपकी बहुत याद आएगी और कहा कि आपके पास तो आपके पति का लंड है और में किसकी चूत से मजे लूँगा और मेरी तो अभी शादी भी नहीं हुई है.. पापा, मम्मी को चोदते है.. में उन्हें देख देख कर भी थक चुका हूँ और माँ के अलावा घर पर कोई औरत नहीं है में क्या करूं? कैसे अपने लंड को शांत करूं और मम्मी को नंगी देखकर तो मुझे आपकी और याद आएगी और में उन्हे रोज़ नंगी नहाते हुए देखता हूँ। फिर भाभी बोली कि तुम अपनी माँ को पटा लो और हर रोज़ तुम्हे मज़े आ जाएगे और तुम्हारा लंड भी शांत हो जाएगा। तो मैंने कहा कि माँ नहीं मानेगी और वो बोली कि तुम्हारा लंड देखकर तो हर औरत मान जाएगी और वो भी लंड की बहुत भूखी है और साड़ी के नीचे बिल्कुल नंगी रहती है.. वो साली तुम्हारे पापा से चुदने के अलावा और किसी से अभी तक नहीं चुदी है.. लेकिन में तुम्हारी मदद करूँगी और फिर वो मान जाएगी और फिर तुम माँ को बहुत खुश रखना। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर भाभी ने कहा कि तुम बाथरूम से नहाकर बाहर निकलना और अपना तोलिया उसके सामने गिरा देना और उसे अपना लंड दिखा देना। फिर में घर आ गया और मैंने ऐसा ही किया.. नहाते हुए बिल्कुल नंगा हो कर नहाने लगा और जानबूझ कर तोलिया और अंडरवियर बाथरूम में नहीं लेकर आया और माँ को आवाज़ दी और मुहं पर साबुन लगा लिया और आंख बंद करके हाथ बाहर निकल कर तोलिया लेने लगा और दरवाजा ज्यादा खोल दिया और मेरी माँ तोलिया देते हुए और मेरे लंड को देखती रह गयी और चली गयी। तो मैंने भाभी को फोन पर सब कुछ बताया.. फिर उसने मुझे दूसरा प्लान बताया और वो कहने लगी अपनी चैन में अपना लंड फंसाना पड़ेगा और फिर चिल्लाना पड़ेगा। तो मैंने कहा कि भाभी में माँ के लिए कुछ भी करूंगा और मैंने ऐसा ही किया और हल्का सा पेंट की चैन में लंड फंसाकर चिल्लाया तो माँ मेरी आवाज सुनकर आ गई और बहुत डर गयी। फिर मेरे लंड की तरफ देखने लगी और हाथ लगाते हुए डरने लगी और एकदम से लंड पकड़कर चैन पर तेल डाला और लंड पेंट की चैन से निकल गया और मेरा लंड एकदम से माँ के मुहं की तरफ खड़ा हो गया। तो माँ उसके सुपाड़े की खाल उतारकर देखने लगी और कहने लगी कि अंडरवियर क्यों नहीं पहनते हो?

तो मैंने कहा कि माँ तुम भी तो नहीं पहनती हो। तो वो कहने लगी कि हमारी बात कुछ और है.. तो मैंने कहा कि क्या बात है? वो कहने लगी कि हमारा इतना मोटा केले जैसा नहीं होता है तो मैंने कहा कि माँ फिर कैसा होता है? माँ ने कहा कि बस थोड़ा छोटा सा छेद होता है। तो मैंने कहा कि माँ आप भी आपका वो दिखाओ ना कैसा होता है? तो माँ ने मेरे लंड हाथ से छोड़ दिया और फिर मैंने माँ से कहा कि आपने भी मेरा देखा है ना.. आप भी दिखा दो ना। फिर माँ ने कहा कि नहीं में नहीं दिखा सकती हूँ और फिर मैंने कहा कि माँ प्लीज आपको मेरी कसम। तो माँ ने कहा कि इसमे कसम देने की क्या ज़रूरत थी? तो मैंने कहा कि माँ क्या आप मेरी कसम तोड़ोगी? तो माँ ने अपनी साड़ी को ऊपर करके मुझे दिखाने लगी.. उनकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे और में नीचे बैठकर बड़े ध्यान से देखने लगा और मैंने कहा कि माँ साड़ी को ऊपर करके पकड़े रहो और दोनों पैर खोलकर दिखाओ ना और माँ ने अपने दोनों पैर खोल दिए और मुझे अपनी चूत दिखाने लगी।

तो मैंने एकदम से माँ की चूत के दाने को मुहं से कसकर चूसा और माँ चिल्लाई उफफफफ्फ़ आईई क्या कर रहा है.. छीईई.. मुहं हटा वहाँ से वो गंदी चीज़ है बेटा। तो में कहने लगा कि नहीं माँ मुझे अच्छी लगती है और माँ उफफफ्फ़ अहह कर रही थी.. फिर मुझे जोश चड़ने लगा तो में और चूत पर मुहं से झटके लगाने लगा माँ उफफफफफ्फ़ अहह और मेरा सर चूत में दबाने लगी। फिर माँ ने कहा कि चल बस हो गया अब छोड़ दे। तो मैंने कहा कि अभी तो इसकी प्यास बुझाऊंगा माँ यह सुनते ही बोली कि तू समझदार है और सब जनता है.. फिर भी मुझे तड़पा रहा है। इतना प्यारा लंड है तेरा.. कितना मज़ा देगा यह आह उफ़फफफफ और फिर शरमाने लगी और वो पूरे जोश में थी.. फिर कहने लगी कि बेटा मेरी साड़ी खोल दो ना। तो मैंने माँ की साड़ी खोली और माँ का ब्लाउज, ब्रा और अब माँ के विशाल बूब्स मेरे मुहं में थे और माँ ने सिसकियाँ भरना शुरू कर दिया और दूसरा बूब्स मेरे मुहं में डाल दिया। तो मैंने माँ का नाड़ा खोल दिया और माँ का पेटिकोट खुल गया और नीचे गिर गया.. माँ पूरी नंगी थी। अब माँ क्या लग रही थी.. सर पर बिंदी बूब्स पर लटकता मंगलसूत्र और हाथों में चूड़ियां और पेरों में पायल और बिल्कुल नंगी.. दोस्तों आज मेरा सपना सच होने जा रहा था.. मैंने कहा कि माँ में आपकी चुदाई के पहले चूत में सिंदूर भरूँगा.. तुम्हे पहले अपना बनाऊँगा फिर चोदूंगा.. तो माँ कहने लगी कि तुझे जो करना है कर.. लेकिन मेरी प्यास बुझा दे.. में बहुत बहुत दिनों से भूखी हूँ.. तेरे पापा भी यहाँ पर नहीं रहते है। फिर मैंने सिंदूर का लाल तिलक झांटो के ऊपर लगा दिया और माँ की चूत के होंठो पर लिस्टिक लगाई और फिर उसे किस करने लगा माँ उफफफफफ्फ़ कितना अच्छा बेटा है तू.. थोड़ा लंड पर शहद लगा ले.. में भी तेरा लोलीपोप चूसूंगी.. तो माँ और में 69 पोज़िशन में एक दूसरे के लिंग और योनि को चूसने लगे उफफफफ्फ़ हफफफ्फ़ बेटा बहुत मज़ा आ रहा है। तुम्हारे लंड से शादी करके अच्छा लग रहा है और में माँ के ऊपर ही लेट गया तो मैंने माँ की चूत पर मेरा लंड लगाया। वो एकदम चिल्ला गई.. लेकिन चूत गीली होने के कारण माँ ज्यादा ज़ोर से नहीं चिल्लाई और कहने लगी कि उफफफ्फ़ कितना मोटा है.. मेरी चूत को इसे लेने के लिए पूरा मुहं खोलना पड़ रहा है। फिर मैंने धक्के और तेज़ कर दिए और माँ ने भी चूतड़ को उछालना शुरू कर दिया।

फिर वो कहने लगी कि उफ़फ्फ़ अह्ह्ह बेटा और तेज़ करो.. माँ को चोद और चोद उउफफफफ्फ़.. बुझा दे इसकी प्यास.. तो में माँ के दोनों पैर अपने हाथ से पकड़कर चोदने लगा और चूमने चाटने लगा। तो माँ कहने लगी कि तू मुझसे कितना प्यार करता है? तो मैंने माँ को अपनी गोद में ले लिया और हम एक दूसरे से चिपक कर चूमने लगे.. माँ उफफफफफ्फ़ आअहह बेटा बहुत मज़ा आ रहा और माँ ने कहा कि तू थक गया होगा और माँ मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लंड पर बैठ गयी और उचकने लगी और फिर लंड पर चूतड़ को गोल गोल घुमाने लगी.. माँ उफफफ्फ़ आह बेटा में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और माँ कहने लगी कि में झड़ने वाली हूँ और फिर मैंने माँ को गोद में ले लिया और माँ को लेकर खड़ा होकर चोदने लगा। माँ की चूत और चूतड़ को खड़े खड़े उछाल रहा था और माँ मेरे गले में हाथ डालकर किस कर रही थी और मेरे निप्पल चूस रही थी। फिर स्मूच करते ही माँ झड़ गयी और फिर मैंने भी झड़ गया और फिर में और माँ नंगे ही सो गये। फिर माँ और मैंने खाना खाया और हम दोनों पूरे दिन नंगे रहे और हमने 4 बार और चुदाई की और फिर हम सो गये ।।

धन्यवाद …

पति की गर्लफ्रेंड मेरी सौतन भाग 2

Pati Ki Girlfriend Meri Sotan – Part 2

प्रेषक : मानसी ..

हैल्लो दोस्तों.. में मानसी फिर एक बार आप लोगों के सामने हाजिर हूँ अपनी एक नयी दास्तान लेकर और अब में आप लोगों को बोर ना करते हुए अपनी पिछली कहानी का अगला भाग सुना रही हूँ और में उम्मीद करती हूँ कि आप लोगों को यह बहुत पसंद आएगी और जैसा कि आप लोगों को पता ही है मैंने अपने पति की गर्लफ्रेंड गीता को उनके साथ मिला दिया और शादी भी करवा दी.. अब हम तीनों एक साथ एक ही बेडरूम में रहते है और हमारे बीच में कोई भी परदा नहीं है और जब हमारा दिल करता है हम लोग सेक्स करते है और अब तो जब सुनील ऑफिस चला जाता है तो हम लोग दिन भर लेस्बियन सेक्स करते रहते है।

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पहले तो में लेस्बियन को पसंद नहीं करती थी.. लेकिन गीता ने कई बार कहा और मुझे लेस्बियन में एक्सपर्ट बना दिया और हम लोग हर दिन लेस्बियन करते रहते है और रात को हम लोग सुनील के साथ ग्रुप सेक्स करते है और में इसी में बहुत खुश भी हूँ.. लेकिन उन ख़ुशी के साथ साथ मुझे थोड़ा और तड़का भी मिल गया जो कि में यह स्टोरी में बता रही हूँ। दोस्तों यह कुछ दिन पहले की बात है.. में कुछ शॉपिंग के लिए मुंबई सेंट्रल माल में गई थी। वहाँ पर मुझे अपने कॉलेज टाईम का एक फ्रेंड मिल गया। उसका नाम देव है जो कि मुंबई में रहता है और कॉलेज के बाद हम लोगों का कोई संपर्क नहीं था.. तभी अचानक वो मेरे सामने आ गया.. पहले तो में पूरी तरह चकित हो गई और बाद में मुझे बहुत ख़ुशी मिली कि कोई पुराना दोस्त मिल गया। फिर हम लोग कॉफी शॉप पर गये और बातें करने लगे। तो उसने मुझे बताया कि वो कल्याण में एक फ्लेट लेकर रहता है.. फिर हम लोगों ने अपना अपना मोबाईल नंबर एक दूसरे को दे दिया और फिर शॉपिंग करके निकल गये।

फिर दो दिन बाद देव ने मुझे फोन किया और बोला कि क्या अगर तुम फ्री हो तो कल्याण आ सकती हो? तो में बोली कि क्यों कोई खास काम है क्या? तो वो बोला कि आज मैंने ऑफीस से छुट्टी ले रखी है और तुम आ जाओगी तो हम लोग बैठकर बातें करेंगे। तो में बोली कि ठीक है में बताती हूँ और फोन रख दिया फिर में सोचने लगी कि में अकेली कैसे जाऊँगी? सुनील और गीता को क्या बताऊँगी? फिर मैंने एक बहाना बनाया और में उनसे बोली कि मुझे मेरे एक दोस्त से मिलना है तो में जा रही हूँ और आते वक़्त मुझे थोड़ी देर हो ज़ायगी। तो सुनील बोला कि ठीक है जाओ.. लेकिन जल्दी आ जाना। फिर मैंने एक काली जींस और नीला टॉप पहना और तैयार होकर कल्याण के लिए निकल पड़ी और कल्याण पहुंचकर मैंने देव को फोन किया। तो वो कार लेकर मुझे लेने पहुंच गया और हम लोग उसके घर की तरफ निकल गये। रास्ते में वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा देता था और में भी मुस्कुराती थी.. फिर हम घर पहुंच गये और उस घर में वो बिल्कुल अकेला रहता था। वो एक बेडरूम वाला फ्लेट था और हम लोग बैठकर बातें करने लगे और बातें करते वक़्त वो मेरी तरफ घूर घूर कर देख रहा था तो में समझ गई कि उसका इरादा क्या है? फिर में सोचने लगी कि अगर सुनील अपनी ख़ुशी के लिए दो दो लडकियों से चुदाई कर सकता है तो में क्यों नहीं कर सकती? और यही बात सोचकर में भी देव को मौका देने लगी। तभी देव ने मुझसे पूछा कि क्या तुम बियर पियोगी? तो मैंने बोला कि नहीं यार में नहीं पीती तो वो बहुत कहने लगा। फिर भी मैंने मना कर दिया और बोली कि में कोल्ड ड्रिंक्स पीउंगी.. तो वो मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक लेकर आया और वो बियर पीने लगा और में कोल्ड ड्रिंक पीने लगी। जब मेरी कोल्ड ड्रिंक खत्म हुई तो मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था जैसे कि मेरा सर भारी हो रहा था तो मैंने देव से पूछा कि मुझे ऐसा क्यों लग रहा है? तो वो सॉरी बोलकर मुझे बोला कि कोल्ड ड्रिंक में मैंने वोड्का मिला दी थी और यह बात सुनकर में उससे बहुत नाराज़ हो गई तो वो मुझसे माफी माँगने लगा और मेरे पैर भी पकड़ लिए और बोला कि मुझे माफ़ कर दो मानसी और पैर छूते हुए धीरे धीरे ऊपर आने लगा जैसे ही उसका हाथ मेरे शरीर पर लगा तो वैसे ही मेरे अंदर एक करंट लगने लगा और मुझे नशा होने लगा। फिर वो धीरे धीरे मेरी जाँघ को किस करने लगा तो में मदहोश होकर उसको चूमने लगी और किस करने लगी। तो वो ख़ुशी से मुझे अपनी बाहों में लेकर मेरे बूब्स को दबाने लगा और मेरे बाल खोलकर मेरी गर्दन को किस करने लगा।

फिर ऐसा करते वक़्त मेरी हालत खराब हो गई और में उसकी चेन खोलकर उसके लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी और फिर वो मुझे गोद में उठाकर अपने बेड पर ले गया और उसने मेरी ड्रेस उतारकर मुझे नंगी कर दिया और बोला कि मानसी तुम्हारा यह हुस्न मुझे उस दिन से पागल कर रहा है जब मैंने तुम्हे वेलकम पार्टी में देखा था.. लेकिन मुझे उम्मीद नहीं थी कि वो हुस्न जिसके लिए में आहें भर रहा था वो आज मुझे मिल जाएगा। तो में बोली कि देव आज से तुम जब भी मुझे बुलाओगे में आ जाउंगी और अपने आप को तुम्हारे हवाले करूँगी.. आज से मेरे पति के साथ तुम भी मेरे जिस्म की मलिक हो.. हाँ और एक बात.. में तुम्हारी बीवी तो नहीं बन सकती.. लेकिन रखेल ज़रूर बनूँगी और रंडी की तरह तुम से चुदवाऊँगी.. तुम्हे जो चाहिए मुझसे ले लो मेरी जवानी का भरपूर मज़ा लो और मुझे भी अपने जिस्म की भूख मिटाने दो। फिर जब मैंने देव को ऐसा बोला तो वो बहुत खुश होकर मेरे बूब्स को दबाने लगा और चूसने लगा और हम लोग 69 पोज़िशन में एक दूसरे को चूसने लगे। जब वो मेरी चूत को चूस रहा था तो मेरी चूत का पानी उसके मुहं में जा रहा था और वो अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर डालकर चूस रहा था और में भी उसके लंड को मुहं में लेकर चूस रही थी।

उसका लंड करीब 8 इंच का होगा और 3 इंच मोटा होगा जो कि सुनील के लंड से बहुत तगड़ा था। फिर वो बोला कि मानसी में अब झड़ने वाला हूँ तुम मेरा सारा रस पीओगी ना और ऐसा बोलते ही मेरे मुहं में अपना सफेद पानी छोड़ दिया और मेरे मुहं को बंद कर दिया तो मैंने उसका सारा पानी अंदर ले लिया और कुछ टाईम के बाद में फिर से उसके लंड को चूसने लगी तो वो पूरा कड़क हो गया तो मैंने उसको नीच लेटाया और में उसके ऊपर आ गई और लंड को अपनी चूत में डाल लिया.. मुझे थोड़ा सा दर्द महसूस हुआ.. लेकिन उस मज़े के सामने यह दर्द मेरे लिए कुछ भी नहीं था। फिर उसके ऊपर बैठकर में उसको चोदने लगी उस टाईम मेरी चूत से रस निकल कर उसके पेट के ऊपर गिर रहा था तो वो उंगली में उसको लेकर चूस रहा था और मेरे बूब्स को दबा रहा था। फिर जब वो झड़ने वाला था तो मुझे नीचे करके मेरे ऊपर आ गया और मुझे धनाधन चोदने लगा और में मदहोशी से बोल रही थी कि चोद लो मुझे देव.. जी भरकर चोद लो और ज़ोर से चोदो ऊओह मेरी चूत को खा जाओ.. देव आज से में तेरी रंडी हूँ.. तुम मुझे जब दिल करे चोद सकते हो देव.. आआहह। तो वो बोला कि में झड़ने वाला हूँ मानसी कहाँ गिराऊँ? तो में बोली कि मेरी चूत में गिरा दो.. सुनील तो मुझे माँ नहीं बना सका हो सकता है में तुम्हारे रस से माँ बन जाऊँ.. मेरी चूत में ही डाल दो और मुझे माँ बना दो देव। फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए। ऐसे ही नंगे हम लोग करीब एक घंटा सो गये और फिर हम लोगों ने खाना ख़ाया और में वहाँ से निकल गई.. मुझे एक अजीब सी ख़ुशी मिली थी। आज से मुझे दो दो लंड का स्वाद मिलेगा और फिर में घर पहंच गई। घर पर गीता अकेली सोई हुई थी और मुझे बहुत थकान लग रही थी तो में भी गीता के पास सो गई और कुछ टाईम के बाद मुझे महसुस हुआ कि कोई मेरी चूत के अंदर हाथ डालकर उसको सहला रहा है। तभी मैंने तुरंत अपनी आखें खोलकर देखा तो गीता अपनी मेक्सी को ऊपर करके अपनी चूत में उंगली कर रही है और दूसरा हाथ मेरी चूत में डाल रही है.. तो में गीता को बोली कि क्या में तुम्हारी कुछ मदद करूं? तो बोली कि दीदी जो करना है कीजिए.. लेकिन मेरी आग को शांत कीजिये।

फिर में गीता की चूत में उंगली डालकर चोदने लगी और उसके बूब्स को चूसने लगी तो गीता मेरी चूत को भी चाटने लगी और बोली कि दीदी आपकी चूत से कुछ अजीब सी स्मेल आ रही है क्या बात है? तो में पूरी तरह चकित हो गई और सोचने लगी कि इसमे देव का रस गया था और मैंने उसे साफ भी नहीं किया था.. तो गीता बोली की इसमे से मर्दों के रस की स्मेल आ रही है तो वो बार बार मुझे पूछने लगी। फिर मुझे मजबूरी में बताना पड़ा कि मेरे दोस्त देव ने मुझे आज चोदा है और यह उसका रस है तो गीता बोली कि दीदी आप क्या करती हो सुनील के होते हुए आप दूसरों से कैसे चुदाई कर सकती हो अगर सुनील को पता चलेगा तो क्या होगा?

तो मैंने गीता को पूरी बात बताई और कहा कि तुम्हे पता है गीता, देव का लंड कितना मोटा और तगड़ा है? में तो पूरी खुश हो गई और मेरी पूरी बात सुनने के बाद गीता बोली कि क्या में भी आपके दोस्त से चुद सकती हूँ? तो मैंने कहा कि ठीक है में कोशिश करती हूँ और यह सुनकर वो बहुत खुश हो गई और मुझे भी थोड़ी राहत मिल गई और मैंने उसे एक बात बोली कि देख गीता दुनिया को पता है कि में सुनील की बीवी हूँ और तुम उसकी बहन हो.. लेकिन घर में हम सब पति पत्नी है.. लेकिन दुनिया के लिए तुम उसकी बहन हो तो देव से यह मत बोलना कि तुम भी सुनील की बीवी हो। तो गीता ने कहा कि हाँ में जानती हूँ दीदी और फिर मैंने प्लान बनाया कि कैसे हम तीनो मिलकर चुदाई कर सकते है? दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है। उसके दो दिन बाद मैंने देव को फोन किया।

में : हैल्लो

देव : हाँ बोलो मानसी।

में : हाय कैसे हो तुम?

देव : एकदम मस्त हूँ यार.. लेकिन मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है।

में : अच्छा सच में याद आ रही है या ऐसे ही बोल रहे हो?

देव : सच में यार।

में : तो तुम एक काम करो कल ऑफीस से छुट्टी ले लो में तुम्हे जन्नत की सेर करवाती हूँ।

देव : रियली.. ठीक है कल में छुट्टी ले लेता हूँ और तुम्हारा इंतजार करता हूँ।

में : ठीक है बाय।

मैंने यह सब इसलिए उससे कहा क्योंकि दो दिन बाद सुनील को एक सप्ताह के लिए टूर पर गोआ जाना था तो हम लोगो ने यह प्लान बना लिया और जैसे सुनील गोआ चला गया.. हम दोनों सुबह करीब 11 बजे कल्याण के लिए घर से निकल गये और वहाँ पर पहुंचकर मैंने देव को फोन किया। तो वो अपनी कार लेकर हम दोनों को लेने के लिए आ गया और जैसे उसने गीता को देखा तो उसका चहरा उतर गया और वो मेरी तरफ उदास होकर देखने लगा। तो मैंने उसको एक स्माईल दी तो वो फिर भी समझ नहीं पाया और कुछ टाईम बाद हम लोग उसके रूम पर आ गए और जैसे हम रूम में पहुंचे देव ने मुझे पूछा कि यह कौन है? तो मैंने उसे बोल दिया कि यह मेरी ननद है.. तो वो बोलने लगा कि उसको क्यों लेकर आई हो? फिर मैंने हंसकर उसको बोला कि मेरे राजा टेंशन मत लो.. हम तो बस आपकी दीवानी है और आज हम दोनों आपको जन्नत की सेर करवांगे। तभी यह बात सुनकर देव तो ख़ुशी से पागल हो गया और गीता के सामने ही मेरे बूब्स को दबाने लगा और किस करने लगा।

तो मैंने भी उसके लंड को पेंट से बाहर निकाल कर सहलाने लगी और जैसे ही गीता ने देव का लंड देखा तो वो हंसकर बोली कि वाह देव भैया क्या लंड है आपका? आज तो बहुत मज़ा आएगा और यह सुनकर देव ने कहा कि हाँ मेरी गीता डार्लिंग चलो अब मजे करते है। फिर हम लोग फ्रिज से सोडा और बर्फ निकाल कर वोड्का पीने लगे और जैसे जैसे हमारी शराब खत्म हो रही थी वैसे वैसे हम नशे में चूर हो रहे थे। फिर देव ने गीता को उठाकर अपनी जाँघ पर बैठा लिया और दूसरी जाँघ पर मुझे और बारी बारी से हमारे बूब्स को दबाने लगा और किस करने लगा। फिर गीता को खड़ा करके उसकी ड्रेस को उतार दिया और मुझे बोला कि तुम मुझे नंगा करो। तो मैंने उसको नंगा कर दिया और खुद नंगी हो गई। हम तीनो पूरे नंगे होकर उसके बेड रूम में चले गये। उसने पहले से 4-5 ब्लूफिल्म की सीडी लाकर रखी थी तो उसको शुरू कर दिया और बोला कि टीवी में जैसे जैसे हो रहा है हम लोग भी ठीक वैसा ही करेंगे.. तो में बोली कि ठीक है।

फिर जैसे जैसे टीवी में चुदाई हो रही थी वैसे ही हम लोग कर रहे थे। उस फिल्म में एक ऐसा सीन था कि हिरोईन हीरो के मुहं पर पेशाब कर देती.. तो देव ने बोला कि बताओ मेरे मुहं पर तुम दोनों में से कौन करेगा? तो में बोली कि तुम जिससे चाहो करवा लो तो वो बोला कि तुम दोनों एक साथ मेरे मुहं पर पेशाब कर लो.. फिर गीता उसके सर के ऊपर बैठी और में छाती पर बैठकर उसके मुहं पर मूतने लगी और वो हम दोनों के पेशाब को पीने लगा और हमे बहुत मज़ा आ रहा था और मूतने के बाद हमारी चूत को वो बारी बारी से चाटने लगा और वो बोला कि मानसी तुमने तो सच में आज मुझे जन्नत की सेर करवा दी.. फिर हम दोनों उसके लंड को चूसने लगी और वो गीता की चूत को चाटने लगा और मेरी गांड में उंगली डालने लगा.. फिर मेरी चूत को चाटा और गीता की गांड में उंगली को डाल दिया। फिर वो फ्रिज से मलाई लेकर हम दोनों की चूत पर लगाकर चाटने लगा.. हम दोनों पूरे जोश में मज़ा ले रही थी और में बोल रही थी खा जाओ मेरे राजा मेरी चूत को खा जाओ हम दोनों तो तुम्हारी रंडी है। चोद लो हम दोनों को कुतिया बनाकर.. फिर गीता ने भी भरी जवानी का बहुत मज़ा लिया और बोली कि दीदी आप तो बहुत मतलबी हो.. अगर में आपसे नहीं पूछती तो आप अकेले ही सारा मज़ा लूटती। तो देव बोला कि कोई बात नहीं मेरी रंडियों में तुम दोनों को भरपूर मज़ा दूंगा। तुम दोनों मेरी कुतिया हो और आज तुम दोनों की में गांड मारूँगा.. साली रंडियों। तो में बोली कि बहनचोद साले जितनी गाली देना है दे और हम दोनों कि चुदाई कर.. हम तो तुम्हारी नौकरानी भी बनने को तैयार है.. तू जो चाहता है वो कर हमारे साथ.. चोद ले हमें.. हम दोनों तेरी रखेल है.. आजा मेरे भडवे चोद दे हमको। फिर देव ने गीता की गांड पर मलाई लगाकर अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया तो वो एकदम से चिल्ला पड़ी और उसको शांत करने के लिए में गीता की चूत में अपनी जीभ डालकर चाटने लगी। फिर देव जोरदार झटके मारने लगा और कुछ टाईम बाद गीता का दर्द कम हो गया और वो पूरी गरम होकर मज़े लेने लगी और बोलने लगी.. चोद ले बहनचोद.. चोद मुझे.. चोद इस छिनाल को.. तू जो बोलेगा में वो करूँगी.. मुझे जी भरकर चोद.. आज मेरी आग को ठंडा कर दे।

फिर करीब 15 मिनट के बाद वो झड़ने लगा तो वो बोला कि में वीर्य कहाँ पर गिराऊँ? तो में बोली कि मादरचोद मैंने कहा था ना तुम मेरी चूत ही चोदना। तो वो तुरंत मेरी चूत में अपना लंड डालकर मुझे चोदने लगा और उसने सारा वीर्य मेरी चूत में ही छोड़ दिया.. तो में देव से बोली कि तू एक काम कर.. तू तीन चार दिन के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले ले और हम तीनो बहुत मस्ती करेंगे और हम चार दिन तुम्हारे साथ तुम्हारी रंडी बनकर रहेंगी और तुझे अपना पति बनाकर चुदाई करवाएंगी। फिर उसने ऐसा ही किया और हम तीनो ने चार दिन तक कोई कपड़ा नहीं पहना। हम नंगे ही रहे.. उस चार दिन में सिर्फ़ ख़ाने के और सोने के अलावा हम सिर्फ़ चुदाई ही कर रहे थे ।।

धन्यवाद …

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बाद मुर्दन के जन्नत मिले ना मिले ग़ालिब क्या पता
गाण्ड मार के इस दूसरी जन्नत का मज़ा तो लूट ही ले

बाथरूम की ओर जाते समय पीछे से उसके भारी और गोल मटोल नितम्बों की थिरकन देख कर तो मेरे दिल पर छुर्रियाँ ही चलने लगी। मैं जानता था पंजाबी लड़कियाँ गाण्ड भी बड़े प्यार से मरवा लेती हैं। और वैसे भी आजकल की लड़कियाँ शादी से पहले चूत मरवाने से तो परहेज करती हैं पर गाण्ड मरवाने के लिए अक्सर राज़ी हो जाती हैं। आप तो जानते ही हैं मैं गाण्ड मारने का कितना शौक़ीन हूँ। बस मधु ही मेरी इस इच्छा को पूरी नहीं करती थी बाकी तो मैंने जितनी भी लड़कियों या औरतों को चोदा है उनकी गाण्ड भी जरूर मारी है। इतनी खूबसूरत सांचे में ढली मांसल गाण्ड तो मैंने आज तक नहीं देखी थी। काश यह भी आज राज़ी हो जाए तो कसम से मैं तो इसकी जिन्दगी भर के लिए गुलामी ही कर लूं।
इसी कहानी से……
हमारी शादी को 4-5 महीने होने को आये थे और हम लगभग रोज़ ही मधुर मिलन (चुदाई) का आनंद लिया करते थे। मैंने मधुर को लगभग हर आसन में और घर के हर कोने में जी भर कर चोदा था। पता नहीं हम दोनों ने कामशास्त्र के कितने ही नए अध्याय लिखे होंगे। पर सच कहूं तो चुदाई से हम दोनों का ही मन नहीं भरा था। कई बार तो रात को मेरी बाहों में आते ही मधुर इतनी चुलबुली हो जाया करती थी कि मैं रति पूर्व क्रीड़ा भी बहुत ही कम कर पाता था और झट से अपना पप्पू उसकी लाडो में डाल कर प्रेम युद्ध शुरू कर दिया करता था।
एक बात आपको और बताना चाहूँगा। मधुर ने तो मुझे दूध पीने और शहद चाटने की ऐसी आदत डाल दी है कि उसके बिना तो अब मुझे नींद ही नहीं आती। और मधुर भी मलाई खाने की बहुत बड़ी शौक़ीन बन गई है। आप नहीं समझे ना ? चलो मैं विस्तार से समझाता हूँ :
हमारा दाम्पत्य जीवन (चुदाई अभियान) वैसे तो बहुत अच्छा चल रहा था पर मधु व्रत त्योहारों के चक्कर में बहुत पड़ी रहती है। आये दिन कोई न कोई व्रत रखती ही रहती है। ख़ास कर शुक्र और मंगलवार का व्रत तो वो जरूर रखती है। उसका मानना है कि इस व्रत से पति का शुक्र गृह शक्तिशाली रहता है। पर दिक्कत यह है कि उस रात वो मुझे कुछ भी नहीं करने देती। ना तो वो खुद मलाई खाती है और ना ही मुझे दूध पीने या शहद चाटने देती है।
लेकिन शनिवार की सुबह वह जल्दी उठ कर नहा लेती है और फिर मुझे एक चुम्बन के साथ जगाती है। कई बार तो उसकी खुली जुल्फें मेरे चहरे पर किसी काली घटा की तरह बिखर जाती हैं और फिर मैं उसे बाँहों में इतनी जोर से भींच लेता हूँ कि उसकी कामुक चित्कार ही निकल जाती है और फिर मैं उसे बिना रगड़े नहीं मानता। वो तो बस कुनमुनाती सी रह जाती है। और फिर वो रात (शनिवार) तो हम दोनों के लिए ही अति विशिष्ट और प्रतीक्षित होती है। उस रात हम दोनों आपस में एक दूसरे के कामांगों पर शहद लगा कर इतना चूसते हैं कि मधु तो इस दौरान 2-3 बार झड़ जाया करती है और मेरा भी कई बार उसके मुँह में ही विसर्जित हो जाया करता है जिसे वो किसी अमृत की तरह गटक लेती है।

मामी का थप्पड़

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प्रेषक : मिकी चौधरी ..

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम मिकी चौधरी है। मेरी उम्र 22 साल, हाईट 5.11 इंच है और रंग गोरा है। दिखने में एकदम सुंदर और में हरियाणा का रहने वाला हूँ। यह कहानी मेरी और मेरी मामी के बारे में है। मेरी मामी की उम्र 35 साल, हाईट 5.3 है.. उनका फिगर 38-32-40 है जो कि उन्होंने खुद मुझे बताया है। वो चहरे से ज़्यादा गोरी नहीं है.. लेकिन शरीर एकदम मस्त चिकना और कसा हुआ है। मेरी मामी एक हाउसवाईफ है और सोनीपत के एक छोटे से गावं में रहती है.. वो हमेशा सूट पहनती है जिसमें वो एकदम सेक्सी दिखती है और उनकी बड़ी गांड और उनके बड़े बड़े बूब्स और भी अच्छे लगते है।

दोस्तों.. में चार साल पहले बारहवीं क्लास के पेपर देने के बाद अपने मामा के घर गया था और वहाँ पर मुझे एक महीना रहना था। में शुरू से ही अपनी मामी की गांड और बूब्स का दीवाना हूँ.. वो हमेशा गहरे गले का सूट पहनती थी और में ज़्यादातर समय उनके घर पर ही बिताया करता था। फिर मुझे धीरे धीरे लगने लगा कि उनका किसी के साथ चक्कर चल रहा है.. क्योंकि वो मेरे सामने भी ज्यादातर टाईम अपने फोन पर ही लगी रहती थी। वो बहुत धीमी आवाज में बातें किया करती थी। लकिन जब घर के बाकी सदस्य भी साथ होते तो वो ऐसा कुछ नहीं करती थी। वो मेरे साथ बहुत खुलकर मज़ाक भी किया करती थी और मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में भी पूछती रहती थी। फिर एक दिन मेरे नाना और नानी को उनके अफेयर का पता लग गया। वो लड़का उनके पड़ोस का ही रहता था.. लेकिन मामी ने नानी को डरा दिया कि अगर मेरे मामा को यह बात बताई तो वो ज़हर खा लेगी और अपने दोनों बच्चो को भी खिला देगी.. तो नानी ने भी नाना को मना कर दिया.. लेकिन उनका वो अफेयर वहीं खत्म हो गया। उसके बाद मामी मुझसे और भी ज़्यादा मज़ाक करने लगी.. फिर एक दिन तो मामी ने हद ही कर दी:

मामी : तुम्हारी कितनी गर्लफ्रेंड है?

में : मामी एक भी नहीं है।

मामी : झूठ मत बोल.. किसी को नहीं बताउंगी तू डर मत।

में : मामी जी सच्ची मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है और में तो लड़कियों से बात तक नहीं करता।

मामी : अच्छा चल यह बता तूने कभी किसी को किस किया है या कहीं छुआ है?

में : मामी जी जब कोई गर्लफ्रेंड ही नहीं है तो में किसके साथ ऐसा कर सकता हूँ?

मामी : तो किसी को नंगा या सिर्फ़ ब्रा, पेंटी में तो देखा ही होगा?

अचानक मामी के मुंह से यह बात सुनकर तो में पूरी तरह से हिल गया। मेरे मुहं से कोई भी आवाज़ नहीं निकल रही थी और मैंने नीचे देखते हुए ना में सर हिला दिया.. लेकिन उस दिन ऐसे ही बात खत्म हो गई और अगले दिन जब में उनके घर गया तो मैंने देखा कि मामी नहाकर बाथरूम से बाहर निकली है और उन्होंने एक छोटा सा पारदर्शी सूट पहन रखा था और उसके नीचे नारंगी कलर की ब्रा। उनके दोनों बूब्स बाहर आने को बेताब थे क्योंकि उनका सूट भी बहुत गहरे गले का था। तभी मेरे मोबाईल पर मेरे एक फ्रेंड का फोन आया और में बाहर जाकर बात करने लगा और जब में वापस आया तो मामी मुझे अजीब सी नज़रों से देख रही थी और वो बोली।

मामी : मुझसे क्यों झूठ बोला?

में : मामी जी मैंने आपसे क्या झूठ बोला?

मामी : यही कि तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।

में : मामी सही में मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.. में एकदम सच बोल रहा हूँ.. प्लीज़ आप मेरा विश्वास करो।

मामी : तो अब बाहर जाकर किससे बात कर रहा था? क्यों मेरे सामने नहीं कर सकता था?

फिर मैंने मामी को विश्वास दिलाते हुए कहा कि मामी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.. लेकिन हाँ मुझे एक लड़की बहुत पसंद है। मामी उस वक़्त मुझसे 7.8 फीट दूरी पर खड़ी थी और में बेड के बहुत नज़दीक खड़ा था। फिर मेरे ऐसा कहते ही वो ज़ोर से हंसते हुए मेरी तरफ भागी और स्पीड के कारण मुझसे आकर टकरा गई। मैंने अपने बचाव के लिए हाथ आगे बढ़ाया.. लेकिन वो फिर भी मुझे अपने साथ लेकर बेड पर गिर गई। मामी मेरी बॉडी पर सीधे गिरी थी। क्या बताऊँ दोस्तों मुझे पहली बार इतना सेक्सी सीन देखने को मिल रहा था.. उसके दोनों बड़े बड़े बूब्स मेरी छाती से लग कर दब रहे थे और में उन्हें बहुत अच्छे से महसूस कर सकता था.. वो एकदम मुलायम थे और मेरी छाती से दबने के कारण उनके बूब्स उनके सूट और ब्रा से बाहर झाँकने लगे थे.. एकदम गोल आकार में और उन्हें देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा था। तभी मामी ने अपना घुटना मेरे लंड के ऊपर रख दिया और धीरे से घूमने लगी और करीब 15-20 सेकण्ड उसी पोज़िशन में रही और वो कह रही थी कि..

मामी : क्या तू मुझे रोक नहीं सकता था? तू मुझे पकड़ लेता तो शायद हम गिरने से बच जाते और वो तो बहुत अच्छा हुआ कि हम बेड के पास खड़े थे और हम बेड पर ही गिर गये। फिर वो सेक्सी स्माईल देते हुए उठते समय मेरे लंड पर अपने घुटने को दबाने लगी और फिर उठकर कांच के सामने जाकर अपने बाल सेट करने लगी। फिर उन्होंने मुझमें एक ऐसी आग जला दी थी जो अपनी सीमा पार कर चुकी थी.. में उठा और धीरे धीरे उनके पीछे गया और जैसे ही उनको पकड़ने के लिये अपने हाथ उनकी कमर के दोनों तरफ से आगे लेकर जाने लगा कि तभी उन्होंने मेरे हाथ पकड़ लिए और घूम गई।

मामी : यह क्या कर रहा है?

में : मामी में आपसे सेक्स करना चाहता हूँ।

पता नहीं कहाँ से मेरे दिमाग में यह बात आई और मैंने हिम्मत करके बोल दी।

ऐसा बोलने पर मेरे पसीने छूट रहे थे और यह बोलने के साथ ही उनको गुस्सा आ गया और मुझे थप्पड़ मारने लगी.. लेकिन मैंने अपना हाथ बीच में ले लिया तो मेरे गाल पर थप्पड़ लगने से बच गया.. लेकिन उन्होंने तभी मेरा हाथ पकड़कर मुझे धक्का दिया और घर से निकल जाने को कहा और साथ में कहा कि में तेरी मम्मी को यह बात बताउंगी। तो मेरी तो जैसे गांड फट गई हो और मेरा मुहं बिल्कुल रोने जैसा हो गया था। फिर मैंने उनसे विनती की.. प्लीज़ आप मेरी मम्मी को मत बताना.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. दोबारा आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा। फिर जैसे ही में मुड़कर जाने लगा तो मामी बोली कि में समझती हूँ.. इस उम्र में ऐसा हर किसी के साथ होता है। लेकिन यह तो देखो कि तुम जिसके साथ ऐसा करने की सोच रहे हो वो कौन है? में तुम्हारी मामी हूँ और क्या मेरे साथ ऐसा सोचते हुए तुम्हें शरम नहीं आई? क्या तुम्हें डर नहीं लगा और मुझे पता है कि तुम यह सब क्यों कर रहे हो? तुम सोचते हो कि क्या में एक रांड हूँ.. जो किसी को भी अपनी चूत दे दूंगी।

उन्होंने ऐसा इसलिए बोला क्योंकि जब उनके अफेयर का पता लगा तो में वहीं पर था। फिर मैंने बहुत डरते हुए कहा कि आप हो ही इतने सेक्सी कि में अपने आप को रोक नहीं पाया और वैसे भी जब आप मेरे ऊपर गिरे थे.. तब से मेरा दिमाग बिल्कुल खराब हो गया था। प्लीज़ मुझे एक बार फिर से माफ़ कर दो। फिर में अपना फटी हुई गांड जैसा मुहं लेकर वहाँ से भाग लिया। फिर उसके बाद में मामा के गावं तो जाता था.. लेकिन उनके घर पर नहीं जाता था। मुझे उनके घर पर गए हुए पूरा एक साल हो गया था। तो एक दिन मामी हमारे घर पर आई हुई थी और में उनसे नज़रे नहीं मिला रहा था। वो रात का टाईम था.. तो मेरी नानी ने बोला कि अपनी मामी को घर तक छोड़कर आ जा और फिर ऐसा कहते ही मामी ने मुझे एक सेक्सी सी स्माईल दी और हम दोनों पैदल जा रहे थे। तभी मामी ने हमारे बीच की ख़ामोशी को तोड़ा और कहा।

मामी : क्या बात है? तू मुझसे बात क्यों नहीं करता है?

तो मैंने कोई जवाब नहीं दिया और में नीचे मुहं करके चुपचाप चलता रहा।

मामी : क्या तू नाराज़ है मुझसे? और क्या तुझे अभी भी मुझसे डर लग रहा है?

में : ( तो में थोड़ी हिम्मत करके बोला ) भला में क्यों डरूंगा?

मामी : क्यों भूल गया क्या वो बात.. उस दिन तो तेरी गांड बहुत फट रही थी।

फिर ऐसे शब्द उनके मुहं से सुनकर में थोड़ा नॉर्मल हुआ और में भी उनसे थोड़ी बहुत बातें करने लगा।

में : में नहीं भूला.. मुझे सब पता है।

मैंने फिर से थोड़ी हिम्मत करके कहा कि मामी प्लीज़ मेरी गर्लफ्रेंड बन जाओ ना।

मामी : थोड़ी देर मेरी तरफ देखते हुए बोली कि चल ठीक है आज से में तेरी गर्लफ्रेंड हूँ।

फिर मेरी जेब में एक चोकलेट थी तो मैंने उनको वो दे दी।

दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर उसके अगले दिन।

मामी : क्या बात है आज तू बड़ा खुश नज़र आ रहा है?

में : हाँ अब मेरी भी एक गर्लफ्रेंड जो बन गई है इसलिए में बहुत खुश हूँ।

फिर ऐसा कहते हुए में उनके बूब्स की तरफ घूर घूर कर देखने लगा।

मामी : तू ऐसे क्या देख रहा है और तुझे क्या चाहिए?

में : मुझे आपके साथ सेक्स करना है

फिर ऐसा कहते हुए उन्होंने मुझे ज़ोर से पीछे धक्का दिया और फिर किचन में जाकर काम करने लगी।

में : मामी प्लीज़ एक बार मुझे यह सूट निकालकर दिखाओ ना मुझे आपके बूब्स और गांड बहुत मस्त लगती है (दोस्तों हम एक ही दिन में एक दूसरे के साथ बहुत ज़्यादा घुल मिल गये थे)।

मामी : अभी नहीं।

में : आपके कितने यार है?

मामी : (हंसते हुए बोली) फिर उन्होंने चार पांच लड़को के नाम बताये.. जिसमें से तीन तो उनके देवर यानी मेरे मामा थे।

में : तो मेरा नंबर कब आएगा?

मामी : वो तो आने वाला समय ही बताएगा।

फिर मेरी छुट्टियाँ खत्म हो गई और में अपने घर आ गया और फिर अगली छुट्टीयों में फिर से में उनके घर गया और जाते ही मैंने उन्हें एक फ्लाईंग किस दिया और आँख मारी.. वो हँसने लगी और उन्होंने मुझे एक सेक्सी स्माईल दी और अपने काम में लग गई। मेरी नानी जी बाहर बैठी थी और मामी किचन में काम कर थी तो में किचन में गया और उनको बोला कि मुझे दूदू पीना है और वो भी ताज़ा।

मामी : तेरी नानी बाहर बैठी है.. थोड़ा धीरे बोल वरना वो सुन लेगी तो बहुत बड़ा पंगा हो जाएगा।

तो में वहाँ से बाहर आ गया और फिर थोड़ी देर बाद मामी जब अपने बेडरूम में गयी तो में भी उनके पीछे पीछे चला गया और अंदर घुसते ही उनको पीछे से पकड़ लिया और अपने हाथ आगे ले जाकर उनके बूब्स को दबाने लगा। उउफ्फ़ क्या मज़ा आ रहा था? में पहली बार किसी को छू रहा था और किसी के बूब्स को दबाने का मेरा यह पहला अनुभव था और में पूरा ज़ोर लगाकर दबा रहा था। तो मामी के मुहं से सेक्सी आवाज़ें आने लगी और वो दर्द के मारे सिसकियाँ ले रही थी और कह रही थी आहह आआहह उूफफ्फ़ माँ आआहह प्लीज़ मिकी छोड़ दे। तेरी नानी अंदर आ गई तो क्या होगा? उईईई बहुत दर्द हो रहा है धीरे से दबा ना.. लेकिन वो अपने बचाव के लिए कुछ भी नहीं कर रही थी। इसका मतलब उनको वो सब करना बहुत पसंद आ रहा था। फिर मेरा लंड तनकर लोहे के सरिये जैसा हो गया था और में अपने लंड को उनकी गांड में दबाने लगा.. वो भी मेरे हाथ पर हाथ रखकर अपने बूब्स दबवा रही थी। फिर उन्होंने मेरा लंड अपने हाथ में लिया और ट्राउज़र के ऊपर से ही सहलाने लगी और फिर मैंने उनको दीवार से लगा दिया और किस किया.. सिर्फ़ दो तीन सेकण्ड के लिए और पता नहीं उनके दिमाग में क्या आया? वो बाहर की तरफ भागने लगी।

मैंने उनको पीछे से बहुत मजबूती से पकड़ लिया और कमर से पकड़कर बेड पर उल्टा गिरा दिया और अपने लंड को उनकी गांड पर दबाने लगा.. मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उनके हाथ में दे दिया तो उन्होंने उसको छोड़ दिया और आग्रह करने लगी कि प्लीज़ अभी कुछ मत करो। लेकिन फिर मैंने भी उनसे आग्रह किया कि मामी प्लीज़ एक बार मेरा माल निकाल दो फिर चले जाना.. प्लीज़ एक बार इसको चूस लो.. लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया तो मैंने उनके सूट को हल्का सा ऊपर उठाया और सलवार को नीचे खींचने लगा तो वो नहीं निकली क्योंकि उन्होंने उसे बहुत कसकर बांध रखा था और पकड़ भी लिया था। तो मैंने उनकी सलवार के ऊपर से ही उनकी गांड की लाईन में लंड को डाल दिया और ऐसे ही ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा। मेरा यह पहला टाईम था तो मेरा वीर्य जल्दी ही निकल गया और उनकी सलवार खराब गई। फिर में साईड में लेट गया और फिर मामी ने बोला कि में वादा करती हूँ कि हम फिर कभी करेंगे और वो उठकर बाथरूम में अपने कपड़े साफ करके आई और उन्होंने अपनी ड्रेस चेंज कर ली और फिर में वहाँ से चला आया।

दोस्तों.. वो मेरी लाईफ का सबसे अच्छा दिन था और उसके बाद तो में जब भी उनके पास जाता हूँ तो वो ना सिर्फ़ मुझे अपने बूब्स पिलाती बल्कि कभी कभी चूत भी चटवाया करती है और में उन्हें बहुत गरम करता रहता हूँ। कभी घर वालों के होते हुए उनकी गांड दबा देता हूँ तो कभी बूब्स दबा देता हूँ.. लेकिन आज तक वो मेरे सामने पूरी नंगी नहीं हुई है। फिर भी में उसे ज़बरदस्ती नहीं बल्कि प्यार से चोदना चाहता हूँ.. इसलिए तो अब तक मैंने कुछ नहीं किया और में इस इंतज़ार में हूँ.. कि वो खुद यह कहे कि मिकी मुझे चोद ।।

धन्यवाद …

मौसी बोली मैं जवान हो गया हु 10

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साली मौसी को तो फुल मस्ती चढ़ि हुई थी और वो तो पायल की चुदाई करने को खुद ही तय्यार हो गयी थी. अचानक यह क्या उसने पायल की सलवार भी उपर से नीचे को खींच दी और वहाँ पर चूमना सुरू कर दिया मुझे पायल की चूत के आस पास का एरिया दिखाई नही दे रहा था इसलिए मुझे अंदाज़ा नही लग रहा था कि उसकी झांते (चूत के आप पास के बाल) थी या नही.
पर मौसी के आक्षन से ये लग रहा था कि उसने शेव की हुई थी नही तो मौसी इतनी मस्ती से उसकी चूत को नही चूमती.
मौसी तो पायल को एकदम मर्द वाली स्टाइल में चुदाई के लिए तय्यार कर रही थी और मौसी की बॉडी और उसके पेटीकोट की वजह से पता चल रहा था कि वो एक औरत है नही तो वो एकदम एक मर्द की तरह पायल की चुदाई की तय्यारी कर रही थी.
मौसी ने पायल की जांघों को भी चाटना और काटना सुरू कर दिया और उसकी चूत वाले एरिया में उंगली भी कर रही थी और कभी उसकी पूरी बॉडी के उपर चुदाई वाली स्टाइल में सवार हो जाती.
अब मौसी ने पायल को पूरा अपने नीचे ले लिया और उसके उपर एकदम एक मर्द की तरह सवार हो गयी बस फ़र्क इतना था कि उसने पेटीकोट नही उतारा था. वो नीचे से पायल की दोनो टाँगो को अपनी टाँगों से पेटीकोट के अंदर से ही जकड़े थी.
अब पायल मस्त हो गयी थी और उसकी गर्मी भी बढ़ने लगी थी वो मौसी को मना नही कर पा रही थी और लेज़्बीयन चुदाई का मज़ा ले रही थी. अब शायद मौसी की चूत में भी खुजली सुरू हो गयी थी क्योंकि अब उसने अपना पेटीकोट आगे उठाया और पायल की चूत के पास अपनी चूत सटा दी, इस बार पायल ने भी कोई रेज़िस्टेन्स नही दिखाई और मौसी के चूतड़ उसके पेटीकोट के बाहर से ही पकड़ कर दबाने लगी ताकि उसकी चूत और मौसी की चूत और करीब आ सके.
अब तो पायल पूरे जोश में आ गयी थी अब पायल ने मौसी की ब्रा को खोलकर उसके चूचों को चूसना सुर कर दिया.
दोस्तो आप ही अंदाज़ लगा सकते है इस टाइम क्या मस्ती का सीन होगा क्योंकि औरत से औरत की चुदाई देखने का मेरा ये दूसरा मौका था और रीडर्स में तो कई ने एक्सपीरियेन्स लिया होगा. मुझे कुच्छ साफ दिखाई नही दे रहा था बस कभी मौसी पायल के उपर होती तो कभी पायल मौसी के उपर.
जब मौसी उपर होती तो उसने पेटीकोट पहना हुआ था इसलिए कुच्छ नही दिखता था पर जब पायल उपर होती तो उसकी मस्त बॉडी को देखकर में पागल हो जाता था. अब मुझे पूरा अंदाज़ा हो गया था कि उसकी चूत शेव की हुई थी नही तो मैं उसकी झांतें ज़रूर देख पाता.
पायल की बॉडी मौसी से हर अंदाज़ में मस्त थी उसकी ज़्यादा हाइट, ज़्यादा बड़े बूब्स और चूतड़ सभी मौसी से 20 थे पर मौसी की चुदाई का जो मज़ा था वो दोस्तों मैं अभी तक की अपनी कहानी में बता चुका हूँ पर उसको महसूस ही किया जा सकता है लिख कर बताना मुश्किल है.
लेकिन आज मौसी की नंगी बॉडी देखकर मेरा लंड बेकाबू हो रहा था पर दोस्तों मैं अपने लंड का पूरा ख़याल रखता हूँ और इसको भटकने नही देता.
जब पायल मौसी के उपर से अपने चूतड़ ठोक ठोक कर चोदती तो मेरा तो बुरा हाल हो जाता पर मौसी बड़े आराम से मज़ा लेती और पायल को ठुकाई के लिए एग्ज़ाइट करती. अबकी बार जब मौसी की उपर वाली टर्न आई तो मौसी ने जबरदस्त रागड़ाई की और पायल तो मारे मस्ती के हाँफने लगी और म्*म्म्ममममम, स्शह करके मस्ती का सिग्नल देने लगी.
अचानक पायल चिल्लई ज़ाआानएमााआअन्न्*ननननणणन् मैं ज्ज्ज्ज्ज्झहछद्द्दद्ड रही हुउन्न्ञनणणन् मेरे अंदर गीला हो रहा हाई.
इसके बाद भी मौसी ने उपर से धकेलना नही छ्चोड़ा पर अब पायल एकदम डेड सी हो गयी तो मौसी को भी रुकना पड़ा पर मौसी बड़ी अपसेट लग रही थी. वो पायल के उपर से हटी और उसने अपना पेटीकोट और ब्रा ठीक किया और बेड से नीचे उतर गयी.
पायल अपने जगह से साइड में हो गयी और उसने कंबल अपने उपेर डाली और चुपचाप सो गयी. मुझे लगा कि वो मौसी की रागड़ाई से गीली हो गयी थी और ठंडी होकर लेट गयी थी.
लेकिन मेरा क्या होगा मौसी एक दम भूखी शेरनी सी लग रही थी और मुझे लगता है कि उसकी चुदाई का ही ऑप्षन मेरे पास था क्योंकि पायल को पहली बार तय्यार करना मेरे लिए मुश्किल था और वह एक बार झाड़ ही चुकी थी. मौसी ने अपनी मस्ती के चक्कर में मुझे बीच में चान्स ही नही दिया और पायल पूरी मस्ती के बाद झाड़ कर सो गयी थी.

बहन की गांड शहद के साथ

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प्रेषक : तेज ..

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम तेज है और में एक छोटे से शहर का रहने वाला हूँ। और मैंने भी आप ही की तरह कामुकता डॉट कॉम पर बहुत सी सेक्सी कहानियाँ पढ़ी है। में इस साईट का बहुत बड़ा फेन हूँ। एक दिन मैंने भी सोचा कि क्यों ना में भी अपनी स्टोरी आप सभी के सामने रखूं। यह कहानी मेरी और मेरी छोटी बहन की एक सच्ची घटना है। अभी मेरी बहन की उम्र 22 साल है और मेरी 24 साल। दोस्तों यह कहानी तब की है जब में 21 साल का था तो में अपनी माँ को नंगा देखने को बहुत उत्सुक रहता था। क्योंकि उस समय मेरी बहन के पास वो सब नहीं था जो कि मेरी माँ के पास था। जब भी मेरी माँ नहाने जाती थी तो में बाथरूम में उनको नहाते हुए छुपकर देखता था। एक दिन मेरी माँ ने मुझे यह सब देखते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया और मुझे बहुत डांटा.. तब से लेकर आज तक मुझे मेरी माँ से बहुत डर लगता है। वो मेरे पहले की बात थी.. लेकिन अब में बड़ा हो चुका हूँ और मेरे लंड का साईज़ 7 इंच और उसकी मोटाई लगभग 3 इंच है।

जब में 21 साल का हुआ तो मेरी बहन की उम्र 19 साल थी.. उस वक़्त मेरी बहन के बूब्स काफी बड़े हो गए थे और में उसके बूब्स को देखकर उसकी तरफ आकर्षित होने लगा था। एक दिन जब में दोपहर को अपनी बहन के साथ सो रहा था। उस दिन घर पर सिर्फ़ पापा थे और मेरी माँ पड़ोस की एक आंटी के यहाँ पर किसी काम से गई हुई थी। उस दिन क्रिकेट का मेच आ रहा था। तो पापा मेच देखने में व्यस्त थे और मुझे मेच देखने का कोई शौक नहीं था। तो में बेड पर जाकर लेट गया और उधर मेरी बहन भी सो रही थी और उसने अपने ऊपर एक चादर डाली हुई थी। मैंने भी अपने ऊपर उसकी थोड़ी सी चादर डाल ली.. मेरी बहन उस समय बहुत गहरी नींद में सोई हुई थी। दोस्तों.. बचपन से ही मुझे सेक्स का बहुत शौक था और मैंने कई बार मुठ भी मारी है। आज मेरे पास एक बहुत अच्छा मौका था.. मेरी बहन का रंग गोरा है और वो दिखने में ठीक ठाक है। जब में उसके पास लेटा तो उसने स्कर्ट और टॉप पहना हुआ था.. में उसके पास में उससे चिपककर लेट गया।

मैंने धीरे से उसके टॉप के अंदर हाथ डाला तो.. मुझे कुछ गर्मी सी महसूस हुई और मेरा हाथ कांप रहा था.. लेकिन फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके अंदर हाथ डाला पहले मैंने धीरे से उसके पेट पर हाथ रखा और फिर मुझे यकीन हो गया कि वो गहरी नींद में सोई हुई है। फिर मेरी हिम्मत और बढ़ गई.. तो मैंने अपना हाथ धीरे से ऊपर की तरफ बढ़ाया तो मुझे कुछ मुलायम मुलायम सा महसूस हुआ और मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। में धीरे धीरे उन मुलायम मुलायम बूब्स को दबाने लगा और अब मेरा लंड पूरी तरह से टाईट हो चुका था और अब में एक हाथ से दोनों बूब्स को बारी बारी से दबा रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे आज स्वर्ग यहीं धरती पर उतर आया हो और मुझे ऐसा करते करते 10 मिनट हो चुके थे.. में और जोश में आने लगा और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा। तभी मेरी बहन की नींद खुलने लगी और मुझे लगा कि अभी मुझे थोड़ी देर रुक जाना चाहिए। में रुक गया और सोने का नाटक करने लगा और फिर थोड़ी देर के बाद मेरी बहन जाग गई और उसको शायद अपने बूब्स पर दर्द हो रहा था। वो उठकर सीधे बाथरूम में चली गई और फिर 5 मिनट के बाद बाहर निकलकर आई और थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गई और में गहरी नींद में सो गया। मेरी बहन का फिगर भी बहुत मस्त है.. बिल्कुल कोई आईटम माल जैसे ही है।

फिर मेरे अंदर और तेज़ सेक्स चढ़ने लगा है। वो जब भी बाथरूम में जाती है.. तो में हमेशा यही सोचता रहता हूँ कि अब वो अंदर क्या कर रही होगी? कई बार मैंने उसको होल से बाथरूम में नंगा देखा है और उसकी चूत पर छोटे छोटे सुनहरे बाल है। मेरा तो मन करता है.. जाकर उनको चूम लूँ और फिर जब भी मेरी बहन सोती थी.. तो में रोज़ उसके टॉप के अंदर से उसके कबूतरों को पकड़ कर बहुत मज़े लेता था.. लेकिन अब मेरी बहन को शक होने लगा था क्योंकि कई बार वो ब्रा पहनकर सोती थी तो सुबह उसको उसकी ब्रा खुली मिलती थी.. लेकिन वो कुछ कर भी नहीं पाती थी और अब यह खेल बहुत आगे बढ़ चुका था। एक दिन की बात है मेरी बहन रात को सो रही थी.. तो मैंने सोचा कि शायद वो गहरी नींद में सो रही है तो मैंने अपना लंड निकाला और मुठ मारने लगा। फिर मैंने अपने एक हाथ से उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए और फिर अपना लंड अपनी बहन के हाथ में रखा और सारा का सारा वीर्य उसके हाथों पर निकाल दिया और सुबह तक मेरा वीर्य सूख चुका था और उसको कुछ पता नहीं चला.. लेकिन ऐसा करते करते मुझे बहुत दिन हो गये थे।

एक दिन में अपनी बहन के बूब्स दबा रहा था और मुठ मारने में व्यस्त था और अचानक मेरी बहन ने मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया.. वो घबराकर उठ गई और अभी भी मेरा लंड उसके हाथ में था। में बहुत घबरा गया और मेरा लंड एकदम से ढीला होकर छोटा हो गया और में बहुत डर गया था.. लेकिन उस समय मेरी बहन ने मुझसे कुछ नहीं कहा और उठकर सीधे बाथरूम में चली गई और फिर थोड़ी देर बाद वो बाहर आई। हम एक दूसरे से नज़रे नहीं मिला पा रहे थे। फिर वो मुझसे थोड़ा नाराज़ रहने लगी और लगभग तीन महीने ऐसे ही बीत गये और उसने इस घटना के बारे में घर पर किसी को नहीं बताया और जब तीन महीने बाद मेरी बहन का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ और वो यह बात भूलने लगी फिर मुझे कुछ कुछ होने लगा। मेरी आदत तो बदल नहीं सकती थी.. फिर एक दिन मेरी माँ और पापा को आचनक से कोई ज़रूरी काम आने के कारण कुछ दिनों के लिए बाहर जाना पड़ा। में और मेरी बहन घर पर अकेले थे। तभी मैंने सोचा कि अगर इस बार कुछ गड़बड़ हुई तो मेरी बहन सच में मेरी शिकायत मेरी माँ से कर देगी। मैंने पापा के रूम से नींद की गोली निकाली और उसको ठंडे पानी में मिला दिया.. फिर रात को मेरी बहन ने वो पानी पिया और सोने चली गई। तभी थोड़ी देर बाद में उसके कमरे में गया तो मैंने देखा कि वो सो चुकी थी.. फिर मैंने उसको चेक करने के लिए उसको आवाज़ लगाई.. लेकिन उसने मुझे कोई जवाब नहीं दिया और फिर मैंने उसको जगाने के लिए हिलाया.. लेकिन वो बिल्कुल भी नहीं हिली तो में समझ चुका था कि नींद की गोली ने अपना असर दिखा दिया है और वो गहरी नींद में सो चुकी है। फिर मैंने घर के सभी गेट लॉक किए और खिड़की पर परदा डाल दिया और ऐसी चालू कर दिया ताकि कोई गर्मी की समस्या ना हो और अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था। अब में अपनी बहन के पास जाकर लेट गया। वो चादर ओढ़कर सोई हुई थी.. मैंने धीरे से अपनी बहन के ऊपर से चादर हटाई और में उसके साथ लेट गया। मुझे अभी भी बहुत डर लग रहा था कि कहीं मेरी बहन उठ ना जाए। फिर मैंने सबसे पहले अपना कांपता हुआ एक हाथ बाहर से उसकी शर्ट पर रखा.. उसने कोई हलचल नहीं की और में समझ चुका था कि अब कुछ भी हो जाए वो नहीं उठने वाली और अब मैंने बिल्कुल भी देर नहीं की और में बैठ गया और मैंने उसके ऊपर से पूरी चादर हटाई और उसकी शर्ट को ऊपर की तरफ सरका दिया.. उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी। उसके दोनों बूब्स मेरी आँखों के सामने आज़ाद थे।

मैंने झट से उन दोनों कबूतरों को अपने हाथों में भर लिया वो बहुत बड़े थे.. वो मेरे दोनों हाथों में भी नहीं समा रहे थे। मैंने अब दोनों बूब्स को दबाना शुरू किया और मुझे आज कोई डर या चिंता नहीं थी। फिर मैंने धीरे धीरे उन दोनों को दबाया.. जिससे मुझे मज़ा आने लगा और में तेज़ होता चला गया और अब मुझसे और रहा नहीं जा रह था.. तो मैंने एक एक करके उन दोनों को चूसना शुरू कर दिया। उसके बूब्स में से कुछ चिपचिपा सा पानी निकल रहा था जिसे कि में अपनी दोनों आख बंद करके चूसे जा रहा था और मैंने अपनी बहन के बूब्स को करीब 10 मिनट तक चूसा और फिर मैंने सोचा कि आज कुछ और काम भी करते है। मैंने अपनी बहन की स्कर्ट को निकाल दिया और फिर मैंने धीरे से उसकी अंडरवियर पर अपनी ज़ीभ लगाई और उसके ऊपर से ही उसकी चूत को चाटने लगा.. मेरा जोश बढ़ता ही जा रहा था और मैंने इसी दौरान अपनी बहन की गर्ल्स अंडरवियर को भी उतार दिया और अब मेरे सामने जो नज़ारा था उसका वर्णन में नहीं कर सकता। उसकी चूत पर बहुत से छोटे छोटे बाल थे और वो काले रंग के थे.. मैंने उसके दोनों पैरों को अलग किया और उसकी चूत देखने की कोशिश करने लगा और धीरे धीरे में अपनी एक उंगली उसकी चूत में डालने लगा और जैसे ही मैंने अपना मुहं उसकी चूत चाटने के लिए आगे किया तो उसकी चूत में से बहुत गंदी सी बदबू आ रही थी.. लेकिन और लोग उसको खुश्बू कहते है और मुझे तो वो बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रही थी।

मुझे अपने लंड पर तरस आ रहा था। मैंने अपनी पेंट को खोला और शर्ट भी उतार दी बस अब में अंडरवियर में था और मेरा लंड अंडरवियर में टेंट बना हुआ था और अब में अपनी बहन के ऊपर जाकर लेट गया। फिर से मैंने उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए और उसको किस करने लगा.. तो मेरे वजन के कारण उसकी सांसे फूलने लगी तो में झट से उसके ऊपर से हट गया। अब मैंने सोचा कि मैंने अपनी बहन के जिस्म के हर एक हिस्से को देख लिया है और बस एक जगह बाकी रह गई थी वो थी उसकी गांड और अब मैंने अपनी बहन को उल्टा किया.. उसकी गांड बहुत मोटी थी और मस्त थी। तो मैंने अपनी जीभ अपनी बहन की गांड पर घुमाना शुरू किया और धीरे से में अपनी बहन की गांड के छेद के पास अपनी जीभ ले जाने लगा और उसकी गांड को चाटने लगा.. लेकिन मैंने चाटने से पहले अपनी बहन की गांड पर थोड़ा शहद लगा दिया था। उसकी गांड का छेद बहुत टाईट था.. तो मैंने एक उंगली उसकी गांड के अंदर की और उसके अंदर भी शहद लगा दिया और अब मुझे अपनी बहन की गांड एक कटोरी की तरह लग रही थी जिसमे बहुत सारा शहद भरा हो।

फिर मैंने धीरे धीरे अपनी जीभ अंदर तक घुसाकर चाटना शुरू किया और फिर मैंने पूरा का पूरा शहद चाट चाटकर साफ़ कर दिया और अब मुझे बहुत तेज़ नींद आ रही थी और उस समय रात के 2:30 बज़ चुके थे और मैंने अपनी बहन को कपड़े पहनाए और सो गया। फिर जब सुबह मेरी आंख खुली तो मेरी बहन कमरे में नहीं थी.. वो नहाने बाथरूम में गई हुई थी। अब मेरे मन में शैतान जाग गया मेरी बहन नहा रही थी और उसको में नीचे से एक छोटे छेद से देख रहा था और में यह देखना चाहता था कि वो कैसे नहाती है.. लेकिन वो नहा चुकी थी और तभी उसने कुछ हलचल महसूस की और उसको लगा कि उसको कोई देख रहा है। तो वो तुरंत गेट के पास आई और उसको लगा जैसे कोई भागकर कमरे में गया हो.. वो तुरंत अपने कपड़े पहनकर कमरे में आई तो में अपनी जगह बिल्कुल वैसे ही सो रहा था जैसे पहले वो मुझे सोता हुआ छोड़कर गई थी.. लेकिन में भूल गया था कि मैंने कमरे की लाईट चालू की थी और फिर मेरी बहन ने लाईट बंद की और में मन ही मन बहुत डर रहा था।

फिर मेरी बहन मेरे पास आई और उसने मुझे आवाज़ लगाई तो में उठ गया.. उसने बोला कि क्या तू अभी बाथरूम के गेट के पास था? तो मैंने बोला कि नहीं में तो सो रहा हूँ.. तो उसने बोला कि तू झूठ मत बोल में सब जानती हूँ और फिर वो चुप हो गई। फिर उस दिन के बाद से लेकर में अभी तक अपनी बहन के जिस्म को देखने के लिए तरस रहा हूँ और अब उसकी उम्र अब 22 साल हो चुकी है और मेरी 24 साल.. अब उसका फिगर और भी मस्त हो गया है वो एकदम सेक्सी माल लगने लगी है उसके बूब्स पहले से बहुत बड़े बड़े हो गए है और उसकी गांड भी मुझे बहुत तड़पाने लगी है ।।

धन्यवाद …

मौसी बोली मैं जवान हो गया हु 9

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मुझसे रहा नही गया और मैने बाथरूम में जाकर मूठ मार ली. एक दिन पायल ने हमे अपने घर पर डिन्नर में बुलाया. मौसा ने मना कर दिया और कहा कि तुम दोनो ही चले जाओ मुझे कुछ काम है. हमने कहा कि ठीक है. हम दोनो पायल के घर चले गये उसका घर मौसी के घर से बड़ा था.
वाहा जाकर हम बाते करने लगे. पायल के हज़्बेंड भी घर पर नही थे. 9:30पीएम पर पायल ने डिन्नर लगा दिया,हम बैठकर डिन्नर करने लगे. डिन्नर करने के बाद जैसे ही हम घर को आने के लिए निकले तो,निकलने के 2 मिनट. बाद ही तेज बारसात शुरू हो गयी.
हम दोनो बहुत भीग गये थे तो हम पायल के घर वापस चले गये. पायल ने कहा कि तुम दोनो भीग गये हो कपड़े चेंज कर लो. पायल ने मौसी को अपनी साड़ी दी और मुझे एक लूँगी दे दी. हम दोनो ने कपड़े चेंज कर लिए.
हमने घर पर फोन करके कहा कि तेज बारिश हो रही है. तो मौसा ने कहा कि अगर बरसात ना रुके तो वही सो जाना कल सुबह आ जाना. मौसी ने कहा कि ठीक है..
मौसी ने हमे बताया तो मैं दुआ करने लगा कि आज बारिश ना रुके और आज किसी तरह पायल की भी चूत मिल जाए तो और भी मज़ा आएगा. पायल भी जाकर अपने कपड़े चेंज कर आई,उसने सलवार सूट पहना था. फिर हम 3नो वही बैठकर बाते करने और टीवी देखने लगे.
मौसी मेरे बराबर में बैठी थी और पायल सामने बैठी थी. मैं टीवी कम और पायल का जिस्म ज़्यादा देख रहा था. मैं मौसी की जाँघ पर हाथ रखकर सहला रहा था.मौसी ने अपनी टांगे और खोल दी जिससे कि मैं उनकी चूत पर अपने हाथ रख सकु. पायल का मूह टीवी की तरफ था इसलिए वो हमे नही देख रही थी.
थोड़ी देर बैठने के बाद पायल ने मुझे एक रूम में और मौसी और खुद को एक रूम में सोने को कहा. मैने मौसी के कान में कहा कि आज रूम को लॉक मत करना आज मुझे तुम्हारी और तुम्हारी सहेली की खिदमत करने का मौका दो.
मौसी ने कहा ठीक है.
मौसी और पायल रूम में जाने लगी तो.मैं भी दूसरे रूम में चला गया. बारिश की वजह से मौसम भी ठंडा हो गया था. मैं फिर उठकर रूम के पास जाकर दरवाज़े से छिप्कर आगे के नज़ारे का इंतेज़ार करने लगा.
मौसी ने ट्यूब लाइट बंद करके नाइट दूधिया बल्ब जला दिया. पायल बोली दरवाजा अंदर से अच्छी तरह लॉक कर ले. मौसी बोली बंद कर दिया है लॉक करके क्या करना कौन सा कोई आ रहा है मैन गेट पर लॉक लगा ही दिया है. बाकी बगल से कुश तो यहाँ आएगा नही,
अगर आ गया तो हम दोनो इस ठंड में उसको भी दाब लेंगी. इस पर पायल ने अजीब सा मूह बनाया और गुस्से से बोली जैसी तेरी मर्ज़ी. फिर मौसी ने अपनी सारी उतार दी और आकर बेड के एड्ज पर बैठ गयी और पायल कपड़े उतारने लगी पहले पायल ने अपनी सलवार उतारी और कमीज़ (कुर्ता)भी उतार दिया.
अब दोनो ने डबल बेड वाला कंबल निकाला और सोने लगे तो जैसे ही कंबल पायल ने अपने उपेर डाला तो बोली यार बड़ी ठंडी हो रही है. मौसी बोली की गर्मी का इंतज़ाम तो मेरे पास है वो बोली क्या तो मौसी ने कहा बगल से कुश को बुला लेते है सारी ठंड दूर हो जाएगी.
इस बात पर पायल ने झूठी नाराज़गी दिखाते हुए मौसी को हल्के से स्लॅप किया. फिर मौसी बोली चल कुश की जगह मैं ही सही और मौसी ने पायल को जाकड़ लिया और उसके लिप्स पर एक जबरदस पप्पी ली, पायल कुच्छ नही कह पाई.
फिर मौसी ने पायल की ब्रा को खोलकर हटा दिया तो पायल के बूब्स जैल से आज़ाद हो गये और वाह क्या बूब्स थे दोस्तों एकदम गुलाबी गोरे जैसे लोटस की पेलेट्स हों म्*म्म्मम. मेरा तो दिल मचलने लगा और साँसे चलने लगी और दिल धड़कने लगा.
फिर मौसी उसके बूब्स को जीभ से चाटने लगी और पायल यार प्ल्स, छोड़ो मुझे, ये क्या कार्ररर रही हाआआआआईयईईईई तुउउुझीई कयय्या हो गया है कह रही थी.
लेकिन मौसी ने अपनी रफ़्तार और बड़ा दी और उसको उपर से पहले से ही नंगा कर दिया था और पायल के उपेर के जिस्म पर पूरी तरह सवार हो गयी वह कभी उसको चूमती, कभी उसकी चूची दबाती कभी उनको चूसने लगती और कभी उसके लिप्स का चुम्मा लेती. फिर मौसी ने पायल को पलट कर उसकी पेट और बॅक साइड पर किस्सिंग सुरू कर दी और दोनो हाथों से उसके चूचों को भी दबाने लगी.
मौसी के इस ऑल साइड अटॅक से पायल एकदम लाचार सी हो गयी थी जबकि पायल का फिगर और बॉडी भी मौसी से 20 था.
फिज़िकली पायल वाज़ मोर स्ट्रॉंग दॅन मौसी बट अट दिस सिचुयेशन शी वाज़ जस्ट अनडिसाइडेड आंड कॅंट नोट रिप्लआइयिंग प्रॉपर्ली टू दा आक्षन्स ऑफ मौसी.
मौसी तो एकदम चोदू वाली स्टाइल में पायल को चोदने पर उतारू थी पर बाहर मेरा बुरा हाल था साँसे अलग चल रही थी और लंड साला अलग ज़ोर मार रहा था.
मैं पूरा सीन दूर के उस गॅप से ब्लू फिल्म की तरह देख रहा था.

सीमा भाभी की नशीली गांड

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प्रेषक : अशोक ..

हैल्लो फ्रेंड्स.. मेरा नाम अशोक शर्मा है और में हरियाणा का रहने वाला हूँ और यह मेरी कामुकता डॉट कॉम पर पहली कहानी है जो कि मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है.. में 27 साल का हूँ और मेरा कलर साफ है और मेरे रामू काका का साईज़ 7 इंच लंबा और 3.5 मोटा है जो कि किसी भी उम्र की चूत को नानी याद दिला देगा और दोस्तों सबसे पहले में यह बताना चाहता हूँ कि मुझे शादीशुदा औरते बहुत पसंद है क्योंकि उनको ही सेक्स का असली मजा लेना और देना आता है।

अब में अपनी आज की कहानी पर आता हूँ.. दोस्तों में फरीदाबाद में रहता हूँ और मेरी फेमिली में मेरे पापा और मम्मी है और में अपने मम्मी पापा का बहुत ही लाडला हूँ और वो मेरी हर एक इच्छा पूरी करते है। दोस्तों यह बात आज से एक साल पहले की है.. हमारे पड़ोस में एक फेमिली रहने आई थी और उस फेमिली में भाई साहब अरुण जी, उनकी वाईफ सीमा भाभी और उनके तीन बच्चे थे। तो मैंने उनको पहली बार रात को देखा था जिस दिन वो अपने घर का सामान टेम्पो से उतार रहे थे और रात को करीब 9 बजे थी और वो सर्दियों का टाईम था और उस समय लगभग हमारी गली में सभी लोग सो गये थे और में बाहर अपने बगीचे में खाना खाने के बाद घूम रहा था। तो माँ ने बोला कि बेटा में चाय बना देती हूँ और तुम जाकर हमारे नए पड़ोसियों को दे आओ फिर में उनको चाय देने उनके घर पर चला गया और में जब घर के अंदर गया तो मैंने देखा कि एक 28 साल की गोरी चिट्टी लड़की नीली जीन्स और काले कलर के ओवरकोट में अपने रूम में सामान सेट कर रही थी।

तभी उनके पति मेरे सामने आए और फिर मैंने अपना परिचय उनको दिया.. तो उन्होंने मुझे भी चाय पीने के लिए कहा और चाय की केटली मुझसे लेकर अपनी वाईफ को दे दी। फिर अरुण भाई साहब ने मुझे अपनी फेमिली से मिलवाया और फिर भाभी जी तीन कप चाय लेकर हमारे पास आई और में उनको पहली नजर में देखकर ही उनका दीवाना सा हो गया था और उनको प्यार भरी नजरों से देख रहा था और शायद उन्होंने भी यह बात पता चल चुकी थी तो हमने एक साथ बैठकर बहुत देर बात की और चाय पी और फिर में वहां से चला आया। फिर उस रात मुझे नींद बहुत देर से आई और रात भर मुझे बस सीमा भाभी ही आँखों के सामने दिख रही थी। अगली सुबह रविवार को में 10 बजे सोकर उठा और सीधा बाहर आकर भाभी को देखने के लिए गया.. लेकिन शायद वो रात को लेट सोई थी और बहुत बार कोशिश करने के बाद मुझे दोपहर तीन बजे उनका चेहरा दिखा। दोस्तों में आपको बता नहीं सकता कि वो क्या बला थी? उनका कलर दूध जैसा सफेद आंखे गोल बड़ी बड़ी होंठ गुलाब जैसे में तो बस उनको देखता ही रह गया और सीमा भाभी भी मुझे देख रही थी। फिर उन्होंने एक बार अंदर अपने पति को देखा और फिर मेरी तरफ़ देखकर धीरे से बोली कि सर जी आप क्या देख रहे हो? तो मैंने हड़बड़ाकर कहा कि कुछ नहीं भाभी बस आपको गुड आफ्टरनून बोलना था। तो उन्होंने मुझे एक शरारती सी स्माईल दी और कहा कि सर जी आप 5 बजे आकर अपने रात वाले चाय के बर्तन ले जाना क्योंकि अभी मैंने किचन सेट नहीं किया है.. तो मैंने कहा कि कोई बात नहीं भाभी जी आराम से दे देना मुझे कोई जल्दबाजी नहीं है। तभी भाभी ने एक स्माईल देकर कहा कि सर जी जल्दबाज़ी तो मुझे भी पसंद नहीं है आराम से ही करूंगी और अंदर चली गई। फिर में शाम 5 बजे तक उनके कहे शब्दों के बारे में ही सोचता रहा और शाम को लगभग 4:50 बजे को उनके पति अरुण जी अपनी गाड़ी लेकर बाहर चले गये और फिर मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि भाभी जी ने मुझे 5 बजे का टाईम क्यों दिया है? जब उनके पति घर से बाहर गए हुए है। तो मैंने सोचा कि शायद वो घर का कुछ सामान लेने गये है फिर 5 बजे में भाभी जी के घर पर जाने के लिए तैयार होने लगा और एक बार उनके नाम की बाथरूम में जाकर मुठ मारी और उनके घर को निकल पड़ा।

फिर मैंने उनके घर की डोर बेल बजाई तो उन्होंने दरवाजा खोला.. यार वो क्या लग रही थी? उन्होंने गहरे नील कलर की साड़ी पहनी हुई थी और क्रीम कलर का स्वेटर पहना हुआ था और बाल खुले हुए थे। में तो बस एक टक नजरों से उनको देख रहा था कि तभी भाभी बोली कि सर जी अंदर आ जाओ वरना सर्दी लग जाएगी। तो मैंने कहा कि नहीं भाभी आप मुझे बर्तन बाहर ही दे दो.. तो उन्होंने कहा कि एक बार अंदर आकर देख तो लो आपकी भाभी ने घर की सजावट कैसी की है। तो भाभी ने मुझसे इतना बोला तो में अंदर चल पड़ा.. यार उसकी क्या गांड थी और आज मैंने पहली बार उनकी गांड के दर्शन किए थे। फिर भाभी ने कहा कि तुम बैठो में तुम्हारे लिए चाय बनाकर लाती हूँ और आज सर्दी बहुत है और आपके भाई साहब भी यहाँ पर नहीं है.. तो तुम्हारे बहाने में भी चाय पी लूँगी।

फिर वो अंदर किचन में चली गई और में सोफे पर बैठ गया और उनके रूम को देखने लगा.. तभी मेरी नजर उनकी साईड में रखी टेबल पर पड़ी उस पर बहुत सारे फोटो रखे थे तो में उनको उठाकर देखने लगा। तभी मेरी नजर भाभी के एक फोटो पर पड़ी उसमे भाभी स्विमिंग पूल के पास काली ब्रा और काली पेंटी में खड़ी थी.. यार क्या माल लग रही थी में बता ही नहीं सकता? उनके बूब्स का साईज़ करीब 36 से 38 का लग रहा था और उनकी चूत वाली जांघो से तो मेरी नजर ही नहीं हट रही थी। तभी यह सब देखकर में उनको चोदने का विचार कर रहा था और मेरा लंड भी भाभी की चूत में जाने को बेकरार खड़ा था और में उसको जीन्स में एक साईड करने लगा.. तो मैंने देखा कि भाभी जी मेरे पीछे खड़ी है और उनके हाथों में चाय की प्लेट है और फिर वो मेरे सामने आकर बैठ गई और मुझे को चाय दी.. तभी में बहुत डर गया था कि मेरी इस हरकत पर कहीं भाभी जी नाराज़ ना हो जाए.. लेकिन भाभी मुझसे ठीक ठाक बातें कर रही थी।

भाभी : सर जी आपकी फेमिली में कौन कौन है?

में : भाभी जी में मेरी मम्मी और पापा हम सिर्फ तीन लोग है।

भाभी : सर जी आप वैसे करते क्या है?

में : भाभी जी में बीए आखरी साल की पढ़ाई कर रहा हूँ।

में : भाभी जी आप मुझ को सर जी क्यों बोलती हो? मेरा नाम अशोक है आप मुझे सिर्फ अशोक ही बोलिए।

भाभी : नहीं सर जी मुझे सर जी बोलना बहुत अच्छा लगता है।

में : भाई साहब कहाँ पर गये हुए है?

भाभी : वो बच्चो को लेकर अपनी अपने मम्मी पापा के यहाँ पर गुडगाँव गये हुए है।

में : भाभी वो कब तक वापस आएँगे?

भाभी : वो लोग कल सुबह तक वापस आयेंगे.. क्योंकि मेरी सास की तबियत थोड़ी बहुत खराब है।

में : लेकिन भाभी जी आप उनके साथ क्यों नहीं गई ?

भाभी : सर जी उनकी माँ से मेरी नहीं बनती है और वो कुछ घमंडी टाईप की औरत है।

में : ठीक है भाभी जी अच्छा में अब चलता हूँ.. मुझे घर पर जाना है और अगर आपको किसी भी चीज़ की जरूरत हो तो प्लीज मुझे बता देना शरमाना मत और मैंने अपना मोबाईल नंबर भाभी को दे दिया और वहां से आ गया। वहां से आने के बाद मेरे सामने बस मुझे हर जगह पर भाभी ही दिख रही थी और उनकी वो काली पेंटी और ब्रा वाली फोटो दिख रही थी। तो में सीधा बाथरूम में गया और अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाकर भाभी के नाम की मुठ मारी.. यार उस दिन की मुठ मारने में भी बहुत मजा आ रहा था और जी तो कर रहा था कि भाभी को जाकर अभी चोद दूँ.. लेकिन लोहा गर्म करके चोट मारने में जो मजा है मुझे उसका इन्तजार था। फिर शाम को 7 बजे में मार्केट को निकल गया। मार्केट में मेरे फोन पर एक मिस कॉल आया और जब मैंने उस नंबर पर फोन किया तो वहां से हैल्लो की स्वीट सी आवाज़ आई और फिर में भाभी की आवाज़ पहचान गया और दिल ही दिल में भगवान को धन्यवाद बोला कि उन्होंने मेरी इतनी जल्दी सुन ली.. फिर मैंने कहा कि क्या बात है भाभी.. क्या हुआ? आपको कुछ चाहिए क्या? तो भाभी ने जवाब दिया कि नहीं सर जी मुझे कुछ नहीं चाहिए.. वो तो में घर पर बैठे बैठे बोर हो रही थी तो मैंने सोचा कि आपसे ही बातें कर लूँ।

तो मैंने कहा कि भाभी जी बहुत धन्यवाद आपने मुझे इस लायक तो समझा.. तो भाभी ने कहा कि सर जी वैसे आप अभी हो कहाँ पर? आपके पीछे से बहुत शौर हो रहा है। तो मैंने कहा कि भाभी जी में मार्केट में हूँ भाभी जी क्या आपके लिए कुछ खाने को लाना है? तो भाभी ने कहा कि नहीं सर जी में बाहर का खाना कम ही खाती हूँ। तो मैंने कहा कि भाभी तभी तो आप इतनी स्वीट हो तो भाभी पूछने लगी कि सर जी में कितनी स्वीट हूँ? तो मैंने कहा कि भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो। फिर भाभी कहने लगी कि ठीक है सर जी में बाद में कॉल करती हूँ शायद उनका फोन आ रहा है। तो मैंने कहा कि ठीक है भाभी में इंतजार करूंगा और फिर रात को 8 बजे में खाना खाकर अपने रूम में आकर भाभी के फोन का इंतजार कर रहा था। तभी थोड़ी देर बाद डोर बेल बजी और माँ ने दरवाजा खोल दिया मुझे किसी की आवाज़ तो आ रही थी.. लेकिन मैंने अनसुना कर दिया और मेरा सारा ध्यान फोन में ही था। तो थोड़ी ही देर बाद माँ मेरे रूम में आई और बोली कि बेटा आज तुम नए पड़ोस वाली भाभी के घर पर ही सो जाना.. अभी कुछ देर पहले सीमा आई थी और वो बोल रही थी कि उनके पति की माँ की तबियत खराब है और वो उनको देखने गये है और वो आज रात घर पर अकेली है तो तुम चले जाना। तो मुझे माँ की बातों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था और मेरे दिल और लंड में जारो से खुशियों के लड्डू फूट रहे थे.. लेकिन माँ के सामने मैंने मुहं लटका कर ठीक है बोल दिया.. तो माँ बोली कि चले जाओ अब रात भी बहुत हो गई है और सीमा को अकेले में डर भी लग रहा होगा। फिर में जाने के लिए तैयार हो गया और मैंने जानबूझ कर स्वेटर नहीं पहना और में भाभी के घर पर पहुंचा तो भाभी ने मुझे धन्यवाद बोला.. मैंने कहा कि भाभी आप किस बात का धन्यवाद बोल रही हो? तो भाभी बोली कि कुछ नहीं फिर भाभी ने मुझसे ख़ाने के बारे में पूछा तो मैंने भाभी को मना कर दिया। रात को करीब 9:30 हो चुके थे। में और भाभी रूम में बैठे बैठे टीवी देख रहे थे और भाभी मेरे साथ में सोफे पर ही बैठी थी और उनके रूम में हीटर चला हुआ था.. लेकिन में जानबूझ कर सर्दी लगने का नाटक करने लगा। तो भाभी उठकर बेडरूम गई और कंबल ले आई और मैंने वो अपने पैरों पर डाल लिया और मैंने भाभी को भी कंबल में आने के लिए कहा और फिर टीवी देखने लगे.. लेकिन मेरा मन तो टीवी देखने का नहीं कर रहा था.. लेकिन फिर भी देखना तो पड़ ही रहा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर में बीच बीच में भाभी की तरफ़ देख रहा था और वो मुझे शरारती नजरों से देख रही थी। शायद हम दोनों ही यह बात सोच रहे थे कि शुरुवात कौन करे? तो मैंने ही हिम्मत करके अपने हाथ कंबल के अंदर से ही भाभी की गांड को छूने लगा और भाभी का चेहरा देखने लगा.. लेकिन भाभी ने कुछ नहीं बोला तो मेरी हिम्म्त और बड गई और में भाभी की गांड को सहलाने लगा और मेरा लंड भी लोवर में से बाहर निकलने को तैयार हो रहा था। फिर मैंने भाभी को धीरे से उसकी गांड पर एक चुटकी काट ली.. तो भाभी ने मुहं से सिर्फ उूऊउईए की आवाज़ निकाली। तो मैंने भाभी को कहा कि क्या हुआ भाभी? तो वो कहने लगी कि सर जी आप तो बड़े वो हो.. प्यार करते करते चुटकी काटते हो। फिर मैंने कहा कि तो भाभी क्या में आपको प्यार कर सकता हूँ? तो भाभी ने कहा कि सर जी मैंने आपको पहले भी कहा था आराम आराम से जल्दबाजी मुझे भी अच्छी नहीं लगती। तो यह बात सुनते ही मानो मेरे साथ ऐसा हो गया कि जैसे ट्रेन को ग्रीन सिग्नल मिल गया हो और मैंने भाभी को अपनी गोद में उठाया और उनको उनके बेडरूम में ले गया और रूम हीटर बाहर से अंदर ले आया और अंदर लगा दिया।

तभी भाभी बोली कि सर जी रूम गरम करके क्या फायदा है? आज आपका तो पहले ही बहुत गरम है। तो मैंने भाभी को कुछ जवाब नहीं दिया और सीधा भाभी के ऊपर लेट गया और भाभी को ज़ोर से बाहों में भरकर उनके होंठो को किस करने लगा और मैंने भाभी को लगभग 10 मिनटट तक लगातार किस किया और फिर उनके पूरे चेहरे को किस करने लगा और एक हाथ से भाभी के सीधे बूब्स को दबाने लगा तो भाभी ने मुझे कसकर पकड़ लिया और मेरी जींस के अंदर हाथ को डालकर मेरे लंड को सहलाने लगी.. फिर रूम भी अब तक गरम हो चुका था। फिर मैंने पहले भाभी का स्वेटर उतारा और फिर उनका ब्लाउज और उनकी साड़ी और फिर पेटिकोट उतार दिया। तो भाभी अब मेरे सामने ब्रा और पेंटी में थी.. यारों वो उस टाईम उस फोटो से भी ज़्यादा सेक्सी लग रही थी और उसने अपनी दोनों आंखे बंद की हुई थी और मैंने भाभी को ऊपर से नीचे तक किस करना शुरू कर दिया और उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही चूसना शुरू कर दिया.. भाभी के मुहं से आहह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ ईईईई की आवाजें आने लगी और अब मैंने भाभी की ब्रा और पेंटी भी उतार दी.. यारों में बता नहीं सकता हूँ कि उसकी चूत क्या लग रही थी?

भाभी की चूत पर एक भी बाल नहीं था और चूत बिल्कुल मक्खन की तरह लग रही थी और उसकी चूत के अंदर का हिस्सा स्ट्रोबरी की तरह लग रहा था और मैंने ज्यादा टाईम ना गंवाते हुए उसकी चूत पर टूट गया और उसकी चूत को चाटने लगा। उनकी चूत की खुशबू मुझ को पागल कर रही थी.. में उनकी चूत के दाने को और चूत की पंखुड़ी को सहला रहा था और भाभी धीरे धीरे अपना आपा खो रही थी और मेरे मुहं को पकड़ कर चूत में दबा रही थी। तो मैंने अपना अंडरवियर भी उता दिया और हम 69 पोज़िशन में आ गये। भाभी मेरा लंड देखकर बहुत खुश हुई और लंड की तारीफ करने लगी। तो मैंने भाभी से कहा कि जानू खुद ही सारी तारीफ कर लोगी या अपनी चूत को भी मौका दोगी? तो भाभी यह बात सुनते ही मेरे लंड को मुहं में लेकर चूसने लगी.. भाभी के होंठो की गरमी से मेरा लंड इतना टाईट हो गया था कि वो चोदने को तैयार हो गया और में भी भाभी की चूत के अंदर जीभ डालकर चाटने लगा और भाभी मेरे लंड को चूसती हुए उसकी चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी और मेरी गोलियों को भी सहला रही थी। में भी भाभी की चूत को इस तरह चाट रहा था कि भाभी के मुहं से सिसकियाँ निकलने लगी और उन्होंने मेरे लंड को अपने पैरों के नीचे दबा लिया और भाभी की चूत में से गरम गरम लावा मेरे मुहं में आने लगा और भाभी अपनी चूत ऊपर करके चटवा रही थी।

फिर भाभी ने मुझसे कहा कि सर जी तुमने तो मेरा पानी चाट कर ही निकाल दिया और अब अपने लंड से तो तुम मेरी जान ही निकाल दोगे वैसे भी तुम्हारा यह अरुण से बहुत बड़ा है। तो में सीधा होकर भाभी के ऊपर लेट गया और भाभी को लिप किस करने लगा और भाभी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। फिर मैंने घुटनो के बल बैठकर अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया और भाभी की चूत के छेद पर सटा दिया और धीरे धीरे लंड को अंदर डालने लगा.. लेकिन लंड अंदर जा नहीं रहा था। तो मैंने भाभी के दोनों पैर ऊपर मोड़कर फैला दिए.. जिसके कारण भाभी की चूत और ऊपर हो गई और अब मैंने एक जोरदार धक्का मारा जिससे मेरा आधे से ज़्यादा लंड भाभी की चूत के अंदर चला गया और भाभी के मुहं से आह्ह्ह माँ मरी थोड़ा धीरे करो की आवाज़ निकल गई। तो मैंने भाभी को लीप किस किया और एक और जोरदार धक्का मारा.. इस बार मेरा लंड भाभी की बच्चेदानी तक चला गया था और भाभी की आँखों से आंसू निकल रहे थे।

तो मैंने भाभी से कहा कि अगर आप सहन नहीं कर पा रही हो तो में लंड को बाहर निकाल लेता हूँ.. लेकिन भाभी ने कहा कि बाहर मत निकलना में ठीक हूँ.. तो में धीरे धीरे झटके मारने लगा। वैसे दोस्तों चूत चोदते समय शुरुवात के धक्के थोड़ा आराम आराम से लगाने चाहिए.. जिससे चूत और लंड दोनों अच्छी तरह सेट हो जाएँ। फिर भाभी भी अपने चूतड़ को ऊपर करके मेरा लंड अंदर लेने लगी और मुहं से आवाज़ भी निकालने लगी आहहाअ सर जी उफ्फ्फ आज जी भरकर मजे लो चुदाई के और अब भाभी पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और मेरी कमर को नोच रही थी.. लेकिन सेक्स में कमर को नुचवाने का जो मजा है उसका में शब्दो में बयान नहीं कर सकता.. तो भाभी अब अपनी चरम सीमा पर थी और मेरे कमर पर अपने पैर सांप की तरह लपेट कर उन्होंने अपनी चूत का पानी झाड़ दिया और मैंने भी 2 मिनट जोरदार झटको के बाद अपना पानी उनकी चूत में डाल दिया.. में भाभी के ऊपर ही लेटा रहा और भाभी ने मुझे किस किया और मुझे धन्यवाद बोला और कहा कि जब तक में यहाँ पर हूँ तब तक मुझ पर आपका हक है और जब तक तुम चाहो तब तक मुझे प्यार कर सकते हो ।।

धन्यवाद …